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रवींद्र जडेजा क्या भारतीय क्रिकेट के बेस्ट फिनिशर हैं?
- Author, शिवाकुमार उलगनाथन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
अंतिम ओवर या अंतिम गेंद तक पहुंचने वाले क्रिकेट मुक़ाबले रोमांचक तो होते ही हैं, उनकी याद भी लंबे समय तक बनी रहती है.
ज्यों ज्यों 20-20 मुक़ाबले बढ़ रहे हैं, वैसे वैसे अंतिम पलों तक रोमांच वाले मैचों की संख्या भी बढ़ रही है. रोमांच और मैच के नतीजे के लिहाज से देखें तो वनडे और टेस्ट क्रिकेट भी दिलचस्प होते जा रहे हैं.
कोई खिलाड़ी चाहे वो कितना ही प्रतिभाशाली क्यों ना हो, ज़रूरी नहीं है कि वह शानदार फिनिशर भी हो. कोई कितना भी ज़ोरदार बल्लेबाज़ क्यों नहीं हो लेकिन ज़रूरी नहीं है कि वो अंतिम ओवर में 15 से ज़्यादा रन बना सके.
उसी तरह से हर गेंदबाज़ भी ऐसा नहीं होता है कि वो अंतिम ओवर में आठ रन भी बचा ले जाए.
वनडे क्रिकेट ने कई बेहतरीन फिनिशरों को देखा है. पाकिस्तान के जावेद मियांदाद सबसे बेहतरीन फिनिशरों में गिने जाते थे.
शारजाह में चेतन शर्मा की आख़िरी गेंद पर लगाया गया छक्का लोग आज भी नहीं भूले हैं. उन्होंने टेस्ट मैचों में भी कई बेहतरीन पारियां खेली थीं.
सचिन तेंदुलकर भी भारतीय क्रिकेट के लिए फिनिशर सहित कई भूमिका निभा चुके हैं. महेंद्र सिंह धोनी, लांस क्लूजनर, माइकल बेवन, माइकल हसी, युवराज सिंह और एबी डिविलियर्स उन खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं, जिन्होंने लाजवाब बल्लेबाज़ी से टीम के लिए मैच जीते हैं.
इन खिलाड़ियों की सूची में शामिल एक और खिलाड़ी का जलवा आईपीएल फ़ाइनल में दिखा. 2023 आईपीएल फ़ाइनल को टूर्नामेंट के इतिहास का सबसे रोमांचक फ़ाइनल के तौर पर देखा जा रहा है.
अंतिम ओवर में चेन्नई को जीत के लिए 13 रन बनाने थे और पहले चार गेंदों पर महज तीन रन बने. आख़िरी दो गेंदों पर 10 रन बनाने थे.
रविंद्र जडेजा ने यहां से पहले छक्का और फिर चौका लगाकर अपनी टीम को अविश्वसनीय अंदाज़ में ट्रॉफी जिता दी.
बेहतरीन ऑलराउंडर हैं जडेजा
वैसे ये पहला मौक़ा नहीं था जब रविंद्र जडेजा ने अपनी टीम के लिए फिनिशर की भूमिका निभायी थी.
आईपीएल की टीम हो या फिर भारतीय टीम, जडेजा ने अपने प्रदर्शन से कई मैच जिताए हैं. वे तीनों फॉर्मेट में खेलते हैं और उनसे टीम को ढेरों उम्मीदें भी होती हैं.
धोनी के संन्यास के लेने के बाद उन्हें मौजूदा भारतीय टीम में सबसे बेहतरीन फिनिशर के तौर पर देखा जा रहा है.
इंटरनेशनल मुक़ाबलों में अपने बल्ले से मैच को फिनिश करने की जडेजा की काबिलियत की पहली झलक 2013-2014 में देखने को मिली.
2013 के चैंपियंस ट्रॉफ़ी फ़ाइनल में एजबेस्टन में जडेजा ने एक लो स्कोरिंग मैच में 25 गेंदों पर नाबाद 33 रन ठोक दिए थे, उन्होंने गेंदबाज़ी में दो विकेट भी चटकाए थे. इस ऑलराउंड खेल के लिए उन्हें मैन ऑफ़ द मैच चुना गया था.
2014 में ऑकलैंड में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ मुक़ाबले में रविंद्र जडेजा, छह विकेट गिरने के बाद बल्लेबाज़ी करने उतरे थे. टीम 316 रनों के विशाल स्कोर का पीछा कर रही थी.
अश्विन और दूसरे गेंदबाज़ों के साथ जडेजा ने भारत को संघर्ष में बनाए रखा. टीम को जीत के लिए अंतिम ओवर में 18 रन की ज़रूरत थी और जडेजा ने 17 रन बनाकर मैच टाई करा दिया.
बल्ले से नाबाज 66 रन बनाने से पहले वे गेंदबाज़ी में दो विकेट भी चटका चुके थे.
2019 के वर्ल्ड कप सेमीफ़ाइनल में उन्होंने न्यूज़लैंड के ख़िलाफ़ भारतीय टीम को जीत तक पहुंचा दिया था.
240 रनों का पीछा करती हुई टीम ने 92 रन तक पहुंचने में छह विकेट गंवा दिए थे, तब जडेजा बल्लेबाज़ी करने उतरे.
उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में आक्रामक बल्लेबाज़ी करते हुए 59 गेंदों पर 77 रन बनाए. भारत ये मैच महज 18 रन से हारा था.
दबाव में बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं जडेजा
रविंद्र जडेजा उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हैं जो नियमित तौर पर तीनों फॉर्मेट में खेलते हैं.
उन्हें भारतीय टीम में बॉलिंग ऑलराउंडर या विदेशी पिचों पर अश्विन पर तरजीह देते हुए उन्हें इकलौत स्पिन गेंदबाज़ के तौर पर चुना जाता है.
भारत अक्टूबर-नवंबर में वर्ल्ड कप क्रिकेट का आयोजन कर रहा है, लिहाजा जडेजा से भी काफी उम्मीदें बढ़ी हुई हैं.
ऋषभ पंत, श्रेयस अय्यर और केएल राहुल के चोटिल होने से भारत का मिडिल ऑर्डर थोड़ा अनिश्चित दिख रहा है. इस समय में इन खिलाड़ियों की वापसी का पूरा भरोसा नहीं है.
ऐसे में ऑलराउंडर जडेजा के लिए बेहतरीन प्रदर्शन करने का मौका हो सकता है. हालांकि इसका दबाव भी उनपर काफी ज़्यादा होगा.
रविंद्र जडेजा कोई ज़ोरदार शाट्स खेलने वाले बल्लेबाज़ नहीं हैं, ना ही उनके पास सूर्यकुमार यादव और हार्दिक पांड्या जैसे शाट्स हैं.
वे युवराज सिंह की तरह लंबे लंबे छक्के भी नहीं लगा सकते. लेकिन उनमें बिना जोख़िम लिए प्रत्येक गेंद पर रन बनाने की काबिलियत है.
गेंदबाज़ी के हिसाब से भी देखें तो जडेजा की स्पिन में कोई ख़ासियत नहीं दिखेगी. ना ही वे बहुत ज़्यादा ट्रिक का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन भारतीय परिस्थितियों में वे बेहद प्रभावी गेंदबाज़ हैं.
उनकी फ़ील्डिंग टीम हमेशा से टीम के लिए एसेट रही है. 2012 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ एक ट्वेंटी-20 मैच में केवल फ़ील्डिंग के लिए उन्हें मैन ऑफ़ द मैच आंका गया था.
एक अच्छे फ़िनिशर को अच्छा फ़ाइटर होना पड़ता है. रविंद्र जडेजा को शुरुआती दिनों में टेस्ट क्रिकेट में टीम में जगह बनाने के लिए काफ़ी संघर्ष करना पड़ा था.
इसके बाद उन्हें कंधे की चोट ने भी परेशान किया. करियर के शुरुआती दिनों में किसी ने सोचा नहीं था कि टेस्ट क्रिकेट में वे इतने कामयाब गेंदबाज़ होंगे, अब तक टेस्ट मैचों में वे 260 विकेट झटक चुके हैं.
2011 के वर्ल्ड कप में भारत को कामयाबी दिलाने में युवराज सिंह के आलराउंड खेल की अहम भूमिका रही थी. 362 रन और 15 विकेट के साथ वे प्लेयर ऑफ़ द सिरीज़ आंके गए थे.
युवराज सिंह की उस कामयाबी को दोहराना इतना आसान नहीं है, लेकिन ये सवाल उठ रहा है कि क्या जडेजा भारतीय टीम के लिए वही रोल प्ले कर सकते हैं?
जडेजा कर पाएंगे युवराज की बराबरी?
क्रिकेट एक्सपर्ट आनंद वेंकटरमन कहते हैं, “दुनिया भर के मैदानों में जडेजा वनडे क्रिकेट में कई बेहतरीन पारियां खेल चुके हैं."
"अंतिम दस ओवरों में अगर टीम को 80 से ज़्यादा रनों की ज़रूरत हो तो वे टीम के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज़ हो सकते हैं. 2019 के वर्ल्ड कप सेमीफ़ाइनल और चैंपियंस ट्राफ़ी की कुछ पारियों में वे इसे साबित कर चुके हैं.”
जडेजा की गेंदबाज़ी के बारे में आनंद वेंकटरमन कहते हैं, “रविंद्र जडेजा अमूमन गेंदों से भी शानदार प्रदर्शन करते रहे हैं. वनडे मैचों में वे एक अच्छे गेंदबाज़ हैं."
"घरेलू मैदानों पर ही नहीं, विदेशी पिचों पर भी वे मारक गेंदबाज़ साबित हुए हैं. हालांकि भरोसेमंद फिनिशर होने के लिए उन्हें बल्ले से और भी बेहतर प्रदर्शन करना होगा.”
क्या रविंद्र जडेजा, भारतीय टीम के लिए आगामी वर्ल्ड कप में युवराज सिंह की भूमिका निभा पाएंगे या फिर एमएस धोनी की तरह फिनिशर साबित होंगे?
इस सवाल के जवाब में आनंद वेंकटरमन कहते हैं, “जडेजा से आगामी वर्ल्ड कप में काफ़ी उम्मीदें हैं. घरेलू मैदान पर वे बेहतरीन भूमिका निभा सकते हैं. लेकिन इस वक्त युवराज सिंह जितनी उम्मीदें लगाना, जडेजा पर दबाव डालने जैसा होगा.”
जडेजा के करियर का हवाला देते हुए आनंद वेंकटरमन कहते हैं, “वनडे क्रिकेट में वे अब तक एक शतक नहीं लगा पाए हैं. टी-20 क्रिकेट में अब तक हॉफ सेंचुरी नहीं जमा सके हैं. आंकड़े पूरी कहानी नहीं कहते हैं, लेकिन इससे खिलाड़ी की क्षमता का पता ज़रूर लगाया जा सकता है.”
हालांकि क्रिकेट की दुनिया में ऐसे कई खिलाड़ी हुए हैं जिन्होंने अपना बेहतरीन प्रदर्शन 30 साल की उम्र के बाद दिया है.
जडेजा 34 साल के हैं और इस साल अपना तीसरा वर्ल्ड कप खेलने के लिए तैयार हैं.
यह उनका अंतिम वर्ल्ड कप हो सकता है. ऐसे में जडेजा पहले वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फ़ाइनल और उसके बाद वर्ल्ड कप के दौरान उम्मीदों पर खरा उतरने की हरसंभव कोशिश करेंगे.
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