चिन्मय कृष्ण दास का बांग्लादेश इस्कॉन और सनातनी जागरण से क्या है रिश्ता

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, मुकीमुल एहसान और सुमेधा पाल
- पदनाम, बीबीसी बांग्ला और बीबीसी हिंदी
बांग्लादेश में राजद्रोह के आरोपों में जेल भेजे गए चिन्मय कृष्ण दास से इस्कॉन बांग्लादेश ने दूरी बना ली है.
26 नवंबर को चिन्मय कृष्ण दास को चटगांव के कोतवाली थाने में दर्ज राजद्रोह के मामले में कोर्ट में पेश किया गया था.
जेल भेजे जाने के विरोध में उनके समर्थकों और पुलिस के बीच हुई झड़प में एक वकील की मौत हो गई थी.
भारत ने चिन्मय की गिरफ़्तारी पर गहरी चिंता व्यक्त की है. वहीं बांग्लादेश में इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग हो रही है.
हालांकि, बांग्लादेश की अदालत ने ऐसी मांग वाली याचिका को ख़ारिज कर दिया है.
कुछ दिन पहले बांग्लादेश इस्कॉन ने दावा किया था कि चिन्मय कृष्ण दास को संगठन से निकाल दिया गया है. हालांकि चिन्मय अब भी श्री पुंडरीक धाम के प्रमुख बने हुए हैं. लेकिन दूसरी ओर इस्कॉन इंक ने उनकी गिरफ़्तारी की निंदा की है.

चिन्मय कृष्ण दास को लेकर क्या है विवाद?

इमेज स्रोत, KAMOL DAS
पाँच अगस्त को बांग्लादेश में शेख़ हसीना सरकार के पतन के बाद से ही आरोप लग रहे हैं कि वहाँ अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़ गए हैं.
अल्पसंख्यकों पर कथित हमले के ख़िलाफ़ चिन्मय कृष्ण दास कई विरोध-प्रदर्शन में शामिल हुए थे.
ये प्रदर्शन सम्मिलित सनातनी जागरण जोत संगठन के बैनर तले होते रहे थे और इसके प्रवक्ता चिन्मय कृष्ण दास हैं.
विवाद तब शुरू हुआ चिन्मय कृष्ण दास समेत 19 लोगों के ख़िलाफ़ चटगांव कोतवाली पुलिस स्टेशन में राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया था.
उन पर आरोप लगा कि उन्होंने 25 अक्तूबर को चटगांव के न्यू मार्केट इलाक़े में बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया था.
दास की गिरफ़्तारी के बाद उनके समर्थक सड़क पर उतर गए. राजधानी ढाका और चटगांव सहित विभिन्न शहरों में विरोध-प्रदर्शन हुए.
इसके बाद बांग्लादेश के कई संगठनों ने इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की और एक याचिका भी दायर की गई. हालांकि बांग्लादेश की एक अदालत ने प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया.
बांग्लादेश इस्कॉन की केंद्रीय कमिटी के सदस्य बिमल कुमार घोष ने बीबीसी बांग्ला को बताया, “चिन्मय कृष्ण दास को इस्कॉन से निष्कासित किया जा चुका है. सरकार के ख़िलाफ़ वह जो कुछ भी करते हैं, उसकी ज़िम्मेदारी हमारी नहीं है.”
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के सूचना सलाहकार नाहिद इस्लाम ने बीबीसी बांग्ला से कहा, “चिन्मय कृष्ण दास देश को अस्थिर करने की योजना के लिए अपने आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे थे.”
इस पूरे घटनाक्रम ने बांग्लादेश में धार्मिक और राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है और इस्कॉन को लेकर यह नया विवाद और जटिल हो गया है.
इस्कॉन से चिन्मय कृष्ण दास का रिश्ता

चिन्मय कृष्ण दास इस्कॉन चटगांव के पुंडरीक धाम के अध्यक्ष हैं. उनका असली नाम चंदन कुमार धर है और भक्त उन्हें 'चिन्मय प्रभु' कहकर संबोधित करते हैं.
अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए हाल ही में बने बांग्लादेश सम्मिलित सनातनी जागरण जोत संगठन के वह प्रवक्ता हैं.
इस्कॉन बांग्लादेश के केंद्रीय अध्यक्ष सत्य रंजन बराई ने इस्कॉन के ख़िलाफ़ काम करने को लेकर 13 जुलाई को उन्हें एक चेतावनी पत्र भेजा था. उन पर पांच आरोप लगाए गए हैं.
बाद में 9 नवंबर 2024 को इस्कॉन बांग्लादेश ने बकायदा प्रेस वार्ता आयोजित कर संगठन से उन्हें निकाले जाने की जानकारी दी थी.
इस्कॉन बांग्लादेश की केंद्रीय कमिटी के सदस्य बिमल कुमार घोष ने बीबीसी बांग्ला से बताया था, “चिन्मय कृष्ण दास को निकाल दिया गया था क्योंकि उन्होंने चेतावनियों पर ध्यान नहीं दिया. बाद में उन्होंने संगठन के अध्यक्ष और सचिव के ख़िलाफ़ मुक़दमा भी किया था.”
कमिटी ने कहा कि चिन्मय कृष्ण दास इस्कॉन की ओर से कोई भी सार्वजनिक बयानबाज़ी नहीं करेंगे और ना ही कोई धार्मिक गतिविधि करेंगे.
हालांकि जब पूछा गया कि वो पुंडरीक धाम के अब भी अध्यक्ष हैं तो कमिटी ने कहा, “हमने उन्हें पद से निष्कासित कर दिया है लेकिन उन्हें धार्मिक शिक्षा देने से रोकने का अधिकार नहीं है.”
हालांकि कमिटी ने कहा कि नई परिस्थिति में इस्कॉन की ओर से उनके ख़िलाफ़ नया फ़ैसला आ सकता है.
गुरुवार को इस्कॉन बांग्लादेश के महासचिव चारुचंद्र दास ने भी चिन्मय और अन्य लोगों के निष्कासन की जानकारी दी.
चारुचंद्र दास ने कहा, “श्री कृष्ण मंदिर के अध्यक्ष लीलाराज गौर दास, सदस्य गौरांग दास और चटगांव के पुंडरीक धाम के अध्यक्ष चिन्मय कृष्ण दास को संगठन के अनुशासन का उल्लंघन करने पर संगठनात्मक पदों सहित सभी गतिविधियों से अलग कर दिया था. उन्होंने जो भी किया है, उसका इस्कॉन से कोई लेना-देना नहीं है."
चारुचंद्र दास ने यह भी कहा कि पिछले 13 अक्तूबर को ही एक आधिकारिक बयान में यह कहा गया था कि चिन्मय कृष्ण दास अब इस्कॉन बांग्लादेश के प्रवक्ता नहीं हैं. इसीलिए उनका बयान पूरी तरह से निजी है.
लेकिन चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ़्तारी को लेकर ग्लोबल इस्कॉन ने एक बयान जारी किया और भारत से हस्तक्षेप की मांग की.
इस्कॉन इंक ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स के अपने हैंडल से बयान जारी करके कहा है कि वह इस्कॉन बांग्लादेश के प्रमुख चेहरा रहे चिन्मय कृष्ण दास के साथ खड़ा है.
बयान के अनुसार, “यह बेबुनियाद आरोप लगाना अपमानजनक है कि इस्कॉन का दुनिया में कहीं भी आतंकवाद से कोई लेना-देना है. इस्कॉन इंक भारत सरकार से तत्काल क़दम उठाने की मांग करता है कि वह बांग्लादेश सरकार से बात करे और बताए कि हम एक शांतिप्रिय भक्ति आंदोलन हैं. हम चाहते हैं कि बांग्लादेश सरकार चिन्मय कृष्ण दास को तुरंत रिहा करे.”
सम्मिलित सनातनी जागरण जोत से रिश्ता

इमेज स्रोत, KAMOL DAS
17 करोड़ की आबादी वाले मुस्लिम बहुल बांग्लादेश में लंबे समय से अल्पसंख्यक हिन्दू आबादी के ख़िलाफ़ हिंसा और उत्पीड़न के आरोप लगते रहे हैं.
लेकिन शेख़ हसीना के सत्ता से बेदख़ल होने के बाद बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमले के कुछ मामले सामने आए हैं.
पाँच अगस्त को शेख़ हसीना बांग्लादेश छोड़ भारत आ गई थीं.
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक देश की कुल आबादी के आठ प्रतिशत हैं.
पिछले तीन महीने से देश में अल्पसंख्यकों पर हमलों के ख़िलाफ़ सम्मिलित सनातनी जागरण जोत के बैनर तले विरोध प्रदर्शन होते रहे थे.
इन प्रदर्शनों और रैलियों का नेतृत्व चिन्मय कृष्ण दास ने संभाला. इसी तरह का एक प्रदर्शन चटगांव के रंगपुर में आयोजित हुआ था.
इसमें निष्कासित इस्कॉन नेता चिन्मय कृष्ण दास को भाषण देते हुए देखा गया. अपने भाषणों में उन्होंने हिन्दुओं पर अत्याचार का आरोप लगाते हुए सरकार पर हमला बोला था.
इस्कॉन बांग्लादेश की केंद्रीय कमिटी के सदस्य बिमल कुमार घोष ने बीबीसी बांग्ला से कहा, “अलग-अलग जगहों पर चिन्मय जो भाषण दे रहे हैं, वो उनका निजी बयान है. इस्कॉन इसकी ज़िम्मेदारी नहीं लेता है.”
इस्कॉन से निकाले जाने को लेकर सम्मिलित सनातनी जागरण जोत संगठन की ओर से कहा गया कि “अंदरूनी राजनीति के कारण उन्हें ग़लत आरोप लगाकर निकाला गया था.”
जब ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस की जासूसी शाखा ने 25 नवंबर को चिन्मय कृष्ण दास को गिरफ़्तार किया और दूसरे दिन चटगांव कोर्ट में पेश किया तो उनकी रिहाई की मांग करते हुए इस्कॉन से जुड़े सदस्यों ने कोर्ट परिसर में प्रदर्शन किया था.
इस प्रदर्शन में शामिल हुए इस्कॉन से जुड़े एक व्यक्ति ने नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर बीबीसी बांग्ला को बताया, “इसकी ज़िम्मेदारी हमारे ऊपर डालना राजनीति से प्रेरित है जबकि इस्कॉन के लोग अहिंसक प्रदर्शन कर रहे थे.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.



















