सऊदी अरब के किंग सलमान बीमार, जानिए उनकी कहानी

किंग सलमान

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सऊदी अरब के किंग सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ अल सऊद की तबीयत ख़राब चल रही है.

88 साल के किंग सलमान फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे हैं.

किंग सलमान का रियाद के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है.

जैसी ही ये ख़बर आई, वैसे ही 22 मई को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किंग सलमान के स्वस्थ होने की कामना की.

पीएम मोदी ने ट्वीट किया, ''सऊदी अरब के किंग सलमान के स्वास्थ्य की रिपोर्ट्स से बहुत चिंतित हूं. मैं भारतीयों के साथ मिलकर किंग सलमान के जल्दी स्वस्थ होने की कामना करता हूं.''

इस रिपोर्ट में हम आपको किंग सलमान के बारे में बताने की कोशिश करेंगे.

कैसे सलमान बने किंग और बदलते हुए सऊदी अरब में शाही परिवार के उत्तराधिकारी मोहम्मद बिन सलमान कैसे बनाए गए.

किंग सलमान

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किंग सलमान के बारे में कुछ बातें

  • जन्म- 31 दिसंबर 1935, रियाद
  • पिता- किंग अब्दुल अज़ीज़ बिन अब्दुलरहमान अल सऊद
  • मां- हस्सा बिंत अहमद अल-सुदैरी
  • पत्नी- नाम सार्वजनिक नहीं
  • बच्चे- सुल्तान, मोहम्मद, अब्दुल अज़ीज़, फ़ैसल, ख़ालिद, तुर्की
  • धर्म- इस्लाम (वहाबी)
जॉर्ज बुश के साथ किंग सलमान

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कहानी किंग सलमान की

किंग सलमान साल 2015 में 79 साल की उम्र में सऊदी के सिंहासन पर बैठे थे. इससे पहले इस गद्दी पर सलमान के सौतेले भाई किंग अब्दुल्लाह थे.

किंग सलमान रियाद प्रांत के 48 साल तक गवर्नर रहे थे. इसके बाद वो 2011 में रक्षा मंत्री थे. एक साल बाद सलमान को क्राउन प्रिंस बना दिया गया.

नए किंग ने सत्ता संभालने के बाद निरंतरता का वादा किया, लेकिन उनके फ़ैसलों ने सऊदी अरब में दूरगामी परिवर्तन किए.

इनमें से सबसे अहम था- अपने बेटे मोहम्मद बिन सलमान को आगे बढ़ाना.

किंग सलमान ने मोहम्मद बिन सलमान को 2015 में रक्षा मंत्री बनाया. युवा प्रिंस ने सऊदी अरब में आर्थिक और सामाजिक बदलाव लाने की शुरुआत की.

लेकिन मोहम्मद बिन सलमान ने पड़ोसी देश यमन के ख़िलाफ़ युद्ध की शुरुआत भी की. इस कारण मानवीय संकट भी पैदा हुआ.

किंग अब्दुल्लाह (बाएं) के साथ सलमान (दाएं)

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बेटे को सौंपी विरासत

साल 2017 में किंग सलमान ने मोहम्मद बिन सलमान को क्राउन प्रिंस बनाने का एलान किया.

मोहम्मद बिन सलमान ने ख़ुद को ताक़तवर करते हुए अपने प्रतिद्वंद्वी राजकुमारों, अरबपति उद्योगपतियों को भ्रष्टाचार के मामले में क़ैद किया.

मोहम्मद बिन सलमान ने अपने आलोचकों, मौलानाओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को भी निशाने पर लिया.

साल 2018 में पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की जिस तरह से हत्या की गई और उसमें मोहम्मद बिन सलमान का नाम आया.

मोहम्मद बिन सलमान, मोहम्मद बिन नाएफ और किंग सलमान (बाएं से दाएं)

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राजा का बेटा राजा

किंग सलमान के पिता सऊदी अरब के संस्थापक किंग अब्दुल अज़ीज़ थे. उन्हें इब्न सऊद के नाम से भी जाना जाता है.

इब्न सऊद की पत्नी हस्सा अल-सैदुरी थीं और सलमान इन्हीं दोनों के बेटे थे.

इस दंपती के सात बेटे थे और उन्हें 'सुदैरी सात' भी कहा जाता था. शाही परिवार में ये गुट मज़बूत होता चला गया. जहाँ सिंहासन एक से दूसरे को मिलता रहा.

सलमान के सगे बड़े भाई फ़हद 1982 से 2005 तक किंग रहे थे. दो अन्य भाई सुल्तान और नईफ़ क्राउन प्रिंस थे.

सलमान सात भाइयों में सबसे छोटे थे. साल 1954 में वो तब राजनीति में घुसे, जब उन्हें रियाद का डिप्टी गवर्नर बनाने का एलान हुआ.

अगले साल सलमान का प्रमोशन हुआ और वो गवर्नर बन गए. वो पाँच साल तक उस पद पर रहे, जिसे देश का सबसे अहम पद माना जाता है.

तीन साल के अंतराल के बाद वो इस पद पर दोबारा आए. इसके बाद सलमान ने रियाद को छोटे रेगिस्तान वाली जगह से आधुनिक शहर बना दिया. ऐसा शहर जहाँ इमारतें, फ़ास्ट फूड की दुकानें और यूनिवर्सिटी थीं.

सलमान ने इस दौरान कई ख़ास हस्तियों की भी मेज़बानी की और विदेशी निवेश पाने में भी मदद की.

मोहम्मद बिन सलमान

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जब किंग सलमान ने अमेरिका को भी दी थी चेतावनी

2007 के एक लीक दस्तावेज़ से पता चला कि किंग सलमान ने तत्कालीन अमेरिकी राजदूत को चेतावनी दी थी कि समाजिक कारणों से सऊदी सरकार पर सुधारों को थोपा नहीं जा सकता.

सलमान ने कहा था कि लोकतंत्र को सऊदी अरब पर थोपा नहीं जाना चाहिए. सलमान ने इसके लिए अमेरिकी शीत युद्ध का हवाला दिया था.

एक दूसरे दस्तावेज़ के ज़रिए ये पता चला कि विशाल सऊदी परिवार में हुए कई विवादों को सुलझाने में सलमान की अहम भूमिका रही.

चूँकि शाही परिवार इतना बड़ा और जटिल रहा कि ऐसे विवादों को सुलझाया जाना भी एक अहम बात है.

सलमान ने कई तरह के कारोबारों में भी रुचि दिखाई. कुछ को पहचान भी मिली लेकिन सऊदी में उनकी भूमिका 2011 में अहम हो गई.

सुल्तान की मौत के बाद किंग अब्दुल्लाह ने सलमान को रक्षा मंत्री नियुक्त किया.

इससे सलमान के कंधों पर ये ज़िम्मेदारी आ गई कि वो अरबों रुपए की हथियारों से जुड़ी वो डील कर पाए, जिससे सऊदी और पश्चिमी देशों के बीच रिश्ते मज़बूत हुए.

मोहम्मद बिन सलमान, मोहम्मद बिन नाएफ और किंग सलमान

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जब सलमान बने क्राउन प्रिंस

नाएफ़ की मौत के बाद एक साल के भीतर सलमान क्राउन प्रिंस बन गए.

2013 में सलमान ने अपनी तीसरी पत्नी की सबसे बड़े बेटे मोहम्मद को क्राउन प्रिंस की कोर्ट का प्रमुख और विशेष सलाहकार नियुक्त किया. मोहम्मद को मंत्री का दर्जा हासिल था.

किंग अब्दुल्लाह की तबीयत जब बिगड़ने लगी तो सलमान ने उनकी कई ज़िम्मेदारियों को उठाना शुरू कर दिया.

सलमान ने मौजूदा नीतियों को ही आगे बढ़ाने की बात कही. ये नीतियाँ सऊदी अरब के बनने से चली आ रही थीं.

जैसी उम्मीद थी, किंग सलमान ने अपने सौतेले भाई मुक़रिन को क्राउन प्रिंस बनाने का एलान किया.

सलमान ने अपने बेटे मोहम्मद को रक्षा मंत्री बनाया और नाएफ़ के बेटे मोहम्मद बिन नाएफ़ को डिप्टी क्राउन प्रिंस बनाया.

इस फ़ैसले ने कई लोगों को चौंकाया.

यमन में सऊदी के किए हमलों में हज़ारों लोगों की जान गई थी.

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मोहम्मद बिन सलमान जब बने डिप्टी क्राउन प्रिंस

मोहम्मद बिन सलमान ने बतौर रक्षा मंत्री सबसे पहले यमन पर सैन्य अभियान शुरू किया. हूतियों ने यमन में विद्रोह कर दिया था और राजधानी पर क़ब्ज़ा कर लिया था.

इस कार्रवाई के ख़िलाफ़ सऊदी का साथ कुछ अरब देशों ने भी दिया.

पाँच सालों में इस अभियान के कारण ज़मीनी हक़ीक़त में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया.

लेकिन इस कारण सऊदी और उसके सहयोगियों पर संभावित युद्ध अपराध के आरोप लगे.

वहीं यमन के लाखों लोगों को अकाल की ओर धकेल दिया गया.

अप्रैल 2015 में मोहम्मद बिन नाएफ़ को पद से हटा दिया गया और मोहम्मद बिन सलमान डिप्टी क्राउन प्रिंस बन गए.

एक साल बाद मोहम्मद बिन सलमान अपने प्लान विज़न 2030 के साथ आए. इस योजना के तहत सऊदी अरब में आर्थिक और सामाजिक सुधार लाने की बात कही गई.

साल 2017 में किंग सलमान ने कई महीनों से चली आ रही अटकलों को ख़त्म किया और मोहम्मद बिन नाएफ की बजाय मोहम्मद बिन सलमान को क्राउन प्रिंस बनाने का फ़ैसला किया.

मोहम्मद बिन नाएफ़ से गृह मंत्रालय भी छीन लिया गया. ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि मोहम्मद बिन नाएफ़ को घर पर नज़रबंद रखा गया.

मोहम्मद बिन सलमान

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मोहम्मद बिन सलमान का ज़ोर

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मोहम्मद बिन सलमान ने क्राउन प्रिंस बनने के बाद आर्थिक और समाजिक सुधारों की दिशा में काम करना शुरू किया.

मोहम्मद बिन सलमान को अपने विरोधियों की आवाज़ दबाने और सत्ता पर दबदबा क़ायम रखने वाला शासक भी कहा गया.

उदाहरण के लिए साल 2018 में कई महिला मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने पुरुषों को गार्डियन मानने वाली व्यवस्था को ख़त्म करने के लिए अभियान शुरू करने की बात कही.

ये वही महिलाएँ थीं, जिन्होंने किंग सलमान के महिलाओं के गाड़ी चलाने पर प्रतिबंध हटाने के फ़ैसले का स्वागत किया था.

पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या में अपना हाथ होने की बात से मोहम्मद बिन सलमान इनकार करते हैं.

लेकिन ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि इस हत्या के बाद किंग सलमान ने सऊदी की नीतियों से जुड़े फ़ैसले अपने हाथ में ले लिए.

मोहम्मद बिन सलमान को दरकिनार करने की कोई कोशिशें नहीं हुईं और वो ही देश पर अपने अधिकार को बनाए हुए हैं.

मार्च 2020 में ऐसी रिपोर्ट्स आईं कि शाही परिवार के तीन राजकुमारों पर राजद्रोह केस दर्ज किए गए.

इनमें मोहम्मद बिन नाएफ़ का भी नाम था और किंग सलमान के इकलौते बचे भाई अहमद का भी नाम था.

इन रिपोर्ट्स के आने से ये कहा जाने लगा कि मोहम्मद बिन सलमान अपने बूढ़े होते पिता की मौत और किंग की कुर्सी संभालने से पहले ही अपने विरोधियों को रास्ते से हटा देना चाहते हैं.

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