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ट्रंप का पुतिन से फ़ोन पर बात करने का दांव, क्या अब थमेगी यूक्रेन की जंग?
- Author, स्टीव रोज़नबर्ग
- पदनाम, रशिया एडिटर, मॉस्को
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने बुधवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फ़ोन पर बात की है. उन्होंने कहा कि यह बातचीत 'बहुत लंबी और बहुत सकारात्मक' रही.
उन्होंने कहा कि दोनों के बीच यूक्रेन युद्ध को 'तुरंत' समाप्त करने के लिए वार्ताएं शुरू करने पर सहमति बन गई है.
ट्रंप ने कहा कि वो यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की को इस बारे में जानकारी देकर शुरुआत करना चाहेंगे.
ट्रंप और क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव, दोनों ने कहा कि दोनों राष्ट्रपति कॉल के दौरान एक-दूसरे के देशों का दौरा करने पर भी सहमत हो गए हैं.
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हालांकि एक फ़ोन कॉल से यूक्रेन में युद्ध जादुई तरीक़े से समाप्त नहीं हो जाएगा.
लेकिन इससे बातचीत शुरू हो सकती है. बातचीत कब और कैसे होगी, ये अभी साफ़ नहीं है.
हालांकि बुधवार शाम को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, "हम सऊदी अरब में मिलेंगे."
जो भी हो राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने टेलीफ़ोन पर हुई इस बातचीत से ही एक कूटनीतिक जीत हासिल कर ली है.
दिलचस्प है कि तीन साल पहले पुतिन एक तरह से सियासी बियाबान में चले गए थे.
यूक्रेन में बड़े पैमाने पर हमला शुरू करने के पुतिन के फ़ैसले ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय जगत में अलग-थलग कर दिया था.
संयुक्त राष्ट्र आम सभा ने बहुमत से एक प्रस्ताव को स्वीकार किया था जिसमें यूक्रेन के ख़िलाफ़ 'ग़ैरक़ानूनी रूप से बल का इस्तेमाल' करने के लिए रूस की निंदा की गई थी.
रूस को हज़ारों अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा. इसके बाद के साल में अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत ने क्रेमलिन नेता के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट तक जारी कर दिया.
जहां तक उस दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन की बात है, रूसी समकक्ष के बारे में उन्होंने कुछ कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया.
उन्होंने पुतिन को 'क़ातिल तानाशाह' और एक 'विशुद्ध ठग' कह कर उनकी निंदा की.
जब फ़रवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन पर चौतरफ़ा हमला बोला, उसके बाद पुतिन और बाइडन के बीच टेलीफ़ोन पर कोई बात नहीं हुई.
और अब 2025 का समय है.
रूस अमेरिकी संबंधों में बड़ा बदलाव
अमेरिका में राष्ट्रपति के बदलाव ने तरीक़े, भाषा और रूस के प्रति अमेरिका के नज़रिए में पूरी तरह बदल दिया है.
ट्रंप कहते हैं कि यूक्रेन में युद्ध ख़त्म करने के लिए वह पुतिन के साथ "मिलजुल कर, बहुत क़रीबी" के साथ काम करना चाहते हैं.
वह उम्मीद करते हैं कि "दोनों नेता एक दूसरे देश का दौरा करेंगे. "
स्पष्ट है कि व्लादिमीर पुतिन भी ऐसा ही चाहते हैं और उन्होंने ट्रंप को मॉस्को आने का न्योता दिया है.
अगर यह दौरा होता है तो यह अमेरिका-रूस के संबंधों में एक बड़ा बदलाव होगा. किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पिछले एक दशक से रूस का दौरा नहीं किया है.
कई मायनों में पुतिन को इस फ़ोन कॉल के बाद वो सब मिल गया है, जो वह चाहते हैं. यानी बिना यूक्रेन और यूरोप के शीर्ष नेतृत्व से बात किए, अमेरिका से सीधी बातचीत. साथ ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति के मंच पर खुद को आगे रखने का मौका भी.
हालांकि यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि पुतिन किस तरह समझौता करना चाहेंगे.
रूसी अधिकारियों का दावा है कि मॉस्को बातचीत के लिए तैयार है लेकिन वे हमेशा 2024 में दिए गए पुतिन के तथाकथित शांति प्रस्ताव का हवाला देते हैं, जोकि समझौते से अधिक धमकी लगता है.
इस योजना के तहत रूस यूक्रेन के उन इलाक़ों को अपने पास रखेगा जिन पर उसने कब्ज़ा किया है, इसके आलावा यूक्रेन के नियंत्रण में अभी भी रहने वाले कुछ इलाक़े पर भी दावा है.
इन सबसे ऊपर, यूक्रेन को नेटो में शामिल होने की इजाज़त नहीं दी जाएगी और रूस पर पश्चिम के प्रतिबंधों को हटाना होगा.
जैसा कि इस सप्ताह की शुरुआत में एक रूसी अख़बार ने लिखा थाः "बातचीत के लिए रूस तैयार है. लेकिन अपनी शर्तों पर. अगर आप कूटनीतिक भाषा को छोड़ दें, तो यह चेतावनी ही है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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