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कोर्ट ने कहा, मनी लॉन्ड्रिंग क़ानून की धारा 50 के तहत गिरफ़्तार नहीं कर सकता ईडी - प्रेस रिव्यू
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 (पीएमएलए) की धारा 50 तहत समन जारी करने का अधिकार तो है लेकिन गिरफ़्तार करने का नहीं.
बिज़नस स्टैंडर्ड की ख़बर के अनुसार, अदालत ने कहा, "यह एकदम स्पष्ट है कि पीएमएलए की धारा 50 में गिरफ़्तार करने की शक्ति नहीं है."
अख़बार लिखता है कि जस्टिस अनूप जयराम भभानी ने एक याचिका पर फ़ैसला सुनाने हुए कहा, "पीएमएलए की धारा 50 के तहत किसी को समन जारी करने और दस्तावेज़ या रिकॉर्ड पेश करने के लिए कहने की शक्ति है जो सिविल कोर्ट की शक्ति जैसी है."
"लेकिन यह पीएमएलए की धारा 19 के तहत मिलने वाली गिरफ़्तार करने की ताकत से अलग है."
आदेश में कहा गया है, "यह स्पष्ट है कि गिरफ़्तार करने की ताकत न तो सेक्शन 50 में हैं और न ही इसके तहत जारी किए जाने वाले समनों से ऐसी कोई ताकत मिल जाती है."
पत्रकारों के ज़ब्त उपकरणों को लेकर दिल्ली पुलिस की याचिका ख़ारिज
दिल्ली की एक अदालत ने 'द वायर' पत्रकारों के उपकरणों की ज़ब्ती को लेकर दिल्ली पुलिस की एक याचिका ख़ारिज कर दी है.
दिल्ली पुलिस ने तीस हज़ारी कोर्ट में मजिस्ट्रेट अदालत के उस फ़ैसले को चुनौती दी थी, जिसमें समाचार पोर्टल द वायर के संपादकों और पत्रकारों से ज़ब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को लौटाने को कहा गया था.
द हिंदू की ख़बर के मुताबिक़, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पवन सिंह राजावत ने इस याचिका को ख़ारिज करते हुए कहा कि "उपकरणों को लगातार ज़ब्त किए जाने से प्रतिवादियों (द वायर के संपादकों और पत्रकारों) को बेवजह मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है."
कोर्ट ने कहा, "प्रेस को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है और अगर इसे स्वतंत्र रूप से काम करने नहीं दिया गया इससे हमारे लोकतंत्र की नींव को गंभीर नुक़सान पहुंचेगा."
पुलिस ने द वायर के संपादकों और पत्रकारों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अक्टूबर 2022 में ज़ब्त किया था.
दिल्ली पुलिस ने यह कार्रवाई भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय की शिकायत पर दर्ज एफ़आईआर पर की थी.
मालवीय ने 'द वायर' पर उन्हें और फ़ेसबुक-इंस्टाग्राम के स्वामित्व वाली कंपनी 'मेटा' को लेकर फ़ेक न्यूज़ प्रकाशित करने का आरोप लगाया था.
सीएम का पद मुझे नहीं छोड़ रहा: गहलोत
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि कांग्रेस में जो कोई सीएम बनने की चाहत रखता है, वह कभी नहीं सीएम नहीं बनता.
इकनॉमिक टाइम्स की ख़बर के अनुसार, उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री का पद छोड़ना चाहते थे लेकिन यह पद उन्हें नहीं छोड़ रहा था और हो सकता है कि एक बार फिर ऐसा हो.
मुख्यमंत्री पद के लिए सचिन पायलट से उनकी प्रतिद्वंद्विता को देखते हुए गहलोत की यह टिप्पणी काफ़ी अहमियत रखती है.
गहलोत ने कहा कि हाई कमान और गांधी परिवार ने तीन बार उनके नेतृत्व पर भरोसा जताया है और आगे भी इस मामले पर हाई कमान ही फ़ैसला करेगा.
उन्होंने कहा, "लेकिन मुझमें भी कुछ तो ख़ूबियां होंगी जो तीन बार इस पद के लिए चुना गया."
'स्कूल में फ़र्श पर न बैठे कोई बच्चा'
बिहार के शिक्षा विभाग ने सभी प्रदेश के डीएम को यह सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं कि सभी सरकारी स्कूलों में बेंच और डेस्क की व्यवस्था होनी चाहिए.
इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, विभाग ने कहा कि कोई भी बच्चा स्कूल में फ़र्श पर नहीं बैठना चाहिए. इसके साथ ही डीएम को टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधाओं का इंतज़ाम करने के लिए भी कहा गया है.
बिहार में 72,663 सरकारी स्कूल हैं जिनमें से 15000 में बेंच और डेस्क न होने के कारण बच्चों को ज़मीन पर बैठना पड़ता है.
ज़्यादातर प्राइमरी और मिडल स्कूलों में बैठने की व्यवस्ता नहीं है. बिहार के सरकारी स्कूलों में तीन करोड़ बच्चे पढ़ाई करते हैं.
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