यूक्रेन युद्ध में शामिल होकर लौटा दक्षिण कोरिया का सैनिक क्यों कर रहा प्रदर्शन?

जीन मैकेंज़ी

सोल संवाददाता

सार्जेंट किम जे- केयंग सोल में कोलंबिया दूतावास के बाहर पूरी सैन्य वर्दी में खड़े हैं. इससे एक दिन पहले वो नीदरलैंड्स के दूतावास के सामने खड़े थे और इससे पहले ग्रीस के दूतावास के बाहर थे.

स्पेशल फ़ोर्सेज के पूर्व सैनिक का ये ‘वन-मैन’ प्रदर्शन, उन सभी 22 देशों का आभार जताने का अपना तरीक़ा है, जिन्होंने 1950 में उत्तर कोरिया के साथ युद्ध के दौरान दक्षिण कोरिया के समर्थन में सैनिक या फिर दवाएं भेजी थीं.

अब वो चाहते हैं कि उनका देश यूक्रेन की मदद करे जिस पर फ़रवरी 2022 में रूस ने हमला किया था.

वो कहते हैं, “हम सौभाग्यशाली हैं कि हमारे देश के लिए खून बहाने वाले विदेशी सैनिकों की बदौलत हम पूरी दुनिया में 10वें सबसे संपन्न देश हैं.”

यही भावना थी जो उन्हें यूक्रेन की जंग में खींच ले गई, जहां उन्होंने चार महीने तक यूक्रेनी सेना के साथ मोर्चे पर एंटी ड्रोन गनर और इंटरनेशनल लीजन की तीसरी बटालियन में स्वास्थ्यकर्मी के रूप में सेवाएं दीं.

किम कोरिया के उन चंद लोगों में से एक हैं जो अपनी सरकार के आदेश को नज़रअंदाज़ कर यूक्रेन जंग में शामिल हुए. जब उत्तर पूर्वी शहर खारकीएव को रूस के हाथों से यूक्रेन ने दोबारा हासिल किया उसके कुछ दिन बाद ही किम वहां पहुंचे थे.

वहां जो कुछ उन्होंने देखा, उसे वो “भयानक, शैतानी, युद्ध अपराध” कहते हैं.

शायद यही वजह है कि वो चाहते हैं कि यूक्रेन की मदद के लिए दक्षिण कोरिया को कुछ करना चाहिए.

'युद्ध की दिशा बदल सकते हैं हथियार'

हफ़्तों से चल रहे जवाबी हमले में यूक्रेन का गोला बारूद तेज़ी से ख़त्म हो रहा है और उस तेजी से उसके सहयोगी आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं.

इस बीच दक्षिण कोरिया, सबसे अधिक गोला बारूद रखने वाले देशों में एक है. उत्तर कोरिया के साथ उसके टकराव का अभी हल नहीं हुआ है और ये देश नहीं जानता कि कब उसे गोला बारूद की ज़रूरत आन पड़े.

लेकिन दक्षिण कोरिया का रक्षा उद्योग बहुत तेजी से बढ़ रहा है. उसके यहां जिस रफ़्तार से टैंक और अन्य हथियारों का उत्पादन हो रहा है, यूरोप सिर्फ उसकी कल्पना ही कर सकता है.

जबसे यूक्रेन की जंग शुरू हुई है, अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के देशों की ओर से सोल पर कीएव को हथियार और गोला बारूद भेजने का दबाव बढ़ रहा है.

उन्होंने अगले हफ़्ते विल्नियस में होने वाली नेटो की बैठक में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक योल को आमंत्रित किया है.

दक्षिण कोरिया में यूक्रेन के राजदूत दमित्रो पोनोमारेंको ने मुझे बताया कि उनका मानना है कि दक्षिण कोरिया के हथियार ‘युद्ध की दिशा बदल सकते हैं.’

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने हाल ही में इसी तरह की अपील की थी.

उन्होंने कहा, “कृपया 70 साल पहले के दिन को याद करिए, कोरिया को मदद की सख़्त ज़रूरत थी. इंसाफ़ और आज़ादी की रक्षा के लिए कोरिया की मदद के लिए पूरी दुनिया ने हाथ बढ़ाया था. आज यूक्रेन की हालत 70 साल पहले की कोरिया जैसी है.”

लेकिन रूस पर सभी तरह के अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने और यूक्रेन को 20 करोड़ डॉलर की मानवीय सहायता देने के बावजूद, सरकारों ने घातक हथियारों को भेजने से परहेज किया है.

सार्वजनिक रूप से राजनेता संघर्ष के समय देशों को हथियार न देने की नीति के पीछे छिपते रहे हैं, लेकिन अधिकांश नेता निजी तौर पर रूस को नाराज़ करने से डरे हुए हैं.

युद्ध से पहले 2021 में दोनों देशों के बीच 27 अरब डॉलर का सालाना व्यापार होता था.

दक्षिण कोरिया की चिंता

सोल को भी कहीं न कहीं लग रहा है कि रूस उत्तर कोरिया पर लगाम लगा सकता है.

हाल ही में दक्षिण कोरिया के एक राजनयिक ने मुझसे कहा, “रूसियों ने हमें साफ़ तौर पर कहा है कि हथियार देना वो लाल रेखा है जिसे अगर हम पार करते हैं तो वो इसका जवाब देंगे.”

ये जवाबी कार्रवाई आर्थिक प्रतिबंध के रूप में हो सकती है. सोल पर दबाव बनाने के लिए रूस, उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन का साथ दे सकता है.

अप्रैल में रूस के पूर्व राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव ने इशारा किया था कि अगर सोल यूक्रेन को सैन्य मदद करेगा तो रूस प्योंगयांग को परमाणु हथियार की अत्याधुनिक तकनीक दे सकता है.

इसीलिए दक्षिण कोरिया ने उन देशों को हथियार देने का रूख़ अख़्तियार किया है जो यूक्रेन को हथियारों से लैस कर रहे हैं.

पिछले साल दक्षिण कोरिया ने पोलैंड को 12.7 अरब डॉलर के टैंक, जेट और अन्य हथियार बेचे थे. इस साल उसने 40 लाख राउंड से अधिक गोला बारूद बेचे हैं.

अमेरिका को नैटो स्टैंडर्ड के लाखों 155एमएम गोलों की आपूर्ति के बारे में काफी सोच विचार के बाद आर्टिलरी की एक प्राइवेट बिक्री पर रज़ामंदी हो गई है.

इन हथियारों को यूक्रेन भेजने से पोलैंड और अमेरिका पर कोई रोक नहीं लगा सकता.

दक्षिण कोरिया में कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि कुछ हथियार-गोलाबारूद तो भेजने की प्रक्रिया में हैं.

ब्रसेल्स स्कूल ऑफ़ गवर्नेंस के कोरियन अध्यक्ष रैमोन पाशेको पार्दो का मानना है कि सोल को पता है कि उसके गोला बारूद को यूक्रेन भेजा जा रहा है.

वो कहते हैं, “दक्षिण कोरियाई सरकार मना नहीं कर सकती कि उसकी बिना जानकारी के उसके घातक हथियार यूक्रेन में इस्तेमाल हो रहे हैं.”

हालांकि दक्षिण कोरियाई सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए इन सौदों पर कुछ कहने से इनकार किया है. उसका कहना है कि हथियारों की आपूर्ति के मामले में उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है.

'युद्ध ख़त्म करना ज़रूरी'

लेकिन जब मई में यूक्रेन की फ़र्स्ट लेडी ओलेना ज़ेलेंस्की ने सोल की यात्रा की तो उनकी लिस्ट से घातक हथियार गायब थे. पश्चिम राजनयिकों को लगता है कि इसका मतलब है यूक्रेन को अप्रत्यक्ष आपूर्ति पर्याप्त हो रही है.

लेकिन राजदूत पोनोमारेंको सीधे और हथियार भेजे जाने की अपील कर रहे हैं, “दक्षिण कोरिया हमें रक्षात्मक सैन्य हथियार भेजे, जैसे एंटी मिसाइल और एंटी ड्रोन सिस्टम.”

लेकिन कुछ लोगों को मानना है कि दक्षिण कोरिया युद्ध की बजाय युद्ध के बाद निर्माण में अधिक अहम भूमिका निभा सकता है.

कोरियन नेशनल डिफ़ेंस यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर किम यंगजुन का कहना है कि कोरिया का अनुभव और विशेषज्ञता सड़क, अस्पताल, स्कूल, टेलीकम्युनिकेशन के क्षेत्र में है.

लेकिन राजदूत पोरनोमारेंकों का कहना कि पुनर्निर्माण से पहले युद्ध ख़त्म करना ज़रूरी है. और इसके लिए हमें अत्याधुनिक हथियार चाहिए.

घरेलू राजनीति

2021 तक यूक्रेन में दक्षिण कोरिया के राजदूत रहे क्वोन की-चांग का मानना है कि दक्षिण कोरिया को कीएव की अपील को मानना चाहिए.

वो कहते हैं, “हमें छोटे देश होने की मानसिकता से बाहर आना चाहिए और लोकतंत्र और आज़ादी की रक्षा के लिए रूस के ख़िलाफ़ खड़े होने से डरना नहीं चाहिए. हमें थोड़े समय के लिए आर्थिक नुकसान होगा, लेकिन हम उबर जाएंगे.”

लेकिन यूक्रेन को दक्षिण कोरिया के हथियार आपूर्ति से जितनी चिंता रूस को है, शायद उतनी ही चिंता दक्षिण कोरिया को भी है.

हाल ही में कराए गए एक पोल्स में 56% दक्षिण कोरियाई लोगों ने यूक्रेन की मदद का विरोध किया जबकि 42% ने समर्थन किया.

देश में अगले साल चुनाव होने वाले हैं और सरकार नहीं चाहती कि विपक्ष के हाथ में एक और मुद्दा दे दिया जाए.

हालांकि यूक्रेन के हालात उस तरफ जाने को मजबूर कर सकते हैं.

बीते अप्रैल में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ने कहा था कि अगर यूक्रेन की व्यापक नागरिक आबादी पर हमला होता है तो वो हथियार भेजने पर विचार कर सकते हैं.

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