उत्तर प्रदेश: महायज्ञ कार्यक्रम में सपा के मुस्लिम विधायक के जाने पर मंदिर को गंगाजल से धुलवाने पर आयोजक ने क्या कहा

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- Author, अमन द्विवेदी
- पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिंदी के लिए
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर ज़िले के एक मंदिर में समाजवादी पार्टी (सपा) की विधायक सैय्यदा ख़ातून के जाने के बाद मंदिर को गंगाजल से धुलवाया गया.
सपा विधायक बलवा गांव में आयोजित शतचंडी महायज्ञ कार्यक्रम में शामिल होने साम्या माता मंदिर पहुंची थीं.
ऐसी ख़बरें आईं कि विधायक के जाने के एक दिन बाद, हिंदू संगठन के सदस्यों और भाजपा के बढ़नी चाफा से नगर पंचायत चेयरमैन धर्मराज वर्मा ने मंदिर को गंगाजल से धुलवाया.
मुसलमान विधायक के मंदिर जाने और उसके बाद उसकी गंगाजल से धुलाई कराने को लेकर अब ख़ासा विवाद खड़ा हो गया है.
शतचंडी महायज्ञ का आयोजन करवाने वाले कृष्ण दत्त शुक्ला ने हिंदू संगठनों और भाजपा के रवैए पर सवाल खड़े किए हैं.

कृष्णदत्त शुक्ला कहते हैं, "जब मंदिर में हमने शतचंडी महायज्ञ का आयोजन किया तो हमारे डुमरियागंज विधानसभा क्षेत्र में जितने प्रत्याशी थे, हमने सभी को न्यौता दिया था. सबको न्यौता देने के बाद जो हमारे पास आया उसका हमने स्वागत किया."
वो कहते हैं "वो मंदिर मेरा है और आज से नहीं है. सदियों से हिंदू और मुसलमान इस मंदिर में जाते थे. अलग-अलग धर्म के लोग आज भी मंदिर में जाते हैं. ये विवाद किस बात को लेकर फैला रहे हैं हम?"
कृष्ण दत्त शुक्ला सवाल उठाते हैं, "अगर एक मुसलमान के मंदिर जाने पर मंदिर अपवित्र हो जाता है तो हिंदू भी तो मुसलमानों के तीर्थ स्थानों पर जाते हैं. तो उन्हें भी उनके स्थलों पर नहीं जाना चाहिए."
वो कहते हैं, "हमारे लिए कोई अपवित्र नहीं है. ग्रन्थों में भी यही लिखा है कि मंदिर में जात-पात का कोई भेदभाव नहीं होता है. मंदिर तो धार्मिक स्थल है, वहां कोई भी जाकर के अपना शीश झुका सकता है."

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आपत्ति का क्या था कारण?
मंदिर के शुद्धीकरण के नाम पर, मंदिर को धुलावाने की मांग करने वाले भाजपा नेता धर्मराज वर्मा का कहना है कि मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है.
उन्होंने कहा, "लोग समर्पण भाव से यहां आते हैं, जिसका विधायक ने अपमान किया है. वह मांसाहारी हैं. उनके दौरे से मंदिर की पवित्रता प्रभावित हुई."
धर्मराज वर्मा विधायक पर आरोप लगाते हुए कहते हैं कि "उन्हें और उनके समाज को जब मंदिर से कुछ लेना-देना नहीं हैं तो फिर वह हमारे धार्मिक स्थल पर क्या करने आई थीं? हम लोग हर मंगलवार यहां पर पूजा करते हैं. वो लोग मांस खाने वाले हैं, पता नहीं क्या खाकर यहां आए और मंदिर को अपवित्र कर गए."
धर्मराज वर्मा ने ये नहीं बताया कि माँसाहारी हिंदुओं के मंदिर में प्रवेश को रोकने के लिए वे क्या और कैसे कदम उठाएँगे?
धर्मराज वर्मा ने कहा कि मंदिर में हो रहे यज्ञ में शामिल होने के लिए अगर सपा विधायक सैय्यदा ख़ातून को आयोजकों ने बुलाया भी था, तो भी उनको वहां नहीं आना चाहिए था.

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सपा विधायक का क्या है कहना?
डुमरियागंज से समाजवादी पार्टी की विधायक सैय्यदा ख़ातून ने मंदिर के शतचंडी यज्ञ में जाने और फिर मंदिर को गंगाजल से धोने के पूरे विवाद पर कहा, "धर्मराज वर्मा की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है, सोशल मीडिया में और क्षेत्र की जनता के बीच अपना नाम बनाने के लिए वह ऐसा करते हैं."
"इन जैसे लोगों की बातों और काम पर मैं ध्यान नहीं देती हैं. ऐसे लोगों को ज़्यादा तवज्जो देने की ज़रूरत नहीं है."
सैय्यादा ख़ातून पूरे मामले को तूल नहीं देने की बात करते हुए कहती हैं, "अगर मेरे क्षेत्र की जनता मुझे बुलाएगी तो मैं ज़रूर जाउंगी. मेरे लिए मंदिर और मस्जिद, सब खुदा के घर हैं."

वहीं विधायक प्रतिनिधि सूर्य प्रकाश उपाध्याय पूरे मामले पर कहते हैं कि "साम्या माता के शतचंडी यज्ञ में विधायक को न्यौता दिया गया था. विधायक वहां गईं, वहां के पुजारियों ने विधायक का स्वागत सत्कार किया. फिर वहां कुछ दान करके वह वापस चली आईं."
वहीं कृष्ण दत्त शुक्ला कहते हैं, "हम ज़िम्मेदार अधिकारियों से बस इतना चाहते हैं कि मंदिर हमारा है, हमारा था और हमारा ही रहेगा. वहां आने वालों में हिंदू और मुसलमान का कोई भेदभाव नहीं है, पहले भी जैसे लोग मंदिर आते-जाते थे, आगे भी वैसे ही आएंगे."
वैसे इस पूरे मामले में अब तक किसी तरह की, कोई शिकायत पुलिस प्रशासन के पास दर्ज नहीं कराई गई थी.
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