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वाराणसी: नाबालिग लड़कों से दुराचार के आरोप में एनजीओ संचालक गिरफ़्तार
अनंत झणाणें
बीबीसी संवाददाता, लखनऊ
वाराणसी में एक शैक्षणिक एनजीओ चलाने वाले एक शख़्स को पुलिस ने चार नाबालिग लड़कों के साथ दुराचार के आरोप में गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया है.
वाराणसी पुलिस के मुताबिक़, '57 साल के सुनील शुक्ल को छह जुलाई को देर शाम गिरफ़्तार किया है.'
पुलिस का कहना है कि उन्हें मुख़बिर से जानकारी मिली कि सुनील शुक्ल बनारस से भागने की फिराक में है और उसे पुलिस ने एक मंदिर के पीछे से गिरफ़्तार किया.
सुनील शुक्ल को आईपीसी की धारा 377, 506, पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी एक्ट के तहत गिरफ़्तार किया गया है, जिसमें आजीवन कारावास तक की सज़ा का प्रावधान है.
'कॉपी, किताब देने के बहाने दुराचार'
जिन चार बच्चों के साथ यह घटना होने का दावा किया गया है, उनमें से एक की माँ ने बीबीसी से बातचीत में आरोप लगाया कि सुनील शुक्ल ने उनके बेटे, उनकी जेठानी के बेटे और पड़ोस के दो और लड़कों के साथ दुराचार किया.
दो पीड़ित लड़के 12 साल के हैं, एक 10 साल का और एक 11 साल का है.
उनका आरोप है कि 20 जून से एक जुलाई के बीच सुनील शुक्ल ने चारों लड़कों के साथ ऐसा दो बार किया.
उनका कहना है कि बच्चों के साथ यह दूसरी बार हुआ तब बच्चों ने ये बात अपने माँ-बाप को बताई.
एफआईआर में सुनील शुक्ल पर बच्चों को जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप है.
एफ़आईआर के मुताबिक "सुनील शुक्ल, धमकी देता था कि अगर घर में किसी को बताया, तो तुम्हारे घर वालों को मरवा देंगे. तुम लोग निचली जाति के हो, अगर किसी को कुछ भी बताया तो तुम लोगों को मार देंगे."
आरोप है कि वो एक पीड़ित बच्चे से कहता था, "बच्चों को बुलाओ, संख्या बढ़ाओ, पढ़ाना है."
बच्चे सुनील शुक्ल के संपर्क में कैसे आए, इस बारे में एक पीड़ित बच्चे की माँ कहती हैं, "हमारे मोहल्ले की एक महिला इनके यहाँ साफ़-सफाई का काम करती थी और उनके माध्यम से बच्चे उसके संपर्क में आए. वो काशी एजुकेशन ट्रस्ट के नाम से एक एनजीओ चलाता है और किताब कॉपी देने के लालच से उसने बच्चों को बुलाया था."
पुलिस पर कार्रवाई में देरी का आरोप
एक पीड़ित की माँ का कहना है कि उन्होंने पहले अपनी शिकायत लंका पुलिस चौकी पर दी. उनका आरोप है कि वहां उनकी शिकायत दबा दी गई.
उनका कहना है कि जब छह दिन तक कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने मीडिया और आला अधिकारियों तक बात ले जाने की धमकी दी और कई औरतें लंका थाने पहुँच गई.
उनका कहना है कि जब उन्होंने मीडिया में जानकारी दी, तब जाकर पुलिस ने मामले में कार्रवाई की.
बच्चों का मेडिकल हुआ है और वो कहती हैं कि पुलिस की कार्रवाई फिलहाल ठीक है.
'सुबह-ए-बनारस' ने किया पद मुक्त
पीड़ित बच्चे की माँ ने बीबीसी को बताया कि अभियुक्त सुनील शुक्ल, 'सुबह-ए-बनारस' का कोषाध्यक्ष हैं.
'सुबह-ए-बनारस' वाराणसी के अस्सी घाट पर कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करता है.
बीबीसी ने 'सुबह-ए-बनारस' के सचिव से बात की तो उन्होंने बताया कि सुनील शुक्ल इस मंच की स्थापना से जुड़े हुए हैं.
लेकिन इस मंच को सुनील शुक्ल के एनजीओ से जुड़ी ज़्यादा जानकारी नही है.
उन्होंने कहा कि जैसे ही 'सुबह-ए-बनारस' की समिति को सुनील शुक्ल पर लगे आरोपों के बारे में जानकारी मिली तो मंच के अध्यक्ष ने सुनील शुक्ल को उनके पद से दो दिन पहले हटा दिया.
बीबीसी ने पुलिस कार्रवाई में हुई देरी के पीड़ित बच्चों की माँ के आरोप को लेकर वाराणसी के एसीपी से फ़ोन पर बात करने की कोशिश की, लेकिन उनसे फ़ोन पर संपर्क नहीं हो सका.