हिमाचल में भारी बारिश से तबाही: 20 से ज़्यादा की मौत, कई मलबे में दबे

    • Author, आदर्श राठौर
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

हिमाचल प्रदेश भारी बारिश से हो रही तबाही के दूसरे और सबसे भीषण दौर से जूझ रहा है. पिछले 48 घंटों में प्रदेश के विभिन्न इलाक़ों में भारी बारिश के कारण जान-माल का भारी नुक़सान हुआ है.

ख़बर लिखे जाने तक 20 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और विभिन्न स्थानों पर भूस्खलन या मकान ढहने से क़रीब इतने ही लोग मलबे में दबे हुए हैं.

शिमला के समरहिल में हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के पास भूस्खलन हुआ जो देवदार के विशाल पेड़ों समेत नीचे शिव मंदिर पर जा गिरा.

सावन का सोमवार होने के कारण यहां काफ़ी श्रद्धालु आए थे जो मलबे की चपेट में आ गए. अब तक यहां से नौ शव बरामद किए जा चुके हैं. आशंका है कि यहां और भी लोग दबे हो सकते हैं.

यहां से कुछ किलोमीटर दूर फागली में मकान ढह गया जहां से पांच शव निकाले जा चुके हैं. यहां भी अभी कुछ और लोगों के दबे होने की आशंका है.

मंडी ज़िले में भी बादल फटने के कारण दो अलग-अलग घटनाओं में मलबे के नीचे दबने से दो लोगों की मौत हो गई. इनमें से एक जगह 12 से 15 लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है.

इससे पहले, बीती रात सोलन में बादल फटने से दो मकान मलबे की चपेट में आ गए. घटना में सात लोगों की मौत हो गई.

इससे पहले पिछले सप्ताह सिरमौर में एक मकान भूस्खलन की चपेट में आ गया था जिससे एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई थी.

आफ़त की बरसात

पहाड़ी इलाक़ों में भारी बारिश होना कोई असामान्य बात नहीं है. मगर हिमाचल प्रदेश में एक वाक्य जो आजकल सबसे ज़्यादा बोला जा रहा है, वह है, “ऐसी बारिश पहले कभी नहीं देखी.”

बड़े-बुज़ुर्ग कह रहे हैं कि ऐसी बारिश उनके बचपन में हुआ करती थी मगर तब भी जान-माल का ऐसा नुक़सान नहीं होता था.

इस मॉनसून सीज़न में, 24 जून से लेकर अब तक, 270 से अधिक लोग भारी बारिश के कारण जान गंवा चुके हैं.

कुछ की जान अचानक आई बाढ़ में बहने से हुई, कुछ भूस्खलन की चपेट में आए, कुछ के मकान ढह गए तो कुछ सड़क हादसों की चपेट में आ गए. प्रदेश भर में कई निजी और सरकारी इमारतें, सड़कें, पुल और अन्य ढांचे क्षतिग्रस्त हो गए हैं.

अमूमन पहाड़ों में बारिश की वजह से होने वाले नुक़सान के दो मुख्य कारण होते हैं- लंबे समय तक लगातार होने वाली बारिश, जिससे भूस्खलन का ख़तरा बढ़ जाता है. दूसरा कारण होता है बादल फटना.

बादल फटने का अर्थ है- अचानक एक ही स्थान पर सामान्य से बहुत अधिक वर्षा होना. इसी कारण तुरंत बाढ़ आने (फ़्लैश फ़्लड) और भूस्खलन जैसी घटनाएं होती हैं.

मौसम विभाग का अलर्ट

मौसम विभाग ने तीन दिन पहले आठ ज़िलों के लिए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया था. यह अलर्ट तब जारी किया जाता है जब भारी से भी ज़्यादा बारिश होने का अनुमान हो.

12 अगस्त को मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक सुरेंद्र पॉल ने बताया था कि अगले 24 घंटों में शिमला, सोलन, कांगड़ा, चंबा, हमीरपुर, बिलासपुर, मंडी और कुल्लू में भारी बारिश हो सकती है.

इसी आशंका को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने भी लोगों से अपील की थी कि वे घरों पर ही रहें और बहुत ज़रूरी होने पर ही बाहर निकलें.

यह चेतावनी सही साबित हुई और पिछले दो दिन से लगातार बारिश हो रही है. इस कारण भूस्खलन और फ़्लैश फ़्लड की घटनाएं तो हुई हीं, कुछ इलाक़ों में जलभराव की भी समस्या हो गई.

मंडी की बल्ह घाटी हिमाचल प्रदेश का सबसे उपजाऊ क्षेत्र माना जाता है. यहां इतनी बारिश हुई कि घाटी से पानी निकालने वाली सुकेती खड्ड उस पानी की निकासी नहीं कर पाई. नतीजा यह हुआ कि एक बड़ा इलाक़ा और वहां उगाई गई सब्ज़ियों के खेत डूब चुके हैं.

मौसम विभाग की ओर से जारी बारिश के आंकड़ों पर नज़र डालें तो पता चल जाता है कि इस तबाही का कारण क्या है.

जिन ज़िलों के लिए बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया था, वहां 14 अगस्त को सामान्य से आठ गुना ज़्यादा तक बारिश दर्ज की गई है.

सोलन में सामान्य से तीन, मंडी में पांच और शिमला में क़रीब सात गुना ज़्यादा बारिश हुई. सबसे अधिक बारिश हमीरपुर में दर्ज की गई जो सामान्य से क़रीब आठ गुना ज़्यादा थी.

समस्या यह है कि ऑरेंज अलर्ट तो सिर्फ़ दो दिनों के लिए था मगर बारिश अभी भी जारी है. इससे हालात और चिंताजनक हो गए हैं.

जिस तरह का नुक़सान पिछले 48 घंटों में हुआ है, वैसा ही एक माह पहले जुलाई के दूसरे सप्ताह में हुआ था. तब मनाली, कुल्लू और मंडी में ब्यास नदी के किनारे बसे इलाक़ों में इस तरह की तबाही हुई थी.

हज़ारों करोड़ रुपए का नुक़सान

तब नवनिर्मित फ़ोर लेन हाईवे का बड़ा हिस्सा नदी में बह गया था. बहुत से निजी और सरकारी भवन जलमग्न हो गए थे और कई पेयजल और सिंचाई परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा था.

इसके बाद हुए नुक़सान का जायज़ा लेने के लिए केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी हिमाचल आए थे, जिसके बाद केंद्र सरकार से मदद भी मिली थी.

हालांकि, प्रदेश सरकार का कहना है कि यह मदद नाकाफ़ी है क्योंकि नुक़सान बहुत ज़्यादा हुआ है.

एक सप्ताह पहले तक प्रदेश सरकार ने बारिश से हुए नुक़सान का अंदाज़ा क़रीब 4000 करोड़ रुपये लगाया था लेकिन अब नए सिरे से यह आकलन करना होगा.

नुक़सान दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है. लगातार हो रही बारिश को देखते हुए प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थानों को बंद कर दिया गया है.

लोगों से घरों में रहने की अपील

इस बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने लोगों से अपील की है कि घरों से बाहर न निकलें. उन्होंने 15 अगस्त के कार्यक्रम के लिए मंडी के लिए तय अपना दौरा भी फ़िलहाल स्थगित कर दिया है.

सीएम ने कहा, “प्रशासन मुस्तैद है और प्रदेश भर में राहत एवं बचाव अभियान चलाए जा रहे हैं. नुक़सान कितना हुआ है, इसके आकलन बाद में करेंगे. अभी हमारी प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित रखना और बंद सड़कों को बहाल करना है.”

मौसम विभाग की ओर से जारी अलर्ट 14 अगस्त तक है. अभी भी कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश हो रही है. इससे राहत एवं बचाव कार्यों में मुश्किल आ रही है. आशंका है कि बारिश ऐसे ही जारी रही तो नुक़सान और बढ़ सकता है.

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