एनपीएस के बारे में जानें, रिटायरमेंट से पहले और बाद में कर्मचारी कैसे और कितना पैसा निकाल सकते हैं?

पेंशन

इमेज स्रोत, Getty Images

    • Author, अरविंद छाबड़ा
    • पदनाम, बीबीसी पंजाबी

एक ओर जहाँ कई राज्य सरकारें पुरानी पेंशन योजना को दोबारा से लागू करने के लिए कदम उठा रहीं हैं, वहीं देश में पेंशन क्षेत्र को नियंत्रित करने वाली संस्था पीएफ़आरडीए का कहना है कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत नई पेंशन योजना (एनपीएस) के तहत जमा रुपये राज्य सरकारों को वापस दिए जा सकें.

यह वो पैसा है जो कर्मचारियों के वेतन से कटौती और सरकार से योगदान के माध्यम से एकत्र किया जाता है.

बीबीसी के इस पत्रकार के आरटीआई आवेदन के जवाब में पीएफ़आरडीए ने बताया है कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत ये रुपये और इन पर लगे ब्याज़ को लौटाया जा सके.

अब अगर इसे राज्य सरकारों को लौटाया नहीं गया तो इससे वो राज्य सरकारें और वहां के कर्मचारियों को बड़ा झटका लग सकता है, क्योंकि प्रत्येक राज्य के हज़ारों करोड़ रुपये इसमें जमा हैं.

पेंशन

इमेज स्रोत, Getty Images

एक राजनीतिक मुद्दा

सरकारी कर्मचारी लगातार पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग कर रहे हैं और राजनीतिक गलियारों में यह मुद्दा चर्चा में बना हुआ है.

हाल ही में हिमाचल प्रदेश के चुनावों में पेंशन एक प्रमुख सार्वजनिक मुद्दा बनकर उभरा था.

राज्य के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि वह अपनी पहली कैबिनेट बैठक में पुरानी पेंशन बहाल करने का वादा पूरा करेंगे.

राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड सरकारें पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने का फ़ैसला पहले ही कर चुकी हैं.

पिछले महीने पंजाब सरकार ने भी पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने का आदेश जारी किया था.

18 नवंबर को जारी नोटिफ़िकेशन में कहा गया कि नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों को पुरानी स्कीम का लाभ दिया जाएगा.

सूत्रों ने कहा था कि सरकार पीएफ़आरडीए में जमा क़रीब 17,000 करोड़ रुपये लौटाने की माँग करेगी.

लेकिन बीजेपी नीत केंद्र सरकार की इस मामले पर अलग राय है. भाजपा केंद्र सरकार ने निकट भविष्य में पुरानी पेंशन योजना की बहाली की संभावना से इनकार किया है.

सोमवार को असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा में पुरानी पेंशन योजना बहाल करने के बारे में पूछा था. जिसके जवाब में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री डॉ. भागवत किसनाराव ने कहा कि सरकार के पास केंद्रीय कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने का कोई प्रस्ताव नहीं है.

पेंशन

इमेज स्रोत, Getty Images

क्यों है पुरानी पेंशन की माँग?

राज्यों में कृषि और अन्य व्यावसायिक व्यवसायों के बाद एक बड़ा वर्ग रोजी-रोटी के लिए सरकारी नौकरियों पर निर्भर है.

रिटायरमेंट के बाद ज़्यादातर कर्मचारी एकमुश्त की बजाय मासिक पेंशन लेना पसंद करते हैं.

पुरानी पेंशन योजना को तरजीह देने का एक कारण यह भी है कि इसके तहत सेवानिवृत्त कर्मचारी को पेंशन ज़रूर दी जाती है. जो सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाले मूल वेतन का 50 प्रतिशत होता है, यानी मूल वेतन का आधा हिस्सा पेंशन के रूप में दिया जाता है.

इतना ही नहीं, सेवानिवृत्त कर्मचारी को कार्यरत कर्मचारी की तरह लगातार महंगाई भत्ता में बढ़ोतरी की सुविधा भी मिलती है.

इससे महंगाई बढ़ने के साथ-साथ पेंशन में भी बढ़ोतरी होती रहती है.

पेंशन

इमेज स्रोत, Getty Images

क्या है पेंशन क़ानून?

पीएफ़आरडीए ने आरटीआई आवेदन के जवाब में कहा कि पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण अधिनियम, 2013 के तहत धन वापसी या निकासी का कोई प्रावधान नहीं है. समय-समय पर होने वाले संशोधनों में ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं निकला.

पीएफ़आरडीए 23 अगस्त, 2003 को भारत में पेंशन क्षेत्र को बढ़ावा देने, विकसित करने और विनियमित करने के इरादे से अस्तित्व में आया. इस संगठन की स्थापना भारत सरकार से पारित एक प्रस्ताव के ज़रिए की गई थी.

इस क़ानून के तहत कोई भी कर्मचारी,विभिन्न स्थितियों के तहत, यह पैसा वापस ले सकता है-

पेंशन

इमेज स्रोत, Getty Images

1. सेवानिवृत्ति पर निकासी

  • कर्मचारी की सेवानिवृत्ति के समय संचित पेंशन निधि का कम से कम 40% ऐनुयिटी यानी वार्षिकी स्कीम की ख़रीद के लिए अनिवार्य रूप से उपयोग करना होगा. (वार्षिकी हर साल किसी को भुगतान की जाने वाली एक निश्चित राशि है).
  • एकत्रित राशि की निकासी को भी टाला जा सकता है. इसे 70 साल की उम्र तक कभी भी निकाला जा सकता है.
  • वार्षिकी की ख़रीद को अधिकतम 3 वर्षों के लिए टाला भी जा सकता है.
  • यदि कुल राशि 2 लाख रुपये से कम है, तो पूरी राशि निकालने का विकल्प भी उपलब्ध है.
पेंशन

इमेज स्रोत, Getty Images

2. रिटायरमेंट की उम्र से पहले क्या है प्रावधान

  • रिटायरमेंट की आयु प्राप्त करने से पूर्व जो कर्मचारी रिटायर होते हैं उन्हें संचित पेंशन निधि का 80 प्रतिशत अनिवार्य रूप से ऐनुयिटी यानी वार्षिकी खरीद के लिए उपयोग करना होगा .
  • इसी वार्षिकी कोष से ही मासिक पेंशन निश्चित किए जाने का प्रावधान है. उपार्जित पेंशन राशि का शेष यानी 20 प्रतिशत कर्मचारी को एकमुश्त भुगतान के रूप में किया जाएगा.
  • यदि कुल जमा राशि 1 लाख रुपये से कम है, तो उसके पास कोई वार्षिकी ख़रीदे बिना समूचा संचित पेंशन राशि निकालने का विकल्प होगा.
वीडियो कैप्शन, दुनिया की एक बड़ी आबादी का रिटायर होने का ख्वाब टूट सकता है? Duniya Jahan

3. सेवानिवृत्ति से पहले मृत्यु के मामले में

  • यदि सेवानिवृत्ति से पूर्व कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है तो उसकी संचित पेंशन राशि का कम से कम 80 प्रतिशत अनिवार्य रूप से ऐनुयिटी यानी वार्षिकी की ख़रीद के लिए उपयोग किया जाएगा.
  • बकाया पेंशन राशि का भुगतान कर्मचारी के नामांकित व्यक्तियों या क़ानूनी उत्तराधिकारियों को एकमुश्त राशि के रूप में दिया जाएगा.
  • यदि कर्मचारी की मृत्यु के समय उसके खाते में राशि दो लाख रुपये से कम है, तो नामांकित व्यक्ति या क़ानूनी उत्तराधिकारियों के पास संपूर्ण संचित पेंशन राशि को वापस लेने का विकल्प होगा.
वीडियो कैप्शन, धंधा पानी

एनपीएस से आंशिक निकासी

एक कर्मचारी को कुछ उद्देश्यों के लिए उसके द्वारा किए गए योगदान का 25% तक निकालने की अनुमति है-

  • बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए,
  • बच्चों के विवाह के लिए,
  • आवासीय घर की ख़रीद या नवीकरण के लिए,
  • किसी भी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए.
कर्मचारी संघ

इमेज स्रोत, Getty Images

क्या है कर्मचारी संघों का पक्ष?

पंजाब में पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग को लेकर कर्मचारी संगठनों द्वारा लगातार सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया जाता रहा है.

संघ नेता इंदरपाल सिंह ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि पैसा वापस न मिलना अफ़सोस की बात है.

हालांकि उनका कहना है कि राहत की बात यह है कि राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर पुरानी पेंशन योजना बहाल कर दी है. इसलिए हम कर्मचारी अब से पुरानी पेंशन योजना के तहत आते हैं. पिछले जमा पैसे के संबंध में, हम देखेंगे कि क्या करना है. हम इस पर कुछ समय बाद विचार करेंगे.

हिमाचल के कर्मचारियों का भी कुछ ऐसा ही मानना है.

हिमाचल के कर्मचारी संघ के नेता भरत शर्मा ने बीबीसी से कहा कि वे उम्मीद कर रहे हैं कि जल्दी ही सरकार अपना वादा पूरा करेगी जिससे अब से कर्मचारी पेंशन के हकदार हो जाएँगे.

सरकार को अब इसके बारे में भी कुछ सोचना होगा कि यह पैसा कैसे वापस लेना है और इसके लिए क्या कदम उठाने हैं.

आप

इमेज स्रोत, Getty Images

आप ने इसे केंद्र की 'नाइंसाफ़ी' बताया

पंजाब के 'आप' प्रवक्ता नील गर्ग ने कहा कि केंद्रीय कर्मचारियों की मदद से इकट्ठा किया गया पैसा अगर वापस नहीं किया जाता तो यह पंजाब के कर्मचारियों के लिए नाइंसाफ़ी है.

उन्होंने कहा, "यह पैसा पंजाब सरकार और उसके कर्मचारियों का है और केंद्र सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है."

नील गर्ग ने कहा कि पंजाब सरकार इस पर क़ानूनी सलाह लेगी और फिर इस पर उचित फ़ैसला लिया जाएगा. उनके मुताबिक़, पंजाब के कर्मचारी क़रीब 17 हज़ार करोड़ रुपये के हकदार हैं.

वीडियो कैप्शन, रिटायरमेंट प्लान बना रही हैं तो ये स्कीम आपके लिए है

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)