You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
हमास ने कैसे बनाए द्वितीय विश्व युद्ध की तर्ज पर इसराइली डिफ़ेंस को भेदने वाले पैराशूट?
- Author, मोहम्मद हमदार और हनान रज़क
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़ अरबी
जब शनिवार को हमास ने इसराइल पर घातक हमला बोला तो इसके लड़ाकों ने सीमा पार करने के लिए घुसपैठ का इस्तेमाल किया.
हमास के मिलिटरी विंग “इज़्ज़ अल-दिन अल क़सम ब्रिगेड्स” म्युज़िक फ़ैस्टिवल में शिरकत करने वालों और ग़ज़ा पट्टी के चारो ओर स्थित इसराइली कस्बों पर हमला बोला. उन्होंने इस औचक हमले को “अल अक़्सा फ़्लड” नाम दिया.
इसराइली सेना के प्रवक्ता रिचर्ड हेश्ट ने इसकी पुष्टि की कि फ़लस्तीनी लड़ाकों ने "पैराशूट" से, समुद्री रास्ते और ज़मीन के रास्ते घुसपैठ की.
सोशल मीडिया पर ऐसे फ़ोटो और वीडियो साझा किए गए हैं जिनमें 'अल क़सम ब्रिगेड' के लड़ाके पैराशूट से नीचे उतरते दिख रहे हैं.
इसराइल पर हमले के लिए उन्होंने पहली बार ऐसे तरीके इस्तेमाल किए.
सीमा पर लगे फ़ेंस को पैराशूट से पार किया
फ़लस्तीनी चरमपंथियों ने ग़ज़ा और इसराइल को बांटने वाली चारदीवारी और कंटीली बाड़ को हवाई रास्ते से पार किया.
उन्होंने ऐसे पैराशूट का इस्तेमाल किया जिसमें एक या दो लोगों को ले जाने की क्षमता थी.
जेनरेटर और ब्लेड से संचालित इन पैराशूट या ग्लाइडर के माध्यम से उन्होंने ग़ज़ा पट्टी के बाहरी इसराइली इलाकों में प्रवेश किया.
द्वितीय विश्वयुद्ध के तरीक़े आजमाए
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान मोर्चे के बहुत पीछे दुश्मन इलाकों में अपने सैनिकों को उतारने के लिए मिलीटरी पैराशूट का इस्तेमाल किया जाना एक आम बात थी.
पहली बार द्वितीय विश्वयुद्ध में पैराशूट टीमों की तैनाती जर्मनी और गठबंधन देशों के द्वारा एक दूसरे के ख़िलाफ़ की गई थी.
1987 ग्लाइडर हमला
शनिवार का हमास का हमला, 1987 में पॉपुलर फ़्रंट फ़ॉर द लिबरेशन ऑफ़ फ़लस्तीनी के जनरल कमांड से जुड़े दो फ़लस्तीनियों, एक सीरियाई और एक ट्यूनीशियाई लड़ाकों द्वारा किए गए ग्लाइडर ऑपरेशन की याद दिलाता है.
नवंबर 1987 में उन्होंने इसराइली सैन्य ठिकाने पर हमला करने के लिए लेबनान से उड़ान भरी थी.
ज़मीनी हमला
एक मोटर से लैस पैराशूट के इस्तेमाल के साथ ही हमास के लड़ाके ज़मीन से हमला शुरू करने में कामयाब हो गए थे.
इसका ये मतलब ये हुआ कि वे बिना पहाड़ चढ़े या किसी विमान का सहारा लिए वो सीमा पार कर सकते थे.
इंजन, पैराशूट को 56 किलोमीटर प्रतिघंटे तक की रफ़्तार देता है.
पैराग्लाइडर तीन घंटे तक ज़मीन से औसतन 5,000 मीटर की ऊंचाई पर उड़ सकते हैं.
पैराग्लाइडिंग वेबसाइटों के अनुसार, वे चार लोगों को या 230 किलोग्राम भार ले जा सकते हैं.
छातानुमान पैराशूट में तीन पहियों वाला एक ढांचा भी होता है जो एक या दो लोगों को ले जाने में सक्षम होता है.
'इज़्ज़ अल-क़सम ब्रिगेड्स' के मिलीटरी मीडिया ने कुछ वीडियो क्लिप पोस्ट किए हैं जिनमें दिखता है कि ज़मीन से पैराग्लाइडर उड़ान भरते हैं और हरेक में एक या दो लड़ाके मौजूद हैं.
अन्य फ़ुटेज में दिखता है कि लड़ाके हवा में ऊपर से गोलियां चला रहे हैं और इसराइली ठिकानों पर हमला बोल रहे हैं.
बाड़बंदी को पार कर इसराइल में घुसने वाले पैराट्रूपर्स को हमास ने "सक्र स्क्वाड्रन" का नाम दिया है.
इसराइली सेना को ये पैराशूट क्यों नहीं दिखे?
हमास मीडिया की ओर जारी किए गए वीडियो क्लिप में दिख रहा है कि रॉकेटों की भारी बमबारी के कवर के बीच पैराग्लाइडरों से हथियारबंद लड़ॉके ग़ज़ा से उड़ान भर रहे हैं.
इनमें कुछ बहुत कम ऊंचाई पर उड़ते दिख रहे हैं, जबकि कुछ आसमान में बहुत ऊंचे उड़ रहे हैं.
इन्हें ग़ज़ा के चारों ओर आसमान में साफ साफ देखा जा सकता था.
इसराइली मीडिया ने सेना से सवाल किया है कि 'वो कैसे इन्हें देखने में असफल रही.'
इसराइली सेना ने अभी तक वो कारण नहीं बताया है जिसकी वजह से लड़ाकों के सीमा पार करने के बावजूद उनका एयर डिफ़ेंस सतर्क नहीं हुआ, ख़ासकर ऐसी स्थिति में जबकि पैराशूट इतने साफ़ दिख रहे थे कि लोगों ने अपने मोबाइल फ़ोन से उनके वीडियो बनाए.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)