यूनिफ़ाइड पेंशन स्कीम या यूपीएस क्या है, जिसे मोदी सरकार ने दी मंज़ूरी

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केंद्र सरकार ने यूनिफ़ाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) योजना को मंज़ूरी दे दी है. ये जानकारी इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी है.
शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने इसकी घोषणा की और कहा कि सरकारी कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को लेकर चिंता भी उठती रही है और पेंशन इसका अहम भाग है.
उन्होंने कहा, "सरकारी कर्मचारी देशभर में लोगों की सेवा करते हैं और इससे समाज की एक व्यवस्था चलती है, समाज में उनका महत्वपूर्ण स्थान रहा है."
उन्होंने सरकारी कर्मचारियों की नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) में सुधारों की मांग की बात की और कहा कि सरकार इस पर विचार कर रही थी और अब सरकार ने यूपीएस को मंज़ूरी दी है.
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस नई स्कीम से केंद्र सरकार के 23 लाख कर्मचारियों को फ़ायदा मिलेगा.
ये योजना अगले साल एक अप्रैल से लागू होगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपीएस को मंज़ूरी मिलने के बाद इसे कर्मचारियों की गरिमा और आर्थिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने वाली योजना कहा है.
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "देश की प्रगति के लिए कठिन परिश्रम करने वाले सभी कर्मचारियों पर हमें गर्व है. यूनिफ़ाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) इन कर्मचारियों की गरिमा और आर्थिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने वाली है. यह कदम उनके कल्याण और सुरक्षित भविष्य के लिए हमारी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है."
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स्कीम की पांच मुख्य बातें
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस यूपीएस के पांच मुख्य हिस्से हैं.
पहला हिस्सा- कम से कम 50 फ़ीसदी निश्चित पेंशन
अश्विनी वैष्णव ने कहा, "कर्मचारियों की एक मांग थी कि उन्हें एक निश्चित रकम पेंशन के रूप में चाहिए, जो वाजिब मांग थी."
ये रक़म रिटारयमेंट के ठीक पहले के 12 महीनों के औसत मूल वेतन का 50 फ़ीसदी होगी. इसके लिए शर्त ये है कि कर्मचारी ने 25 साल की सेवा पूरी की हो.
इससे कम वक्त (10 साल से अधिक और 25 साल से कम) तक सेवा की है तो रकम भी उसी हिसाब से होगी.
दूसरा हिस्सा- निश्चित फैमिली पेंशन
किसी कर्मचारी की सेवा में रहते हुए मृत्यु होने की स्थिति में परिवार (पत्नी) को 60 फ़ीसदी पेंशन के रूप में मिलेगा.
तीसरा हिस्सा- न्यूनतम निश्चित पेंशन
10 साल तक की न्यूनतम सेवा की स्थिति में कर्मचारी को कम से कम 10 हज़ार रुपये प्रति माह पेंशन के रूप में दिए जाएंगे.
चौथा हिस्सा- महंगाई के हिसाब से व्यवस्था
कर्मचारी और फेमिली पेंशन को महंगाई के साथ जोड़ा जाएगा. इसका लाभ सभी तरह की पेंशन में मिलेगा यानी कर्मचारियों की पेंशन में महंगाई इंडेक्शेसन को शामिल किया जाएगा. ये महंगाई राहत ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइज़ेस फ़ॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स के इंडेक्स पर आधारित है. यह व्यवस्था मौजूदा समय में सेवारत कर्मचारियों के लिए है.
पाँचवाँ हिस्सा- ग्रैच्युटी के अलावा नौकरी छोड़ने पर एकमुश्त रक़म दी जाएगी
इसकी गणना कर्मचारियों के हर छह महीने की सेवा पर मूल वेतन और महंगाई भत्ते का दसवां हिस्से के रूप में होगी. इस रकम से कर्मचारियों की निश्चित पेंशन पर कोई असर नहीं होगा.

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कैसे बनाई गई नई पेंशन स्कीम
शनिवार को अश्विनी वैष्णव ने कहा कि, "प्रधानमंत्री मोदी ने अप्रैल डॉ. सोमनाथन (फाइनेंस सेक्रेटरी थे) के नेतृत्व में इस मामले पर विचार करने के लिए एक कमिटी बनाई थी."
उन्होंने बताया "कमिटी ने क़रीब-क़रीब सभी राज्यों, लेबर संगठनों के साथ बात की, साथ ही दुनिया के दूसरे देशों में मौजूद सिस्टम को समझा. इस पूरी प्रक्रिया के बाद कमिटी ने यूनिफ़ाइडपेंशन स्कीम की सिफारिश की, जिसे सरकार ने मंज़ूरी दे दी है."
उन्होंने कहा कि यूनिफ़ाइड पेंशन स्कीम आने वाले दिनों में लागू होगी.
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस स्कीम का भार कर्मचारियों पर नहीं पड़ेगा यानी कर्मचारियों पर इसका भार नहीं पड़ेगा.
अश्विनी वैष्णव ने कहा, "पहले कर्मचारी इसके लिए 10 फ़ीसदी का अंशदान करते थे और केंद्र सरकार भी इसके लिए 10 फ़ीसदी का अंशदान करती थी."
2019 में सरकार ने सरकारी योगदान को 14 फ़ीसदी कर दिया था. अब सरकार के अंशदान को बढ़ाकर 18.5 फ़ीसदी कर दिया जाएगा."
उन्होंने कहा, "ये 1 अप्रैल 2025 से लागू होगी और तब तक इसके लिए संबंधित नियमों को बनाने के काम किया जाएगा और कर्मचारियों के पास एनपीएस या यूपीएस में रहने का विकल्प होगा."

उठने लगे सवाल
पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग कर रहे नेशनल मूवमेन्ट फ़ॉर ओल्ड पेंशन स्कीम के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बन्धु ने सरकार की नई घोषणा पर सवाल उठाए हैं और पूछा है कि सरकार को पुरानी पेंशन स्कीम का विकल्प देने में क्या दिक्कत है?
उन्होंने बीबीसी हिंदी के सहयोगी चंदन यादव से कहा, "यदि सरकार न्यू पेंशन स्कीम और यूनिफ़ाइड पेंशन स्कीम का विकल्प दे सकती है तो फिर पुरानी पेंशन स्कीम (ओपीएस) का विकल्प देने में क्या दिक्कत है? यदि यूपीएस में बेसिक का 50 फ़ीसदी दे सकते हैं तो ओपीएस में भी तो 50 फ़ीसदी ही देना होता है."
वहीं नेशनल मिशन फ़ॉर ओल्ड पेंशन स्कीम के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ये नई व्यवस्था एनपीएस से भी ख़राब व्यवस्था होगी.
उन्होंने लिखा, "सरकार ने अपना अंशदान बढ़ाकर 18.5 फ़ीसदी कर दिया है. 25 साल की नौकरी करने वालो को 50 फ़ीसदी यानी पुरानी पेंशन के बराबर पेंशन दी जाएगीप, जिनकी नौकरी कम होगी उन्हें दस हज़ार और डीआर देगी और हमारा वाला 10 फ़ीसदी अंशदान भी रख लेगी. केवल अंत के 6 महीने की सैलरी वापस करेगी."
उन्होंने लिखा, "इसका मतलब ये कि ये एनपीएस से भी ख़राब व्यवस्था होगी क्योंकि जो लोग इतनी लंबी नौकरी करेंगे उन्हें यूपीएस से ज़्यादा लाभ एनपीएस में ही रहता."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
















