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18 महीने पद ख़ाली रहने के बाद चीन ने भारत के लिए किसे चुना राजदूत?- प्रेस रिव्यू
भारत में क़रीब डेढ़ साल बाद चीन ने अपना नया राजदूत भेजने की तैयारी की है. इस ख़बर को आज कई अख़बारों ने अपने पन्नों पर प्रमुखता से जगह दी है.
अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने अपने पहले पन्ने पर प्रकाशित इस ख़बर में बताया है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने असाधारण तौर पर 18 महीने की देरी के बाद शुई फ़ीहॉन्ग को भारत में नया राजदूत नियुक्त किया है.
हालांकि, इस पर अभी तक कोई औपचारिक एलान नहीं किया गया है लेकिन चीन के विदेश मंत्रालय ने समाचार एजेंसी पीटीआई को पुष्टि की है कि अफ़ग़ानिस्तान और रोमानिया में राजदूत रह चुके शुई अब भारत में चीन के राजदूत होंगे.
अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू ने लिखा है कि 60 वर्षीय शुई जल्दी ही नई दिल्ली में अपना पद संभाल लेंगे. वह यहां सन विडॉन्ग की जगह लेंगे, जो भारत में अपना कार्यकाल अक्टूबर 2022 में ही पूरा करके जा चुके हैं.
सन विडॉन्ग, भारत के कार्यकाल से पहले पाकिस्तान में भी चीन के राजदूत रह चुके थे और फ़िलहाल उप विदेश मंत्री हैं और चीन की दक्षिण एशिया पॉलिसी को संभालना उनके ज़िम्मे है.
शुई की नियुक्ति भारत और चीन के बीच लंबे समय से चल रहे सैन्य गतिरोध को हल करने के लिए कई दौर की वार्ता के बीच हुई है.
दोनों देशों के संबंध मई 2020 में लद्दाख में हुई हिंसक सैन्य झड़प के बाद से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं. इसके बाद से दोनों पक्षों ने अभी तक कोर कमांडर स्तर की 21 दौर की वार्ता की हैं.
हंगामे के बीच उत्तर प्रदेश के संभल में सबसे अधिक वोटिंग
लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में उत्तर प्रदेश की 10 सीटों पर वोटिंग हुई. राज्य में 57.3 फ़ीसदी वोटिंग हुई.
हिंदी अख़बार दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार राज्य के संभल में सबसे अधिक 62.81 वोटिंग हुई. संभल में पुलिस ने लाठीचार्ज किया था.
अख़बार ने पुलिस के हवाले से लिखा है कि जिन लोगों पर लाठी चलाई गई वे मतदान को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे इसलिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा.
वहीं, राज्य में सबसे कम 53.99 फ़ीसदी मतदान आगरा में दर्ज किया गया.
यूपी में मंगलवार को संभल, हाथरस, आगरा, फतेहपुर सीकरी, फ़िरोज़ाबाद, मैनपुरी, एटा, बदायूं, बरेली और आंवला सीट पर वोटिंग हुई.
अख़बार लिखता है, "10 सीटों पर 100 कैंडिडेट चुनावी मैदान में हैं. इनमें 8 महिला प्रत्याशी हैं. थर्ड फेज़ में मुलायम परिवार से तीन सदस्य चुनावी मैदान में हैं. मैनपुरी से डिंपल यादव, फ़िरोज़ाबाद से अक्षय यादव और बदायूं से आदित्य यादव की प्रतिष्ठा दांव पर है."
उमर अब्दुल्ला ने इन मुसलमानों के लिए कोटे का समर्थन किया
नेशनल कॉन्फ़्रेंस नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने कहा है कि वह तुष्टिकरण की राजनीति के ख़िलाफ़ हैं लेकिन आर्थिक रूप से पिछड़े मुसलमानों को कोटा देने के समर्थन में हैं.
अंग्रेज़ी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में उमर अब्दुल्लाह ने कहा, "मुसलमान समुदाय के बीच में ही आर्थिक रूप से कमज़ोरों को कोटा दिए जाने की भी बात उठती है. मैं पूरे समुदाय को कोटा दिए जाने के ख़िलाफ़ हूं लेकिन आर्थिक तौर पर पिछड़े मुसलमानों को ज़रूर आगे बढ़ाना चाहिए."
उमर अब्दुल्लाह का ये बयान ऐसे समय आया है जब लोकसभा चुनाव की रैलियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार ये आरोप लगा रहे हैं कि कांग्रेस पार्टी अपनी वोटबैंक की राजनीति के लिए एससी, एसटी और ओबीसी को मिलने वाला आरक्षण मुसलमान समुदाय को देने की साज़िश कर रही है.
उमर अब्दुल्लाह ने कहा, "तुष्टिकरण की राजनीति का समर्थन करने वाला मैं आख़िरी आदमी हूं. लेकिन बीजेपी के साथ समस्या ये है कि यह दिखाने के लिए कि वे मुसलमानों का तुष्टिकरण नहीं कर रहे हैं, वे दूसरे रास्ते पर जा रहे हैं. असल में वे मुसलमानों को प्रताड़ित कर रहे हैं और उन्हें उनके उचित हक़ से वंचित कर रहे हैं."
बारामूला से लोकसभा चुनाव प्रत्याशी उमर अब्दुल्लाह ने कहा कि ये "बड़ी शर्म की बात है कि देश की आबादी में 14 फ़ीसदी हिस्सा रखने वाले मुसलमान समुदाय से एक भी शख्स सत्ताधारी पार्टी की ओर से लोकसभा या राज्यसभा में नहीं गया. इतने सालों में मोदी कैबिनेट में एक भी मुस्लिम चेहरा नहीं रहा."
पंजाब सरकार का बीजेपी की लोकसभा प्रत्याशी को वीआरएस देने से इनकार
पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार और केंद्र एक बार फिर आमने-सामने हैं. अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार भारत सरकार की ओर से आईएएस अधिकारी परमपाल कौर को वॉलंटियरी रिटायरमेंट (वीआरएस) की मंज़ूरी मिलने के बाद पंजाब सरकार ने इस आवेदन को ठुकरा दिया है.
पंजाब सरकार ने परमपाल कौर से कहा है कि वह ड्यूटी पर लौटें और अगर ऐसा नहीं होता तो उनके ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
अख़बार के अनुसार परमपाल कौर पंजाब कैडर की आईएएस अधिकारी हैं और उन्होंने बीते अप्रैल में भारतीय जनता पार्टी ज्वॉइन की थी. इसके बाद उन्होंने अपना इस्तीफ़ा मुख्य सचिव अनुराग वर्मा को सौंपा. हालांकि, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उनका इस्तीफ़ा स्वीकार नहीं किया.
बीजेपी ने कौर को पंजाब की बठिंडा लोकसभा सीट से प्रत्याशी भी बनाया है. सीएम मान ने इसको लेकर सार्वजनिक तौर पर सवाल खड़े किए थे. इसके बाद केंद्र सरकार ने पंजाब सरकार को ये जानकारी दी थी कि परमपाल कौर का इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया गया है.
इसके बाद राज्य सरकार की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि तीन महीने के नोटिस पीरियड से कौर को छूट नहीं मिली है और न तो उनके वॉलंटियरी रिटायरमेंट पर ही कोई फ़ैसला किया गया है.
हालाँकि उन्होंने पीएसआईडीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर अपने कर्तव्यों को ख़ुद ही छोड़ दिया, लेकिन राज्य सरकार ने नियमों के अनुसार नोटिस अवधि को माफ़ नहीं किया था.
इस नोटिस में ये भी कहा गया है कि तीन महीने के नोटिस पीरियड को माफ़ करने का अधिकार केवल राज्य सरकार के पास है. वह भी कुछ ख़ास परिस्थितियों और कारणों को ध्यान में रखते हुए.
नोटिस में राज्य में आईएएस अधिकारियों की कमी का हवाला देते हुए इस बात पर भी ज़ोर दिया गया है कि परमपाल कौर के इस्तीफ़े को स्वीकार करने से जुड़ा कोई आदेश जारी नहीं किया गया.
पंजाब सरकार ने कहा है कि परमपाल कौर राजनीति में सक्रिय हैं. ये उनकी ओर से बताए गए वॉलंटियरी रिटायरमेंट के आधार के विपरीत है.
परमपाल कौर शिरोमणि अकाली दल के नेता और पूर्व मंत्री सिकंदर सिंह मलूका की बहू हैं. उन्होंने पंजाब स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (पीएसआईडीसी) के मैनेजिंग डायरेक्टर के पद से तीन अप्रैल को इस्तीफ़ा दिया था.
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