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श्रीलंका में धर्मगुरु समेत सात की मौत: पुनर्जन्म की चाहत में आत्महत्या का संदेह, क्या है मामला
- Author, रंजन अरुण प्रसाद
- पदनाम, संवाददाता, बीबीसी तमिल
श्रीलंका में एक धर्मगुरु समेत सात लोगों की मौत चर्चा में है. मरने वालों में तीन बच्चे शामिल हैं.
ये दावा किया जा रहा है कि आत्महत्या के बाद जल्दी ही दोबारा जन्म लेने के दावे से प्रेरित होकर इन लोगों ने जान दी. मरने वाले तीन बच्चों के खाने में कथित तौर पर उनकी मां ने ज़हर मिला दिया था.
स्थानीय पुलिस इस मामले की जांच कर रही है.
शुरुआती जांच के अनुसार, 47 साल के बौद्ध धर्मगुरु रुवन प्रसन्ना गुणरत्ने ने अपने उपदेशों में कहा था कि आत्महत्या के बाद लोग जल्द ही पुनर्जन्म ले सकते हैं.
गुणरत्ने पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने बौद्ध धर्म की गलत व्याख्या करते हुए श्रीलंका के विभिन्न हिस्सों में उपदेश दिया.
ये बताया गया है कि गुणरत्ने शुरू में एक केमिकल लैब में काम करते थे, लेकिन बाद में यह काम छोड़कर वे लोगों को उपदेश देने लगे.
आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुजर रहे हैं तो भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.
धर्मगुरु के परिवार में पांच की मौत
धर्मगुरु गुणरत्ने ने 28 दिसंबर को अपने घर में जहर खाकर आत्महत्या कर ली.
पुलिस ने बताया कि धर्मगुरु की पत्नी ने अपने तीन बच्चों को कथित तौर पर खाने में जहर दिया, और बाद में उन्होंने भी आत्महत्या कर ली.
पुलिस को शुरू में संदेह हुआ कि महिला अपने पति की मौत का दुख बर्दाश्त नहीं कर पाई है जिसके चलते उसने आत्महत्या की है, लेकिन बाद में जब घटना को लेकर कई तरह की बातें सामने आईं तो पुलिस ने कई एंगल से इस पूरे मामले की जांच की.
जांच के दौरान पुलिस ने परिवार के अंतिम संस्कार में शामिल हुए 34 साल के पिरथी कुमार नाम के व्यक्ति को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया.
पिरथी ने बताया कि वह कुछ साल पहले इस धर्मगुरु के धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल हुआ था. तब से वो धार्मिक गुरु और उनके परिवार के अनुष्ठान में हिस्सा लेते रहे हैं.
पिरथी ने बताया कि धर्मगुरु के उपदेशों में आत्महत्या जैसे विषय शामिल होते थे. पुलिस को उनसे पता चला कि जल्द पुनर्जन्म के इरादे से धर्मगुरु ने आत्महत्या की थी.
पूछताछ के कुछ ही समय बाद 2 जनवरी को पिरथी कुमार का शव एक होटल से बरामद हुआ. पुलिस जांच में पता चला कि उन्होंने भी नशीली दवा खाकर आत्महत्या की है.
कथित तौर पर जो दवा खाकर आत्महत्या करने की बात कही जा रही है, उस दवा को पुलिस ने होटल से जब्त कर लिया है.
इस तरह धर्मगुरु और उनके परिवार के अंतिम संस्कार में शामिल हुई एक अन्य महिला ने भी कथित तौर पर जहर खाकर आत्महत्या कर ली है.
पुलिस ने बताया कि आत्महत्या करने वाली महिला भी धर्मगुरु के उपदेश कार्यक्रम में शामिल हुई थी.
साइनाइड जैसे जहर का शक
क्या आत्महत्या करने वालों ने एक ही तरह के जहर का इस्तेमाल किया, पुलिस इसकी भी जांच कर रही है.
पुलिस अब उन अन्य लोगों से भी पूछताछ कर रही है जो धर्मगुरु और उनके परिवार के अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे.
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के प्रवक्ता निहाल तालुदा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इन सभी ने साइनाइड जैसा जहर खाकर आत्महत्या की है.
उन्होंने कहा, “सभी चार मामलों में मरने का तरीका लगभग एक जैसी दिखाई दिया. हमें एक बैग मिला है, जिसमें जहर होने का संदेह है. हमें एक छोटी बाल्टी में भी जहर मिला है. हमें लगता है कि यह साइनाइड है. लैब रिपोर्ट के बाद हम ज्यादा जानकारी सामने रख पाएंगे.”
जांच में सामने आया है कि धर्मगुरु ने जहर खाकर आत्महत्या करने और मरने के बाद पहले से अच्छा जन्म मिलने का उपदेश दिया था.
पुलिस का कहना है कि ऐसे बहुत सारे लोग थे, जो उन पर विश्वास करते थे. धर्मगुरु ने उन्हें मानने वाले लोगों से कहा था कि वे इस उपदेश को अपने रिश्तेदारों को भी बताएं.
मोक्ष पाने की चाह में 11 लोगों ने दी जान
इसी से मिलता जुलता एक मामला पांच साल पहले दिल्ली से सामने आया था.
30 जून 2018 की देर रात दिल्ली के बुराड़ी में भाटिया परिवार के 11 लोगों ने आत्महत्या कर ली थी.
मूल रूप से राजस्थान के चित्तौड़गढ़ का रहने वाला परिवार करीब बास साल पहले दिल्ली आकर बसा था और एक रोज इस परिवार ने ‘मोक्ष’ पाने की एक भ्रामक चाह की पीछा करते हुए अपनी जान ले ली.
सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि परिवार ने खुद को फांसी पर लटकाने के लिए पड़ोसियों से स्टूल लिया था.
परिवार की सबसे वृद्ध नारायण देवी(77) थीं, जो कमरे में फर्श पर मृत पाईं गईं. इसके अलावा उनके बड़े बेटे भवनेश उर्फ भुप्पी (50), दूसरा बेटा ललित (45) और उन दोनों की पत्नियां सविता (48) और टीना (42) भी फंदे से लटके थे. भुप्पी की दो युवा बेटियां और एक नाबालिग बेटा साथ ही ललित का एक 15 वर्षीय बेटा भी मृत पाए गए.
रविवार सुबह जब पहले चश्मदीद गुरचरण सिंह घर में घुसे तो 10 लोग फंदे से लटके पाए गए थे. वह बताते हैं कि सारे दरवाज़े खुले थे.
जांच कर रही पुलिस को घर से दो रजिस्टर मिले थे, जिनमें आध्यात्मिक और मोक्ष से संबंधित बातें लिखी थीं.
पूरी दुनिया में ऐसे मामले
ऐसे मामले सिर्फ़ भारत में ही नहीं, बल्कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और अन्य देशों में भी सामने आते रहे हैं.
मेलबर्न में पांच सदस्यों के एक परिवार को अपना घर इसलिए छोड़कर जाना पड़ा क्योंकि उन्हें लगता था कि वहां उनमें से किसी की हत्या हो जाएगी.
'अपार्ट' नाम से एक फ़िल्म भी आई थी जिसमें 'शेयर्ड साइकोसिस' से जुड़ा मामला दिखाया गया था. इसमें एक कपल को लगता था कि उन्हें कोई मारने वाला है.
लेकिन, समस्या तब पैदा होती है जब ऐसे हालातों में लोग इलाज से ज्यादा तंत्र-मंत्र पर भरोसा करने लगते हैं.
संभव है कि भाटिया परिवार में भी ऐसा हुआ हो.
कभी-कभी ऐसी मान्यताओं के अतिवादी एक ख़ास पंथ भी बना लेते हैं. अंधविश्वास के ख़िलाफ़ काम करने वाले डॉ. दाभोलकर और गोविंद पनसारे को मारने वाले लोग ऐसी ही संस्था से जुड़े थे जो पंथ को बढ़ावा देता है.
कोलकाता का 'आनंद मार्ग' या जापान का ओम शिनरिक्यो ऐसे ही पंथों के उदाहरण हैं. ओम शिनरिक्यो के अनुयायियों ने 1995 में टोक्यो में जहरीली गैस छोड़ दी थी. उनका दावा था कि इसके जरिए 'हम अंतिम सत्य की तलाश कर रहे हैं.'
जापान की सरकार ने उन्हें अतिवादी घोषित कर दिया था और गिरफ़्तार कर लिया था.
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