श्रेयस अय्यर के रंगत में आने से टीम मैनेजमेंट का तनाव घटा या बढ़ा

    • Author, मनोज चतुर्वेदी
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

भारत ने इंदौर में खेले गए दूसरे वनडे अंतरराष्ट्रीय मैच में ऑस्ट्रेलिया को 99 रन से फतह करके सिरीज़ पर क़ब्ज़ा जमा लिया.

इस सिरीज़ जीतने के दौरान भारतीय टीम की कुछ ख़ूबियां सामने आईं, जिनका टीम को अगले माह से शुरू होने वाले आईसीसी विश्व कप में फ़ायदा मिल सकता है.

भारतीय टीम ने मोहाली में पहला वनडे मैच जीतकर अपने को रैंकिंग में पहले नंबर पर पहुँचा दिया था और अब दूसरी जीत ने विश्व कप में नंबर एक टीम के रूप में उतरना पक्का कर दिया है.

श्रेयस अय्यर हमेशा से भारतीय टीम की विश्व कप योजना के हिस्सा रहे हैं पर वह चोट की समस्या से लौटने के बाद से लय में नहीं खेल पा रहे थे और इससे भारतीय टीम प्रबंधन की चिंताएं बढ़ गई थीं.

वह टीम में चौथे नंबर पर खेलने वाले बैटर हैं, इसलिए टीम प्रबंधन पिछले कुछ समय से वैकल्पिक योजना पर भी काम कर रहा था.

शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर का दिखा जलवा

एशिया कप के दौरान श्रेयस के चोटिल होने पर केएल राहुल को इस नंबर पर आजमाया गया और वह शतक लगाकर इस स्थान के दावेदार बनते नज़र आए.

मौजूदा सिरीज़ के पहले मैच में श्रेयस के सस्ते में रन आउट हो जाने के बाद यह माना जा रहा था कि वह अगर इंदौर में भी नहीं चल सके तो विश्व कप के दौरान प्लेइंग 11 से स्थान खो सकते हैं.

पर श्रेयस अय्यर ने दूसरे वनडे में अपने प्रदर्शन से दिखाया कि वह चौथे नंबर पर खेलने के लिए क्यों ख़ास हैं.

उन्होंने 116.66 की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करके105 रन बनाए, जिसमें 11 चौके और तीन छक्के शामिल रहे. इस प्रदर्शन से श्रेयस का खोया विश्वास भी वापस आ गया है, जिसका भारत को विश्व कप में जरूर फायदा मिलने वाला है.

शुभमन गिल पिछले कुछ समय से जिस अंदाज़ में बल्लेबाजी कर रहे हैं, उससे लगता है कि वह विश्व कप में भारत के ट्रंप कार्ड साबित हो सकते हैं.

गिल ने मोहाली में अर्धशतकीय पारी खेलने के दौरान ही विश्व कप के लिए पूरी तरह से तैयार होने का संकेत दे दिया था.

उन्होंने इंदौर में शतकीय पारी (104) खेलकर यह संकेत दे दिया है कि विश्व कप में वह टीम के लिए अहम भूमिका निभाने वाले हैं.

छा गए सुपर सूर्या

शुभमन के लय में खेलने का विश्व कप में उनके ओपनिंग जोड़ीदार रोहित शर्मा को भी मिलेगा. शुभमन शुरुआत से ही अच्छी गति से खेलते हैं, इससे रोहित को पहले जमने और फिर आक्रामक अंदाज से खेलने में मदद मिलेगी.

गिल का यह वनडे मैचों में इस साल का पांचवां शतक है और इस शतकीय पारी के दौरान 107.21 की स्ट्राइक रेट यह दिखाता है कि वह भले ही शुरुआत में थोड़े धीमे रहते हैं पर जल्द ही रन गति को बढ़ाने का माद्दा रखते हैं.

इसमें चौकों के लिए दरार तलाशने में सफल रहने के अलावा वह जरूरत के समय छक्के लगाने की क्षमता भी रखते हैं.

सूर्यकुमार यादव को क्रिकेट के सबसे छोटे प्रारूप का बेजोड़ खिलाड़ी माना जाता है. पर वनडे क्रिकेट में उस प्रदर्शन को दोहराने में सफल नहीं हो पा रहे थे.

इससे लग रहा था कि वह शायद वनडे क्रिकेट के लिए नहीं बने हैं. उन्हें दिक्कत यह हो रही थी कि वह कई बार अच्छी शुरुआत करने के बाद भी अपने प्रदर्शन को बड़ी पारी में नहीं बदल पा रहे थे.

वनडे क्रिकेट में लगातार खराब प्रदर्शन के बाद उनके विश्व कप टीम में चयन को लेकर भी सवाल उठने लगे थे. लेकिन मोहाली में उन्होंने अपने टी-20 के कुछ शॉटों पर अंकुश लगाकर अपनी अर्धशतकीय पारी खेलकर सभी का मन मोह लिया.

इंदौर में तो उन्होंने आक्रमक अंदाज से दिखाया कि वह तेजी से रन बनाने की ज़रूरत के समय बहुत उपयोगी साबित हो सकते हैं. उन्होंने 194.59 की स्ट्राइक रेट से 37 गेंदों में 72 रन की पारी खेलकर भारत का स्कोर 399 रन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई.

सूर्यकुमार ने पारी के 44वें ओवर में केमरून ग्रीन के एक ओवर की चार गेंदों पर चार छक्के लगाकर उनका मनोबल जरूर तोड़ दिया है. अब वह जब भी सूर्या के सामने होंगे,तो सामान्य नहीं रह सकेंगे. बहुत संभव है कि ग्रीन के सपनों में सूर्या आने लगें, जैसे शेन वार्न के सपनों में सचिन तेंदुलकर आते थे.

सूर्या और ईशान का प्रदर्शन क्या बताता है?

यह सही है कि सूर्या और ईशान किशन की विश्व कप की भारतीय एकादश में भले ही जगह नहीं बने. पर इन दोनों ने अपने प्रदर्शन से यह ज़रूर जता दिया है कि उनके रहते भारत की बेंच स्ट्रेंथ भी दमदार है और ज़रूरत के समय के लिए वह पूरी तरह से तैयार हैं.

रविचंद्रन अश्विन विश्व कप टीम में शामिल नहीं हैं. पर टीम में कोई ऑफ स्पिनर शामिल नहीं किए जाने की आलोचना भी की गई थी. एशिया कप के दौरान अक्षर पटेल के चोटिल हो जाने के बाद अश्विन को इस सीरीज की टीम में चुने जाने पर यह संकेत जरूर मिला था कि उन्हें विश्व कप टीम में शामिल किया जा सकता है.

अश्विन हमेशा ही भारतीय गेंदबाजी के मास्टर स्ट्रोक रहे हैं. उनको विकेट से स्पिन तो मिल ही रहा था और गति में मिश्रण करने से उन्हें खेलना मुश्किल हो गया और उन्होंने तीन विकेट निकालकर ऑस्ट्रेलिया की पारी की कमर तोड़ दी.

यह अश्विन की गेंदबाजी का ही कमाल था कि डेविड वॉर्नर को दाहिने हाथ के बल्लबेज की तरह खेलना पड़ा.

टीम प्रबंधकों का सिर दर्द बढ़ा

अभी कुछ समय पहले तक यह कहा जा रहा था कि विश्व कप सिर पर आ गया पर टीम के बैटर्स ही फाइनल नहीं हो सके हैं.

इसकी वजह केएल राहुल, श्रेयस अय्यर चोट की समस्या के बाद लौटने वाले थे और सूर्यकुमार यादव रंगत में नहीं खेल पा रहे थे.

लेकिन एशिया कप के बाद इस सिरीज़ में इन तीनों के रंगत में खेलने से अब टीम प्रबंधकों के लिए यह समस्या होने वाली है कि एकादश में किसे खिलाया जाए और किसे नहीं.

भारतीय टीम बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों मामलों में तो फिट हो गई है. सिर्फ एकमात्र क्षेत्र ऐसा था, जिसमें टीम थोड़ी कमज़ोर नज़र आई और वह कैचिंग. इस कमजोरी की वजह से ऑस्ट्रेलिया के पुछल्ले बैटर्स हार के अंतर काफी कम करने में सफल हो गए.

विश्व कप में ऐसी गलतियों से बचना होगा, अन्यथा दिक्कतें बढ़ सकती हैं.

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