40 फ़ीसदी से ज़्यादा भारतीय मूल की आबादी वाले देश की कहानी जहां पीएम मोदी गए

इमेज स्रोत, X/NARENDRA MODI
भारत से लगभग 14 हज़ार किलोमीटर दूर एक देश जिसकी क़रीब 42 फ़ीसदी आबादी भारतीय मूल की है. इसी साल यहां भारतीय मूल की महिला कमला प्रसाद बिसेसर प्रधानमंत्री बनी थीं.
इससे इतर इस देश की एक और बड़ी पहचान है- क्रिकेट. सुनील नरेन, दिनेश रामदीन और रवि रामपॉल, ये कुछ ऐसे नाम हैं जो किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. इन तीनों का संबंध कैरिबियाई देश त्रिनिदाद और टोबैगो से है और वेस्टइंडीज़ क्रिकेट टीम के लिए खेल चुके हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी पांच देशों की यात्रा पर हैं. इनमें एक देश त्रिनिदाद और टोबैगो भी है. गुरुवार देर रात पीएम मोदी त्रिनिदाद और टोबैगो की राजधानी पोर्ट ऑफ़ स्पेन पहुंचे थे और पारंपरिक भोजपुरी चौताल (लोकगीत) से उनका स्वागत किया गया.
स्वागत के बाद पीएम मोदी ने एक्स पर भोजपुरी में लिखा, "एगो अनमोल सांस्कृतिक जुड़ाव!"
इस मौक़े पर पीएम मोदी ने कहा, "प्रधानमंत्री कमला जी के पूर्वज बिहार के बक्सर में रहा करते थे. वहां लोग इन्हें बिहार की बेटी मानते हैं. जब मैं 25 साल पहले आख़िरी बार यहां आया था, तो हम सभी लारा के कवर ड्राइव और पुल शॉट की प्रशंसा करते थे. आज, सुनील नरेन और निकोलस पूरन हमारे युवाओं के दिलों में वही उत्साह जगाते हैं. तब से लेकर अब तक, हमारी दोस्ती और भी मज़बूत हुई है."
अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय समुदाय के सदस्यों से मुलाक़ात की और त्रिनिदाद और टोबैगो के विकास और प्रगति में उनके महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की.

इमेज स्रोत, Getty Images
भारतीय कैसे पहुंचे त्रिनिदाद और टोबैगो?
त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीय मूल के लोग 19वीं सदी में 'गिरमिटिया सिस्टम' के तहत पहुंचे थे.
भारतीय उपमहाद्वीप से साल 1845 से 1917 के बीच लगभग एक लाख 43 हज़ार लोग मज़दूरी के लिए त्रिनिदाद लाए गए.
इन भारतीय प्रवासियों में से अधिकांश उत्तर भारत से आए, मुख्य रूप से यूनाइटेड प्रोविन्स (वर्तमान यूपी) और बिहार के ज़िलों से. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक़, यहां भोजपुरी बोलने वाले लोगों की संख्या ज़्यादा है.
ब्रिटिश उपनिवेशों में ग़ुलामी समाप्त होने के बाद मज़दूरों की भारी कमी हो गई थी. इसके चलते अंग्रेज़ों ने भारत से मज़दूरों को 'गिरमिट' योजना के तहत भेजना शुरू किया.
गिरमिट अंग्रेज़ी शब्द 'एग्रीमेंट' से बना है. इसके तहत भारतीयों को 3–5 साल तक खेती या मज़दूरी करने का अनुबंध दिया जाता था. बाद में घर लौटने का विकल्प था, लेकिन ज़्यादातर लोग वहीं बस जाते थे. आज भी गिरमिटियों के वंशज अपने पूर्वजों के प्रदेश, ज़िला, ब्लॉक और गांव का ज़िक्र करते हैं.
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "आप, गिरमिटिया के बच्चे, अब संघर्ष से परिभाषित नहीं होते. आप अपनी सफलता, अपनी सेवा और अपने मूल्यों से परिभाषित होते हैं. सच कहूँ तो, 'डबल्स' और 'दाल पूरी' में ज़रूर कुछ जादू है- क्योंकि आपने इस महान देश की सफलता को दोगुना कर दिया है!"
भारत और त्रिनिदाद और टोबैगो के बीच संबंध सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक संबंधों की अभिव्यक्ति से काफ़ी आगे बढ़ गए हैं. यहां क़रीब 14 लाख लोगों की आबादी में लगभग 42 प्रतिशत भारतीय विरासत का हिस्सा हैं.
मज़दूरी से शुरू हुआ भारतीय मूल के लोगों का सफ़र आज बिज़नेस, राजनीति, चिकित्सा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान छोड़ रहा है. शायद कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जो भारतीय मूल के लोगों से अछूता हो.
त्रिनिदाद और टोबैगो का इतिहास
त्रिनिदाद और टोबैगो एक जुड़वां द्वीपों वाला देश है, जो वेस्टइंडीज़ के दक्षिण-पूर्व हिस्से में स्थित है. यह देश दो मुख्य द्वीपों त्रिनिदाद और टोबैगो के साथ कुछ छोटे द्वीपों से मिलकर बना है. यह कैरिबियाई द्वीपों का सबसे दक्षिणी भाग है और दक्षिण अमेरिका के उत्तरी तट के पास मौजूद है.
यह देश 1962 में ब्रिटिश उपनिवेशवाद से आज़ाद हुआ और उसी साल कॉमनवेल्थ और संयुक्त राष्ट्र का सदस्य भी बना. 1976 में यह एक गणराज्य बन गया. इसकी राजधानी पोर्ट ऑफ़ स्पेन, त्रिनिदाद के उत्तर-पश्चिमी तट पर स्थित है.
त्रिनिदाद और टोबैगो कैरिबियन के सबसे समृद्ध देशों में से एक है, क्योंकि यहां तेल और गैस के बड़े भंडार हैं, जिनका इस्तेमाल इसकी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है.
यह दो-द्वीपीय देश मुख्य रूप से अफ़्रीकी और भारतीय मूल के लोगों से बसा है और इसकी प्रति व्यक्ति आय लातिन अमेरिकी और कैरिबियाई देशों के औसत से कहीं ज़्यादा है.
तेल पर निर्भरता के कारण देश की अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की क़ीमतों पर निर्भर हो गई है.
1980 और 1990 के दशक की शुरुआत में जब तेल के दाम गिरे, तो देश पर भारी विदेशी कर्ज़ चढ़ गया, बेरोज़गारी बढ़ी और मज़दूरों का असंतोष फैला.
कैरिबियन क्षेत्र के अन्य देशों की तरह त्रिनिदाद और टोबैगो भी नशीली दवाओं और गैंग से जुड़ी हिंसा की समस्या से जूझ रहा है, जो इसके पर्यटन क्षेत्र के लिए ख़तरा बन गई है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
















