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वर्ल्ड कप में क्यों सुपरहिट है रोहित शर्मा की कप्तानी और बल्लेबाज़ी
- Author, विधांशु कुमार
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिन्दी के लिए
लखनऊ में रविवार को जब भारत का मुक़ाबला इंग्लैंड से हुआ तो किसी ने सोचा नहीं था कि लगातार चार मैच हार चुकी इंग्लैंड की टीम इस वर्ल्ड कप में भारत के सामने अब तक की सबसे बड़ी चुनौती पेश करेगी.
टॉस हारकर जब भारतीय टीम पहले बैटिंग करने आई तो रोहित शर्मा और शुभमन गिल ने शुरू में तो बड़े शॉट्स लगाए लेकिन जल्दी ही गिल नौ रन बनाकर आउट हो गए.
गिल के बाद विराट कोहली क्रीज़ पर आए लेकिन वो स्कोरर को बिना तंग किए शून्य पर ही आउट हो गए.
जल्दी ही श्रेयस अय्यर भी चार रन बनाकर आउट हो गए. भारतीय टीम ने 40 रन पर 3 विकेट खो दिए.
लखनऊ की पिच पर गेंद रुककर आ रही थी. इंग्लैंड के गेंदबाज़ अच्छी लाइन और लेंथ में बोलिंग कर रहे थे और उनके फ़ील्डर्स ज़बरदस्त फील्डिंग कर रहे थे.
ऐसे में रन बनाना तो मुश्किल हो ही रहा था, दूसरे छोर पर लगातार विकेट्स भी गिर रहे थे.
शुरुआत में तेज़ी से रन बनाने वाले रोहित शर्मा ने मौक़े की नज़ाकत को समझा और गियर बदला. अब वो संभल कर खेल रहे थे.
पहले केएल राहुल और बाद में सूर्यकुमार यादव के साथ मिलकर उन्होंने अच्छी साझेदारी निभाई.
लेकिन 87 के निजी स्कोर पर रोहित ने रशीद ख़ान की गेंद को हवा में खेला और लिविंगस्टन द्वारा कैच आउट हो गए.
101 बॉल की इस पारी में उन्होंने 10 चौके और तीन छक्के लगाए और भारतीय पारी में जान बनाए रखी.
कमेंट्री कर रहे पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने कहा कि ये रोहित शर्मा की बेस्ट पारी है.
उन्होंने स्टार स्पोर्ट्स चैनल को कहा, “जब हम रोहित शर्मा की वनडे में महानता की बात करते हैं तो हम उनकी तीन डबल सेंचुरी की बात करते हैं. अभी हाल ही में उन्होंने एक तेज़ शतक भी लगाया है, लेकिन मेरी नज़र में 87 रनों की ये पारी उनकी सर्वश्रेष्ठ पारियों में एक है. इसके तीन कारण हैं – दोपहर में पिच बैटिंग के लिए आसान नहीं थी, इंग्लैंड ने बढ़िया बोलिंग चेंज की और जोस बटलर की रणनीति ने भी भारतीय टीम को दबाव में डाल दिया था.”
गंभीर ने बांधे तारीफ़ों के पुल
रोहित के आउट होने के बाद कमेंट्री कर रहे हर्षा भोगले ने कहा कि अगर वो अपना शतक पूरा कर लेते तो शायद ये वनडे में उनकी सबसे बेहतर पारी कहलाती.
उन्होंने भले ही शतक पूरा ना किया हो लेकिन जिस मुश्किल घड़ी से उन्होंने भारतीय पारी को निकाला उसने फ़ैंस और पूर्व खिलाड़ियों का दिल जीत लिया.
भारत को 2007 के टी-20 और 2011 के वनडे वर्ल्ड कप जिताने में अहम भूमिका निभाने वाले गौतम गंभीर ने भी रोहित शर्मा की पारी और उनकी कप्तानी की जमकर तारीफ़ की.
उन्होंने रोहित के 87 रन पर हवाई शॉट खेल कर आउट होने को पॉज़िटिव क्रिकेट खेलना बताया और कहा कि कप्तान रोहित शर्मा वही कर रहे हैं, जिसकी उन्हें अपनी टीम से भी उम्मीद है.
गंभीर ने कहा, “कप्तान वो होता है जो हर वो चीज़ खुद कर के दिखाता है, जिसकी दरकार वो अपनी टीम से रखता है. अगर आपको टीम से पॉजिटिव बैटिंग की ज़रूरत है तो ख़ुद भी वही करके दिखाएँ."
"रोहित शर्मा अपना काम कर रहे हैं. शायद सर्वाधिक रन स्कोरर की लिस्ट में वो 10वें या पाँचवे नंबर पर हों, ये चीज़ कोई अहमियत नहीं रखती क्योंकि आपका लक्ष्य है 19 नवंबर को फ़ाइनल जीतना. आप तय कर लें कि आप क्या चाहते हैं – शतक बनाना या फिर जीत के लिए खेलना."
"अगर शतक बनाना ही लक्ष्य होता तो वो संभलकर खेलते और शतक पर ही फ़ोकस करते. लेकिन अगर आपका लक्ष्य वर्ल्ड कप जीतना है तो बिना स्वार्थ के कप्तान की तरह आप वैसा ही खेलेंगे जैसा रोहित शर्मा ने बैटिंग करके दिखाया.”
मिस्बाह भी हुए मुरीद
वहीं पाकिस्तान के पूर्व कप्तान मिस्बाह उल हक़ भी रोहित शर्मा की पारी के मुरीद हो गए.
एक पाकिस्तानी चैनल को इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “इस तरह की पिच पर ये असाधारण बल्लेबाज़ी है. ख़ासकर तब, जब दूसरी छोर से विकेट लगातार गिर रहे हों तो बहुत मुश्किल होता है पॉजिटिव क्रिकेट की चाह दिखाना और गेंदबाज़ों को दबाव में लाना."
"इसमें कोई शक नहीं कि भारत को एक अच्छी शुरुआत मिली, लेकिन उसके बाद उन्होंने तीन विकेट गँवा दिए – और वो तीनों बड़े विकेट्स थे. विराट कोहली का विकेट गिरने के बाद रोहित जिस तरह खेले वो कमाल था. वो एक एंकर की तरह भी खेल रहे थे और बीच-बीच में शॉट्स खेलकर गेंदबाज़ों पर भी दबाव डाल रहे थे. उन्होंनें स्कोरिंग रेट को चार रन प्रति ओवर से लेकर पाँच के क़रीब पहुँचाया और कभी भी मैच को हाथ से बाहर जाने नहीं दिया.”
रोहित शर्मा की इस पारी और बेहतरीन गेंदबाज़ी की मदद से भारत ने 229 के स्कोर का ना सिर्फ बचाव किया बल्कि इंग्लैंड को 100 रनों की करारी हार का भेंट दिया.
ये जीत इसलिए भी अहम थी क्योंकि पहली बार भारतीय टीम ने इस वर्ल्ड कप में टार्गेट सेट किया था और एक साधारण से स्कोर का सफलता से बचाव किया था.
अब तक 6-0
इस वर्ल्ड कप में भारतीय टीम ने अब तक खेले गए अपने सारे 6 मैच जीत लिए हैं, और वो भी बड़े अंतर से.
पहले मैच में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 199 पर ऑल आउट किया और फिर 4 विकेट खोकर मैच जीत लिया.
दूसरे मैच में अफ़ग़ानिस्तान ने भारत के विरुद्ध 8 विकेट खोकर 272 रन बनाए और भारतीय टीम ने ये लक्ष्य सिर्फ़ 30 ओवरों में ही 8 विकेट रहते पूरा कर लिया.
तीसरे मैच में भारत ने पाकिस्तान को धो डाला और उनके 191 के स्कोर को 31वें ओवर में पूरा कर लिया.
अगले मैच में भारत का सामना बांगलादेश से हुआ जिन्होंने पचास ओवर्स में 8 विकेट पर 256 रन बनाए. भारत ने ये टार्गेट 42 ओवर में 3 विकेट खोकर पूरा कर लिया.
न्यूज़ीलैंड के खिलाफ़ मैच भारत के लिए सबसे क़रीबी मुकाबला रहा जब उनके 273 रन के स्कोर को भारत ने 6 विकेट खोकर 48वें ओवर में पूरा किया.
इसके बाद इंग्लैंड को 100 रनों से हराकर भारतीय टीम नें विश्व कप में पहली बार लगातार 6 मैच में जीत हासिल की और इस चैंपियनशिप के टॉप पर 12 अंको के साथ जगह बना ली.
भारत के अलावा कोई भी टीम इस वर्ल्ड कप में सभी मैच नहीं जीत सकी है.
कप्तानी-बल्लेबाज़ी, दोनों में अव्वल
भारत की जीतों के इस सिलसिले में सबसे बड़ा हाथ रोहित शर्मा का रहा है जिन्होंने ना सिर्फ़ ज़बरदस्त बैटिंग की है बल्कि सूझबूझ भरी कप्तानी से अपने साथी खिलाड़ियों से भी भरपूर योगदान लिया है.
अब तक की छह पारियों में उन्होंने 66 की औसत से 398 रन बनाए हैं. इसमें एक शतक और दो अर्धशतक शामिल हैं.
वो सर्वाधिक रन बनाने वालों की सूची में फ़िलहाल पाँचवे नंबर पर है लेकिन उनका स्ट्राइक रेट 119 का है जो टॉप 5 बल्लेबाज़ो में सबसे ज़्यादा है. इसके अलावा उन्होंने अब तक सर्वाधिक 20 छक्के भी लगाए हैं.
रोहित शर्मा कप्तानों वाली पारियाँ खेल रहे हैं और भारत के लिए सर्वाधिक कुल स्कोर बनाकर टॉप पर हैं. उनसे कुछ रन पीछे बैटिंग लीजेंड विराट कोहली हैं.
बल्लेबाज़ी के अलावा रोहित शर्मा कप्तानी में भी चमक रहे हैं. इंग्लैंड के खिलाफ़ मैच में इसके कई उदाहरण सामने आए.
जिस तरह उन्होंने टीम को कम स्कोर डिफ़ेंड करने के लिए प्रोत्साहित किया, जिस तरह चालाकी से बोलिंग चेंज करते रहे, जिस तरह आक्रामक फ़ील्ड लगाकर बल्लबाज़ों को दबाव में डाला, जिस तरह उन्होंने साथी खिलाड़ियों का साथ दिया या फिर कुलदीप यादव को डीआरएस ना लेने पर समझाना हो- वो क्रिकेट की फ़ील्ड पर टीम के अभिभावक नज़र आए जो किसी भी कप्तान का कर्तव्य होता है.
कमेंट्री कर रहे इंग्लैंड के पूर्व कप्तान इयन मॉर्गन ने कहा कि वो अब तक महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी का लोहा मानते थे लेकिन जिस तरह से रोहित शर्मा पिछले कुछ साल से कप्तानी कर रहे हैं, चाहे वो आईपीएल हो या भारतीय टीम, कप्तान के रूप में उनका क़द भी बढ़ता जा रहा है.
इंग्लैंड के ख़िलाफ़ मैच में रोहित शर्मा ने दो बड़े रिकॉर्ड भी बनाए. कप्तान के तौर पर रोहित शर्मा का ये 100वाँ मैच था. उन्होंने अब तक 100 मेचौं में भारत की कप्तानी की है जिसमें 74 मैचों में उन्हें जीत मिली है, जबकि 23 मैचों में भारत हारा है.
100 मैचों की कप्तानी करने वाले वो छठे भारतीय खिलाड़ी हैं. उनसे पहले विराट कोहली, महेंद्र सिंह धोनी, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़, मोहम्मद अज़हरुद्दीन और कपिल देव 100 या अधिक मैचों में भारत की कप्तानी कर चुके हैं.
रविवार को अपनी 87 रनों की पारी के दौरान रोहित शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 18000 रन भी पूरे कर लिए और ऐसा करने वाले वो पाँचवें भारतीय बल्लेबाज़ बन गए. उनसे पहले सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली और विराट कोहली ये मकाम हासिल कर चुके हैं.
जिस तरह रोहित बैटिंग कर रहे हैं, अभी उनके बल्ले से कई और शतक बाक़ी नज़र आते हैं. लेकिन फिलहाल कप्तान रोहित शर्मा की निगाहें सिर्फ एक टार्गेट पर टिकी हैं – भारत को विश्व कप की ट्रॉफ़ी दिलवाना.
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