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इसराइल-हमास युद्ध ख़त्म होने पर ग़ज़ा का क्या होगा, इसराइली रक्षा मंत्री ने बताया
- Author, वायर डेविस, बीबीसी संवाददाता, यरुशलम से
- पदनाम, एलिस डेविस, बीबीसी संवाददाता, लंदन से
इसराइल और हमास के बीच लगभग तीन महीनों से जंग जारी है. लेकिन ये जंग ख़त्म करने के बाद ग़ज़ा का भविष्य क्या होगा?
इसराइली रक्षा मंत्री योआव गैलांट ने एक प्रस्ताव जारी कर इस बारे में जानकारी दी है.
इस प्रस्ताव में उन्होंने बताया है कि भविष्य में ग़ज़ा में किस तरह का प्रशासन होगा और उसका नियंत्रण किसके पास होगा.
उन्होंने कहा कि इस इलाक़े में फ़लस्तीनियों का शासन तो होगा लेकिन वो सीमित होगा.
उन्होंने ये भी साफ किया कि युद्ध ख़त्म होने के बाद ग़ज़ा में हमास का नियंत्रण नहीं रहेगा और इसकी सुरक्षा की पूरी ज़िम्मेदारी इसराइल ही लेगा.
जिस वक़्त योआव गैलांट ग़ज़ा के भविष्य की तस्वीर पेश कर रहे थे तो ठीक उसी वक़्त ग़ज़ा पर इसराइली सेना के हमले जारी थे.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने हमास के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से कहा है कि बीते 24 घंटों में इसराइली हमलों में ग़ज़ा में 20 फ़लस्तीनी नागरिकों की मौत हुई है.
वहीं, अमेरिकी रक्षा मंत्री एंटनी ब्लिंकन भी इसी हफ़्ते इस क्षेत्र के दौरे पर हैं. अपने दौरे में वो क़ब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में फ़लस्तीनी अधिकारियों और इसराइली नेताओं से मुलाक़ात करेंगे.
एंटनी ब्लिंकन का दौरा एक ऐसे वक़्त हो रहा है जब मंगलवार को लेबनानी शहर बेरूत के दक्षिण में हुए ड्रोन हमले में हमास की राजनीतिक शाखा के डिप्टी प्रमुख सालेह अल-अरुरी की मौत हो गई है. इसके बाद से इस क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है.
इसराइल पर अल-अरुरी की हत्या का आरोप लगाया जा रहा है. हालांकि, न तो इसराइल ने इसकी पुष्टि की है और न ही इसमें अपने शामिल होने से इनकार किया है.
ग़ज़ा के भविष्य को लेकर इसराइल की योजना
इसराइली रक्षा मंत्री के इस 'फ़ोर कॉर्नर' योजना में ग़ज़ा की सुरक्षा की पूरी ज़िम्मेदारी इसराइल के हाथों में होगी.
कई देशों की सेनाओं को मिलाकर एक बहुदेशीय फोर्स का गठन किया जाएगा जो इसराइली बमबारी से हुई व्यापक तबाही के बाद इस इलाक़े के पुनर्निमाण का काम करेगी.
ग़ज़ा के भविष्य निर्माण में इसराइल के पड़ोसी देश मिस्र की भी अहम भूमिका होगी.
हालांकि, उसकी भूमिका में क्या-क्या शामिल रहेगा इस पर अभी कुछ नहीं कहा गया है.
इसराइली रक्षा मंत्री ने योजना से जुड़े जो दस्तावेज़ पेश किए हैं उनके अनुसार इस इलाक़े के प्रशासन की ज़िम्मेदारी फ़लस्तीनी नागरिकों के हाथों में ही रहेगी.
योआव गैलांट ने कहा, "ग़ज़ा में रहने वाले नागरिक फ़लस्तीनी हैं इसलिए यहां प्रशासन देखने का काम फ़लस्तीनी लोगों के संगठन को ही दिया जाएगा. लेकिन इसमें एक शर्त ये रहेगी कि ग़ज़ा से इसराइल के ख़िलाफ़ किसी हिंसक कार्रवाई को अंजाम नहीं दिया जाएगा और यहां से उसे कोई ख़तरा भी नहीं रहेगा."
इसराइल में दिखे गहरे मतभेद
ग़ज़ा के "भविष्य की योजना" पेश किए जाने के बाद से इस मुद्दे पर इसराइल में गहरे मतभेद देखे जा रहे हैं.
इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की सरकार में शामिल कुछ धुर-दक्षिणपंथी नेताओं ने कहा है कि ग़ज़ा में रहने वाले फ़लस्तीनियों को वहां से हटाकर यहूदियों को बसाना चाहिए.
इस तरह के विवादित प्रस्तावों को क्षेत्र के दूसरे मुल्कों ने और इसराइल के ही कुछ सहयोगी मुल्कों ने "अतिवादी" और "अमल न करने लायक" बता कर खारिज कर दिया."
इसराइली कैबिनेट के दूसरे सदस्यों की ओर से दिए गए प्रस्तावों की तुलना में रक्षा मंत्री योआव गैलांट के प्रस्ताव को अधिक व्यवहारिक बताया जा रहा है.
हालांकि, ऐसी आशंका भी जताई जा रही है कि फ़लस्तीनी नेता इसे अस्वीकार कर सकते हैं.
फ़लस्तीनी नेताओं का मानना है कि युद्ध ख़त्म होने के बाद ग़ज़ा के नियंत्रण का पूरा अधिकार ग़ज़ा के लोगों को ही दिया जाना चाहिए.
बिन्यामिन नेतन्याहू ने अब तक सार्वजनिक तौर पर ये नहीं बताया है कि युद्ध ख़त्म होने के बाद ग़ज़ा में नए प्रशासन को लेकर वो क्या सोचते हैं.
हालांकि, बीते दिनों उन्होंने ये इशारा ज़रूर किया है कि ग़ज़ा में युद्ध अभी कई महीनों तक जारी रह सकता है.
उन्होंने कहा कि जब तक इसराइल हमास का पूरी तरह ख़ात्मा नहीं करता उसका उद्देश्य पूरा नहीं होगा.
अब आगे युद्ध कैसे होगा, ये भी बताया
रक्षा मंत्री ने ये भी बताया कि युद्ध के अगले चरण में इसराइली सेना किस तरह आगे बढ़ने की योजना बना रही है.
उन्होंने कहा कि उत्तरी ग़ज़ा में इसराइली सेना ज़्यादा से ज़्यादा हमले करेगी. इनका मकसद ज़मीनी हमले करके सुरंगे आदि नष्ट करना होगा. और इन हमलों में हवाई के साथ-साथ ज़मीनी हमले शामिल होंगे.
वहीं दक्षिण में इसराइली सेना हमास के नेताओं की तलाश करना जारी रखेगी और इसकी कोशिश होगी कि वो उनके कब्ज़े में मौजूद इसराइली बंधकों को छुड़ा सके.
गुरुवार को इसराइली सेना ने कहा कि उसने ग़ज़ा शहर और ख़ान युनिस समेत ग़ज़ा के उत्तर और दक्षिण में हमले किए हैं.
सेना का कहना है कि उसने "आतंकवादी ढांचों" को निशाना बना कर हमला किया और कई विद्रोहियों को मारा. सेना के मुताबिक़, ये विद्रोही सैनिकों के पास विस्फोटक डेटोनेट करने की कोशिश कर रहे थे.
सेना ने ये घोषणा भी की कि उसने फ़लस्तीनी इस्लामिक जिहाद के एक वरिष्ठ नेता ममदू लोलो को एक हवाई हमले में मार दिया है.
गज़ा में हमास के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा है कि बीते 48 घंटों में ग़ज़ा में 125 से अधिक लोगों की मौत हुई है.
वहीं, ख़ान युनिस के पश्चिम में अल-मवासी में हुए इसराइली हवाई हमलों में 14 लोगों की मौत हुई है जिनमें से 14 बच्चें हैं.
अल-मवासी नाम के इस छोटे शहर को इसराइली सेना ने विस्थापित फ़लस्तीनियों के लिए "सुरक्षित पनाहगाह" कहा था.
हमास के दावों पर इसराइली सेना ने अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
एक प्रत्यक्षदर्शी जमाल हमाद सालाह ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "हमला जिस वक़्त हुआ उस वक़्त आधी रात थी और हम लोग सो रहे थे. हमला कैम्प के टेन्टों पर हुआ. ये 4x2 के टेन्ट हैं जिनमें लोग सो रहे थे और इनमें ज़्यादातर बच्चे थे. एक शव हमले की जगह से उछलकर 40 मीटर दूर गिरा था."
फ़लस्तीनी इलाक़ों में बच्चों के लिए काम करने वाले संगठन सेव द चिल्ड्रेन के कंट्री डायरेक्टर जेसन ली कहते हैं, "ग़ज़ा में कोई भी जगह सुरक्षित नहीं बची. रिहाइशी कैम्प, स्कूल, अस्पताल और तथाकथित 'सुरक्षित ज़ोन' को कभी भी युद्ध का मैदान नहीं बनना चाहिए."
गज़ा में हमास के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक ग़ज़ा में 22,400 लोगों की मौत हो चुकी है.
ये ग़ज़ा की 23 लाख लोगों की आबादी का एक फ़ीसदी के आसपास है.
सात अक्तूबर को हमास ने गज़ा की सीमा की तरफ से इसराइल पर हमला किया था.
इस हमले में हमास के लड़ाकों ने क़रीब 1,200 इसराइलियों की हत्या कर दी थी और क़रीब 240 लोगों को अपने साथ बंधक बनाकर ले गए थे.
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