बोंडी बीच अटैक: हमलावर साजिद का भारत से नाता, क्या कह रहा है पाकिस्तानी मीडिया

बोंडी बीच हमले में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि देती एक महिला

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इमेज कैप्शन, बोंडी बीच पर हुई गोलीबारी में 15 लोगों की मौत हुई है
    • Author, ज़ैनुल आबिद
    • पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग

पाकिस्तानी मीडिया ने 14 दिसंबर को सिडनी के बोंडी बीच पर हुई गोलीबारी में शामिल दो बंदूकधारियों के भारत से संबंधों पर विस्तार से रिपोर्ट की है.

डेली टाइम्स अख़बार की एक रिपोर्ट में कहा गया है, "ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों और सामुदायिक सूत्रों ने बोंडी बीच हमले को पाकिस्तान से जोड़ने वाले ऑनलाइन दावों को खारिज करते हुए पुष्टि की है कि हमले में शामिल हमलावर भारतीय मूल के थे."

भारत के तेलंगाना राज्य की पुलिस ने 16 दिसंबर को कहा कि हमलावरों में से एक साजिद अकरम ने नवंबर 1998 में ऑस्ट्रेलिया बसने से पहले हैदराबाद से बीकॉम की डिग्री पूरी की थी.

घटना वाले दिन साजिद अकरम की आस्ट्रेलियाई पुलिस की कार्रवाई में मौत हो गई थी.

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मंगलवार को तेलंगाना पुलिस ने बताया था ऑस्ट्रेलिया में बसने के बाद साजिद अकरम ने पारिवारिक कारणों से छह बार भारत की यात्रा की थी, आखिरी यात्रा साल 2022 में दो हफ़्ते की थी.

यहूदियों के हनुका त्योहार के दौरान हुए हमले में 15 लोगों की मौत हुई है, जो ऑस्ट्रेलिया में लगभग 30 वर्षों में हुई सबसे भयानक गोलीबारी की घटना है.

इस हमले के तुरंत बाद, कुछ भारतीय पत्रकारों और सोशल मीडिया यूज़र्स ने संदिग्धों का संबंध पाकिस्तान से होने का दावा किया था.

पाकिस्तानी मीडिया ने भारत पर पाकिस्तान को बदनाम करने का आरोप लगाया

जियो न्यूज़ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बंदूकधारियों की पहचान की पुष्टि होने से भारतीय मीडिया "शर्मिंदा" हो गई है क्योंकि इससे उनके आरोपों का पर्दाफ़ाश हो गया है

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इमेज कैप्शन, जियो न्यूज़ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बंदूकधारियों की पहचान की पुष्टि होने से भारतीय मीडिया के आरोपों का पर्दाफ़ाश हो गया

पाकिस्तानी मीडिया के मुख्य आउटलेट्स ने भारतीय मीडिया के एक वर्ग पर पाकिस्तान के ख़िलाफ़ अभियान चलाने का आरोप लगाया है.

पाकिस्तानी मीडिया ने कहा कि बोंडी बीच के बंदूकधारियों की पहचान की पुष्टि होने के बाद ऐसी झूठी रिपोर्टों का पर्दाफ़ाश हुआ.

जियो न्यूज़ टेलीविज़न की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय न्यूज़ चैनलों ने गोलीबारी की घटना के तुरंत बाद बिना किसी सबूत के हमलावरों का पाकिस्तान से संबंध जोड़कर पाकिस्तान के ख़िलाफ़ प्रचार शुरू कर दिया.

उर्दू अख़बार डेली पाकिस्तान की एक रिपोर्ट में भी यही लिखा गया, "हमले में अकरम की संलिप्तता दुनिया में आतंकवाद को बढ़ावा देने की भारत की नीति का प्रमाण है."

उर्दू अख़बार नवा-ए-वक्त के एक संपादकीय में कहा गया है कि इस बात ने भारतीय और इसराइली मीडिया के पाकिस्तान को इस घटना से जोड़ने और "फ़र्ज़ी दावे" फैलाने के लिए शुरू किए गए अभियान को उजागर किया है.

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सरकारी पीटीवी न्यूज़ चैनल की उर्दू वेबसाइट पर एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बोंडी बीच घटना के तुरंत बाद एक अभियान शुरू किया गया था, जिसका मकसद "फ़र्ज़ी सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल के ज़रिए पाकिस्तान को बदनाम करना" था.

इसमें आगे कहा गया है कि तथ्य सामने आने के बाद यह साबित हो गया कि ये पाकिस्तान को बदनाम करने की कोशिश थी, जो "बेबुनियाद" थी.

अंग्रेजी भाषा की वेबसाइट जियो न्यूज़ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बंदूकधारियों की पहचान की पुष्टि होने से भारतीय मीडिया "शर्मिंदा" हो गया है क्योंकि इससे उनके आरोपों का पर्दाफ़ाश हो गया है.

'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' में 16 दिसंबर को छपी एक रिपोर्ट में कहा गया, "राजनयिक पहल ने पिछले 24 घंटों में भारतीय मीडिया के उस नैरेटिव को कमज़ोर कर दिया, जिसमें मोदी सरकार के निर्देशों के तहत हमलावरों को ग़लत तरीके से पाकिस्तानी मूल का बताया गया था."

16 दिसंबर को 'डॉन' में एक संपादकीय में कहा गया, "सिडनी हमले जैसी त्रासदियों का इस्तेमाल कभी भी इस्लाम विरोधी विचारों या प्रवासी विरोधी बयानबाजी को बढ़ावा देने के लिए नहीं किया जाना चाहिए."

इसमें कहा गया है, "नफ़रत के ज़रिए समाज को बांटने देना आईएस जैसे आतंकवादी समूहों के साथ-साथ पश्चिम और अन्य जगहों के धुर दक्षिणपंथी चरमपंथियों के लिए एक जीत होगी, जो मुसलमानों, प्रवासियों और अश्वेत लोगों को बदनाम करना चाहते हैं."

पाकिस्तान में कई सोशल मीडिया यूज़र्स इस बात से ख़ुश दिखे कि बोंडी बीच घटना से पाकिस्तान का संबंध होने के भारतीय मीडिया के दावे ग़लत निकले.

एक्स यूज़र इहतिशामुल हक ने पोस्ट किया, "गोदी मीडिया हैरान है ! उन्होंने पूरी दुनिया से झूठ बोला और अपने ही लोगों को बेवकूफ़ बनाया. अब वे अपना चेहरा छुपा रहे हैं. साजिद अकरम भारतीय निकला है, और यह अब इंटरनेशनल हेडलाइन बन गई है."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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