नरेंद्र मोदी के प्रति नरम रुख़ के सवाल पर क्या बोले जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह

इमेज स्रोत, BBC News India/you tube
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने ख़ुद पर केंद्र सरकार और पीएम नरेंद्र मोदी के प्रति नरम रुख़ रखने वाली बातों का जवाब दिया है.
उन्होंने कहा है कि वो केंद्र सरकार के साथ अच्छे माहौल में काम करना चाहते हैं और इसे मित्रता का नाम नहीं दिया जाना चाहिए.
बीबीसी संवाददाता स्टीफन सैकर को दिए एक विशेष इंटरव्यू में उमर अब्दुल्लाह ने जम्मू-कश्मीर के हालात और पाकिस्तान से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब भी दिए हैं.
उन्होंने कहा कि कश्मीर को लेकर जितना बुरा होना था, वह हो चुका है और अब वो उनमें से कुछ चीज़ों को वापस हासिल करने की कोशिश में लगे हैं.

बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

'चुनावी राजनीति में कुछ भी स्थाई नहीं'

इमेज स्रोत, ANI
उमर अब्दुल्लाह पांच साल पहले नज़रबंद थे और अभी वो जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के पद पर फिर से बैठे हैं. अपनी इस वापसी को वो कैसे देखते हैं?
इस सवाल पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह कई मायनों में हैरान करने वाला है.
"पांच साल पहले मैं सरकार का मेहमान था. सरकार ने जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति में जो बदलाव किया उसके बाद मुझे हिरासत में ले लिया गया था. उसके बाद पिछले साल ही मैं लोकसभा चुनावों में हार गया था. उस चुनाव में हारने के कुछ महीनों बाद यह वापसी बताती है कि राजनीति और ख़ासकर चुनावी राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं है."
उमर अब्दुल्लाह ने पिछले साल जून में कहा था कि वो जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने के लिए संघर्ष करेंगे और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की विधानसभा में प्रवेश नहीं करेंगे क्योंकि ऐसा करना उनके लिए अपमानजनक होगा.
फिर उन्होंने अपने विचार क्यों बदल लिए?
उनका कहना है, " ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि चुनाव के पहले कई अनजान लोगों ने मुझसे एक सवाल पूछा कि अगर यह विधानसभा मेरे लिए ठीक नहीं है तो इसके लिए चुनाव लड़ना या उसके लिए वोटिंग करना उनके लिए कैसे अच्छा है. मेरे पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था."
"मुझे लगता है कि बीजेपी और केंद्र सरकार ने वह कर दिया जो वो जम्मू-कश्मीर के साथ करना चाहते थे. अब हमारा काम जम्मू-कश्मीर के लिए उन चीजों को वापस हासिल करने की कोशिश करें जो हमसे छीन लिया गया है, ख़ासकर एक केंद्र शासित प्रदेश की जगह, एक राज्य के तौर पर जम्मू कश्मीर की मान्यता, वो वापस दिलाना इसमें शामिल है."
उमर अब्दुल्लाह ने कहा, "हम मानते हैं कि वो वादे और जो प्रतिबद्धता प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और सरकार के प्रतिनिधियों ने सुप्रीम कोर्ट में जताई है उसे पूरा करने की ज़रूरत है और हम इसी के लिए दबाव बना रहे हैं."

केंद्र सरकार और पीएम मोदी के प्रति नरम रुख़!

इमेज स्रोत, ANI
बीबीसी ने उनसे पूछा कि उनकी अपनी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस के ही साथी आरोप लगाते हैं कि कश्मीर मामले में आपका नज़रिया ग़लत है, आपके नरम रुख़ से कुछ हासिल नहीं होगा, आपको स्पष्ट नज़रिया अपनाना होगा और इसकी निंदा करनी होगी.
उमर अब्दुल्लाह ने इस आरोप के जवाब में कहा, "मैंने कहा था कि जिन लोगों ने कश्मीर से पूर्ण राज्य का दर्जा छीना है उनसे यह दोबारा मांगना मूर्खतापूर्ण है. हमने इस मामले में समर्पण नहीं किया है, अगर हमने ऐसा किया होता तो जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य के दर्जे को वापस करने की मांग का प्रस्ताव विधानसभा में पारित नहीं करते."
उनके पूछा गया कि हाल ही में जम्मू-कश्मीर में एक टनल के उद्घाटन के मौक़े पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की और वो आपकी तरफ देखकर मुस्कुरा रहे थे. ऐसा लगता है कि आप और पीएम मोदी दोस्त हो गए हैं?
उमर अब्दुल्लाह ने कहा. "किसी के साथ अच्छे माहौल में काम करने को ग़लत तरीके से मित्रता के तौर पर नहीं लिया जाना चाहिए. नेशनल कॉन्फ़्रेंस बीजेपी के ख़िलाफ़ रही है, हम अभी भी ख़िलाफ़ हैं और ख़िलाफ़ रहेंगे.
"मैं समझता हूं कि बीजेपी संसद के अगले सत्र में समान नागरिक संहिता, मुस्लिमों की धार्मिक संपत्ति से जुड़े वक़्फ विधेयक, वन नेशन वन इलेक्शन पर आगे बढ़ेगी. हमने इनका विरोध किया है और करते रहेंगे. हम बीजेपी का हर उस मुद्दे पर विरोध करेंगे जो हमें लगता है कि देश की धर्मनिरपेक्ष छवि के ख़िलाफ़ है."
"हमने जम्मू-कश्मीर के लोगों से कहा कि हम भारत सरकार से अच्छे रिश्ते बनाकर काम करें और अगर भारत सरकार अपने वादों को पूरा करने में नाकाम रही तो ज़ाहिर तौर पर हम इस पर फिर से विचार करेंगे.
हालांकि उमर अब्दुल्लाह ने कहा है कि पीएम मोदी के रहते उन्हें जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा वापस मिलने की कोई उम्मीद नहीं है.
उनका कहना है कि अनुच्छेद 370 और पूर्ण राज्य का दर्जा कश्मीर के लिए महत्वपूर्ण है और हम इसे नहीं छोड़ सकते. ये ऐसे मुद्दे हैं जो जम्मू कश्मीर के लोगों की रोज़ाना की ज़िंदगी को प्रभावित करते हैं, इसलिए हम इन मुद्दों को जीवित रखना चाहते हैं.
अगस्त 2019 में विशेष क़ानून बनाकर केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को ख़त्म कर दिया था जिसके बाद बड़े पैमाने पर कश्मीर में सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हुए थे. तब उमर अब्दुल्लाह समेत कश्मीर के कई बड़े नेताओं को नज़रबंद कर दिया गया था.
क्या बिना अधिकार के लोगों से वादा किया?

इमेज स्रोत, ANI
उमर अब्दुल्लाह पर से यह सवाल भी किया गया कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर की जनता से कई ऐसे वादे किए थे, जिसे पूरा करने का अधिकार उनके पास नहीं है.
उमर अब्दुल्लाह ने कहा, "मैंने लोगों से कहा था जो कुछ मैं कर सकता हूं वो करूंगा और कुछ चीज़ों के लिए जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य बनने तक इंतज़ार करना पड़ेगा."
जम्मू कश्मीर में आपके मुख्यमंत्री बनने के बाद हिंसा की घटना में बढ़ोतरी हुई.
इसके जवाब में उमर अब्दुल्लाह ने कहा, "हां ऐसी एक या दो घटनाएं हुईं. लेकिन अगर आप पिछले पांच साल पर गौर करें तो पिछला साल इस मामले में काफ़ी शांति वाला रहा है."
बीबीसी ने उनसे पूछा कि उनके पिता फारूक़ अब्दुल्लाह नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक बड़े नेता हैं वो जम्मू-कश्मीर की आवाज़ रहे हैं. उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान कश्मीर में चरमपंथी घटना का स्रोत हो सकता है, उन्होंने पाकिस्तान को यह सब बंद करने की चेतावनी भी दी है तो क्या उमर अब्दुल्लाह इससे सहमत हैं?
इस सवाल पर उनका कहना है, "मुझे लगता है कि पाकिस्तान ने यह कभी बंद नहीं किया था. जम्मू-कश्मीर में बीते एक साल में हुई घटनाओं को देखकर भारत सरकार को पाकिस्तान से बातचीत के लिए कहना बहुत कठिन है."
जम्मू-कश्मीर के आर्थिक विकास के बारे में उमर अब्दुल्लाह ने कहा है, "जम्मू कश्मीर में जिस तरह का निवेश होना चाहिए वैसा नहीं हुआ है और इस मामले में मैं भारत सरकार से सहमत हूं. हम कश्मीर के लिए नई औद्योगिक नीति, पर्यटन नीति पर काम कर रहे हैं. मैं कुछ दिनों से जम्मू-कश्मीर से दूर हूं और वहां पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए काम में लगा हूं."
"मैं उन चीजों को पूरा करने में लगा हूं जिसकी शुरुआत पिछली बार मुख्यमंत्री रहते हुए की थी. मैं हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के लिए लगा हूं. मैं समझता हूं कि जम्मू-कश्मीर में पर्याप्त बिजली के बिना बेहतर आर्थिक स्थिति हासिल नहीं की जा सकती है."

'मुसलमानों के पास संसद के अलावा क्या विकल्प है?'

इमेज स्रोत, ANI
जम्मू कश्मीर का भारत में एक ख़ास स्थान है, यह मुस्लिम बहुल इलाक़ा भी है. पिछले दस साल में बीजेपी की सरकार ने देशभर में जो कुछ भी काम किया है, जो फ़ैसले लिए हैं. एक मुस्लिम होने के नाते उमर अब्दुल्लाह ने इस पर भी अपनी राय रखी है.
उनका कहना है, "मैंने हमेशा इस मुद्दे को उठाया है कि बीजेपी यह दिखाना चाहती है कि वो मुस्लिम तुष्टिककरण नहीं करती है. वो कांग्रेस पर इसका आरोप लगाती है. लेकिन यह साबित करने के लिए कि आप मुस्लिम तुष्टिकरण नहीं करते हैं, इसके लिए मुस्लिमों को व्यवस्थित तौर पर निशाना बनाना ग़लत है."
कई मुसलमान मानते हैंं कि यूनिफॉर्म सिविल कोड उनके ख़िलाफ़ है, जबकि उमर अब्दुल्लाह इस मुद्दे पर लोगों को शांत रहने को और लोकतंत्र और संसद पर भरोसा करने के लिए कहते हैं.
उमर अब्दुल्लाह का कहना है, "जिस समुदाय की आबादी देश में केवल 15 फ़ीसदी है उसके सामने और क्या विकल्प हैं? क्या कोई मुझे कोई अन्य विकल्प बता सकता है.''
"अगर आप संसद पर भरोसा नहीं करते हैं या बीजेपी के अलावा उन दलों पर भरोसा नहीं करते हैं, जिनको मुसलमानों के वोट की ज़रूरत है, जिन्हें संसद में सीट की ज़रूरत है, अगर आप कोर्ट पर भरोसा नहीं कर सकते हैं, तो 15 फ़ीसदी आबादी के लिए क्या विकल्प बचता है."
"क्योंकि ज़ाहिर तौर पर देश के बहुसंख्यकों के ख़िलाफ़ वो हाथों में हथियार लेकर खड़े नहीं हो सकते हैं. हमारे पास जो विकल्प हैं उसपर भरोसा करने के अलावा और क्या रास्ता है."
उमर अब्दुल्लाह ने अगले दस साल के लिए कश्मीर के बारे में कहा, " मुझे लगता है कि वो जम्मू कश्मीर के लिए जितना बुरा कर सकते थे, कर दिया है. हमें इनमें से कुछ चीजों को वापस हासिल करना है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित












