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चंद्रयान-3: विक्रम लैंडर के चांद पर उतरने के बाद प्रज्ञान रोवर से जुड़े पांच सवालों के जवाब
चंद्रयान-3 उपग्रह की चांद के दक्षिणी ध्रुव के क़रीब सफल लैंडिंग हो गई है. भारत के लिए ये एक बड़ी उपलब्धि है. दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करने वाला भारत दुनिया का पहला देश बन गया है और इसी के साथ चंद्रयान-3 मिशन के तीनों ही लक्ष्य पूरे हो गए हैं.
भारत के चांद पर पहुंचने की उपलब्धि पर दुनिया के कई देशों ने बधाई दी है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को बधाई देते हुए कहा कि चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग विज्ञान और तकनीक की दुनिया में भारत की तरक्की को दिखाता है.
पाकिस्तान के पूर्व मंत्री फवाद चौधरी ने भी इसरो को बधाई दी है. उन्होंने एक ट्वीट में भारत के इस क्षण को बड़ी उपलब्धि करार दिया है. उन्होंने कहा, "चंद्रयान-3 का चांद पर पहुंचना इसरो के लिए बड़ी उपलब्धि है. इसरो के अध्यक्ष मिस्टर सोमनाथ के साथ युवा वैज्ञानिकों के जश्न को भी मैं देख रहा हूं. सपने देखने वाले युवा ही दुनिया को बदल सकते हैं. गुड लक."
हालांकि सफल लैंडिंग के बाद अब सबकि नज़रें प्रज्ञान रोवर पर है. चंद्रयान-3 की लैंडिंग के आधे घंटे के भीतर ही प्रज्ञान रोवर चांद की सतह पर बाहर आ गया. मिशन के अब आगे का काम रोवर ही पूरा करेगा.
रोवर कैसे काम करेगा, चांद के दक्षिणी ध्रुव पर ये कौन सी चीज़ें तलाशेगा, ऐसे कुछ सवाल हमने पूछा शिव नादर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर आकाश सिन्हा से. आकाश सिन्हा की स्पेस, रोबोटिक्स, एआई जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता है.
1. चंद्रयान का लैंडर अब चांद की सतह पर लैंड कर गया है, अब आगे क्या?
किसी भी स्पेस मिशन का फाइनल आउटपुट किसी भी रोवर या रोबट से ही आता है.
मिशन तो हो गया पूरा, हम चांद पर पहुंच गए..तो अब रोवर का क्या?
तो अब रोवर का काम यहां से शुरू होता है.
रोवर को बहुत ही स्मार्टली डिज़ाइन किया गया है कि वो चांद पर सैंपल कलेक्ट कर सके, चांद पर नैविगेट कर सके और हमें डेटा भेज सके.
2. रोवर चंद्रमा की सतह पर कैसे चलेगा?
रोवर एक ड्राइवरलेस कार की तरह है और उसे चांद पर ख़ुद ही ड्राइव करना है.
उसे ख़ुद ही फै़सले लेने हैं कि सामने कहीं कोई क्रेटर तो नहीं है, कोई पत्थर तो नहीं है, क्या मैं उसे पार कर सकता हूं, क्या नहीं कर सकता हूं.
इसे तय करने के लिए हमने रोवर में दो बहुत स्मार्ट कैमरे फिक्स किए हैं.
इसी कैमरे की मदद से रोवर अपना थ्रीडी मॉडल बना लेता है और उसकी मदद से नैविगेट करता है.
3. रोवर यहां क्या-क्या चीज़ें तलाशेगा?
पानी सबसे बड़ी चीज़ है. इसके अलावा दुर्लभ चीज़ें मिलने की भी संभावना है.
यहां पर यूरेनियम, गोल्ड या किसी भी प्रकार का दुर्लभ धातु मिल सकता है.
हीलियम-3 होने की भी संभावना है, जिससे न्यूक्लियर ईंधन बन सकता है.
इन सब चीज़ों को करने के लिए रोवर में विशेष सेंसर हैं.
4. रोवर संपर्क कैसे स्थापित करेगा?
संपर्क के लिए इसरो ने इस बार ख़ास ध्यान रखा है.
रोवर, प्रोपोर्शन और लैंडर मिलाकर दस से ज़्यादा एंटीना हैं और एक ख़ास बात ये है कि रोवर चंद्रयान-3 के मॉड्यूल से तो संपर्क साध ही सकता है.
साथ में चंद्रयान-2 के मॉड्यूल से भी संपर्क कर सकता है.
यहां तक कि लैंडर भी दोनों ही चंद्रयानों के मॉड्यूल से कम्युनिकेट कर सकता है.
ये धरती पर इसरो के स्टेशन से सीधे भी संपर्क साध सकता है.
तो इतने रास्ते हैं कि संपर्क टूटने की अवसर शायद ही आए.
5. क्या रोवर के साथ भारत का तिरंगा भी गया है?
चंद्रमा के साउथ लूनर पोल पर भारत ने अपना झंडा साल 2008 में ही गाड़ दिया था. साल 2008 में चंद्रयान-1 ने एक इम्पैक्ट प्रोब भेजा था, जिसने तकरीबन साउथ पोल पर जाकर हिट किया.
उसमें स्पेक्ट्रोमीटर भी गया था, जिसने इस हिस्से में पानी के कणों की पुष्टि की थी.
साथ ही उसके साथ भारत का एक तिरंगा भी शामिल था. इस बार रोवर ने कोई तिरंगा तो साथ नहीं रखा है पर एक ख़ास तैयारी की गई है.
रोवर के दोनों पहियों में आप कह सकते हैं कि स्टैंप यानी मुहर बने हुए हैं. एक तरफ़ भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है, तो दूसरी तरफ़ इसरो का लोगो है.
अब जहां-जहां ये रोवर जाएगा वहां-वहां चांद पर अपने पद चिह्न छोड़ेगा, जिसमें कि हमारा राष्ट्रीय प्रतीक और इसरो का लोगो होगा.
सबसे दिलचस्प बात है कि ये चिह्न वहां हमेशा के लिए रहेंगे क्योंकि चांद पर कोई हवा नहीं है.
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