फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप में कहानी बीयर और फ़ुटबॉल के बीच एक लंबी जंग की

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इक्वाडोर का एक फ़ैन अपनी टीम का मैच देखने के बाद लौट रहा था. उसकी टीम ने फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप में मेज़बान देश क़तर को दो-शून्य से हराया था.
बीबीसी ने उनसे स्टेडियम के भीतर बीयर पर लगी पाबंदी के बारे में पूछा.
होज़े नाम के इस फ़ैन ने छोटा सा जवाब दिया - ‘बहुत ही निराशाजनक’
“मुझे अंदर एक ऐसी बीयर मिली जिसमें ज़ीरो फ़ीसदी अल्कोहोल था. पर कम से कम कुछ मिला तो. फ़्लेवर ही सही.”
एक अन्य फ़ैन एमीलियो कहते हैं, “ये शत प्रतिशत ग़लत है. लोग स्टेडियम के अंदर बीयर के लिए नारे लगाते सुनाई दे रहे थे.”
आख़िरी वक़्त में क़तर में हो रहे वर्ल्ड कप के दौरान बीयर पर लगी पाबंदी, फ़ीफ़ा और शराब के बीच दशकों से चली आ रही एक क़िस्म की जंग का हिस्सा है.
इससे पहले भी बीयर कंपनियों को स्पॉन्सरशिप दिए जाने पर फ़ीफ़ा पर आरोप लगे थे.
ये कहा गया कि फ़ीफ़ा फ़ैन्स की सुरक्षा की बजाए पैसे को प्राथमिकता दे रहा है.
फ़ीफ़ा की बैन लगाने की नीति

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हालाँकि फ़ीफ़ा हाल के वर्षों में मेज़बान देशों को इस बात के लिए तैयार करने में लगा रहता है कि वे अल्कोहोल की अनुमति दें.
लेकिन पहले फ़ीफ़ा स्टेडियम को ड्राई यानी बिना शराब के रखने की सिफ़ारिश करता रहा है.
साल 2004 तक फ़ीफ़ा के नियमों के तहत स्टेडियम के अंदर शराब नहीं बिक सकती थी.
साथ ही स्टेडियम में शराब पीने वाले हर व्यक्ति को बाहर का रास्ता दिखाने का नियम भी था.
लेकिन इन नियमों में बदलाव और स्टेडियम के भीतर बीयर की अनुमति की पैरवी करने के बाद फ़ीफ़ा और कुछ मेज़बान देशों के बीच तकरार देखी गई है.
ब्राज़ील में बीयर पर पाबंदी हटानी पड़ी

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साल 2014 में ब्राज़ील ने फुटबॉल वर्ल्ड कप होस्ट किया था.
इस देश में फ़ुटबॉल किसी धर्म से कम नहीं और पाँच बार वर्ल्ड कप विजेता मुल्क़ में टूर्नामेंट होना एक बड़ा इवेंट था.
लेकिन इसमें एक ही दिक्कत थी.
बीयर ब्राज़ील में बहुत मशहूर है, लेकिन अन्य कई देशों की तरह ब्राज़ील में भी फ़ैन्स का जोश कई बार हिंसा में बदलता रहा है.
यही वजह थी कि साल 2003 में ब्राज़ील में फ़ुटबॉल मैचों में बीयर पर पाबंदी लगा दी गई थी.
इस क़दम का मक़सद स्टेडियम के भीतर हिंसा और गुंडागर्दी को रोकना था.
लेकिन फ़ीफ़ा का प्रमुख स्पांसर बीयर का एक बड़ा ब्रैंड बडबाइज़र है.
तो फ़ीफ़ा ने ब्राज़ील को दो टूक शब्दों में कहा कि उन्हें बीयर को लेकर अपने नियम बदलने होंगे. उस वक्त फ़ीफ़ा के महासचिव जेरोम वाल्क ने कहा था, “शराब फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप का अहम हिस्सा है इसलिए हम इसे उपलब्ध कराएँगे. माफ़ करिएगा अगर मैं थोड़ा घमंडी लगूँ, लेकिन इस विषय पर कोई बातचीत संभव नहीं है.”
“और बीयर बेचने की अनुमति नियमों के तहत होनी चाहिए.”
ब्राज़ील के स्वास्थ्य मंत्री ने इसपर आपत्ति जताई और देश के राष्ट्रपति सलाहकार मार्को गार्सिया ने फ़ीफ़ा महासचिव को बड़बोला, औपनिवेशिक और बेवकूफ़ बताया.
लेकिन तमाम आपत्तियों के बाद मेज़बान ब्राज़ील को अपने नियम बदलने पड़े और मैचों के दौरान बीयर बेची और पी गई.
टूर्नामेंट के दौरान कई बार फ़ैन्स के बीच झड़पें हुईं. कोलोंबिया और उरुग्वे के बीच हुए मैच में कई लोगों को स्टेडियम के बाहर का रास्ता दिखाना पड़ा.
जब आलोचना बढ़ी तो फ़ीफ़ा महासचिव वाल्क ने एक टीवी चैनल को बताया, “मैं शराब पीने वाले लोगों की संख्या से हैरान था. बहुत से लोग नशे में धुत थे.”
ये पूछे जाने पर कि क्या भविष्य में फ़ीफ़ा अपनी नीति बदल सकता है, उन्होंने कहा, “अगर हमें लगा कि अल्कोहोल की बिक्री को नियंत्रित करना ज़रूरी है तो बेशक हम इसे कंट्रोल करेंगे.”
रूस पर दवाब

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लेकिन साल 2018 में रूस में हुए वर्ल्ड कप में फ़ीफ़ा की पॉलिसी में कोई बड़ा बदलाब नहीं आया.
ब्राज़ील की ही तरह रूस में ही बड़े स्पोर्टिंग इवेंट्स के दौरान अल्कोहोल के सेवन को सीमित रखने की नीति है.
रूस ने साल 2005 में स्टेडियमों के भीतर शराब की बिक्री, सेवन और विज्ञापन पर रोक लगा दी थी.
2014 में रूस के सोची में हुए विंटर ओलंपिक खेलों में कोई शराब कंपनी स्पांसर नहीं थी.
साल 2012 में रूस ने टीवी, ऑनलाइन और प्रिंट मीडिया में शराब के विज्ञापनों पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी.
लेकिन अगले ही साल राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने वर्ल्ड कप के मैचों के दौरान शराब बेचे जाने की अनुमति वाले कानून पर मुहर लगा दी.
साथ ही विज्ञापन को लेकर नियमों में भी कुछ ढील दे दी.
धर्म के कारण आपत्तियां

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वर्ल्ड कप के दौरान शराब पर सिर्फ़ फ़ीफ़ा और मेज़बान देश ही नहीं जूझते रहे हैं.
यूरो 2022 में फ़ीफ़ा और खिलाड़ियों के बीच भी तकरार हो चुकी है.
खिलाड़ियों को प्रेस वार्ता के दौरान हाइनकेन ब्रैंड की बीयर टेबल पर रखे जाने पर आपत्ति थी.
फ़्रांस के मशहूर मिडफ़ील्डर पॉल पोग्बा ने अपनी प्रेसवार्ता के दौरान कंपनी की बोतल को हटाकर ही अपनी बातचीत शुरू की.
उन्हीं की टीम के करीम बेंज़ेमा ने भी बिना बीयर की बोतल के ही पत्रकारों से बात की.
हालांकि दोनों ही अवसरों पर हाइनकेन ने जो बीयर प्रेसवार्ता के दौरान टेबल पर रखी थी उसमें अल्कोहोल की मात्रा शून्य थी.
लेकिन दोनों खिलाड़ियों को ब्रैंड के साथ एसोसिएट करने पर ही आपत्ति थी.
इसके बाद यूरो करवाने वाली संस्था यूएफ़ा खिलाड़ियों और कोचों से पहले ही बीयर रखे जाने के बारे में पूछ लेती थी.
क़तर वर्ल्ड कप में पाबंदी

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अब बात इस वर्ल्ड कप की.
फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप 2022 में मेज़बान मुल्क को धार्मिक कारणों से बीयर से गुरेज़ है. क़तर में शराब की बिक्री बेहद सीमित और नियंत्रित है.
यही वजह है कि आख़िरी वक़्त में फ़ीफ़ा स्टेडियम के भीतर बीयर की बिक्री पर रोक लगाने के लिए तैयार हुआ है.
लेकिन अब भी वीआईपी टिकट वाले लोग अपने एग्ज़िक्यिूटव बॉक्स में बैठकर मैच से पहले, मैच के दौरान और मैच के बाद शराब पी सकते हैं.
अब फ़ीफ़ा के इस फ़ैसले से उसके पार्टनर स्पांसर बडबाइज़र के संबंधों पर क्या असर पड़ता ये देखना होगा.
1980 के दशक से ही फ़ीफ़ा का प्रमुख स्पांसर रहा बडबाइज़र हर वर्ल्ड कप में, 75 मिलियन अमेरिकी डॉलर संस्था के खाते में डालते रहा है.
बडबाइज़र एक अमेरिकी ब्रैंड है. साल 2026 में होने वाले वर्ल्ड कप के तीन मेज़बान देशों में अमेरिका भी एक है.
कंपनी को उम्मीद होगी कि अमेरिका में उसे अपनी बीयर बेचने की अनुमित मिलेगी.













