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सैफ़ अली ख़ान पर हमला: बांग्लादेश में मौजूद अभियुक्त के पिता ने किया ये दावा
शरीफ़ुल इस्लाम शहज़ाद को मुंबई में फ़िल्म अभिनेता सैफ़ अली ख़ान के घर में घुसकर हमला करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.
उनके पिता रूहुल अमीन फ़कीर का कहना है कि गिरफ़्तार अभियुक्त भले ही उनका लड़का है. लेकिन, सीसीटीवी फ़ुटेज में जिस व्यक्ति को देखा जा रहा है, वह उनका लड़का नहीं है.
यानी उनका दावा है कि फ़ुटेज में नज़र आने वाला और गिरफ़्तार होने वाला व्यक्ति एक नहीं है, बल्कि अलग-अलग हैं. बांग्लादेश के झालोकटी में रहने वाले रूहुल अमीन फ़कीर के परिवार में पत्नी के अलावा तीन बेटे हैं.
शरीफ़ुल इस्लाम उनके मंझले बेटे हैं. रूहुल ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि बीते शुक्रवार की शाम को उनकी अपने बेटे से आख़िरी बार बातचीत हुई थी. उस दौरान दोनों ने एक-दूसरे का हाल-चाल जाना था.
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वो कहते हैं, "मैं फ़ोन पर ज़्यादा बात नहीं करता. बच्चों से बात के दौरान यही बात होती है कि कैसे हो? ठीक से रहो. उनका दावा है कि उनको अपने बेटे की गिरफ़्तारी की ख़बर टीवी चैनलों और फ़ेसबुक के ज़रिए मिली थी."
रूहुल अमीन फ़कीर कहते हैं, "फ़ुटेज में जो तस्वीर नज़र आई थी, उससे लगा कि यह मेरे बेटे की नहीं है. पुलिस ने मेरे बेटे को ज़रूर गिरफ़्तार किया था. लेकिन, तस्वीर में जो व्यक्ति है, वो अलग है."
अभियुक्त के पिता क्या बोले?
रूहुल अपने 30 साल के बेटे के बारे में बताते हैं, "वो बचपन से ही लंबे बाल रखता था और उनको पीछे की ओर झाड़ता था. यानी, उसके बाल कुछ ऊपर की ओर रहते हैं."
"लेकिन, फ़ुटेज से मिली तस्वीर में उस व्यक्ति के बाल आंख की भौहों तक हैं. इसके बाद मैंने देखा कि चेहरे में भी कोई समानता नहीं है."
उनका दावा है कि शायद किसी दूसरे व्यक्ति की ग़लतफ़हमी में ही उनके पुत्र पर हमले का आरोप लगाया गया है.
उनका मानना है कि क़रीब छह-सात महीने पहले भारत जाकर उनके गांव के किसी भी लड़के के लिए ऐसा मुश्किल काम करना संभव नहीं है.
रूहुल कहते हैं, "सैफ़ अली ख़ान, शाहरुख़ ख़ान और सलमान ख़ान तो बड़े लोग हैं. यह लोग मंत्रियों और सांसदों की तरह प्रभावशाली और सुपरस्टार हैं. उनके क़रीब पहुंचना तो मुश्किल है."
भारत क्यों गए थे शरीफ़ुल?
रूहुल अमीन फ़कीर बताते हैं कि शरीफ़ुल बीते साल यानी वर्ष 2024 में मार्च-अप्रैल के दौरान भारत गए थे.
उनका कहना था, "उनके ख़िलाफ़ कुछ मामले चल रहे थे. मैं अपने इलाक़े में यूनियन बीएनपी का अध्यक्ष हूं. शरीफ़ुल भी इसका सदस्य है. बड़ा बेटा भी राजनीति में है."
फ़कीर बताते हैं कि अवामी लीग के सत्ता में रहने के दौरान ही उनके ख़िलाफ़ राजनीतिक बदले की भावना से कई मामले दर्ज किए गए थे, इसी वजह से शरीफ़ुल ने देश छोड़ने का फ़ैसला किया था.
वो बताते हैं कि शरीफ़ुल के भारत जाने की जानकारी परिवार को थी. क्या अवामी लीग सरकार के पतन के बाद वो स्वदेश लौटना चाहते थे?
फ़कीर इसका जवाब 'नहीं' में देते हैं. वह कहते हैं, "यह तय हुआ था कि शरीफ़ुल ज़रूरी दस्तावेज़ बनवा कर वहीं रहेंगे."
फ़कीर बताते हैं कि शरीफ़ुल ने भारत में एक 'बार जैसे होटल' में काम शुरू किया था और हर महीने की दस तारीख़ को अपने वेतन से कुछ पैसे विभिन्न तरीके से यहां परिवार को भेजते थे.
हालांकि, मुंबई पुलिस ने भी शरीफ़ुल के होटल में काम करने की बात कही है. पुलिस ने कहा है कि शरीफ़ुल ने मुंबई के एक पब में वेटर का काम शुरू किया था. लेकिन, वहां ज़्यादा दिनों तक नहीं रहे.
सैफ़ पर हमला कब हुआ था?
एक हमलावर ने बीती 16 जनवरी को तड़के मुंबई के बांद्रा इलाक़े में स्थित सैफ़ अली ख़ान के आवास में घुसकर उन पर चाकू से हमला किया था. इसमें सैफ़ को गंभीर चोटें आई थीं.
उसके बाद मुंबई पुलिस ने 19 जनवरी को मुंबई के पास एक जंगल से शरीफ़ुल इस्लाम को गिरफ़्तार किया था.
मुंबई पुलिस ने उनको सैफ़ अली ख़ान पर हमले का अभियुक्त बताते हुए उनके बांग्लादेशी नागरिक होने की भी बात कही थी.
हालांकि, अदालत में हाज़िर किए जाने पर शरीफ़ुल की ओर से पेश बचाव पक्ष के दोनों वकीलों ने दावा किया कि शरीफ़ुल के बांग्लादेशी नागरिक होने का कोई सबूत नहीं मिला है.
एडवोकेट संदीप शेरखान ने दावा किया है कि शरीफ़ुल इस्लाम बीते कई वर्षों से अपने परिवार के साथ मुंबई में रह रहे हैं.
ऐसे में यह आरोप निराधार है कि वो कुछ महीने पहले अवैध रूप से बांग्लादेश से भारत आए हैं.
शरीफ़ुल की पहचान, पहचान पत्र और भारत में बांग्लादेश-विरोधी राजनीति पर विवाद जारी है.
कई लोग मुंबई पुलिस की ओर से शरीफ़ुल को तत्काल 'बांग्लादेशी घुसपैठिया' ठहराने को भी संदेह की निगाहों से देख रहे हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.