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पंजाब में गुरु ग्रंथ साहिब की 'बेअदबी' का एक और मामला: फिरोज़पुर में युवक की मौत के बाद कैसे हैं हालात- ग्राउंड रिपोर्ट
- Author, गगनदीप सिंह जस्सोवाल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, फिरोज़पुर से
चार मई को फिरोज़पुर के बंडाला गांव में गुरुद्वारा बाबा बीर सिंह में कथित ईशनिंदा की घटना हुई थी.
इस घटना के बाद 19 साल के अभियुक्त बख्शीश सिंह को कथित तौर पर बुरी तरह से पीटा गया, जिससे उनकी मौत हो गई. बख्शीश सिंह बंडाला के पास एक गांव टाली गुलाम के रहने वाले थे.
सोमवार को एसपी रणधीर कुमार ने बताया कि बख्शीश सिंह की मौत के मामले में पुलिस ने जरनैल सिंह नामक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया है.
बीबीसी पंजाबी की टीम ने बख्शीश के गांव जाकर उनके परिवार वालों के बारे में पता लगाने की कोशिश की है. बंडाला और टाली गुलाम गांवों की ओर जाने वाली सड़कों की हालत बहुत ख़राब है.
लगभग 30 किमी की दूरी तय करने में लगभग डेढ़ घंटे का समय लगा, जबकि रविवार होने के चलते सड़क पर बहुत भीड़ नहीं थी. सड़कें तो खस्ताहाल हैं ही, मोबाइल नेटवर्क भी ठीक नहीं था.
हम बख्शीश सिंह के घर पहुंचे. घर में दुख का माहौल था. बख्शीश सिंह की मां बलजिंदर कौर का चेहरा उदास था.
वह और अन्य महिलाएं रविवार शाम अपने गांव टाली गुलाम में श्री गुरु ग्रंथ साहिब सम्मान कमेटी के सदस्यों के सामने अपना गुस्सा जाहिर कर रही थीं.
यह समिति गुरु ग्रंथ साहिब का सम्मान बनाए रखने को अपना मिशन मानती है.
बख्शीश के मेडिकल रिकॉर्ड
बख्शीश का घर गांव के बाहरी इलाके में स्थित है. उसके परिवार के मुताबिक, वह मानसिक रूप से बीमार था, इसी वजह से उसने 12वीं की पढ़ाई छोड़ दी थी.
बख्शीश सिंह का परिवार एक जाट सिख परिवार है. उनका घर अभी भी निर्माणाधीन है और परिवार एक कमरे में रह रहा है. उनके पिता लखविंदर सिंह एक छोटे किसान हैं.
अपने बेटे के शोक में डूबे लखविंदर सिंह ने कहा, "मेरा बेटा मानसिक रूप से विक्षिप्त था और उसने 12वीं कक्षा से पढ़ाई छोड़ दी थी. पिछले तीन साल से उसका इलाज चल रहा था. वह पहले एक बार दिल्ली गया था, फिर हम उसे वापस ले आए."
चार मई के दिन को याद करते हुए उन्होंने कहा, "मेरे बेटे ने ग़लत काम किया. किसी ने मुझे फोन पर इसके बारे में बताया. मैं गुरुद्वारे गया और वहां मौजूद लोगों को बख्शीश के मेडिकल रिकॉर्ड दिखाए और उनसे अनुरोध किया है मेरा बेटा मानसिक रूप से स्वस्थ्य नहीं है. लेकिन उन्होंने उसे छीनकर कागज़ों को फाड़ दिया."
"उन लोगों ने मेरे बेटे को मेरे सामने पीटा और तलवार से ज़ख़्मी कर दिया. उन लोगों ने मेरी जान लेने की कोशिश भी की. लेकिन मैं वहां से मोटरसाइकिल पर भाग निकला."
लखविंदर के मुताबिक़, हादसे के वक्त उनके बेटे के पास कोई फ़ोन नहीं था क्योंकि वह तीन-चार मोबाइल फ़ोन तोड़ चुका था, इसलिए अभी उसके पास कोई फ़ोन नहीं था.
लखविंदर सिंह ने इस मामले की जांच की मांग की है कि उनका बेटा गुरुद्वारे में अकेले पहुंचा था या कोई उसको ले गया था.
उन्होंने ये भी बताया कि पुलिस ने उनका बयान रिकॉर्ड किया है.
लखविंदर सिंह ने कहा, "बख्शीश ठीक से खाना तक नहीं जानता था. वह मानसिक अस्पताल में रहा था. लेकिन उसने अपना धर्म कभी नहीं बदला था."
लखविंदर सिंह की चाची गुरमीत कौर भी गुस्से से भरी हैं.
वे कहती हैं, "अगर उसने कोई अपराध किया है तो उसे पुलिस को सौंप देना चाहिए था और हमारे सभी रिश्तेदार वहां जाकर सिख पंथ से माफ़ी मांगते, लेकिन उसे मारा नहीं जाना चाहिए था. पुलिस को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए और हमें न्याय चाहिए."
पुलिस बल की मौजूदगी
बख्शीश सिंह की मां बलजिंदर कौर कहती हैं, "मेरा बेटा पिछले तीन साल से मानसिक रूप से बीमार था. उसने यहां तक कहा था कि वह जीना नहीं चाहता. मेरे पति रोते हुए घर आए और कहा कि उन लोगों बख्शीश को मार डाला. मेरे बेटे के हत्यारों को सज़ा मिलनी चाहिए."
बख्शीश सिंह के गांव टल्ली गुलाम से दो किलोमीटर दूर बंडाला गांव स्थित गुरुद्वारा बाबा बीर सिंह में गंभीर माहौल था. यहां 'संत समाज' के नेता बाबा अवतार सिंह सुर सिंह वाले, भाई अमरीक सिंह अजनाला सहित भारी पुलिस बल की मौजूदगी थी.
संत समाज के सामने बख्शीश के परिवार के कुछ सदस्य भी मौजूद थे, जिन्होंने बख्शीश की अंतिम अरदास गुरुद्वारा साहिब में करने का अनुरोध किया है.
श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार समिति ने बीबीसी को सीसीटीवी फुटेज दिखाया है, जिसमें बख्शीश सिंह सिर पर पगड़ी बांधकर गुरुद्वारे में प्रवेश करते हैं, गुरुग्रंथ साहिब तक जाते हैं और उसमें से एक पेज फाड़ कर बाहर जाते हुए दिखते हैं.
इसके बाद घटना के चश्मदीद लखबीर सिंह ने कहा, "दोपहर करीब डेढ़ बजे अभियुक्त गुरुद्वारे में दाखिल हुआ, उसके बाद गुरु ग्रंथ साहिब के पन्ने फाड़े. इसके बाद संगत ने उन्हें पकड़ा और पीटा. फिर जब पुलिस गुरुद्वारे पहुंची तो संगत ने अभियुक्त को पुलिस के हवाले कर दिया, इसके बाद अस्पताल में उनकी मौत हो गई."
लखबीर सिंह ने आगे कहा, "मैंने पुलिस में बयान दर्ज कराया और अभियुक्त के ख़िलाफ़ धारा 295-ए के तहत मामला दर्ज किया गया है. अब प्रशासन को पता लगाना चाहिए कि अभियुक्त ने किसके कहने पर ईशनिंदा की है."
उन्होंने ये भी बताया, "हमारा सवाल यही है कि इस तरह की घटना पंजाब में किसी अन्य धर्म के साथ क्यों नहीं होती है."
लखबीर सिंह कहते हैं, "श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह की ओर से अभियुक्त के परिवार के सामाजिक और धार्मिक बहिष्कार की घोषणा के बाद, अभियुक्त के परिवार के सदस्य ने माफी मांगने के लिए दो दिन का समय मांगा है."
श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार समिति के अध्यक्ष सुखजीत सिंह खोसे ने कहा, "दोनों घटनाएं वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण हैं, जिनमें गुरुग्रंथ साहिब के साथ बेअदबी और युवक की मौत शामिल है. युवक का परिवार भी सिख है. उनकी धर्म में आस्था है. उन्हें आकर एक बार फिर से माफ़ी मांगनी चाहिए."
पंजाब में ईशनिंदा की घटनाएं
पंजाब में कथित बेअदबी और फिरोज़पुर जैसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं. 2015 के बाद यह एक बड़ा राजनीतिक और धार्मिक मुद्दा बन गया है.
18 दिसंबर, 2021 - हरमंदिर साहिब में शाम को रहरास साहिब के पाठ के दौरान गुरु ग्रंथ साहिब का अपमान करने की कोशिश करने वाले एक व्यक्ति की कुछ लोगों ने पिटाई की, पुलिस ने अभियुक्त की मौत की पुष्टि की. अकाल तख्त और एसजीपीसी के जत्थेदार ने इस घटना के पीछे बड़ी साजिश और सिख समुदाय पर हमला बताया था.
19 दिसंबर, 2021 - कपूरथला के निज़ामपुर गांव में गुरुद्वारा साहिब के अंदर निशान साहिब का अपमान करने के प्रयास का आरोप एक व्यक्ति पर लगा, जिसकी पुलिस ने पुष्टि नहीं की. ग्रामीणों ने अभियुक्तों को पकड़ लिया और पुलिस के सामने ही पीट-पीटकर मार डाला.
15 अक्टूबर, 2021- सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन के समर्थन में कुछ निहंगों ने तरनतारन ज़िले के रहने वाले लखबीर सिंह नाम के शख़्स की हत्या कर दी.
13 सितंबर, 2021 - तख्त केसरगढ़ साहिब आनंदपुर साहिब में लुधियाना के रहने वाले परमजीत सिंह ने सिगरेट का धुआं उड़ाकर गुरु ग्रंथ साहिब का अपमान किया, जिसे टास्क फोर्स ने पकड़ लिया और पुलिस को सौंप दिया.
26 जुलाई, 2016- 47 वर्षीय बलविंदर कौर की दो मोटरसाइकिल सवारों ने दिनदहाड़े हत्या कर दी थी. बलविंदर कौर पर लुधियाना के घवाड़ी में गुरु ग्रंथ साहिब का अपमान करने का आरोप था.
बहबलकलां-कोटकपुरा में बरगाड़ी बेअदबी पर गोलीबारी
1 जून, 2015- कोटकपूरा के गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला से गुरु ग्रंथ साहिब की प्रति ग़ायब हो गई थी.
25 सितंबर, 2015- बरगाड़ी के गुरुद्वारा साहिब के पास पोस्टर लगाकर अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया था. पोस्टरों में चोरी के मक़सद के मामले में सिख संगठनों को खुली चुनौती दी गई.
12 अक्टूबर, 2015- फरीदकोट के बरगारी गांव में गुरु ग्रंथ साहिब के पन्नों के हिस्से मिले.
14 अक्टूबर, 2015 - गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान और आरोपियों की गिरफ़्तारी को लेकर सिख संगठनों ने कोटकपूरा में विरोध प्रदर्शन किया. इस बीच पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लोगों पर लाठीचार्ज किया. उसी दिन बहबल कलां में सिखों और पुलिस के बीच हुई झड़प में पुलिस की गोलीबारी में दो सिख युवक कृष्ण भगवान सिंह और गुरजीत सिंह की मौत हो गई थी.
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