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ट्रंप और पुतिन की बातचीत पर ज़ेलेंस्की की तीखी प्रतिक्रिया, कहा बिना यूक्रेन की भागीदारी के कोई भी शांति समझौता बेकार
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ताज़ा टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने कहा, "यूक्रेन युद्ध को लेकर किसी भी समझौते को यूक्रेन तब तक नहीं स्वीकार करेगा जब तक कि उसमें ख़ुद यूक्रेन की भागीदारी ना हो"
उन्होंने कहा, "इस बात का ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये समझौता रूस और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय बातचीत बनकर ना रह जाए. हम ये हरगिज नहीं कब़ूल करेंगे कि सब कुछ पुतिन की योजना के हिसाब से हो."
उन्होंने ये भी कहा, "युद्ध को लेकर अगर समझौते की बात हो तो उसमें यूक्रेन और दूसरे यूरोपीय भागीदार भी शामिल हों, ये ज़रूरी है."
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ज़ेलेंस्की ने कहा, "मैंने राष्ट्रपति ट्रंप को बता दिया है कि यूक्रेन के लिए पहली प्राथमिकता सुरक्षा की गारंटी है और ये बिना अमेरिकी मदद के मुमकिन नहीं है."
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने भी ज़ेलेंस्की की बात दोहराते हुए कहा, "यूक्रेन को केंद्र में रखे बिना कोई भी समझौता नहीं हो सकता."
उन्होंने कहा कि युद्ध के मैदान और शांति समझौते दोनों में ही यूक्रेन की मज़बूत स्थिति के लिए वो लगातार प्रयास कर रहे हैं और यूक्रेन को ज़रूरी मदद, पैसा और सैन्य सहायता मुहैया कराने के लिए ज़ोर लगा रहे हैं.
क्या कहा था ट्रंप ने?
लेकिन ऐसा क्या हुआ कि ज़ेलेंस्की, ने इतनी तीखी प्रतिक्रिया दी.
दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ट ड्रंप ने गुरुवार को एक बार फिर रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को ख़त्म करने को लेकर प्रतिक्रिया दी है.
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया ट्रुथ अकाउंट पर एक पोस्ट में लिखा, "कल रूस और यूक्रेन के साथ शानदार बातचीत हुई. युद्ध ख़त्म होने की अच्छी संभावना है."
लेकिन इससे पहले बुधवार को ट्रंप ने बताया था कि उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फ़ोन पर बात की है और वह उनसे मिलने वाले हैं.
इससे इन अटकलों को बल मिलने लगा था कि पुतिन के साथ ट्रंप कोई निर्णायक बातचीत करने वाले हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनकी और पुतिन के बीच की यह बातचीत 'बहुत लंबी और बहुत सकारात्मक' रही.
उन्होंने कहा कि दोनों के बीच यूक्रेन युद्ध को 'तुरंत' समाप्त करने के लिए वार्ताएं शुरू करने पर सहमति बन गई है.
ट्रंप ने कहा कि वो यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की को इस बारे में जानकारी देकर शुरुआत करना चाहेंगे.
ट्रंप और क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि दोनों राष्ट्रपति कॉल के दौरान एक-दूसरे के देशों का दौरा करने पर भी सहमत हो गए हैं.
हालांकि बुधवार शाम को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, "हम सऊदी अरब में मिलेंगे."
रूस-यूक्रेन युद्ध
रूस और यूक्रेन के बीच फ़रवरी 2022 में युद्ध की शुरुआत हुई थी. तब से ही अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ रूस का तनाव बढ़ गया था.
यूक्रेन में बड़े पैमाने पर हमला शुरू करने के पुतिन के फ़ैसले ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय जगत में अलग-थलग कर दिया था.
संयुक्त राष्ट्र आम सभा ने बहुमत से एक प्रस्ताव को स्वीकार किया था जिसमें यूक्रेन के ख़िलाफ़ 'ग़ैरक़ानूनी रूप से बल का इस्तेमाल' करने के लिए रूस की निंदा की गई थी.
रूस को कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा. इसके बाद के साल में अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत ने पुतिन के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट तक जारी कर दिया.
जहां तक उस दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन की बात है, पुतिन के बारे में उन्होंने कुछ कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया.
उन्होंने पुतिन को 'क़ातिल तानाशाह' और एक 'विशुद्ध ठग' कह कर उनकी निंदा की.
जब फ़रवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन पर चौतरफ़ा हमला बोला, उसके बाद पुतिन और बाइडन के बीच टेलीफ़ोन पर कोई बात नहीं हुई.
और अब 2025 का समय है.
रूस अमेरिकी संबंधों में बड़ा बदलाव
अमेरिका में राष्ट्रपति के बदलाव ने तरीक़े, भाषा और रूस के प्रति अमेरिका के नज़रिए को पूरी तरह बदल दिया है.
ट्रंप कहते हैं कि यूक्रेन में युद्ध ख़त्म करने के लिए वह पुतिन के साथ "मिलजुल कर, बहुत क़रीबी" के साथ काम करना चाहते हैं.
वह उम्मीद करते हैं कि "दोनों नेता एक दूसरे देश का दौरा करेंगे. "
स्पष्ट है कि व्लादिमीर पुतिन भी ऐसा ही चाहते हैं और उन्होंने ट्रंप को मॉस्को आने का न्योता दिया है.
अगर यह दौरा होता है तो यह अमेरिका-रूस के संबंधों में एक बड़ा बदलाव होगा. किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पिछले एक दशक से रूस का दौरा नहीं किया है.
कई मायनों में पुतिन को इस फ़ोन कॉल के बाद वो सब मिल गया है, जो वह चाहते हैं. यानी बिना यूक्रेन और यूरोप के शीर्ष नेतृत्व से बात किए, अमेरिका से सीधी बातचीत. साथ ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति के मंच पर खुद को आगे रखने का मौका भी.
हालांकि यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि पुतिन किस तरह समझौता करना चाहेंगे.
रूसी अधिकारियों का दावा है कि मॉस्को बातचीत के लिए तैयार है लेकिन वे हमेशा 2024 में दिए गए पुतिन के तथाकथित शांति प्रस्ताव का हवाला देते हैं, जोकि समझौते से अधिक धमकी लगता है.
इस योजना के तहत रूस यूक्रेन के उन इलाक़ों को अपने पास रखेगा जिन पर उसने कब्ज़ा किया है, इसके अलावा अब भी यूक्रेन के नियंत्रण वाले कुछ इलाक़े पर भी उसका दावा है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित