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वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप: ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ भारत की टीम में कितना है दम
विधांशु कुमार
खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
साल 2013 में आख़िरी बार भारतीय टीम ने किसी आईसीसी ट्रॉफ़ी को जीता था.
लगभग 10 साल बाद एक बार फिर भारतीय टीम के पास मौक़ा है वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप जीतकर आईसीसी टूर्नामेंट जीतने का.
सात जून से इंग्लैंड के ओवल में होने वाले वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप के फ़ाइनल में भारत के सामने है टेस्ट की नंबर वन टीम ऑस्ट्रेलिया.
ऑस्ट्रेलिया की टीम इंग्लैंड के कंडिशंस में ख़ुद को बेहतर आंक रही होगी.
भारतीय कप्तान रोहित शर्मा और कोच राहुल द्रविड़ के सामने जितना बड़ा मौक़ा है, उतनी ही मुश्किल चुनौती भी.
आईपीएल के बाद सीधा टेस्ट क्रिकेट
भारतीय टीम लगभग एक सप्ताह से इंग्लैंड में प्रैक्टिस कर रही है.
इससे पहले 15 सदस्यीय टीम के एक खिलाड़ी को छोड़कर सभी ने दो महीने लंबे और कठिन आईपीएल टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था.
वो टी-20 का फ़ॉर्मेट था और अब टीम को टेस्ट क्रिकेट खेलना है.
मैच से पहले भारतीय टीम ने किसी दूसरी टीम के ख़िलाफ़ वार्म अप मैच खेलने से भी मना कर दिया था.
सफ़ेद बॉल के बाद लाल गेंद से खेलना एक बड़ी चुनौती होगी.
सफ़ेद बॉल मशीन से सिली जाती है जिसकी वजह से सिलाई का उभार कम होता है और वो कम स्विंग करती है जबकि लाल बॉल हाथ से सिली जाती है जिसके कारण सीम पर ज़्यादा बड़ा सिलाई का उभार होता है, जो अधिक देर तक टिकता है और गेंद स्विंग भी अधिक करती है.
एक तो इंग्लैंड का माहौल और दूसरी ड्यूक्स बॉल का होना, वहाँ स्विंग गेंदबाज़ी के लिए काफ़ी मददगार साबित होता है.
भारतीय बल्लेबाज़ों के लिए उछाल भरी पिच पर स्विंग खेलना आसान नहीं होगा.
भारतीय कप्तान रोहित शर्मा मानते हैं कि मॉडर्न क्रिकेटरों को इस सभी चुनौतियों से निपटने के लिए मानसिक तौर से तैयार रहना चाहिए.
हालाँकि मार्च के बाद ऑस्ट्रेलिया ने भी कोई टेस्ट क्रिकेट नहीं खेली है, लेकिन टीम में शामिल स्टीव स्मिथ, मार्नस लाबुशेन, माइकल नेसर और मार्कस हैरिस इंग्लैंड में ही काउंटी क्रिकेट खेल रहे थे.
वहीं भारत के चेतेश्वर पुजारा भी इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट में व्यस्त थे. ऑस्ट्रेलिया के दो खिलाड़ी- डेविड वॉर्नर और कैमरन ग्रीन इस साल के आईपीएल में शामिल थे.
कीपर कौन- भरत या किशन?
भारतीय टीम के पास चयन की एक बड़ी समस्या है कि विकेटकीपर-बल्लेबाज़ किसे चुना जाए?
पिछले कुछ साल से ऋषभ पंत विकेट के पीछे से और बल्ले से भी मैच जिताने वाली क्रिकेट खेल रहे थे.
टीम में उनकी जगह भरना आसान नहीं है, क्योंकि श्रीकर भरत को एक बेहतर कीपर माना जाता है, लेकिन उनकी बैटिंग पर अभी सवाल है.
वहीं ईशान किशन पंत की साँचे में ही ढले क्रिकेटर हैं, लेकिन उन्हें लंबे क्रिकेट मैच खेलने का अनुभव कम है.
साल 2021 से उन्होंने सिर्फ़ 4 फर्स्ट क्लास क्रिकेट मैच खेले हैं.
कीपर के चयन के बारे में जानकारों की राय मिली-जुली है.
जहाँ हरभजन सिंह और रिकी पोंटिंग जैसे पूर्व खिलाड़ी चाहते हैं कि ईशान किशन को मौक़ा मिलना चाहिए, वहीं रवि शास्त्री का मानना है कि ओवल मैदान के कंडीशंस को देखकर फ़ैसला करना चाहिए.
अगर कंडीशंस दो स्पिनर्स को मौक़ा देने की आज़ादी दें, तो भरत रेस में आगे रहेंगे लेकिन अगर भारतीय टीम चार पेसर्स के साथ उतरती है, तो बैटिंग को मज़बूत करने के लिए किशन की अंतिम 11 में जगह बनती है.
दो स्पिनर्स या चार सीमर्स?
भारतीय मैनेजमेंट का एक और सरदर्द है गेंदबाज़ी की कॉम्बिनेशन चुनना.
दो स्पिनर्स और तीन सीमर्स या फिर एक स्पिनर और चार सीमर्स को खिलाया जाए, ये फ़ैसला काफ़ी हद तक पिच और कंडीशंस पर निर्भर करता है.
हालाँकि अभी की पिच को देखकर लोग कह रहे हैं कि इस पर अच्छा बाउंस मिलेगा और बाउंड्री भी लंबी है जिससे ऑस्ट्रेलिया की मदद होगी.
वहीं कुछ एक्सपर्ट्स का ये भी मानना है कि मौसम पाँचों दिन साफ़ रहा, तो दूसरे दिन के बाद बैटिंग भी आसान हो जाएगी और स्पिनर्स का रोल भी बढ़ सकता है.
न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ पिछले वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप के फ़ाइनल में भारतीय टीम दो स्पिनर्स अश्विन और जडेजा के साथ उतरी थी और उन्हें हार मिली थी.
क्या एक बार फिर दो स्पिनर्स की जगह होगी या फिर मोहम्मद शमी, मोहम्मद सिराज के साथ उमेश यादव, जयदेव उनादकट और शार्दुल ठाकुर में किन्हीं दो को टीम में जगह मिलेगी- ये देखना होगा.
पूर्व टेस्ट क्रिकेटर वसीम अकरम का कहना है कि अगर भारतीय तेज़ गेंदबाज़ पिच को देखकर अति-उत्साहित ना हो जाएं और टाइट लाइन लेंथ में गेंदबाज़ी करें, तो उन्हें फ़ायदा होगा. शमी, सिराज और उमेश यादव से भारत को यही उम्मीदें होंगी.
वहीं स्पिन के ऑलराउंडर्स अश्विन और जडेजा से विकेट के साथ साथ लेट ऑर्डर में रन की दरकार भी भारतीय टीम को होगी.
टॉप ऑर्डर की चुनौती
पिछली बार इंग्लैंड में टेस्ट सिरीज़ में भारतीय टीम की सफलता का बड़ा कारण था ओपनर्स रोहित शर्मा और केएल राहुल का टीम को अच्छी शुरुआत दिलवाना.
इस बार राहुल टीम में नहीं हैं और रोहित शर्मा का सफेद बॉल का फ़ॉर्म भी कुछ ख़ास नहीं है.
लेकिन जानकारों को उम्मीद है कि रोहित पिछले कुछ साल से सबसे अच्छा जिस फ़ॉर्मेट में खेल रहे हैं, वो टेस्ट क्रिकेट ही है.
फ़ाइनल में उनके बल्ले से रन निकलना भारतीय टीम के लिए बेहद ज़रूरी है.
रोहित के साथ इस बार एक नया जोड़ीदार ओपनिंग के लिए उतरेगा, वो हैं शुभमन गिल.
आईपीएल और वनडे क्रिकेट में गिल ने जैसे तूफ़ान सा मचाया हुआ है. वनडे क्रिकेट में सबसे तेज़ 1000 रन बनाने वाले वो भारतीय क्रिकेटर हैं.
इसी साल आईपीएल में उन्होंने तीन शतकों के साथ लगभग 60 की औसत के साथ 890 रन बनाए.
लेकिन क्या वो इसी फ़ॉर्म को टेस्ट क्रिकेट में भी उतार पाएँगे, ये एक बड़ा सवाल है.
गिल के साथ एक अच्छी बात ये है कि हालाँकि उन्होंने आईपीएल में ताबडतोड़ बैटिंग की है, लेकिन उनकी बैटिंग का स्टाइल क्लासिकल ही कहा जाएगा.
उनका डिफ़ेंस भी मज़बूत है और लंबी पारी खेलने का टेम्परामेंट भी उनके पास है.
उन्हें भारतीय क्रिकेट का अगला बड़ा खिलाड़ी कहा जा रहा है और इसकी पहली परीक्षा इंग्लैंड में होने वाली है.
पुराने मिडिल ऑर्डर की वापसी
ख़राब फ़ॉर्म की वजह से एक समय चेतेश्वर पुजारा को टीम से बाहर निकाला जा चुका था.
अजिंक्य रहाणे का क्रिकेट करियर भी ख़त्म हुआ माना जा रहा था.
लेकिन पहले पुजारा ने और अब रहाणे ने टीम में वापसी कर सबको चौंका दिया है.
पुजारा-कोहली-रहाणे वाली भारतीय मिडिल ऑर्डर के कंधों पर टीम को बड़ा स्कोर खड़ा कराने की ज़िम्मेदारी होगी.
इन तीनों खिलाड़ियों में तैयारी की लिहाज से चेतेश्वर पुजारा सबसे अव्वल नज़र आ रहे हैं.
इंग्लैंड की काउंटी टीम ससेक्स की कप्तानी करते हुए उन्होंने इस सीज़न में 12 मई तक सात पारियों में 3 शतक लगाए थे और इस दौरान उनका औसत 77 का रहा.
भारतीय टीम में नंबर 3 पर खेलने वाले पुजारा का रिकार्ड ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ भी बढ़िया है और उनसे उम्मीद है कि वो टीम की रक्षा कवच की भूमिका फिर निभा पाएँगे.
वहीं विराट कोहली ने पिछले साल वनडे में शतक लगाकर लगभग चार साल के अकाल को ख़त्म किया. उसके बाद से वो अपनी पुरानी लय में नज़र आ रहे हैं.
इस साल आईपीएल में भी उन्होंने शानदार बैटिंग करते हुए 53.25 की औसत से 639 रन बनाए. इस बार उनके बल्ले से दो शतक निकले.
कोहली अभी टीम के नंबर वन बल्लेबाज़ हैं और उनका विकेट लिए बग़ैर विपक्षी टीम मैच जीतने की कल्पना भी नहीं कर सकती.
वहीं रहाणे की कहानी कम रोचक नहीं है. भारतीय टीम से छुट्टी के बाद आईपीएल में भी उन्हें किसी टीम ने नहीं लिया, जब चेन्नई की टीम ने उन्हें बेहद कम पैसों में खरीदा.
चेन्नई के लिए आईपीएल में उन्होंने 11 पारियों में 32.60 की औसत से 326 रन बनाए, जिनमें दो अर्धशतक शामिल रहे. धोनी ने उन्हें खुलकर खेलने का भरोसा दिलाया और इसी आत्मविश्वास के साथ वो अब इंग्लैंड पहुँचे हैं.
भारतीय कोच राहुल द्रविड़ मानते हैं कि रहाणे को लंबे करियर के बारे में सोचना चाहिए और ये नहीं मानना चाहिए कि वो सिर्फ़ एक मैच खेलने टीम में आए हैं.
अगर वो ऐसा सोचेंगे तो अच्छा खेलेंगे और आगे भी टीम का हिस्सा होंगे.
क्या ऑस्ट्रेलिया है मज़बूत?
इंग्लैंड की कंडीशन और ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की तैयारी तो देखते हुए कुछ जानकार ऑस्ट्रेलिया को ही मज़बूत टीम मान रहे हैं.
टीम की बैटिंग की कमान स्मिथ और लाबुशेन के हाथों में होगी. ट्रैविस हेड निचले क्रम में या फिर ओपनिंग करते भी दिख सकते हैं और वो बेहद आक्रामक खिलाड़ी हैं.
ऑस्ट्रेलिया की टॉप 5 मज़बूत है लेकिन संजय मांजरेकर के अनुसार नंबर 5 या 6 पर आने वाले कैमरन ग्रीन तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं.
वो कहते हैं कि जब विरोधी टीम के पहले पाँच बल्लेबाज़ आउट हो जाते हों, तो बोलिंग करने वाली टीम थोड़ा रिलैक्स हो जाती है कि पारी अब ख़त्म होने वाली है.
लेकिन ऐसे में अगर सामने कैमरन ग्रीन जैसा बल्लेबाज़ आए, जो तेज़ भी खेल सकता है और जिसका डिफ़ेंस भी मज़बूत हो तो दूसरी टीम मुश्किल में पड़ सकती है.
वहीं ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाज़ी की बात करें, तो जॉश हेज़लवुड का अंतिम समय टीम से निकल जाना उनके लिए एक झटका है.
ग्लेन मैकग्रा की शैली में ढले हुए हेज़लवुड एक ही लाइन लेंग्थ पर लंबे समय तक गेंदबाज़ी कर भारतीय बल्लेबाज़ों को परेशान कर सकते थे.
हालाँकि उनकी जगह टीम में नेसर के जगह मिली है लेकिन तेज़ गेंदबाज़ी काफ़ी कुछ अब कप्तान पैट कमिंस पर निर्भर करेगी.
वहीं स्पिन डिपार्टमेंट में उनके पास नेथन लॉयन जैसा गेंदबाज़ है, जो किसी भी पिच पर ख़तरनाक साबित हो सकता है.
लेकिन अगर भारतीय बल्लेबाज़ों ने टिक कर खेलना दिखा दिया, तो भारतीय टीम की बोलिंग में वो क्षमता है कि वो पाँच दिन में 20 विकेट निकाल सके.
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