वेनेज़ुएला चाहकर भी भारत के मामले में ट्रंप की इच्छा क्यों पूरी नहीं कर सकता

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- Author, रजनीश कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि भारत रूस के बदले अमेरिका और वेनेज़ुएला से तेल ख़रीदेगा.
वेनेज़ुएला पर अभी अप्रत्यक्ष तौर पर अमेरिका का नियंत्रण है और अमेरिकी कंपनियां वहाँ के ऑयल सेक्टर में निवेश कर रही हैं.
अगर भारत रूस से तेल आयात पूरी तरह से बंद कर देता है तो क्या वेनेज़ुएला इसकी भरपाई कर सकता है?
एनर्जी इंटेलिजेंस की रिपोर्ट बताती है कि वेनेज़ुएला आंशिक रूप से ही इसमें मदद कर सकता है.
एनर्जी इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार,भारत में केवल रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की जामनगर रिफाइनरी ही वेनेज़ुएला के कच्चे तेल की बड़ी मात्रा को लगातार रिफाइन करने में सक्षम है. बाक़ी भारतीय रिफाइनरियों के लिए वेनेज़ुएला का तेल अब भी एक कठिन और जोखिम भरा प्रयोग बना हुआ है.''
एनर्जी इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार, ''वेनेज़ुएला के कच्चे तेल की ख़राब गुणवत्ता के कारण वहाँ की सरकारी स्वामित्व वाली पेट्रोलियोस डी वेनेजुएला आमतौर पर डेटेड ब्रेंट के मुक़ाबले डिलीवरी के आधार पर 13 से 15 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर आपूर्ति की पेशकश करती रही है.''
एनर्जी इंटेलिजेंस की रिपोर्ट बताती है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण आपूर्ति बाधित होने से पहले 2015 में भारत का वेनेज़ुएला से आयात 4.41 लाख बैरल पहुंच गया था. इसमें से लगभग तीन-चौथाई रिलायंस को जाता था जबकि बाक़ी नायरा एनर्जी की रिफाइनरी को मिलता था, जिसे रूस की राज्य-नियंत्रित रोसनेफ्ट संचालित करती है और अब प्रतिबंधों के दायरे में है.''

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वेनेज़ुएला कितना सक्षम?
एनर्जी एक्सपर्स नरेंद्र तनेजा कहते हैं कि वेनेज़ुएला तेल आपूर्ति के मामले में रूस की जगह नहीं ले सकता है.
इसका कारण बताते हुए तनेजा ने बीबीसी हिन्दी से कहा, ''भारत हर दिन 50 लाख बैरल कच्चा तेल आयात करता है. वेनेज़ुएला का अभी कुल तेल उत्पादन हर दिन आठ लाख बैरल है. इनके पास तेल का भंडार भले सबसे बड़ा है लेकिन उत्पादन आठ लाख बैरल ही कर पा रहे हैं. इसमें से वेनेज़ुएला क्यूबा, अमेरिका और चीन को भी बेचता है. अभी तो वेनेज़ुएला को अपना उत्पादन बढ़ाना होगा. दुनिया में तेल की सप्लाई की कोई दिक़्क़त नहीं है, मुद्दा क़ीमत का है.''
नरेंद्र तनेजा कहते हैं, ''वेनेज़ुएला पहले 40 लाख बैरल हर दिन तेल का उत्पादन करता था लेकिन अभी उनके पास इतना बड़ा इन्फ़्रास्ट्रक्चर नहीं है. इस स्तर तक पहुँचने में निवेश की ज़रूरत होगी और लंबा समय (कई साल) लगेगा. मेरा मानना है कि हर दिन 30 से 40 लाख बैरल तेल उत्पादन करने में वेनेज़ुएला को कम से कम पाँच साल लगेंगे. ट्रंप का एक साल हो गया है और तीन साल और बचे हैं.''
टॉर्टॉइज़ कैपिटल के सीनियर पोर्टफोलियो प्रबंधक रॉब थम्मेल ने अमेरिकी न्यूज़ नेटवर्क सीएनएन से कहा, ''वेनेजुएला के तेल की गुणवत्ता रूसी तेल जैसी ही है. इन्हें भारत की रिफाइनरियां पहले से ही रिफाइन करने के लिए तैयार हैं.''
सीएनएन ने लिखा है, ''वेनेज़ुएला का तेल तंत्र जर्जर है. 1999 में देश की समाजवादी सरकार के सत्ता में आने से पहले हासिल किए गए रोजाना 30 लाख बैरल से अधिक उत्पादन के स्तर पर लौटने के लिए लगभग एक दशक का काम और अरबों डॉलर के निवेश की ज़रूरत होगी.''

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तेल की गुणवत्ता
नरेंद्र तनेजा कहते हैं कि वेनेज़ुएला का तेल बहुत भारी है और उससे डीज़ल आसानी से बन जाता है.
सीएनएन से यूएस बैंक एसेट मैनेजमेंट के सीनियर स्ट्रैटिजिक इन्वेस्टमेंट निदेशक रॉब हॉवर्थ ने कहा, "वेनेजुएला या अमेरिका के तेल से रूसी तेल को पूरी तरह बदलने के लिए बड़े निवेश की ज़रूरत होगी. लेकिन समय के साथ, इससे रूसी अर्थव्यवस्था के लिए अतिरिक्त चुनौतियां पैदा हो सकती हैं."
दिल्ली स्थित थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के निदेशक अजय श्रीवास्तव कहते हैं, ''भारत अपने कुल तेल का एक तिहाई आयात रूस से कर रहा था. इतना तेल उत्पादन तो वेनेज़ुएला कर भी नहीं रहा है. देखिए ट्रंप भारत ही नहीं यूरोप से भी कई ऐसी प्रतिबद्धताएं करवा रहे हैं, जिन्हें अंजाम तक पहुँचाना काल्पनिक लगता है. जो ट्रंप चाह रहे हैं, उसके लिए सिस्टम तैयार नहीं है.''

एनर्जी का रीयल टाइम डेटा उपलब्ध कराने वाला फर्म केप्लर के अनुसार, 13 जनवरी तक भारत में रूसी कच्चे तेल का कुल आयात औसतन 11 लाख बैरल प्रतिदिन रहा है जबकि 2025 में यह औसतन 17.3 लाख बैरल प्रतिदिन था.
एनर्जी इंटेलिजेंस से भारत पेट्रोलियम के पूर्व रिफाइनिंग निदेशक और तेल उद्योग सलाहकार आर. रामचंद्रन ने कहा, ''रिलायंस के पास एशिया के सबसे उन्नत ब्लेंडिंग ढांचों में से एक है, साथ ही एक बड़ा कोकर भी है.''
''इंडियन ऑयल का तीन लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाला पारादीप संयंत्र और हिंदुस्तान पेट्रोलियम की विशाखापत्तनम में उन्नत रिफाइनरी, जिसमें रेज़िड्यू अपग्रेडर यूनिट है, कभी-कभार कोई खेप ले सकते हैं, लेकिन वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल की लगातार ख़रीद के लिए उनके पास ज़रूरी ब्लेंडिंग सुविधाएं और बड़े रेज़िड्यू अपग्रेडर नहीं हैं. नायरा केवल रूसी तेल को ही रिफाइन कर रही है, इसलिए वेनेजुएला के तेल का एकमात्र संभावित बड़ा ख़रीदार रिलायंस ही बचता है.''

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वेनेज़ुएला से तेल लाना महंगा होगा?
नरेंद्र तनेजा कहते हैं, ''अमेरिकी प्रतिबंध से पहले वेनेज़ुएला से भारत अपने कुल आयात का 10 फ़ीसदी लेता था. वेनेज़ुएला का तेल बहुत भारी है. इसे दुनिया में हर जगह रिफाइन नहीं किया जा सकता है. इसे रिफाइन करने की मशीनरी केवल चीन, अमेरिका और भारत में है. लेकिन इससे डीज़ल अच्छा बनता है. इसे रिफाइन करने के लिए नाफ्ता की भी ज़रूरत होती है.''

क्या वेनेज़ुएला से तेल लाना महंगा होगा?
इसके जवाब में तनेजा कहते हैं, ''आप जितनी दूर से तेल लाते हैं, उसकी शिपिंग लागत भी उतनी ही बढ़ जाती है. शिपिंग का समय बढ़ता है तो बीमा की राशि भी बढ़ती है. बीमा हर दिन का होता है. वेनेज़ुएला से जहाज़ को गुजरात के जामनगर में आना है तो इसमें आमतौर पर 22 से 27 दिन लगते हैं क्योंकि पूरा अफ़्रीका का चक्कर लगाना पड़ता है. अगर अमेरिका से तेल आएगा और ज़्यादा समय लगेगा. रूस से भी लाते हैं तब भी 26 दिन लगते हैं. लेकिन रूस ख़ुद ही भारत में डिलीवर करता है.''
खाड़ी के देशों से तेल लाना ज़्यादा आसान होता है क्योंकि ये देश भारत के पास में हैं. यहाँ से जहाज़ तेल लेकर तीन से चार दिन में पहुँच जाते हैं. ऐसे में यहाँ की शिपिंग लागत कम होती है और इंश्योरेंस में भी कम ख़र्च आता है.
तनेजा कहते हैं, ''रूस से तेल भारत लाने में वेनेज़ुएला की तुलना में दो से तीन दिन ज़्यादा लगते हैं. वेनेज़ुएला से जहाज़ आता है तो दक्षिण अफ़्रीका के नीचे से अरब सागर से होकर गुजरात पहुँच जाता है. स्वेज मैक्स से तेल आता है तो कम समय लगता है. लेकिन वीएलसीसी यानी वेरी लार्ज क्रूड कैरियर स्वेज कैनाल से नहीं निकल पाते हैं और उन्हें पूरा अफ़्रीका का चक्कर लगाना पड़ता है.''
''रूस से ज़्यादातर वीएलसीसी ही आते हैं. दूसरा रास्ता है पूर्वी रूस से, जो साउथ चाइना सी होते हुए, सिंगापुर से बंगाल की खाड़ी के बाद हिन्द महासागर में श्रीलंका से निकलकर फिर पश्चिमी तट पर आता है. इसमें भी समय उतना ही लग जाता है. लॉजिस्टिस्क में वेनेज़ुएला और रूस में बहुत फ़र्क़ नहीं है. भारत में जितने तरह के तेल की खपत होती है, उसमें 45 फ़ीसदी डीज़ल है. ऐसे में वेनेज़ुएला का तेल भी भारत के लिए ख़राब नहीं है. भारत अभी 41 देशों से तेल ले रहा है.''

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वेनेज़ुएला की माली हालत
एनर्जी इंटेलिजेंस की एक और रिपोर्ट बताती है कि वेनेज़ुएला विदेशी क़र्ज़ के बोझ तले दबा है और उसके लिए तेल इन्फ़्रास्ट्रक्चर को विकसित करना आसान नहीं है.
रिपोर्ट के मुताबिक़ विशेषज्ञ वेनेज़ुएला के बकाया बाहरी क़र्ज़ को 150 अरब डॉलर से अधिक आंकते हैं, जो उसकी तबाह अर्थव्यवस्था के आकार से लगभग दोगुना है.
"पेट्रोलियोस डी वेनेज़ुएला ने 2017 में लगभग 60 अरब डॉलर के बॉन्ड पर डिफॉल्ट किया था. तेल से जुड़े किसी भी नए निवेश के लिए यह भारी क़र्ज़ का बोझ एक अहम कारक है. संभावित निवेशक न केवल कुछ मामलों में पुराने बकाया की वसूली करना चाहेंगे बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहेंगे कि वेनेज़ुएला का तेल उत्पादन सेक्टर जो पिछले 25 वर्षों में कुप्रबंधन और गिरावट से खोखला हो चुका है, उन्हें दोबारा नुकसान न उठाना पड़े.''
नॉर्वे स्थित कंसल्टेंसी कंपनी रिस्टैड एनर्जी के अनुसार, कच्चे तेल का उत्पादन 30 लाख बैरल हर दिन के स्तर तक बहाल करने के लिए वेनेजुएला को अब से 2040 तक 183 अरब डॉलर के निवेश की ज़रूरत होगी. एनर्जी इंटेलिजेंस का अनुमान है कि 2025 में वेनेजुएला का तेल उत्पादन औसतन 8.40 लाख बैरल प्रतिदिन रहा.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















