You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
फ़्रांस और जर्मनी ने फ़लस्तीनियों के समर्थन में विरोध-प्रदर्शन पर लगाई पाबंदी
- Author, इडो वॉक़ और लॉरेन्स पीटर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
फ्रांस की सरकार ने देश में फ़लस्तीनियों के समर्थन में विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगा दी है.
गृह मंत्री जेराल्ड डर्मानिन ने चेतावनी दी है कि फ्रांस में रहने वाले जो विदेशी नागरिक नियमों का पालन नहीं करेंगे उन्हें वापस भेज दिया जाएगा. वहीं फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने देश वासियों से एकजुटता की अपील की है.
इसराइल और हमास के बीच जारी जंग ने यूरोपीय मुल्कों की चिंता बढ़ा दी है, उनका मानना है कि मौजूदा तनाव लोगों में यहूदी विरोधी भावना को बढ़ा सकता है.
हालांकि सरकार की लगाई पाबंदी के बावजूद गुरुवार को बड़ी संख्या में फ़लस्तीनी समर्थकों ने राजधानी पेरिस में विरोध प्रदर्शन किया.
पैसेल दे ला रिपब्लिक के नज़दीक हुई एक रैली में क़रीब 3 हज़ार लोगों ने हिस्सा लिया. प्रदर्शनकारी फ़लस्तीनी झंडा लहरा रहे थे और "इसराइल ख़ूनी है" और "फ़लस्तीन ज़रूर जीतेगा" जैसे नारे लगा रहे थे.
भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने पानी की बौछार का इस्तेमाल किया. विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने के लिए पुलिस ने अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया है.
फ़लस्तीनियों के समर्थन में विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगाने का आदेश देते हुए डार्मानिन ने कहा कि रोक का पालन न करने वाले को गिरफ्तार किया जाना चाहिए "क्योंकि वो क़ानून व्यवस्था के लिए मुश्किल पैदा कर सकते हैं."
लेकिन फ़लस्तीनी समर्थक समूहों का कहना है कि ये रोक अभिव्यक्ति की आज़ादी के ख़िलाफ है. उनका कहना है कि वो फ़लस्तीनियों के हक़ों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन करना जारी रखेंगे.
मैक्रों की अपील
रैली में शामिल हुई शार्लोट वॉतिए ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "हम एक ऐसे देश में रहते हैं, जहां नागरिक क़ानून है. ये एक ऐसा देश है, जहाँ हमें कसी मामले में अपनी राय रखने का हक़ है और विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है."
वो कहती हैं, "एक पक्ष के हक़ में दूसरे पक्ष का समर्थन करने वालों पर पाबंदी लगाना अन्याय है."
इधर जर्मनी की राजधानी बर्लिन में भी पुलिस ने सभी तरह के फ़लस्तीनी समर्थक प्रदर्शनों पर रोक लगा दी है. पुलिस का कहना है कि इससे यहूदी विरोधी भावना के बढ़ने और हिंसा को सही ठहराए जाने का ख़तरा है.
पुलिस ने कहा कि गुरुवार को बर्लिन के पश्चिम में मौजूद पॉट्सडेमर प्लात्ज़ में कुछ लोग फ़लस्तीनियों के समर्थन में प्रदर्शन के लिए इकट्ठा हुए थे. इनमें से 60 प्रदर्शनकारियों ने पुलिस का आदेश मानते हुए प्रदर्शन रोक दिया.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने फ्रांस में रहने वालों से अपील की है कि वो एकजुटता का प्रदर्शन करें. उन्होंने कहा, "अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विचारों का विभाजन पहले ही है, राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा न होने दें."
मैक्रों ने फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास को "एक आतंकी संगठन" बताया और कहा कि "ये संगठन इसराइल के लोगों की मौत चाहता है."
बीते सप्ताह शनिवार को इसराइल पर हुए हमास के हमले में 13 फ्रांसीसी नागरिकों की मौत की पुष्टि हुई है. मैक्रों ने कहा कि 17 फ्रांसीसी नागरिक अब भी लापता हैं और हो सकता है कि ये उन लोगों में शामिल हों जिन्हें हमले के दौरान हमास के लड़ाके बंधक बनाकर अपने साथ गज़ा ले गए थे.
लापता लोगों में चार बच्चे भी शामिल हैं. मैक्रों ने कहा, "इसराइल और अपने दूसरे सहयोगियों के साथ मिलकर फ्रांस सभी क़दम उठा रहा है ताकि इन नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया जा सके."
मैक्रों ने कहा कि इसराइल को अधिकार है कि वो राष्ट्रीय हित में चरमपंथियों को ख़त्म करे. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि "ऐसा करते हुए उसे आम नागरिकों की जान बचानी चाहिए क्योंकि यही गणतंत्रिक मुल्क का फर्ज़ है."
उन्होंने कहा, "चरमपंथ के ख़िलाफ़ उठाया जाने वाला क़दम मज़बूत होना चाहिए लेकिन अन्याय नहीं होना चाहिए."
फ्रांस में बढ़ी यहूदी विरोधी घटनाएं
यूरोप में फ्रांस ऐसा मुल्क है, जहाँ बड़ी संख्या में यहूदी और मुसलमान समुदाय के लोग बसते हैं.
यहाँ क़रीब पाँच लाख यहूदी बसते हैं जो यूरोप के दूसरे देशों की तुलना में सबसे अधिक हैं.
वहीं एक आकलन के अनुसार, देश में मुसलमानों की आबादी क़रीब 50 लाख है जो यूरोप के दूसरे किसी देश के मुक़ाबले अधिक है.
गुरुवार को गृह मंत्री जेराल्ड डर्मानिन ने स्थानीय मीडिया से बात करते हुए कहा कि देश में मौजूद यहूदी स्कूलों और पूजास्थनों की रक्षा के लिए वहां पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने की ज़रूरत है.
उन्होंने फ्रेंच रेडियो से कहा कि शनिवार को हमास के हमले के बाद से देश में क़रीब एक सौ यहूदी विरोधी घटनाएं दर्ज की गई हैं. अधिकतर मामलों में दीवारों पर ग्राफिटी बनाई गई है, जिनमें या तो "स्वस्तिक" का चिह्न बनाया गया है या फिर "यहूदियों का ख़ात्मा" या "इसराइल के विरोध में इंतिफ़दा शुरू हो" लिखा है. फ़लस्तीनियों के इसराइल विरोधी और यहूदी विरोधी संघर्ष को इंतिफ़दा कहा जाता है.
उन्होंने कहा कि कुछ घटनाओं में स्कूल और पूजास्थलों में छिपाकर चाकू ले जाने की कोशिश कर रहे लोगों को गिरफ्तार किया गया है
फ्रांसीसी पुलिस का कहना है कि उन्होंने नेशनल असेम्बली की अध्यक्ष येल ब्रॉन-पीवे और एक और नेता मेयर हबीब की सुरक्षा और कड़ी कर दी है. ये दोनों यहूदी मूल के हैं.
मिल रही जानकारी के अनुसार ब्रॉन-पीवे को मौत की धमकियां मिली हैं. वो राष्ट्रपति मैक्रों की रिनैसां पार्टी की सदस्य हैं.
इस सप्ताह उन्होंने इसराइल के समर्थन में फ्रांसीसी संसद की इमारत को इसराइली झंडे के रंग की रोशनी से सजाया था. मंगलवार को संसद क सत्र शुरू होने से पहले उन्होंने सभी सांसदों से एक मिनट का मौन रखने की भी अपील की थी.
येल ब्रॉन-पीवे ने घोषणा की कि पॉपुलर फ्ऱंट फ़ॉर द लिबरेशन ऑफ़ पैलेस्टीइन (पीएफ़एलपी) की एक सदस्य मरियम अबू दक्का अगले महीने संसद में होने वाली डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग में शामिल होने पर पाबंदी लगाई जाएगी. पीएफ़एलपी एक विद्रोही संगठन है जिसे यूरोपीय संघ चरमपंथी संगठन मानता है.
मेयर हबीब विदेश में रहने वाले फ्रांसीसी लोगों के एक संगठन का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसमें इसराइल और फ़लस्तीनी इलाक़ों में रहने वाले फ्रांसीसी मूल के लोग शामिल हैं. वो खुले तौर पर इसराइल का समर्थन करते हैं. इसराइल पर हमास के हमले के बाद उन्होंने कहा था, "हम जो देख रहे हैं वो नरसंहार है."
हमास के हमले और उसके बाद के घटनाक्रम का असर फ्रांस की राजनीति पर पड़ा है. जहां अधिकांश राजनीतिक पार्टियों ने शनिवार को हुए हमले को "आतंकी हमला" करार दिया है और कहा है कि इसराइल को जवाबी कार्रवाई करने का हक़ है, वहीं धुर वामपंथी पार्टी की प्रतिक्रिया अलग थी.
ले फ्रांस इनसुमी पार्टी के वामपंथी नेता ज्यां लुइक मैलॉनशौं की प्रतिक्रिया सरकार की प्रतिक्रिया से अलग रही है. पार्टी ने एक बयान जारी कर हमास के हमले को "फ़लस्तीनी ताकतों का सशस्त्र हमला" करार दिया है जिसकी सोशलिस्ट और कम्युनिस्ट पार्टियों जैसी वामपंथी पार्टियों ने भी कड़ी आलोचना की है.
जर्मनी का स्टैंड
जर्मनी के चांसलर ओलाफ़ शूल्त्ज़ ने कहा है कि देश में "यहूदी विरोधी भावना" को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
उन्होंने संसद को बताया है कि फ़लस्तीन समर्थक समूह सामीदू को देश में बैन किया जाएगा. हमास के हमले के बाद इस समूह से जुड़े लोगों ने बर्लिन के नज़दीक नोयकर्न इलाक़े में मिठाइयां बांटी थीं. शूल्त्ज़ ने कहा, "हम यहूदी विरोधी भावना को बर्दाश्त नहीं करेंगे."
उन्होंने संसद को बताया कि इसराइल की सुरक्षा उनके देश की नीति में शामिल है. इसराइल के प्रति समर्थन जताने के लिए जर्मनी की विदेश मंत्री एनालेना बारबोक शुक्रवार को इसराइल के दौरे पर जाने वाली हैं.
जर्मन अधिकारियों के अनुसार मेइन्ज़, ब्रॉन्शविग और हेलब्रॉन समेत कई जगहों पर इसराइल के समर्थन में झंडे लगाए गए थे जिन्हें फ़लस्तीन समर्थकों ने फाड़ दिया लिया. कुछ जगहों पर झंडा लगाए जाने के कुछ ही घंटों के भीतर उन्हें या तो फाड़ दिया गया या फिर नष्ट कर दिया गया.
अतिरिक्त रिपोर्टिंग: जेम्स ग्रेगोरी
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)