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बिहार: झंझारपुर में इंडिया गठबंधन के लिए अपने उम्मीदवार का आरएसएस कनेक्शन क्यों बना चुनौती - ग्राउंड रिपोर्ट
- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, झंझारपुर से बीबीसी हिंदी के लिए
बिहार में लोकसभा के तीसरे चरण में झंझारपुर लोकसभा सीट पर चुनाव होना है. इस सीट पर एनडीए गठबंधन ने अपने निवर्तमान सांसद रामप्रीत मंडल पर फिर से दांव लगाया है तो इंडिया गठबंधन ने इस सीट से वीआईपी के सुमन कुमार महासेठ को मैदान में उतारा है.
झंझारपुर की इस लड़ाई को त्रिकोणीय बना रहे हैं गुलाब यादव. जो हाथी (बीएसपी) पर सवार होकर इस लोकसभा सीट पर फतह की ख्वाहिश रखते हैं.
झंझारपुर सीट की इस त्रिकोणीय लड़ाई के तीनों किरदार बहुत दिलचस्प हैं.
पहले किरदार हैं.. निवर्तमान सांसद रामप्रीत मंडल जो खुद स्वीकार कर रहे है कि उन्होंने क्षेत्र में काम नहीं किया हैं.
दूसरी तरफ़ हैं.. इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार सुमन कुमार महासेठ.. जिनका रिश्ता बीजेपी और आरएसएस से रहा है.
वहीं तीसरे ओर बीसपी के गुलाब यादव हैं.. जो इस इलाके में आरजेडी के नेता रहे हैं.
'गुलाब जी हैं इंडिया गठबंधन के असली उम्मीदवार'
सुबह के सात बजे हैं और झंझारपुर के गंगापुर गांव में गुलाब यादव के पैतृक घर पर गहमा-गहमी है. घर के अहाते में कम से कम 5 एसयूवी और बाहर पतली गली में दर्जनों मोटरसाइकिलें खड़ी हैं.
टी शर्ट और ट्राउज़र में गुलाब यादव अपने समर्थकों से लगातार क्षेत्र का हाल जान रहे हैं.
उनकी ज़ुबान पर पंचायत दर पंचायत नाम रटे हुए हैं. घर के हॉल के बाहर जमा मर्दाना चप्पलें राजनीति में पुरुषों के वर्चस्व की कहानी कह रही हैं.
हालांकि, हॉल के अंदर बाबा साहेब आंबेडकर के अलावा दो महिलाओं का छोटा पोस्टर चिपका हुआ है. जिसमें अंबिका गुलाब यादव (पत्नी) और बिंदु गुलाब यादव (बेटी) की तस्वीर है.
अंबिका गुलाब यादव वर्तमान में विधान पार्षद हैं और बिंदु गुलाब यादव ज़िलाध्यक्ष हैं. दिलचस्प है कि साल 2022 में अंबिका गुलाब यादव ने विधान पार्षद चुनाव में सुमन कुमार महासेठ (फ़िलहाल वीआईपी उम्मीदवार) को ही हराया था.
अपने पिता के कैंपेन के लिए निकल रहीं बिंदु गुलाब यादव बीबीसी से कहती हैं, “पिछले चुनाव में जो जीते, उन्होंने लोगों की कोई उम्मीद पूरी नहीं की. इस बार सबका साथ गुलाब जी के साथ है. 51 प्रतिशत हाथी छाप मत पड़ेगा, बाक़ी 49 प्रतिशत दूसरे सब सिमटे हुए हैं.असली महागठबंधन के उम्मीदवार गुलाब जी ही हैं.”
'सबका कलेजा तोड़ कर हाथी निकलेगा'
ब्लॉक प्रमुख के तौर पर राजनीति शुरू करने वाले गुलाब यादव की राजनीति में उभार का अहम पड़ाव साल 2015 है जब वो आरजेडी के टिकट पर झंझारपुर से विधायक बने.
साल 2019 के लोकसभा चुनाव में आरजेडी के ही टिकट पर उन्होंने झंझारपुर लोकसभा चुनाव लड़ा था. लेकिन पत्नी को विधान पार्षद का निर्दलीय चुनाव लड़ाने और पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर मार्च 2022 में आरजेडी ने उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया.
ऐसे में गुलाब यादव और इंडिया महागठबंधन का आधार वोट एक ही है. महागठबंधन उम्मीदवार के आधार वोट में सेंध लगाने के सवाल पर गुलाब यादव कहते हैं, “वीआईपी का कुछ नहीं है, सब हवा है. जिस पहलवान (सुमन महासेठ) की बात कर रहे हैं, ऐसी पटखनिया दो साल पहले मारे हैं कि जल्दी होश न आया. और अबकी बार ऐसा हराएंगे कि पाताल में चला जाएगा. सबका कलेजा तोड़ कर हाथी निकलेगा.”
गुलाब यादव के चुनावी एफिडेविट में ये दर्ज है अंबिका गुलाब यादव के अलावा भी उनकी एक और पत्नी हैं जिनका नाम माधवी गुलाब यादव है. साथ ही गुलाब यादव पर साल 2023 में दुष्कर्म का भी मामला दर्ज हुआ था.
'अनाज दिया है लेकिन अब घर और बाथरूम दे सरकार'
दोपहर के 12 बजे हैं और गुलाब यादव के घर से तकरीबन 50 किलोमीटर दूर अंधराठाढ़ी प्रखंड में महंत राजेश्वर गिरी उच्च विद्यालय के खेल मैदान में एलजेपी (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान भाषण दे रहे हैं.
उनका गला ख़राब है और वो माइक की आवाज़ बढ़ाने के लिए कह रहे हैं. उनके बगल में ही एनडीए उम्मीदवार और निवर्तमान सांसद रामप्रीत मंडल और जेडीयू से राज्यसभा सांसद संजय झा बैठे हैं.
चिराग पासवान, विरासत टैक्स और मोदी सरकार द्वारा महिलाओं के लिए किए गए काम गिना रहे हैं.
सैकड़ों की भीड़ में पीछे बैठी सुलेना देवी चिराग की बातों पर सहमति से सिर हिला रही हैं. वो कहती हैं, “मोदी जी को वोट देंगे.वृद्धा पेंशन देते हैं और अंत्योदय का चावल फ्री देते हैं.”
उनके पास बैठी डोमनी देवी कहती हैं, “खुश हूं. सरकार ने अनाज दिया है, पैसे देता है. बाक़ी अबकी बार घर और बाथरूम सरकार दे दे तो अच्छा होगा.”
लेकिन राजो देवी नाराज़ हैं. वो कहती हैं, “सब कुछ चमचा बेलचा को मिलता है. दुसाध-मुसहर को कोई पूछने वाला नहीं है. सरकार को बच्चों को रोज़गार देना चाहिए. सरकार जो पैसे देती है मदद के लिए,उससे काम चलेगा क्या?”
'मैंने अपने मतदाता मालिक से माफ़ी मांग ली है'
इस भीड़ में मौजूद ज्यादातर महिलाएं जेडीयू उम्मीदवार रामप्रीत मंडल का नाम नहीं जानतीं. लेकिन वो मोदी, तीर छाप और नीतीश को जानती हैं.
दिलचस्प है कि जहां क्षेत्र में महिलाएं मीडिया से क्या बात कर रही हैं, उस पर नज़र उनके साथ आए पुरुष रखते हैं, वैसे ही झंझारपुर लोकसभा उम्मीदवार रामप्रीत मंडल मीडिया को क्या बयान दे रहे हैं, इस पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है.
दरअसल, कुछ दिनों पहले ही रामप्रीत मंडल का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वो कह रहे थे, “जब लोगों से मिलने जाते हैं तो वो गाय-भैंस चराने चले जाते हैं.”
इस बयान के वायरल होने के बाद से ही रामप्रीत मंडल के आसपास रहने वाले लोग उनकी हर बातचीत पर नज़र रख रहे हैं.
बीबीसी से बातचीत में रामप्रीत मंडल कहते हैं, “हमारी लड़ाई तो किसी से नहीं है. नीतीश जी, मोदी जी, चिराग जी के चलते मेरी जीत पक्की है. कोरोना काल में हम नहीं जा सके इसके लिए हमने मतदाता मालिक से माफी मांग ली है. बाक़ी एंटी-इनकंबेंसी तो रूलिंग पार्टी के साथ हो ही जाता है.”
'मेरी लड़ाई जेडीयू से है, मीडिया गुलाब को हाईलाइट कर रहा'
दोपहर ढल रही है और सूरज की तपिश कम हो चुकी है. मधुबनी के बाबूबरही के जगदीश चन्द्र नन्दन उच्च विद्यालय के मैदान में छितराई हुई हज़ारों की भीड़ जमा है. आसपास के लोग पड़ोसियों के साथ अपने घरों की छतों पर खड़े हैं.
मंच पर से भाषण लगातार चल रहा है. मंच के दोनों ओर लेडीज़ पर्स टंगा है जो विकासशील इंसान पार्टी का चुनाव चिन्ह है.
इंडिया गठबंधन के प्रमुख चेहरे तेजस्वी यादव की यहां सभा होनी है और उनके हेलिकॉप्टर उतरने का सब बेसब्र होकर इंतज़ार कर रहे है. मंच से भाषणों का दौर जारी है. इंडिया गठबंधन ने इस सीट पर विकासशील इंसान पार्टी के सुमन कुमार महासेठ को उम्मीदवार बनाया है.
बीजेपी से जुड़े रहे सुमन कुमार महासेठ के रिश्ते राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी रहे हैं. जिसकी तस्वीरें आजकल इंटरनेट पर वायरल हैं.
क्या गुलाब यादव उनका वोट काटेंगे, इस सवाल पर वो बीबीसी से कहते हैं, “महागठबंधन का सारा आधार वोट मेरे साथ है और साथ ही निवर्तमान सांसद का एंटी-इनकंबेंसी भी. ग्राउंड पर हाथी का एक भी वोटर आपको नहीं मिलेगा. मेरी लड़ाई जेडीयू से है, मीडिया ही गुलाब यादव को हाईलाइट कर रही है.”
'ये तो अपने डेथ वारंट पर साइन करने जैसा है'
साल 2020 में सुमन कुमार महासेठ, विधानसभा चुनाव वीआईपी उम्मीदवार के तौर पर लड़े थे. तब वीआईपी बीजेपी के साथ चुनाव लड़ रही थी. उस वक्त चुनाव लड़ने के लिए सुमन कुमार महासेठ बीजेपी से वीआईपी में शामिल हो गए थे, लेकिन चुनाव हारने के बाद फिर से वो बीजेपी में शामिल हुए.
इस बार बीजेपी से टिकट नहीं मिलने की स्थिति में वो फिर से वीआईपी में शामिल हो गए और उन्हें झंझारपुर से लोकसभा का टिकट मिल गया.
स्थानीय पत्रकार राजकुमार झा बीबीसी से कहते है, “मुसलमानों में कंफ्यूजन है. क्योंकि इनका आरएसएस वाला फोटो सोशल मीडिया पर वायरल है. अभी जो राजनीति है, उसमें मुसलमानों के लिए सुरक्षा अहम विषय है.”
हालांकि, इस संबंध में पूछने पर सुमन कुमार महासेठ बीबीसी से कहते हैं, “मेरी पहचान आज के दिन में महागठबंधन से जुड़ी है.”
लेकिन क्या ये बात इतनी आसान है, इसका जवाब गुलाब यादव के घर पर मिलता है.
यहां विराटनगर (नेपाल) से अपनी दांयी आंख का ऑपरेशन कराके आए मोतिउर रहमान बैठे हैं. वो मधेपुर ब्लॉक के रहने वाले हैं. वो बताते हैं कि वोट डालने के लिए अस्पताल से पन्द्रह दिन की छुट्टी लेकर आए हैं. वोट डालकर फिर दूसरी आंख का ऑपरेशन कराने जाएंगे.
मोतिउर रहमान बीबीसी से कहते हैं, “हम गुलाब यादव के यहां चाय भी नहीं पिएंगे, लेकिन वोट इन्हीं को देंगे. इनको आरजेडी टिकट दे देता तो यादव मुसलमान का वोट कहीं नहीं जाता.”
इसी तरह मुस्लिम नौजवान अज़मी बीबीसी से कहते हैं, “तेजस्वी यादव सब मुसलमानों को मारने वालों को टिकट दे देंगे और हम उन्हें वोट दे देंगे. ये तो अपने डेथ वारंट पर साइन करने जैसा है.”
झंझारपुर लोकसभा क्षेत्र का गणित
कोसी और कमला की धार पर बसा झंझारपुर, बिहार के मधुबनी ज़िले का अनुमंडल है. जिसे कई सालों से ज़िले का दर्जा दिए जाने की मांग होती रही है.
इसके अंर्तगत खजौली, बाबूबरही, राजनगर, झंझारपुर, फुलपरास, लौकहा विधानसभा क्षेत्र आते हैं. जिसमें से पांच पर एनडीए और सिर्फ़ एक यानी लौकहा विधासनसभा पर आरजेडी का क़ब्ज़ा है.
पहली बार ये लोकसभा सीट 1972 में अस्तित्व में आई और यहां से जगन्नाथ मिश्र ने जीत दर्ज की थी.
1972 से अब तक 11 सांसद पिछड़े – अति पिछड़े समुदाय से चुने गए हैं. जातिगत संरचना की बात करें तो यहां 35 फीसदी अति पिछड़ा वोट निर्णायक है. अन्य जातियों में यादव 20 फीसदी और मुस्लिम 13 फीसदी हैं.
झंझारपुर से सबसे ज़्यादा बार सांसद आरजेडी से देवेन्द्र प्रसाद यादव रहे हैं. उन्होंने इस सीट पर पांच बार जीत दर्ज की.
उन्होंने हाल ही में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया. उन्होंने लालू प्रसाद यादव को चिठ्ठी लिख कर दर्जन भर सीट पर आयातित उम्मीदवार उतारने पर नाराज़गी जाहिर की.
उन्होंने लिखा कि समाजवादियों की धरती से कार्यकर्ताओं के बदले किसी सांप्रदायिक सोच वाले व्यक्ति को झंझारपुर से उम्मीदवार बनाने के फ़ैसले से वो बुरी तरह आहत हुए हैं.
साफ़ है कि देवेन्द्र यादव की नाराज़गी, गुलाब यादव की उम्मीदवारी और सुमन कुमार महासेठ की पुरानी छवि.. इंडिया गठबंधन की राह के मुश्किल रोड़े हैं.
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