सर्दियों में छोटे बच्चों को बीमार होने से बचाने के लिए रखें इन बातों का ख़्याल

भारत समेत दुनिया के कई देशों में ठंड का मौसम चल रहा है.

ये मौसम बड़ों को तो परेशान करता ही है लेकिन इसमें नन्हें बच्चों को भी कई समस्याओं से जूझना पड़ता है.

ऐसे में इन बच्चों को ठंड से बचाना बेहद ज़रूरी होता है.ख़ासतौर पर पांच साल या उससे छोटे उम्र के बच्चों के साथ ठंड के मौसम मे बेहद सावधानी बरतने की ज़रूरत होती है.

ठंड के मौसम में कुछ टिप्स अपना कर आप अपने छोटे बच्चों को गर्म और सुरक्षित रख सकते हैं.

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ठंड में कैसे रखें अपने बच्चों को गर्म और सुरक्षित

ठंड के मौसम में पांच साल से कम उम्र के बच्चों के साथ ज़्यादा समस्याएं और जोख़िम होता है.

ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (नेशनल हेल्थ सर्विस) की सलाह के अनुसार छोटे बच्चों और शिशुओं को गर्म और ठंड से सुरक्षित रखने के लिए एक से ज़्यादा कपड़े पहनाने चाहिए.

रात के समय उनको हल्के वज़न वाले कंबल ओढ़ाना चाहिए. यहां यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि शिशुओं को रात के समय गर्म कमरे की ज़रूरत नहीं होती है.

उनके लिए 16 से 20 डिग्री सेल्सियस का तापमान सबसे अच्छा होता है. ज़्यादा गर्मी शिशुओं की अचानक मृत्यु यानी एसआईडीएस (सडन इंफैंट डेथ सिंड्रोम) की वजह बन सकती है.

अगर आप ठंड के मौसम में अपने शिशु को बाहर लेकर जा रहे हैं तो उसके सर को गर्म कपड़े से ढक कर रखें. इसके अलावा उसे गर्मी देने के लिए दस्ताने और मोज़े भी पहनाएं.

गाड़ी में जाते समय सुरक्षा उपायों के तहत अपने बच्चे को थोड़े कम मोटे स्वेटर या कोट पहनाएं ताकि आपके बच्चे को सीट बेल्ट से बांधने की जगह बन सके.

अगर ज़रूरत है तो आप सीट बेल्ट से बांधने के बाद उसे कंबल ओढ़ा सकते हैं. हालांकि जब आप गाड़ी से उतर कर वापस घर या कमरे के अंदर आएं तब आप उसे हटा भी दें.

अपने पालतू जानवरों को कैसे रखें गर्म और सुरक्षित

अगर ठंड ज़्यादा है तो इंसानों की तरह जानवर भी ठंड लगने (हाइपोथर्मिया) का शिकार हो सकते हैं.

वेटनरी चैरिटी संस्थान पीडीएसए के मुताबिक़ ठंड के मौसम में आप अपने पालतू कुत्तों या बिल्लियों के लिए कंबल का इंतज़ाम कर सकते हैं.

इसके अलावा आप उनके बिस्तर को भी मोटा या गद्देदार बना सकते हैं. बूढ़े हो रहे कुत्तों और बिल्लियों को भी ऐसे बिस्तर पसंद आते हैं.

पीडीएसए की सलाह के मुताबिक़ अगर ठंड के समय आपके पालतू जानवर बाहर खेलने में कम वक़्त बिता रहे हैं तो आप उनके साथ घर में भी खेल सकते हैं. आप उनके लिए खिलौने लेकर आ सकते हैं.

रात के समय अपनी बिल्लियों को कमरे के अंदर उनके लिटर ट्रे के साथ ही रखें.

अचानक तापमान गिरने से बाहर रहने वाले पालतू जानवर जैसे कि खरगोश और गिनी पिग्स पर भी बुरा असर पड़ सकता है.

ऐसे में उनको ठंड से बचाने के लिए बिस्तर का इंतज़ाम किया जा सकता है या घर के अंदर रखा जा सकता है.

लेकिन घर के अंदर रखने से पहले आप यह ज़रूर तय कर लें कि उनके पास खेलने के लिए पर्याप्त जगह हो.

क्या ठंड के मौसम में अपने पालतू कुत्ते को बाहर ठहलाया जा सकता है?

ठंड के मौसम में भी कुत्तों को बाहर ठहलाने की ज़रूरत होती है. आम तौर पर उनके बाल या फ़र उन्हें गर्म रखते हैं.

लेकिन आरएसपीसीए बीमार, बुज़र्ग या पतले फ़र वाले कुत्तों को सर्दी के कपड़े या स्वेटर पहनाने की सलाह देती है.

वहीं पीडीएसए की सलाह के अनुसार बर्फ़ीले मौसम के दौरान अपने पालतू जानवरों के पंजों का ध्यान ज़रूर रखें. क्योंकि ऐसे मौसम में आपके पालतू जानवरों के पंजों को ज़्यादा नुकसान हो सकता है.

ठंड के दिनों में अपने कपड़ों को आसानी से कैसे साफ़ करें

सर्दियों में हीटर पर कपड़े सुखाना एक आम बात है. आप अपने घर के उन हिस्सों में भी थोड़ी देर के लिए हीटर ज़रूर चलाएं जिनका आप कम इस्तेमाल करते हैं. क्योंकि ठंड के दिनों में नमी से सीलन आने का ख़तरा भी बना रहता है.

इसके लिए आप हवा से नमी ख़त्म करने वाली मशीन डिह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. ऐसी कुछ मशीनों में लॉन्ड्री की सेटिंग भी होती है और आप इन्हें अपने कपड़े सुखाने में भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

फाइनेंस मामलों से जुड़े पत्रकार मार्टिन लुई ने बीबीसी पॉडकास्ट में इस मशीन की तारीफ़ करते हुए कहा था, डिह्यूमिडिफायर चलाना आमतौर पर कमरे में हीटर चलाने से ज़्यादा सस्ता है.

कार को बर्फ़ से कैसे बचाएं

कई सारे ड्राइवरों को बर्फ़ीले मौसम या जगहों पर अपनी कारों को बर्फ़ से ढकने से बचाना होता है.

इसके लिए कई बारे वे कार पर गर्म पानी डालते हैं. लेकिन ड्राइवरों को ऐसा ना करने की सलाह भी दी जाती है.

क्योंकि गर्म या उबलते पानी से कार के शीशे चटक सकते हैं और पानी दोबारा से आपकी कार पर जम सकता है.

ब्रिटेन में कार ख़रीदने की सुविधा देने वाली कंपनी एए ऐसी स्थिति में कार के वाइपर को बंद कर के इंजन चालू रखने की सलाह देती है. इसके अलावा आप गर्म हवा के रुख को अपनी विंडस्क्रीन की तरफ़ कर सकते हैं.

साथ ही आप अपनी कार के पिछले हिस्से में लगे ब्लोअर या हिटर को भी चालू कर सकते हैं.

अगर आपकी कार में एयर-कॉन फ़ीचर है तो खिड़कियों पर फॉग जमने से बचाने के लिए आप उसका इस्तेमाल कर सकते हैं.

इसके बाद आप एक नरम ब्रश से बर्फ़ को हटा सकते हैं और फ़िर खिड़कियों को साफ़ करने वाले स्क्रैपर और बर्फ़ पिघलाने वाले लिक्विड का इस्तेमाल कर सकते हैं.

प्लग इन हीटर और इलेक्ट्रिक कंबल को इस्तेमाल करने का सही तरीका क्या है?

ठंड के दौरान बहुत सारे लोग पोर्टेबल हीटर का इस्तेमाल भी करते हैं. लेकिन अगर सावधानी से इस्तेमाल ना किया जाए तो इससे आग लगने का ख़तरा भी बना रहता है.

आग बुझाने वाले कर्मचारियों और इलेक्ट्रिक सेफ़्टी फ़र्स्ट चैरिटी संस्था के मैनेजर इसके इस्तेमाल का तरीका बताते हैं.

उनके अनुसार, हीटर को हमेशा सपाट सतह पर रखना चाहिए ताकि वह गिरे ना. किसी भी ज्वलनशील वस्तु को हीटर से कम से कम तीन फिट या एक मीटर की दूरी पर रखना चाहिए.

इसके अलावा कपड़े, कंबल, रजाई या इस तरह के दूसरे सामानों को हीटर के संपर्क से दूर रखना चाहिए.

साथ ही अपको कपड़े सुखाने के लिए भी हीटर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और इसे रात भर या लंबे समय तक जलते हुए नहीं छोड़ना चाहिए.

विशेषज्ञ हीटर को एक्सटेंशन प्लग में ना लगाने की चेतावनी भी देते हैं. क्योंकि इससे आग का ख़तरा भी बना रहता है.

इलेक्ट्रिक कंबल या ब्लोअर को ज़्यादा देर तक इस्तेमाल करना भी ख़तरनाक हो सकता है. इसीलिए इसे इस्तेमाल करते समय हमेशा टाइमर का इस्तेमाल करना चाहिए.

अगर इलेक्ट्रिक कंबल का तार बाहर निकला हुआ दिख रहा हो, कंट्रोल यूनिट में कोई दिक्कत हो या स्विच ऑन करने पर बदबू आ रही हो तो उसे बिलकुल भी इस्तेमाल ना करें.

गैस से चलने वाले हीटर का इस्तेमाल करने पर कमरे में कार्बन मोनोऑक्साइड भर जाने का ख़तरा बना रहता है. इसीलिए कमरे में इससे कार्बनडाइऑक्साइड की मौजूदगी से आगाह करने वाले अलार्म को लगा कर रखें.

ठंड में होने वाले इंफ़ेक्शन से कैसे बचें

ठंड के दौरान, जुकाम, गले में दर्द, सर्दी, खांसी और इस तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती हैं.

इसके अलावा नोरावायरस (विंटर वॉमिटिंग बग) के मामले भी बढ़ जाते हैं. साथ ही अब भी कोविड का ख़तरा बरकरार है.

सर्दियों के मौसम में लोग ज़्यादातर समय तक अपने घरों में ही रहते हैं. ऐसे में इंफ़ेक्शन फैलने का ख़तरा और भी ज़्यादा बना रहता है. जैसे कि बंद जगहें जहां पर खिड़की या दरवाज़े नहीं होते हैं, वहां पर इंफ़ेक्शन फैलने का ख़तरा भी ज़्यादा होता है.

साफ़-सफ़ाई और हाईजीन का ध्यान रखकर, खांसते या छींकते समय रुमाल या टिशू पेपर का इस्तेमाल करने से और हाथ धोने से इस समस्या से बचा जा सकता है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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