ग़ज़ा-इसराइल युद्धविराम: जब विस्थापित फ़लस्तीनी उत्तरी ग़ज़ा में अपने घरों को पहुंचे तो उन्होंने क्या देखा

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ग़ज़ा-इसराइल युद्धविराम के बाद अब ग़ज़ा के लोग अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं.
ग़ज़ा के एक सुरक्षा अधिकारी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया कि सोमवार सुबह नेट्ज़रिम कॉरिडोर खुलने के बाद दो घंटे के भीतर पैदल चलकर दो लाख विस्थापित लोग उत्तरी ग़ज़ा में दाखिल हुए हैं.
समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार, सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि ग़ज़ा शहर और उत्तरी इलाके में अपने तबाह घरों की ओर लौट रहे लोगों के लिए 135,000 टेंट की ज़रूरत होगी.
अपने घरों की ओर लौट रहे लोगों के चेहरे पर एक साथ कई भाव हैं. वो घर की ओर लौटते हुए खुश हैं तो लेकिन तबाही देखकर मायूस भी हो रहे हैं.

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हमास और नेतन्याहू ने क्या कहा?
हमास ने ग़ज़ा के विस्थापितों की उत्तरी ग़ज़ा में वापसी को 'जीत' बताया है.
चरमपंथी संगठन हमास ने कहा है, "विस्थापितों की वापसी हमारे लोगों की एक जीत है. यह विस्थापन और इसराइली कब्ज़े की योजना की असफलता और हार का संकेत है."
वहीं, रविवार देर रात इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा कि इस कॉरिडोर को तब खोला गया है जब हमास अर्बेल येहुद नाम की इसराइली बंधक को छोड़ने के लिए तैयार हुआ है.
उत्तरी ग़ज़ा में लोगों को लौटने देने के बदले हमास इसराइल के छह और बंधकों को रिहा करेगा.
इससे पहले इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा कि इस सप्ताह हमास इसराइल के छह और बंधकों को रिहा करेगा और सोमवार से उत्तरी ग़ज़ा के लोगों को उनके घरों में वापस जाने दिया जाएगा.
रिहा किए जाने वाले बंधकों में एक आम नागरिक अर्बेल येहुद भी शामिल हैं. आम लोगों की रिहाई न होने के कारण ही इसराइल उत्तरी ग़ज़ा के लोगों को उनके घरों में वापस नहीं लौटने दे रहा था.
हमास ने शनिवार को भी चार बंधकों को रिहा किया था लेकिन उस वक्त अर्बेल येहुद को रिहा नहीं किया था.
इसराइल ने हमास पर युद्धविराम समझौते की शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाया था. समझौते के तहत सबसे पहले इसराइल के आम नागरिकों को रिहा किया जाना था.
इसराइल-हमास युद्धविराम समझौते के तहत ये सहमति बनी थी कि पहले चरण में 33 इसराइली बंधकों को रिहा किया जाएगा. इसके बदले 1,900 फ़लस्तीनी क़ैदी रिहा होंगे.
33 बंधकों में से सात को हमास ने रिहा किया है. अब इसराइली सरकार ने बताया है कि 26 को रिहा किया जाना था लेकिन हमास के अनुसार इनमें से आठ की मौत हो चुकी है. अब आने वाले हफ़्तों में 18 बंदियों को रिहा किया जाएगा.

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युद्धविराम के बाद घर लौटने को लोग बेचैन थे. बीबीसी संवाददाता रुश्दी अबु अलूफ़ ने बताया है कि एक साथ ही फ़लस्तीनी लोगों में घर लौटने की खुशी भी है और ग़म भी है.
ये कुछ ऐसा क्षण है जिसकी प्रतीक्षा वो एक साल से ज़्यादा समय से कर रहे थे. लेकिन घर लौट रहे लोगों की खुशी ज़्यादा समय तक नहीं ठहर रही है जब वो दूर-दूर तक बर्बादी के मंजर देख रहे हैं.
ग़ज़ा शहर के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों के कुछ इलाके तो ऐसे लगते हैं कि यहां कोई शक्तिशाली भूकंप आया था.
हालांकि कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अभी प्रतीक्षा में हैं. ऐसे ही लोगों में से एक 55 साल के ख़ालिद राबा से बीबीसी ने बात की.
उनका कहना है, "हम अभी ख़ान यूनिस में हैं. ये दक्षिणी ग़ज़ा पट्टी में है. मैं मूल रूप से जबालिया से हूं. ये उत्तरी इलाके में है. हम भी जाने की योजना बना रहे थे लेकिन जबालिया के हमारे रिश्तेदारों ने ऐसा नहीं करने की सलाह दी है. मेरे भाई ने मुझे कहा कि अभी मत आओ. घर ज़मींदोज़ हो चुके हैं. लोग सड़क पर हैं और कोई मदद नहीं कर रहा है."
सैटेलाइट तस्वीरों के एक विश्लेषण के अनुसार, ग़ज़ा पट्टी में सबसे ज़्यादा नुक़सान उत्तरी ग़ज़ा में हुआ है. इस विश्लेषण के अनुसार, 11 जनवरी तक उत्तरी ग़ज़ा के प्रशासनिक इलाके की दो तिहाई (69.8 प्रतिशत) से ज़्यादा इमारत तबाह हो चुकी है. पूरी ग़ज़ा पट्टी में ये औसत 59.8 प्रतिशत का है.
वहीं ग़ज़ा शहर के प्रशासनिक इलाके में ये प्रतिशत 74.2 प्रतिशत है.
पैदल चल रहे लोगों के बीच कार से भी लोगों को आने की मंजूरी दी गई है. लेकिन उन्हें इसके लिए जांच से गुजरना होगा. बीबीसी संवाददाता रुश्दी अबु अलूफ़ के अनुसार, कार से आने वाले लोगों को चेकप्वाइंट पार करने में कई दिन लगेंगे.

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डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर जर्मनी की प्रतिक्रिया
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग़ज़ा को 'डिमोलिशन साइट' बताया था. ट्रंप ने कहा कि वो चाहते हैं कि मिस्र और जॉर्डन ग़ज़ा के विस्थापित फ़लस्तीनी लोगों को अपने यहां जगह दे.
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने जॉर्डन के राजा अब्दुल्लाह से गुज़ारिश की है कि मिस्र के राष्ट्रपति से भी इस बारे में बात करने की उनकी योजना है.
ग़ज़ा को डिमोलिशन साइट (तबाह स्थल) बताते हुए ट्रंप ने कहा कि फ़लस्तीनी लोगों को जगह देना "अस्थायी भी हो सकता है और लंबे समय के लिए भी हो सकता है."
ट्रंप के इस प्रस्ताव की हमास और फ़लस्तीनी अथॉरिटी दोनों ने ही निंदा की है. वहीं जॉर्डन और मिस्र ने भी ये प्रस्ताव ख़ारिज कर दिया है.
इस पर जर्मनी के विदेश मंत्रालय का भी बयान आया है. रॉयटर्स ने विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता के हवाले से जानकारी दी है.
इसमें जर्मनी ने कहा कि यूरोपियन यूनियन, अरब सहयोगियों और संयुक्त राष्ट्र का ये विचार है कि, "फ़लस्तीनी लोगों को ग़ज़ा से विस्थापित नहीं किया जाना चाहिए और ग़ज़ा पर स्थायी तौर पर इसराइल का कब्ज़ा नहीं हो सकता."
ग़ज़ा के हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक इसराइली हमले में 47,200 फ़लस्तीनी लोगों की मौत हुई है.
हमास ने सात अक्तूबर, 2023 को इसराइल पर हमला किया था. इस हमले में 1,200 इसराइली लोगों की मौत हुई थी और 251 लोगों को हमास ने बंधक बना लिया था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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