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जयशंकर के अमेरिका दौरे पर इतनी बातें क्यों, क्या भारत को निराशा हाथ लगी?
डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर गए थे. भारत में सोशल मीडिया पर कई लोग जयशंकर की तस्वीर शेयर करते हुए लिख रहे थे कि ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में भारतीय विदेश मंत्री को पहली पंक्ति में जगह दी गई थी.
इंडिया टुडे ने ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह की एक तस्वीर शेयर करते हुए 21 जनवरी को लिखा था कि भारतीय विदेश मंत्री को अग्रणी पंक्ति में बैठने की जगह दी गई.
इस फोटो को शेयर करते हुए अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू की डिप्लोमैटिक अफेयर्स एडिटर सुहासिनी हैदर ने लिखा, ''यह अहम है कि ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में जयशंकर को पहली पंक्ति में जगह मिली जबकि क्वॉड गुट के देश ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्रियों को कुछ पंक्ति पीछे जगह मिली.''
अमेरिका के डेलावेयर यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर मुक़्तदर ख़ान ने जयशंकर की तस्वीर दिखाते हुए एक वीडियो बनाया है, जिसमें वह दिखा रहे हैं कि भारतीय विदेश मंत्री पहली नहीं तीसरी लाइन में बैठे थे.
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मुक़्तदर ख़ान ने कहा, ''नरेंद्र मोदी को डोनाल्ड ट्रंप ने शपथ ग्रहण समारोह में निजी तौर पर आमंत्रित नहीं किया था. नरेंद्र मोदी ने ट्रंप के शपथ लेने के बाद ट्वीट कर बधाई दी थी और जयशंकर से एक पत्र भी भेजा था. लेकिन ट्रंप ने नरेंद्र मोदी को फ़ोन नहीं किया. ट्रंप ने राष्ट्रपति जिनपिंग को ख़ुद से फोन करके दावत दी. ट्रंप ने चीन के ख़िलाफ़ टैरिफ लगाने की धमकी दी थी लेकिन अभी तक उन्होंने टैरिफ नहीं लगाया है.''
जयशंकर को शपथ ग्रहण में कहाँ जगह मिली?
मुक़्तदर ख़ान ने कहा, ''डॉ जयशंकर ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में तीसरी पंक्ति में थे. मुझे नहीं लगता है कि ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में जयशंकर का शामिल होना बहुत बड़ी बात है. जयशंकर से ज़्यादा अच्छी तस्वीर तो मुकेश अंबानी और उनकी पत्नी की है."
''अच्छी से मतलब है कि इनकी मुलाक़ात डोनाल्ड ट्रंप से हुई. जयशंकर ने जो तस्वीर पोस्ट की, उसमें उनके साथ काश पटेल और विवेक रामास्वामी हैं. आमंत्रण भारत को मिला था और भारत ने जयशंकर को भेजने का फ़ैसला किया था. ट्रंप चीन से संबंध सुधारने की कोशिश कर रहे हैं.''
इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंक सानोबर इंस्टिट्यूट के कार्यकारी निदेशक क़मर चीमा ने जयशंकर के अमेरिका दौरे को लेकर कई बातें कही हैं. क़मर चीमा कहते हैं, ''जयशंकर ने क्वॉड देशों के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की. जयशंकर ने अमेरिका के नए विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ बैठक के बाद भी प्रेस कॉन्फ़्रेंस नहीं की. भारतीय विदेश मंत्री ने वॉशिंगटन स्थित अपने दूतावास में आकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की. ''
क़मर चीमा ने कहा, ''मार्को रुबियो और जयशंकर की मुलाक़ात के बाद कोई प्रेस कॉन्फ़्रेंस नहीं हुई. इसका मतलब यह है कि दोनों इसके लिए सहज नहीं थे. दूसरा मतलब यह है कि कुछ ठोस बात नहीं हुई. दोनों के बीच यह पहली मुलाक़ात थी और हम उम्मीद कर रहे थे कि वे मीडिया से बात करेंगे. या तो मार्को रुबियो सहज नहीं थे या तो जयशंकर तैयार नहीं थे.''
चीमा कहते हैं, ''मेरा मूल्यांकन है कि मार्को रुबियो से डॉ जयशंकर ख़ुश नहीं हैं. मार्को रुबियो से हाथ मिलाने की पहल जयशंकर ने की थी. मुझे मार्को रुबियो की बॉडी लैंगवेज बहुत सकारात्मक नहीं दिख रही थी और जयंशकर भी बहुत सहज नहीं थे. हो सकता है कि मैं ग़लत होऊं.''
सोशल मीडिया पर एस जयशंकर और मार्को रुबियो की मुलाक़ात का जो वीडियो क्लिप शेयर किया जा रहा है, उसमें साफ़ दिख रहा है कि रुबियो से हाथ मिलाने की पहल जयशंकर ने की. ट्रंप ने शपथ लेने के बाद कई ऐसे संकेत दिए हैं, जिनके आधार पर कहा जा रहा है कि वह चीन से सीधे टकराने की बजाय संबंध अच्छा करने पर ज़ोर दे रहे हैं.
चीन से करीबी बढ़ा रहे हैं ट्रंप?
ट्रंप ने शी जिनपिंग को शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था. भारत के साथ ट्रंप ने ऐसा नहीं किया.
अमेरिकी अख़बार वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक़ ट्रंप ने अपने अधिकारियों से कहा है कि वह सौ दिन के भीतर चीन का दौरा करना चाहते हैं. ट्रंप ने चीनी स्वामित्व वाले ऐप टिक टॉक को बैन करने का फ़ैसला भी टाल दिया है. ऐसे में कहा जा रहा है कि ट्रंप का चीन के प्रति रुख़ राष्ट्रपति बनने के बाद बदला-बदला सा लग रहा है.
अमेरिकी मीडिया आउटलेट ब्लूमबर्ग के अनुसार, भारत सरकार ट्रंप की चुनौतियों से निपटने की तैयारी कर रही है. ब्लूमबर्ग ने लिखा है कि अगर ट्रंप भारत के मामले में टैरिफ को लेकर अड़ जाते हैं तो मोदी सरकार एक ट्रेड डील के लिए तैयार हो जाएगी.
हालांकि जयशंकर ने कहा था कि अमेरिका में ट्रंप की जीत से जिन देशों को डर है, उनमें भारत नहीं है. लेकिन ट्रंप प्रशासन की ओर से अब तक कोई आश्वासन नहीं मिला है.
ब्लूमबर्ग ने लिखा है कि ट्रंप प्रशासन भारत के ट्रेड सरप्लस को कम करना चाहता है. भारत से अमेरिका का व्यापार घाटा पिछले साल 35.3 अरब डॉलर का था. यानी भारत ने 35 अरब डॉलर के ज़्यादा सामान अमेरिका में बेचा था.
ट्रंप नहीं चाहते हैं कि भारत के साथ व्यापार घाटा अमेरिका का हो. ब्लूमबर्ग ने लिखा है कि भारत अमेरिका से आयात होने वाले सामानों पर टैरिफ कम कर सकता है और साथ ही आयात बढ़ा सकता है.
ब्लूमबर्ग ने लिखा है, ''भारत अमेरिका से ज़्यादा व्हिस्की, स्टील और तेल ख़रीद सकता है. इसके अलावा भारत अमेरिका से आयात होने वाले सामान पर टैरिफ में कटौती कर सकता है. भारत ट्रंप प्रशासन से टकराने के मूड में नहीं है. भारत अमेरिका से 18 हज़ार अपने अवैध प्रवासियों को भी वापस बुलाने पर तैयार हो गया है. मार्को रुबियो ने जयशंकर के साथ अवैध भारतीय प्रवासियों का भी मुद्दा उठाया था.''
भारत के लिए झटका
भारत के ख़िलाफ़ ट्रंप की टैरिफ धमकी को लेकर भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने लिखा है, ''ट्रंप भारत पर टैरिफ लगाते हैं तो यह अमेरिका की आर्थिक दादागिरी होगी. अमेरिका की अर्थव्यवस्था भारत से बहुत बड़ी है. अमेरिका की अर्थव्यवस्था 29 ट्रिलियन डॉलर की है, जबकि भारत की महज चार ट्रिलियन डॉलर की. अमेरिका में प्रति व्यक्ति आय 66 हज़ार डॉलर है, जबकि भारत में केवल 2400 डॉलर. अमेरिका दुनिया की आर्थिक व्यवस्था को कंट्रोल करता है. अंतरराष्ट्रीय व्यापार डॉलर में होता है और इससे अमेरिका का दबदबा और बढ़ जाता है.''
सिब्बल ने लिखा है, ''अमेरिकी नीतियों से दुनिया भर की अर्थव्यवस्था प्रभावित होती हैं. अमेरिका भारत से अपनी तुलना नहीं कर सकता है. मुक़ाबला बराबरी में होता है. अमेरिका का व्यापार घाटा मुख्य रूप से चीन के साथ ज़्यादा है. चीन से अमेरिका का व्यापार घाटा 30 फ़ीसदी है, ईयू से 16 फ़ीसदी है और कनाडा से 15 फ़ीसदी. भारत से अमेरिका का व्यापार घाटा महज 3.2 प्रतिशत है. भारत इस मामले में नौवें नंबर पर है.''
2022 में भारत और अमेरिका का द्विपक्षीय व्यापार 191.8 अरब डॉलर का था. भारत ने 118 अरब डॉलर का निर्यात किया था और आयात 73 अरब डॉलर का था. यानी भारत का 2022 में 45.7 अरब डॉलर सरप्लस व्यापार था.
लेकिन ट्रंप ने अमेरिका फर्स्ट पॉलिसी के तहत भारत के ख़िलाफ़ टैरिफ लगाया तो चीज़ें बदलेंगी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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