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'हम जाएं तो कहां जाएं?' तेज़ होते इसराइली हमलों के बीच ग़ज़ा में कोई जगह सुरक्षित नहीं
- Author, रुश्दी अबु अलूफ़
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, ग़ज़ा से
‘हम कहाँ जाएं? क्या ग़ज़ा में कोई सुरक्षित जगह है? हमारा मोहल्ला शांत और ख़ूबसूरत था पर अब यहां छिपने की जगह नहीं है.’
ये शब्द हैं ग़ज़ा के रिमाल मोहल्ले के लोगों के.
मैंने अपने जीवन के सात सबसे मुश्किल घंटे रिमाल में बिताए हैं. आसमान से इसराइली फ़ाइटर जेट बम गिरा रहे थे. हमास के हमले का बदला लिया जा रहा था.
शनिवार को फ़लस्तीनी हिमायती चरमपंथी संगठन हमास ने इसराइल पर ज़बरदस्त हमला किया था. हमास के आतंकवादी हमले में अब तक 1200 लोगों की जान जाने की ख़बर है.
अब इसराइल ग़ज़ा पट्टी में हमास के ठिकानों को निशाना बना रहा है और इसकी ज़द में आम लोग भी आ रहे हैं. इसराइली हमले में दर्जनों रिहाइशी इमारतों को नुकसान पहुँचा है.
इसके अलावा ग़ज़ा की दूर-संचार कंपनियों के दफ़्तर, फ़ैक्टरियां और इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ़ ग़ज़ा को भी भारी नुकसान हुआ है.
सोमवार रात भर ग़ज़ा में ज़बरदस्त धमाकों की आवाज़ें सुनाई देती रहीं. बच्चे लगातार चीख-पुकार मचा रहे थे और कोई भी पल भर की नींद नहीं ले पाया.
रिमाल ग़ज़ा का सबसे अमीर इलाक़ा है और यहाँ अक्सर शांति रहती है. लेकिन अब ये भी इसराइली हमलों का निशाना है.
सबसे ख़ौफ़नाक रात और तबाही का मंजर
मंगलवार सुबह हुई तो आसमान से गिर रहे बमों से थोड़ी राहत मिलने लगी. लोग बाहर निकले और तबाही पर नज़र दौड़ाई.
ग़ज़ा के दक्षिण-पश्चिमी इस इलाके में बुनियादी ढांचा तबाह हो चुका और सड़कें पूरी तरह से बर्बाद हैं.
इलाक़े को बाक़ी ग़ज़ा से जोड़ने वाली सड़कें, गाड़ी चलाने लायक़ नहीं बची हैं.
मैंने गाड़ी से इलाक़े का चक्कर लगाया. ऐसा लग रहा था कि रात को कोई भूकंप आया है. हर जगह मलबा था, टूटी कांच थी और तार बिखरे पड़े थे.
तबाही इतनी थी कि मैं इलाके की कई मशहूर इमारतों को पहचान नहीं पा रहा था.
अपनी बिटिया शाहद को उठा कर गली से निकल रहे मोहम्मद अबु अल-कास ने मुझे बताया, “मेरा सबकुछ मिट गया है. मेरा अपार्टमेंट इसी बिल्डिंग में था और मैं यहाँ अपने पाँच बच्चों के साथ रहता था. इसी बिल्डिंग के नीचे किराने की दुकान चलाता था. अब कुछ नहीं बचा है.”
"हम कहाँ जाएं? हम बेघर हो गए हैं? हमारे पास सिर ढकने के लिए जगह नहीं है और न ही कोई रोज़गार"
"क्या मेरा घर और मेरी किराने की दुकान इसराइल के लिए मिलिट्री टार्गेट थे?"
वे इसराइली सेना के उस बयान को झूठा बताते हैं जिसमें सेना ने कहा था कि वे सिविल इलाक़ों को निशाना नहीं बनाते.
फ़लस्तीन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि सिर्फ़ सोमवार रात 300 लोगों की मौत हुई है, इनमें से एक तिहाई ग़ैर-सैनिक लोग थे.
ये कई वर्षों में ग़ज़ा की सबसे ख़ौफ़नाक और जानलेवा रात थी.
ग़ज़ा शहर के जबालिया रिफ़्यूजी कैंप दोपहर के वक्त 15 लोगों की मौत हुई.
इसराइली फौज ने कहा कि उनके निशाने पर हमास का एक कमांडर था. लेकिन हमले में कैंप के साथ मौजूद मार्केट और अन्य मोहल्लों में कई लोगों की मौत हुई.
गहराता मानवीय संकट
शनिवार के बाद से अब तक ग़ज़ा में करीब 1055 लोगों की मौत हुई है. ग़ज़ा के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इनमें 260 बच्चे भी शामिल हैं. इसके अलावा 4500 लोग घायल हैं.
ग़ज़ा भूमध्य सागर के तट पर स्थित 41 किलोमीटर लंबी और 10 किलोमीटर चौड़ी पट्टी है. इस छोटे से इलाके में करीब 22 लाख लोग रहते हैं.
इन लोगों के पास खाना, ईंधन, बिजली और पानी नहीं पहुँच रहा है क्योंकि इसराइल ने सारी आपूर्ति बंद कर दी है.
हमास के शनिवार को इसराइल पर हमले के बाद से ही रक्षा मंत्री ने कह दिया था कि अब ग़ज़ा में सारी सप्लाई बंद कर दी गई है.
हमास के मिलिटेंट इसराइल से अपने साथ 100 से 150 के करीब लोगों को अपहरण करके भी ले आए हैं.
शनिवार को हमास के अप्रत्याशित हमले में अब तक इसराइल में 1200 लोगों की मरने की पुष्टि हो चुकी है.
वाद अल-मुग़राबी रिमाल में अपने घर के पास तबाह हुई इमारतों को देखकर बोलती हैं, "क्या आप इस बात की कल्पना कर सकते हैं कि हम सब यहां 21वीं सदी में बिना बिजली और पानी के जी रहे हैं. मेरे बच्चे के पास नैपी नहीं है और दूध की आधी बोतल ही बची है. क्या मेरे बच्चे ने इसराइल पर हमला किया था?”
ग़ज़ा छोड़ कर जाने के रास्ते बंद
शनिवार को हमले के बाद ग़ज़ा की सबसे बड़ी सुपरमार्केट मंगलवार को खुली. दरअसल मार्केट की पिछली तरफ मौजूद एक छोटे से दरवाज़े को खोला गया. वहां दर्जनों लोग लाइन में लगे हैं.
ये लोग चाहते हैं कि अंदर जो भी मिले उसे ख़रीद लें क्योंकि ये संघर्ष कब तक चलने वाला है इसका किसी को अंदाज़ा नहीं है.
ग़ज़ा के बाज़ारों में आने वाली सब्ज़ी शहर के दक्षिणी हिस्से में उगाई जाती है. ईंधन की कमी के कारण वहां से सब्ज़ी का शहर के भीतर आना लगातार मुश्किल होता जा रहा है.
अब तक मिस्र से खाने और अन्य ज़रूरी सामान की कोई सप्लाई नहीं हुई है. मिस्र ने अपनी सीमा पर स्थित बॉर्डर पोस्ट को बंद कर दिया है. वैसे तो 2007 में ग़ज़ा पर हमास के कब्जे के बाद से ही मिस्र ने अपनी सीमाएं बंद सी कर दी थीं.
मिस्र और ग़ज़ा की सीमा पर रफ़ाह क्रॉसिंग है. इस क्रॉसिंग से अब किसी को भी ग़ज़ा छोड़ कर नहीं जाने दिया जा रहा है.
ग़ज़ा के गृह मंत्रालय ने कहा कि आमतौर पर हर दिन 400 लोग सीमा के आर-पार आते जाते हैं लेकिन सोमवार और मंगलवार को इसराइली हवाई हमले में फ़लस्तीन की ओर का एंट्री गेट ध्वस्त हो गया.
क़रीब 2 लाख लोग लोग अपने घरों को छोड़ चुके हैं और उनमें से अधिकांश लोग संयुक्त राष्ट्र द्वारा संचालित स्कूलों में शरण लेने पर मज़बूर हैं.
कुछ लोग अपने घरों को डर के मारे छोड़ दिया तो अधिकांश लोगों ने हवाई हमले में अपने घर के नष्ट होने के बाद बेघर हुए.
ग़ज़ा में बहुत सारे लोग अपने घर के बेसमेंट में शरण लिए हुए हैं लेकिन इमारत के ध्वस्त होने के बाद उसमें फंस जाने का ख़तरा बढ़ गया है.
सोमवार की रात एक इमारत के बेसमेंट में 30 परिवार फंस गए थे.
रिमल के निवासी मोहम्मद अल मुघराबी ने कहा, "पहले की लड़ाइयों में, शहर का ये हिस्सा, सीमा के निवासियों के लिए सुक्षित होता था."
सोमवार को इसराइली हमले के बाद अब ये साफ़ है कि कोई भी जगह सुरक्षित नहीं है.
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