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अजित पवार के महाराष्ट्र सरकार में आने से एकनाथ शिंदे का क्या होगा?
जब महाराष्ट्र के मौजूदा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना से बग़ावत करने के बाद ये भी कहा था कि वे महाविकास अघाड़ी की सरकार में अजित पवार से नाराज़ थे.
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार में अजित पवार उप मुख्यमंत्री थे.
शिंदे गुट की बग़ावत के चलते शिवसेना में फूट पड़ गई और महाविकास अघाड़ी सरकार भी गिर गई.
शिंदे गुट के विद्रोह के एक साल पूरे होने पर अब अजित पवार ने शिंदे कैबिनेट में उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली है.
जब महाविकास अघाड़ी सरकार थी, तब एकनाथ शिंदे ने ये आरोप लगाया था कि तत्कालीन उप मुख्यमंत्री अजीत पवार उनके विधायकों के साथ अन्याय कर रहे थे.
उनका कहना था, "वे हमारे विधायकों को फ़ंड नहीं दे रहे थे, इसलिए हमने ये सरकार छोड़ दी है."
लेकिन अब वही अजित पवार शिंदे-फडणवीस की सरकार में शामिल हो गए हैं.
एकनाथ शिंदे और उनके विधायक अजित पवार के ख़िलाफ़ थे.
एक साल पहले एकनाथ शिंदे ने 40 विधायकों और 10 निर्दलीय विधायकों के साथ शिवसेना छोड़ दी थी और फिर बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई.
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कौन हैं ये 16 विधायक?
कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के सत्ता संघर्ष को लेकर फ़ैसला सुनाया था.
इसमें शिव सेना और मूल पार्टी के 16 विधायकों की अयोग्यता पर फ़ैसला लेने का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर को दिया गया है.
उद्धव बाला साहेब ठाकरे की शिवसेना कह रही है कि एक निश्चित समय के भीतर इस पर फ़ैसला लेना ज़रूरी है.
लेकिन सत्ता पक्ष का कहना है कि राष्ट्रपति जितना भी चाहें समय ले सकते हैं, ये उनका अधिकार है.
ये विधायक हैं-
एकनाथ शिंदे
तानाजी सावंत
प्रकाश सुर्वे
बालाजी किनिकर
लता सोनावणे
अनिल बाबर
यामिनी जाधव
संजय शिरसाट
भरत गोगवले
संदीपन भूमरे
अब्दुल सत्तार
महेश शिंदे
चिमनराव पाटिल
संजय रायमुलकर
बालाजी कल्याणकर
रमेश बोरोन
शिंदे समेत 15 विधायक अयोग्य होंगेः संजय राऊत
शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेता संजय राउत का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे समेत उनके गुट के 16 विधायक अयोग्य हो जाएँगे. क़ानून की कोई भी ख़ामी उन्हें नहीं बचा सकती.
उनके मुताबिक, "सरकार के अस्थिर होने का ख़तरा बरकरार है. इसीलिए अजित पवार को सरकार में शामिल कराया गया है."
उन्होंने कहा, “एकनाथ शिंदे को अयोग्य ठहराए जाने के बाद अगले कुछ दिनों में राज्य को नया मुख्यमंत्री मिलेगा. ये भविष्यवाणी नहीं बल्कि मेरी राय है.”
शिंदे गुट के विधायकों को कैबिनेट विस्तार में शामिल किया जाना चाहिए था, लेकिन क्या ऐसा हुआ?
शिंदे गुट के विधायक इस पर अब विचार कर रहे होंगे और हो सकता है कि आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति का नया रूप देखने को मिले.
संजय राउत का कहना है कि "शरद पवार को यक़ीन था कि अजित पवार बीजेपी के साथ जाएँगे."
अयोग्य क़रार दिए जाने की आशंका से बीजेपी का प्लान बी?
वरिष्ठ पत्रकार संदीप प्रधान का मानना है कि बीजेपी ने एनसीपी विधायकों को सरकार में सिर्फ़ इसलिए शामिल किया है क्योंकि एकनाथ शिंदे और 15 विधायकों को अयोग्य ठहराया जा सकता है.
अगर मुख्यमंत्री और 15 अन्य विधायक अयोग्य ठहराए जाते हैं, तो ये योजना उस गैप को भरने के लिए बनाई गई है.
संदीप प्रधान के मुताबिक़, "अगर अयोग्यता की कार्रवाई नहीं की गई तो भी शिंदे वरिष्ठ नेताओं देवेंद्र फडणवीस और अजीत पवार के बीच सैंडविच बन कर रह जाएँगे. ऐसी भी चर्चा है कि फडणवीस को भी केंद्र में मौक़ा दिया जा सकता है. फिर भी फडणवीस का फ़ोकस राज्य पर रहेगा."
प्रधान को लगता है कि दिल्ली में फडणवीस और राज्य में शिंदे-पवार की जोड़ी होगी.
वे कहते हैं, “हालांकि ताज़ा फ़ैसले ने शिंदे-फडणवीस-पवार को एक साथ ला दिया है, लेकिन वे असंतुष्ट रहेंगे. उन्हें सत्ता का लाभ नहीं मिलेगा.”
शिव सेना में फूट और बग़ावत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बहस हुई थी. अभी ये मामला सुलझा भी नहीं कि बीजेपी ने इसी तरह एक और पार्टी को तोड़ दिया है.
प्रधान ने कहा, “भाजपा का क़दम क़ानून की कसौटी पर खरा नहीं उतरता और यह अनैतिक और अवैध है.”
वो कहते हैं, ''बीजेपी 2024 का लोकसभा चुनाव जीतना चाहती है. उसे यक़ीन नहीं है कि एकनाथ शिंदे गुट को अपेक्षित सफलता मिलेगी. इसीलिए उन्होंने एनसीपी को साझीदार बनाया है. एनसीपी के पास क़द्दावर नेता हैं. वे पैसे से समर्थ हैं. इनमें से कुछ को लोकसभा टिकट मिल सकता है. चूँकि उनके पास उनका आधार क्षेत्र है इसलिए उनके चुने जाने की संभावना है.”
प्रधान ये भी कहते हैं कि कर्नाटक, बिहार, बंगाल में बीजेपी की ज़मीन खिसक गई है. उनका इरादा महाराष्ट्र में ज़्यादा से ज़्यादा सीटें हासिल करने का है.
प्रधान के अनुसार, “विधायकों की अयोग्यता का निर्णय विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के लिए अहम है. अगर फ़ैसला शिंदे गुट के पक्ष में आया, तो इससे व्यक्तिगत तौर पर उन पर और राष्ट्रपति की भूमिका पर सवाल उठ सकते हैं. उन्होंने बयान दिया था कि मैं साहसिक फ़ैसला लूँगा.”
प्रधान कहते हैं कि एक तरह से यह इस बात का संकेत है कि शिंदे गुट के विधायकों का क्या होने वाला है.
क्या ये बीजेपी का शिंदे गुट को जवाब है?
वरिष्ठ पत्रकार मृणालिनी नानिवाडेकर का कहना है कि चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि शिवसेना कौन है. 2019 में मतदाताओं ने देवेंद्र फडणवीस के रूप में एक युवा मुख्यमंत्री को चुना था.
उन्होंने कहा कि देवेंद्र फडणवीस को दोबारा मुख्यमंत्री बनने से रोकने की पूरी कोशिश की गई. बीजेपी ने इन कोशिशों को नाकाम कर दिया है. उसने एक साल पहले शिवसेना को तोड़ा था, अब एनसीपी के साथ वही हुआ है.
मृणालिनी नानिवाडेकर ने कहा कि अगर अजित पवार के पास 40 विधायक हैं तो पार्टी उनकी होगी.
उन्होंने आगे कहा, "फडणवीस को शिंदे और पवार के बीच समन्वय बनाना होगा. बीजेपी का लक्ष्य लोकसभा की जीत सुनिश्चित करना है. कुछ दिन पहले अख़बारों में एक विज्ञापन छपा था. जिसमें मुख्यमंत्री के तौर पर एकनाथ शिंदे को प्रमुखता दी गई थी. बाद में उस विज्ञापन की सामग्री बदली गई. ये बीजेपी को पसंद नहीं आया."
नानिवाडेकर ने कहा, "बीजेपी ने एनसीपी का समर्थन लेकर शिंदे गुट को करारा जवाब दिया है."
उन्होंने कहा, ''बीजेपी को अहसास हो गया है कि एकनाथ शिंदे और उनके गुट से हाथ मिलाने से लोकसभा में अपेक्षित सफलता नहीं मिलेगी. कोर्ट के फ़ैसले के वक़्त तीसरे विकल्प पर विचार किया गया."
शिंदे और असहाय होंगे?
वरिष्ठ पत्रकार विजय चोरमारे का कहना है कि रविवार को जो हुआ, वो बीजेपी के ऑपरेशन का हिस्सा था.
वे कहते हैं, "केंद्रीय तंत्र का उपयोग करके विपक्षी दलों के नेताओं पर दबाव डाला जाता है. एक सर्वे से पता चला है कि राज्य में बीजेपी को लोकसभा की 15 सीटें मिलेंगी. उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी एनसीपी से हाथ मिलाती है तो उसे 10 से 12 सीटें और मिलने की उम्मीद है."
विजय चोरमारे कहते हैं, “मुझे नहीं लगता कि ताज़ा घटनाक्रम में शिंदे की कोई भूमिका होगी. शिंदे बीजेपी के लिए कोई बड़ा मुद्दा नहीं हैं. 300 से ज़्यादा लोकसभा सीटों पर चुनाव का लक्ष्य बीजेपी के लिए दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है.”
चोरमारे के अनुसार, “एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री हैं लेकिन सभी महत्वपूर्ण फ़ैसले देवेंद्र फडणवीस लेते हैं. वे मुख्यमंत्री कार्यालय से संबंधित लगभग सारे निर्णय भी लेते हैं. फडणवीस की वजह से ही ब्रजेश सिंह को प्रमुख सचिव नियुक्त किया गया था. मुख्यमंत्री के रूप में भी शिंदे असहाय हैं.”
चोरमारे को लगता है कि अजित पवार के एनसीपी ग्रुप को साथ लेने के बाद वे और भी असहाय हो जाएँगे.
मुख्यमंत्री और 15 अन्य विधायकों की अयोग्यता पर फ़ैसला अभी लंबित है.
विधानसभा अध्यक्ष शिंदे गुट के ख़िलाफ़ फ़ैसला ले सकते हैं, तो विकल्प के तौर पर बीजेपी ने एनसीपी से हाथ मिला लिया है.
विधानसभा अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय किए गए दिशा निर्देश से बाहर नहीं जा सकते.
चोरमारे ने कहा, “अयोग्यता की लटकती तलवार को देखते हुए बीजेपी ने एक वैकल्पिक योजना बनाई है.”
उन्होंने आगे कहा, “बीजेपी के पास 105 विधायक हैं. शिंदे समूह और एनसीपी गुट दोनों के पास सीमित ताक़त है. भाजपा स्वागत भव्य करती है. लेकिन शामिल होने के बाद काम तो उसके साँचे में ही करना होगा.”
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