अफग़ान टैक्सी ड्राइवर 'देसी' एयर कूलर से गर्मी को ऐसे दे रहे हैं मात

    • Author, केली एनजी
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

अफ़ग़ानिस्तान के बेहद गर्म शहर में टैक्सियों की छतों पर प्लास्टिक के डिब्बे और एग्ज़ॉस्ट पाइप नजर आते हैं.

दरअसल, ये 'देसी' एयर कूलर हैं, जो टैक्सी ड्राइवरों ने ख़ुद अपने हाथों से बना लिए हैं, ताकि किसी तरह इस झुलसाती गर्मी को मात दी जा सके.

कंधार शहर में पारा अक्सर 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है.

टैक्सी ड्राइवर बताते हैं कि कारों में लगा एयर कंडीशनर ज़्यादातर वक़्त ख़राब ही रहता है.

एक ड्राइवर अब्दुल बारी न्यूज़ एजेंसी एएफ़पी से कहते हैं, "ये (कूलर) कार के एसी से भी अच्छा काम करता है. एसी तो बस आगे बैठे लोगों को ठंडक देता है, ये कूलर पूरी टैक्सी में हवा फैला देता है."

न्यूज़ एजेंसी के एक वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे अब्दुल बारी टेप से कूलर के पाइप को टैक्सी की खिड़की पर जोड़ रहे हैं. वहीं उनके एक साथी टैक्सी की छत पर चढ़कर इस कूलर को ठीक से रख रहे हैं.

हालांकि, इस जुगाड़ की एक दिक़्क़त भी है. अब्दुल बारी कहते हैं, "दिन में दो बार इसमें पानी डालना पड़ता है."

फिर भी वो मुस्कराते हुए कहते हैं, "लेकिन मेरे लिए तो ये बढ़िया ही है."

अफ़ग़ानिस्तान के लिए बड़ी मुसीबत है जलवायु परिवर्तन

अफ़ग़ानिस्तान दुनिया के सबसे ग़रीब देशों में से एक है. इसके साथ ही ये उन मुल्कों में भी शामिल है जो जलवायु परिवर्तन के असर से सबसे ज़्यादा प्रभावित हो रहे हैं.

सरकार ने चेतावनी दी है कि आने वाले हफ़्तों में देश के ज़्यादातर हिस्सों में तापमान और तेज़ी से बढ़ेगा.

कंधार के एक और टैक्सी ड्राइवर गुल मोहम्मद बताते हैं कि कुछ साल पहले जब मौसम "बेहद गर्म" होने लगा, तो उन्होंने इस तरह के कूलर का सहारा लिया.

गुल मोहम्मद कहते हैं, "इन कारों का एसी सिस्टम चलता ही नहीं था और मरम्मत बहुत महंगी पड़ती. तो मैं एक टेक्नीशियन के पास गया और अपने लिए कस्टम कूलर बनवाया."

32 साल के गुल मोहम्मद ने इस पर करीब 3,000 अफ़ग़ानी (43 डॉलर या 32 पाउंड) ख़र्च किए.

उनके इस जुगाड़ की सवारी करने वाले मुसाफ़िर भी तारीफ़ कर रहे हैं.

19 साल के नोरुल्लाह कहते हैं, "जब कोई कूलर नहीं होता तो हालत बहुत मुश्किल हो जाती है. मैं तो अपने साथ गर्मी की दवा तक रखता हूँ." उन्होंने बताया कि हाल ही में गर्मी की वजह से उन्हें ड्रिप तक लगवानी पड़ी.

इस साल अप्रैल से जून के बीच अफ़ग़ानिस्तान में अब तक की सबसे गर्म बसंत ऋतु दर्ज की गई.

संयुक्त राष्ट्र की फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (एफ़एओ) ने पिछले हफ़्ते कहा कि देश में भीषण सूखा फैल रहा है, जिससे फ़सलें और ग्रामीणों की ज़िंदगी तबाह हो रही है.

विशेषज्ञ बार-बार चेतावनी दे चुके हैं कि जलवायु परिवर्तन का असर अफ़ग़ानिस्तान की मानवीय हालत को और गंभीर कर देगा.

तालिबान के अगस्त 2021 में सत्ता में आने के बाद, जब अमेरिका की अगुवाई वाली सेनाएं यहां से निकल गईं, तब अफ़ग़ानिस्तान संयुक्त राष्ट्र के जलवायु सम्मेलनों से भी बाहर हो गया.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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