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अरविंद केजरीवाल क्या बीजेपी विरोधी खेमे में शामिल नहीं होंगे?- प्रेस रिव्यू
23 जून को बिहार के पटना में जब विपक्षी नेताओं का जुटान हुआ, तब बीजेपी के ज़्यादातर विरोधी दल एकजुट हुए थे.
इस बैठक के बाद जब विपक्षी दलों के नेताओं साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की, तब आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल मौजूद नहीं थे.
केजरीवाल की इस ग़ैर-मौजूदगी ने आम आदमी पार्टी की हिचक पर कई सवाल उठाए.
अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदू' ने इसी पर आज न्यूज़ विश्लेषण किया है. आज की प्रेस रिव्यू में यह न्यूज़ विश्लेषण पढ़िए.
बीते कुछ महीनों में भले ही अरविंद केजरीवाल ने विपक्षी दलों के नेताओं से मुलाक़ात की हो मगर ये पहली बार था, जब विपक्षी दलों के बड़े जुटान में केजरीवाल को बुलाया गया था.
पहले कहा ये भी जाता था कि कांग्रेस जानबूझकर आम आदमी पार्टी को दूर रख रही है. पर तब से कांग्रेस ने अपने स्टैंड को कुछ बदला है और कुछ नरम भी हुई है.
इसी की नतीजा है कि शायद आम आदमी पार्टी विपक्षी दलों की बैठकों में शामिल हो रही है.
हालांकि केजरीवाल के मामले में ये पहली बार था, जब वो उन लोगों के साथ मंच साझा कर रहे थे, जिनको वो कभी कोसते थे और भ्रष्ट बताते थे.
पटना की बैठक में मौजूद एक शख़्स ने बताया- राहुल गांधी ने बैठक में कहा कि वो सब भुलाकर आए हैं और अतीत में जिसने जो भी कहा, वो पीछे छोड़ आए हैं.
हालांकि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केजरीवाल का वो बयान याद दिलाया, जिसमें 2016 में केजरीवाल ने शरद पवार को सबसे भ्रष्ट नेता बताया था.
केजरीवाल बैठक में कैसे दिखे थे?
पटना में चली चार घंटे लंबी बैठक में केजरीवाल स्थिर नहीं दिख रहे थे.
केजरीवाल ने बैठक में कहा, ''अब विपक्षी दलों को अपने हित किनारे रखकर दूसरे की जीत में अपनी जीत देखनी चाहिए.''
केजरीवाल इसी बैठक में दूसरे दलों से आम आदमी पार्टी के उस अभियान को समर्थन देने की बात करते हैं, जिसमें ब्यूरोक्रेसी पर दिल्ली सरकार के कंट्रोल को ख़त्म करने वाले अध्यादेश का 'आप' विरोध कर रही है.
इस अध्यादेश के कारण सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल सरकार के हक़ में जो फ़ैसला सुनाया था, उसका कोई मतलब नहीं रह गया था.
कांग्रेस के लिए ये अतीत के पन्ने फिर खोलने जैसा पल था. सक्रिय राजनीति में आने से पहले केजरीवाल तब सत्ता में बैठी कांग्रेस को लोकपाल लाने के लिए कुछ ऐसे ही अल्टीमेटम दिया करते थे.
केजरीवाल के रुख़ से विपक्षी दलों के नेताओं में गुस्सा दिखा.
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने ये तक कह दिया, ''हम इतनी दूर बस एक मुद्दे पर बात करने नहीं आए हैं.''
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी केजरीवाल से कांग्रेस के साथ अपने विवाद दिल्ली में चाय पर बैठकर सुलझाने की बात कही.
इसी बैठक में महबूबा मुफ्ती ने केजरीवाल के अगस्त 2019 के उस स्टैंड को याद दिलाया, तब कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का सभी विपक्षी दल विरोध कर रहे थे, सिवाय आम आदमी पार्टी के.
द हिंदू की रिपोर्ट में लिखा है कि बैठक के बाद केजरीवाल लंच पर तो दिखाई दिए मगर प्रेस कॉन्फ्रेंस में नज़र नहीं आए.
हालांकि आप के महासचिव संदीप पाठक ने द हिंदू को बताया था कि पार्टी सिर्फ़ अध्यादेश पर समर्थन लेने के लिए बैठक में गई थी और वो आम चुनाव अकेले लड़ने का इरादा रखती है.
आम आदमी पार्टी का ये इरादा ऐसे वक़्त में पता चल रहा है, जब 15 विपक्षी दल बीजेपी के ख़िलाफ़ 2024 का चुनाव साथ लड़ने के लिए सहमत हो गए हैं.
मणिपुर के कारण मिजोरम पर दबाव
मणिपुर में बीते दो महीने से हिंसा की घटनाएं देखने को मिल रही हैं.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के बाद भी मणिपुर के हालात बदल नहीं रहे हैं.
मगर मणिपुर की इस अस्थिरता का असर पड़ोसी राज्य मिजोरम में भी देखने को मिल रहा है.
द इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़, हिंसा के कारण मणिपुर से अब तक मिज़ोरम आने वालों की संख्या 12 हज़ार के पार कर गई है.
मिज़ोरम पर इस पलायन का भार इस कदर पड़ रहा है कि अब उसने केंद्र सरकार से फंड मांगे हैं.
मिज़ोरम के गृह आयुक्त एच लालेन्गमाविया ने कहा, ''अब तक हमें एक पैसा नहीं मिला है. अब तक हम जो मदद कर पाए हैं, वो चर्च, स्वयंसेवी संस्थाओं और लोगों के कारण कर पाए हैं. अगर केंद्र सरकार ने दखल नहीं दिया तो अगले दो हफ़्तों में हमारे पास संसाधनों की कमी हो जाएगी.''
गृह आयुक्त ने कहा, ''कई स्टूडेंट्स को स्कूल में दाखिला दिलवाया गया है और स्वास्थ्य, खाने से जुड़ी सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं. कम बजट होने के बावजूद भी हम अच्छी तरह से मदद करने की कोशिश कर रहे हैं.''
2024 चुनाव में पहले मोदी सरकार में फेरबदल
2024 में आम चुनाव होने हैं.
2024 चुनावों को देखते हुए बीजेपी केंद्र और संगठन के स्तर पर कई बदलाव कर सकती है.
दैनिक भास्कर ने इसी ख़बर को पहले पन्ने पर जगह दी है.
अखबार लिखता है कि मोदी सरकार में फेरबदल कभी भी हो सकता है. इस बारे में बुधवार को पीएम मोदी ने बैठक भी की है.
ये बैठक चार घंटे तक चली. बैठक में पीएम मोदी के अलावा अमित शाह, जेपी नड्डा, संगठन महासचिव बीएल संतोष भी मौजूद थे.
अखबार सूत्रों के हवाले से लिखता है कि कैबिनेट में फेरबदल के फौरन बाद संगठन में बदलाव होगा.
बीजेपी से जुड़े जानकारों के हवाले से अखबार लिखता है कि पीएम आवास पर संगठन के साथ इतनी लंबी बैठक सामान्य घटना नहीं है. इसका मतलब साफ है कि 2024 में संगठन और सरकार में उपयुक्त लोगों की अदला बदली की औपचारिकताओं और इसके नफ़ा नुक़सान का आकलनो हो रहा है.
सूत्र बताते हैं कि इस बारे में एलान चार जुलाई से पहले हो जाएगा.
धार्मिक फ़िल्मों के लिए दिशा-निर्देश बने- कोर्ट
फ़िल्म आदिपुरुष के ख़िलाफ़ दायर याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में बुधवार को भी सुनवाई हुई.
इस सुनवाई की ख़बर को हिंदुस्तान अख़बार ने पहले पन्ने पर जगह दी है.
अखबार लिखता है कि आदिपुरुष विवाद में दाखिल दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा, 'धार्मिक विषयों पर बनी फ़िल्मों को पास करने के लिए दिशा-निर्देश बनाने की ज़रूरत है.'
कोर्ट ने कहा, ''रामायण, कुरान या बाइबिल जैसे धार्मिक ग्रंथों पर ऐसी विवादित फ़िल्में बनाई ही क्यों जाती हैं, जिनसे लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है.''
कोर्ट ने टिप्पणी की, ''एक फ़िल्म में हमने देखा कि भगवान शिव को त्रिशूल बगल में दबाए भागते हुए दिखाया गया, अब बात बढ़ते-बढ़ते भगवान राम, देवी सीता और हनुमान को भद्दे तरीके से दिखाने पर आ गई है. किसी भी धर्म, मज़हब को ग़लत तरीके से दिखाते हुए फ़िल्म नहीं हननी चाहिए.''
ये टिप्पणियां जज राजेश सिंह चौहान और जज श्रीप्रकाश सिंह की खंडपीठ ने की है.
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