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हरदीप सिंह निज्जर हत्या मामले में कनाडा में गिरफ़्तार तीन भारतीय युवकों के परिवारवाले क्या कह रहे हैं?
- Author, गगनदीप सिंह जस्सोवाल और गुरप्रीत सिंह चावला
- पदनाम, बीबीसी पंजाबी
खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में कनाडा पुलिस ने शुक्रवार को तीन भारतीयों को गिरफ़्तार किया.
हरदीप सिंह निज्जर की 18 जून 2023 को एक गुरुद्वारे की पार्किंग में हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. निज्जर कनाडा के वैंकूवर स्थित गुरु नानक सिख गुरुद्वारा के अध्यक्ष भी थे.
कनाडा की इंटीग्रेटेड होमिसाइड इन्वेस्टिगेशन टीम ने तीन मई को तीन अभियुक्तों को हिरासत में लिया.
इनकी पहचान भारतीय नागरिक करण बराड़, करणप्रीत सिंह और कमलप्रीत सिंह के रूप में हुई है.
बीबीसी पंजाबी ने इन तीनों की पारिवारिक पृष्ठभूमि जानने की कोशिश की है.
पंजाब के रहने वाले हैं तीनों युवा
22 वर्षीय करण बराड़ पंंजाब के फरीदकोट के रहने वाले हैं, जबकि करणप्रीत गुरदासपुर के मूल निवासी हैं जबकि तीसरे अभियुक्त कमलप्रीत जालंधर ज़िले के रहने वाले हैं.
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने निज्जर की हत्या में 'भारत सरकार के एजेंटों के शामिल होने' के आरोप लगाए थे.
ये आरोप ट्रूडो ने सितंबर 2023 में कनाडा की संसद में लगाए थे. लेकिन भारत सरकार ने इन आरोपों को 'बेबुनियाद' बताया था.
करण स्टडी परमिट पर कनाडा गए थे. पंजाब पुलिस सूत्रों के मुताबिक, करण बराड़ फरीदकोट ज़िले के कोटकपुरा शहर के रहने वाले हैं. वे इस क्षेत्र के कोट सुखिया गांव के हैं.
पंजाब पुलिस के सूत्रों ने कहा, ''करण बराड़ ने कोटकपुरा में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की, फिर वो 2020 में स्टडी परमिट पर कनाडा गए.''
पुलिस का कहना है कि करण एक ज़मींदार परिवार से हैं. पड़ोसियों और आस-पास से मिली जानकारी के मुताबिक, करण के दादा बलबीर सिंह बराड़ स्थानीय कारोबारी हैं.
करण अपने माता-पिता के इकलौते बेटे हैं. परिचितों ने बताया कि करण बराड़ की मां रमन बराड़ काम के सिलसिले में सिंगापुर में रहती थीं. करण बराड़ के पिता मंदीप बराड़ का पिछले महीने 18 अप्रैल को निधन हो गया था, जिसके चलते करण की मां भी भारत आ गई थीं.
करण बराड़ का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है
फरीदकोट के एसपी जसमीत सिंह ने कहा कि करण बराड़ का कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है.
हालांकि, करण के पिता के ख़िलाफ़ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था. बीबीसी पंजाबी को मिली एफ़आईआर के मुताबिक़, करण के पिता मंदीप सिंह बराड़ फरीदकोट ज़िले में कथित धोखाधड़ी के आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे थे.
उनके ख़िलाफ़ कोटपुरा थाने में एक अप्रैल 2024 को भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत मामला दर्ज किया गया था.
रविंदरपाल सिंह की शिकायत पर फरीदकोट ज़िले के कोटकपुरा पुलिस स्टेशन में मंदीप सिंह के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई थी.
एफ़आईआर में रविंदरपाल सिंह ने आरोप लगाया था कि उन्होंने 2018 में कनाडा का वीज़ा पाने के लिए मंदीप सिंह को ढाई लाख रुपये दिए थे, लेकिन उन्हें न तो वीज़ा मिला और न ही पैसे वापस मिले.
गुरदासपुर के करणप्रीत के बारे में क्या जानकारी है?
गुरदासपुर से बीबीसी संवाददाता गुरप्रीत सिंह चावला के मुताबिक करणप्रीत सिंह गुरदासपुर ज़िले के सुंदल गांव के रहने वाले हैं.
करणप्रीत एक आम किसान परिवार से हैं. उनके पिता भी दुबई में ट्रक चलाते रहे हैं. गांव के सरपंच के बेटे और करणप्रीत सिंह के चाचा रणजीत सिंह राणा का कहना है कि करणप्रीत का जन्म और पालन-पोषण एक साधारण परिवार में हुआ.
उन्होंने कहा कि प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद, करणप्रीत 2016 में दुबई चले गए, जहां उन्होंने अपने पिता के साथ लगभग चार साल तक ट्रक ड्राइवर के तौर पर काम किया.
करणप्रीत के कनाडा जाने के बारे में रणजीत सिंह ने कहा कि करणप्रीत वर्क परमिट पर कनाडा गए थे. उन्होंने कहा कि करणप्रीत पिछले तीन साल से कनाडा में थे, जहां वह ट्रक चलाते थे.
उन्होंने यह भी बताया, “करणप्रीत का यहां कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि उनका स्वभाव काफी मिलनसार है. इसलिए उनकी गिरफ्तारी से ग्रामीण काफ़ी हैरान हैं.”
उन्होंने कहा, ''करणप्रीत ने अपनी स्कूली शिक्षा अपने गांव के पास के एक स्कूल से पूरी की और उन्हें पंजाब में रहते हुए उसके किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल होने के बारे में कोई जानकारी नहीं है.'
करणप्रीत के परिवार ने कहा कि उन्हें यक़ीन ही नहीं हो रहा कि उनका बेटा ऐसे अपराध में शामिल हो सकता है.
करणप्रीत की दो बहनें हैं और दोनों की शादी हो चुकी है. ग्रामीणों ने बताया कि करणप्रीत सिंह ने करीब दो दिन पहले अपने परिवार से बात की थी, जिसमें उनकी रोज़ की तरह ही बातचीत हुई थी.
परिजनों ने बताया कि परिवार वालों ने कर्ज़ लेकर करणप्रीत को कनाडा भेजने की व्यवस्था की थी.
करणप्रीत के परिवार वालों ने उनके बारे में और कोई जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया.
कमलप्रीत सिंह स्टडी वीज़ा पर गए थे कनाडा
पंजाब पुलिस की ओर से बताया गया है कि संदिग्धों में से एक कमलप्रीत सिंह जालंधर ज़िले के नकोदर सब डिविज़न के गांव चक कलां के रहने वाले हैं.
कमलप्रीत सिंह ने नकोदर के एक निजी स्कूल में पढ़ाई की. साल 2019 में उन्होंने बारहवीं की पढ़ाई पूरी की. उसके बाद वह स्टडी वीज़ा पर कनाडा चले गए.
कमलप्रीत का परिवार आर्थिक रूप से मज़बूत है क्योंकि उनके पिता सतनाम सिंह नौकरी में हैं और गांव में अच्छी ज़मीन भी है.
पंजाब पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि कमलप्रीत की बहन भी कनाडा में रहती हैं जबकि उनकी मां भी 2022 में उनसे मिलने कनाडा गई थीं.
जालंधर ग्रामीण के वरिष्ठ पुलिस कप्तान अंकुर गुप्ता ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया, "जहां तक हमने जांच की है, कमलप्रीत सिंह का जालंधर ज़िले में कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है."
कमलप्रीत के पिता सतनाम सिंह ने बीबीसी पंजाबी को बताया, "हमें अपने बेटे की गिरफ्तारी के बारे में ख़बरों से ही पता चला. यह हमारे लिए दुखद है. कमलप्रीत 2019 में स्टडी वीज़ा पर कनाडा गया था. वह पिछले दो साल से गुरदासपुर के करणप्रीत के साथ रह रहा था. हमने करण बराड़ के बारे में कभी नहीं सुना."
भारत सरकार की प्रतिक्रिया
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि भारत कनाडाई पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए तीन भारतीय नागरिकों के बारे में जानकारी साझा किए जाने का इंतज़ार करेगा.
उन्होंने कहा, “क्या वहां इन लोगों का कोई आपराधिक गिरोह सक्रिय था, हम इंतज़ार करेंगे कि कनाडा पुलिस हमें इसके बारे में बताए. ये हमारी चिंता है. हम उन्हें ये बता रहे हैं कि उन्होंने भारत से कनाडा में, विशेषकर पंजाब से संगठित अपराध की अनुमति दी है."
कनाडा में भारत के उच्चायुक्त संजय वर्मा ने कहा कि (उच्चायोग) इन तीन भारतीयों के बारे में कनाडाई अधिकारियों से नियमित जानकारी मिलने की उम्मीद है.
उन्होंने कहा, "मैं समझता हूं कि ये गिरफ्तारियां कनाडा की जांच का नतीजा हैं. यह कनाडा का आंतरिक मामला है और इसलिए हमें इस पर कोई टिप्पणी नहीं करनी है."
पंजाब के रहने वाले थे हरदीप सिंह निज्जर?
हरदीप सिंह निज्जर जालंधर के गांव भार सिंह पुरा के रहने वाले थे. भारत सरकार के अनुसार, निज्जर खालिस्तान टाइगर फोर्स के प्रमुख थे और खालिस्तान टाइगर फोर्स के सदस्यों के संचालन, नेटवर्किंग, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता देने में सक्रिय रूप से शामिल थे.
पंजाब सरकार के अनुसार, निज्जर की एक एकड़ ज़मीन राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जालंधर के पैतृक गांव भार सिंह पुरा में ज़ब्त कर ली है.
अलग खालिस्तान राष्ट्र के लिए ऑनलाइन अभियान "सिख रेफरेंडम 2020" चलाने के ख़िलाफ़ एक मामले में साल 2020 में पंजाब में निज्जर की संपत्ति कुर्क की गई थी.
एजेंसी के मुताबिक, निज्जर भारत में प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस से भी जुड़े थे. निज्जर को ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तान जनमत संग्रह के लिए मतदान के दौरान देखा गया था.
सितंबर 2023 में कनाडा के प्रधानमंत्री ट्रूडो भारत में जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने आए थे. यहां से लौटने के तुरंत बाद, उन्होंने 18 सितंबर को कनाडा की संसद में बयान दिया कि निज्जर की हत्या के पीछे "भारत सरकार की संभावित संलिप्तता के आरोपों" की जांच की जा रही है.
हालांकि, मोदी सरकार ने कनाडा और अमेरिका में गैर-क़ानूनी तरीक़ों से की जा रही हत्याओं में शामिल होने के आरोपों से इनकार किया है.
अक्टूबर 2023 में, भारत ने 40 कनाडाई राजनयिकों की राजनयिक छूट रद्द कर दी थी. इसके चलते कनाडाई दूतावास के करीब दो-तिहाई स्टाफ को भारत छोड़कर वापस जाना पड़ा.
भारत ने कहा था कि कनाडा सिख अलगाववादियों को जो छूट दे रहा है, वह भारत के लिए ही नहीं बल्कि कनाडा के लिए भी सही नहीं है.
मई 2024 के पहले हफ्ते में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने एक बार फिर निज्जर की हत्या और भारत के साथ संबंधों का ज़िक्र किया और भारत ने इस पर आपत्ति जताई.
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