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उत्तराखंड में सुरंग हादसा: मज़दूरों तक पहुँचने के लिए नए रास्ते खोजे जा रहे हैं, कब तक ख़त्म होगा ऑपरेशन?
- Author, अनंत झणाणें, उत्तरकाशी से और निखिला हेनरी, दिल्ली से
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
उत्तराखंड के उत्तरकाशी इलाक़े में बनाई जा रही सुरंग धंसने से फंसे 41 मजदूरों को सुरक्षित निकालने के लिए बचावकर्मी अब नए उपायों पर ग़ौर कर रहे हैं.
पिछले 12 दिनों से बचावकर्मी ड्रिलिंग मशीन के ज़रिए मज़दूरों तक पहुँचने का प्रयास कर रहे थे. लेकिन शुक्रवार को ड्रिलिंग मशीन टूटने के बाद ये काम रुक गया.
इन मज़दूरों को सुरक्षित बाहर निकालने का ऑपरेशन शुरू से ही काफ़ी चुनौती भरा था.
सुरंग के भीतर मिट्टी काफ़ी ढीली है. वहां पत्थर भी खिसकते रहते हैं. इसके साथ ही सुरंग के निर्माण के दौरान लगाये गए सरिये काटना भी मुश्किल साबित हो रहा है.
शुक्रवार को बचावकर्मी सही दिशा में बढ़ते दिख रहे थे. लेकिन तभी ड्रिलिंग मशीन मलबे के साथ मिले मिश्रित धातु के टुकड़ों में फंसने के बाद सुरंग के अंदर टूट गई.
इसके बाद आज (सोमवार) सुबह मशीन को पूरी तरह से हटा दिया गया है.
इस बीच, बचावकर्मियों ने मजदूरों तक पहुंचने के लिए पहाड़ के ऊपर से खुदाई लंबवत (वर्टिकल) खुदाई शुरू कर दी है.
अधिकारियों ने ये भी कहा है कि वे मज़दूरों तक तेज़ी से पहुंचने के लिए मैन्युअल (हाथ से) खुदाई सहित अन्य तकनीकों के बारे में भी विचार कर रहे हैं.
वर्टिकल ड्रिलिंग क्या होती है?
योजना ये है कि बचावकर्मी उत्तरकाशी ज़िले के सिल्क्यारा में स्थित उस पहाड़ी की चोटी से मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश करेंगे, जिसके नीचे सुरंग का निर्माण किया जा रहा था.
अधिकारियों ने पहाड़ी के ऊपर पहुंचने के लिए एक अस्थाई सड़क और प्लेटफार्म पहले ही बना लिया है.
बचावकर्मियों को श्रमिकों तक पहुंचने के लिए 86 मीटर (282 फीट) नीचे की ओर ड्रिल करना होगा - यह क्षैतिज मार्ग (46.6 मीटर) की दूरी से लगभग दोगुना है.
सोमवार सुबह तक अधिकारी सुरंग में 31 मीटर तक खुदाई करने में कामयाब रहे हैं.
नेशनल हाइवे एंड इन्फ़्रास्ट्रक्टर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के वरिष्ठ अधिकारी महमूद अहमद इस बचाव अभियान की अगुवाई कर रहे हैं.
उन्होंने कहा है कि मौजूदा रफ़्तार से मज़दूरों को सुरक्षित बाहर निकालने में 100 घंटे और लग सकते हैं, बशर्ते अब कोई बाधा न आए.
द हिंदू अख़बार के मुताबिक अगर सारी प्रक्रिया बिना किसी दिक्कत के अपने अंजाम तक पहुँचती है तो मज़दूरों को एक वर्टिकल छेद के ज़रिए बाल्टियों में डाल कर ऊपर खींचा जाएगा.
अधिकारियों का कहना है कि तूफ़ान और बर्फ़बारी का ख़तरा इस प्रक्रिया को जटिल बना सकता है.
हालांकि, अधिकारियों ने ये भी कहा है कि वो हर परिस्थिति के लिए तैयार हैं.
हॉरिज़ोंटल या क्षैतिज़ ड्रिलिंग क्या है?
अब तक बचावकर्मी सीधे रास्ते से एक पतली सुरंग बनाकर अनुमानित 60 मीटर मलबे की दीवार के बीच से अलग-अलग चौड़ाई के कई पाइप भेजने पर काम कर रहे थे.
इसके माध्यम से श्रमिकों को स्ट्रेचर पर बाहर निकाला जा सकता था.
अब, वे मज़दूरों तक पहुंचने के लिए एक वैकल्पिक रास्ता बनाने के लिए ड्रिलिंग के मुख्य स्थल पर 180 मीटर वर्टिकल (लंबवत) ड्रिलिंग कर रहे हैं.
द हिंदू के मुताबिक रविवार को वर्टिकल ड्रिलिंग वाले स्थान पर एक प्लेटफॉर्म बना दिया गया था.
लेकिन अधिकारियों ने फ़िलहाल लंबवत ड्रिलिंग के बारे में कोई सूचना जारी नहीं की है.
मैन्यूल खुदाई कैसे होगी?
बचावकर्मियों ने 34 मीटर हॉरिज़ोटल खुदाई भी कर ली थी. वे मज़दूरों से महज़ 12 मीटर की दूरी पर पहुँच चुके थे लेकिन शुक्रवार को ड्रिलिंग करने वाली ऑगर मशीन बीच में ही टूट गई.
इसके बाद ऑपरेशन को रोक दिया था. एक इमरजेंसी दल भीतर गया और मशीन को कड़ी मशक्कत के बाद सोमवार को बाहर निकाला गया.
अब इस स्थान पर भी बचावकर्मी हाथों से बाक़ी बचे 12 मीटर की खुदाई का प्रयास करेंगे.
लेकिन हाथ से होने वाली खुदाई के बाद इस जगह से मशीनों के सहारे ही पाइपें डाली जानी हैं.
इस वक्त क्या हैं हालात
घटनास्थल पर मौजूद माइक्रो टनलिंग एक्सपर्ट क्रिस कूपर ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा है, “हम ऑगर मशीन के टूटे हुए टुकड़ों को निकाल रहे हैं, कई पाइप हैं, उन्हें भी काटना है. लगभग तीन घंटे का समय इसमें लग सकता है उसके बाद हमें हाथों से टनल को काटना होगा."
"इसमें कितना वक्त लगेगा ये हम नहीं बता सकते. ये ग्राउंड की परिस्थिति पर निर्भर करता है. आर्मी इस ऑपरेशन को सुपरवाइज़ कर रही है. 30 मीटर की वर्टिकल ड्रिलिंग की जा चुकी है.”
इसके अलावा पूर्व इंजीनियर-इन-चीफ़ और रिटायर्ड बीआरओ डीजी लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने बताया है, “ऑगर जो फंसा था उसे पूरा निकाल लिया गया है लेकिन डेढ़ मीटर की डैमेज पाइप है जो अभी भी फंसी है उसे निकालने का काम जारी है. वो हो जाएगा तो हम हाथों से टनल खोदेंगे. और बची हुई दूरी को धीरे-धीरे खोदेंगे. उम्मीद है जल्द से जल्द ये काम पूरा होगा.”
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