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धोनी ने अचानक सीएसके की कप्तानी क्यों छोड़ी, ऋतुराज को किसने दी कप्तानी- प्रेस रिव्यू
भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रहे महेंन्द्र सिंह धोनी ने गुरुवार सवेरे अपने जाने पहचाने अंदाज़ में चेन्नई सुपरकिंग्स (सीएसके) की टीम मैनेजमैन्ट को बताया कि वो टीम की कप्तानी छोड़ रहे हैं.
इससे पहले उन्होंने टीम के अपने दूसरे साथियों और सहयोगियों के साथ नाश्ते की मेज़ पर इस पर चर्चा की थी.
अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार, धोनी ने सीएसके मैनेजमेन्ट टीम को अपने फ़ैसले के बारे में बताया और कहा कि वो ऋतुराज गायकवाड को कप्तानी सौंप देंगे, जिन्हें बीते कुछ वक़्त से इस भूमिका के लिए तैयार किया जा रहा था.
ऋतुराज के बारे में सीएसके के मुख्य कार्यकारी अधिकारी काशी विश्वनाशन कह चुके हैं कि इस भूमिका के लिए उन्हें दो साल से तैयार किया जा रहा था.
अख़बार लिखता है कि ये अचानक हुआ फ़ैसला है लेकिन साल 2022 में जब रविंद्र जाडेजा कप्तान बने थे उस वक़्त की तुलना में मौजूदा वक़्त में टीम बेहतर स्थिति में है.
उस वक़्त धोनी के फ़ैसले से सीएसके को बड़ा झटका लगा था, लेकिन इस बार कोच स्टीफ़न फ्लेमिंग का कहना है कि टीम बेहतर स्थिति में है.
फ्लेमिंग ने कहा, "बड़ी बात ये है कि कुछ साल पहले शायद हम धोनी के कप्तानी छोड़ने को लेकर पूरी तरह तैयार नहीं थे. उस वक़्त टीम की लीडरशिप हिल गई थी और कोच इस बारे में सोचने लगे थे कि उनके जाने पर क्या विकल्प होंगे. तब इसके बारे में सोचना असंभव था लेकिन फिर इसने उस वक़्त इस संभावना के बीज बो दिए थे. इसलिए हमने पूरी कोशिश की है कि हम फिर से कोई ग़लती ना करें."
अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की लिस्ट वाली इस टीम की कप्तानी ऋतुराज गायकवाड को देना टीम के सिद्धांतों के अनुरूप है. वो शांत स्वभाव के हैं और बेहद दबाव वाली स्थिति को जिस तरीके से हैंडल करते हैं, उसके लिए उनकी तारीफ़ की जाती है.
खुद धोनी ने किया तैयार
27 साल के गायकवाड 2019 में सीएसके में आए थे. उस वक़्त उनका बेस प्राइस था 20 लाख रुपये. तब से लेकर अब तक उनके ग्राफ़ में बढ़ोतरी होती रही है.
2022 में उन्हें ऑरेंज कैप मिला और वो उन चंद खिलाड़ियों में से थे, जिन्हें सीएसके ने 6 करोड़ रुपये में रोक लिया. अब वो सबसे कम दाम के कप्तान होंगे.
इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि गायकवाड को पता था कि धोनी के बाद कप्तानी उनके हाथों में होगी लेकिन उन्हें अंदाज़ा था कि अगले सीज़न से पहले ये वक़्त नहीं आएगा. लेकिन माना जाता है कि धोनी ख़ुद खिलाड़ी रहते गायकवाड को इस भूमिका के लिए तैयार करना चाहते थे.
विश्वनाथ ने अख़बार को बताया, "हेड कोच से बात करने के बाद उन्होंने हमें सवेरे अपने इस फ़ैसले के बारे में बताया. एन श्रीनिवासन ने धोनी को ज़िम्मेदारी दी थी और जो भी फ़ैसला वो लेंगे वो सीएसके के लिए सही होगा. वो बीते कुछ वक्त से गायकवाड को इसके लिए तैयार कर रहे हैं. उन्हें लगता है कि अब गायकवाड इस ज़िम्मेदारी के लिए पूरी तरह तैयार हैं."
वहीं फ्लेमिंग कहते हैं, "इसके लिए समय सही है. इस स्थिति की संभावना को देखते हुए गायकवाड और दूसरों को पहले से कप्तानी के लिए तैयार किया जा रहा था."
ईडी का कार्ति चिदम्बरम पर आरोप, वीज़ा के लिए ली घूस
पी चिदम्बरम के बेटे और कांग्रेस नेता कार्ति चिदम्बरम ने चीनी नागरिकों के वीज़ा अप्रूवल के लिए घूस ली है. ये आरोप ईडी ने लगाया है.
ईडी का कहना है कि पंजाब की एक पावर प्लांट में काम करने वाले चीनी नागरिकों के वीज़ा के अप्रूवल के लिए कार्ति चिदम्बरम ने अपने क़रीबी सहयोगी एस भास्करमन के ज़रिए 50 लाख की घूस ली थी.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक ख़बर के अनुसार, उस वक्त उनके पिता पी चिदम्बरम गृह मंत्री हुआ करते थे.
अख़बार के अनुसार ईडी ने कहा, "जांच में पता चला है कि कार्ति चिदम्बरम ने तालवंडी साबू पावर लिमिटेड में काम करने वाले चीनी नागरिकों के वीज़ा के फिर इस्तेमाल के लिए अवैध तरीके से अपने सहयोगी के ज़रिए 50 लाख रुपये की रिश्वत ली है."
"गृह मंत्रालय से वीज़ा के दोबारा इस्तेमाल की इजाज़त के लिए कंपनी के अधिकारियों ने कार्ति से संपर्क किया था." ये पावर प्लांट पंजाब के मानसा में है.
मार्च 19 को पीएमएलए कोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लिया था जिसके बाद ईडी ने इस मामले में चार्जशीट दायर की है. मनी लॉन्ड्रिंग के इस मामले में तालवंडी साबू पावर कंपनी के अलावा एडवान्स्ड स्ट्रैटेजिक कन्सल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड नाम की कार्ति की कंपनी और भास्कररमन को अभियुक्त बनाया हगया है.
चीफ़ जस्टिस ने कहा, तमिलनाडु गवर्नर ने की अवमानना
सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने गुरुवार को तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि को लेकर अहम टिप्पणी की है.
अख़बार द हिंदू में छपी एक ख़बर के अनुसार, कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि डीएमके नेता के. पोनमुडी के ख़िलाफ़ आय से अधिक संपत्ति मामले में दोषी ठहराने पर रोक लगाए जाने के बाद भी राज्यपाल राज्य मंत्रिमंडल में दोबारा शामिल करने से इनकार कर रहे हैं.
चीफ़ जस्टिस की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने कहा, "इस मामले में राज्यपाल का व्यवहार गंभीर चिंता का विषय है. हम ये बात कोर्ट में कहना नहीं चाहते. वो सुप्रीम कोर्ट की अवमानना कर रहे हैं. जब कोर्ट की दो जजों की बेंच ने पोनमुडी मामले में उन्हें दोषी क़रार देने पर रोक लगाई, राज्यपाल को हमें या नहीं बताना चाहिए कि इस आदेश से उन पर लगा दोष कम नहीं होता."
इससे पहले उच्च शिक्षा मंत्री के तौर पर पोनमुडी को शपथ दिलाने से राज्यपाल ने इनकार कर दिया था. उनका कहा था कि ये "संवैधानिक नैतिकता" के ख़िलाफ़ होगा.
उनका कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने पोनमुडी के ख़िलाफ़ दोष लगाने पर रोक लगाई है लेकिन इससे नैतिक आधार पर उन पर लगा दोष कम नहीं हो जाता.
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