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विराट कोहली ने टी-20 वर्ल्ड कप को लेकर किसको दिया है कड़ा संदेश
- Author, विमल कुमार
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
"मुझे पता है कि जब टी20 क्रिकेट की बात आती है तो दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अब मेरा नाम खेल को बढ़ावा देने के साथ इस्तेमाल किया जाता है. हालाँकि, मुझे लगता है कि अब भी मेरे अंदर क्रिकेट (टी20 वाली) है."
उम्मीद के मुताबिक़ विराट कोहली के इस बयान ने सोशल मीडिया पर ख़ूब सुर्ख़ियाँ बटोरी हैं. पिछले कुछ महीनों से कोहली अपने परिवार के साथ समय बिताने के चलते सक्रिय क्रिकेट से दूर थे.
हाल ही में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ पाँच टेस्ट मैचों की सिरीज़ में भी वो नहीं खेले थे.
इसी दौरान लगातार इस बात की अटकलें भी लगाई जा रहीं थी कि शायद जून में होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप के लिए कोहली का चयन मुश्किल हो.
कोहली के मन की बात
आपको ये याद दिलाना ज़रूरी है कि कुछ ही सप्ताह पहले बीसीसीआई के सचिव जय शाह ने रोहित शर्मा को अमेरिका और वेस्टइंडीज़ में होने वाले वर्ल्ड कप के लिए कप्तानी की ज़िम्मेदारी को कंफ़र्म किया था, लेकिन वे कोहली के उस टूर्नामेंट में खेलने के सवाल को टाल गए थे.
इसके बाद अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से ऐसी ख़बरें चलाई गई, जिसमें बार-बार ये तर्क दिया जाने लगा कि कोहली की वर्ल्ड कप टीम में जगह नहीं बनती है.
और तो और जब पूर्व कोच और कोहली के बेहद क़रीबी माने जाने वाले रवि शास्त्री ने भी इस हफ़्ते कॉमेंट्री के दौरान ये कहा कि आने वाले वर्ल्ड कप में युवा खिलाड़ियों और फ़ॉर्म को अहमियत दी जानी चाहिए ना कि साख को.
उन्होंने भले ही कोहली का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन इशारा साफ़ था क्योंकि साथ ही कॉमेंट्री कर रहे इंग्लैंड के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन ने ये तर्क दिया कि टीम इंडिया ऐसा भला सोच भी कैसे सकती है कि कोहली वर्ल्ड कप की टीम में नहीं होंगे, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टी-20 फ़ॉर्मेट के विस्तार के लिए कोहली जैसे दिग्गज और उनके ब्रैंड का इस्तेमाल क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था आईसीसी कर रही है.
पंजाब किंग्स के ख़िलाफ़ 49 गेंदों पर 77 रन की पारी खेलने के बाद कोहली को मैन ऑफ़ द मैच चुना गया.
जब विराट कोहली हर्षा भोगले के सामने इटंरव्यू के लिए आए, तो ये स्पष्ट था कि इतने बड़े मौक़े पर वो अपने मन की बात करेंगे.
ऐसे मन की बात जो फ़ैंस नहीं, बल्कि बीसीसीआई के चयनकर्ताओं तक पहुँचेगी.
कोहली ने इस बयान के बाद गेंद पूरी तरह से मुख्य चयनकर्ता अजित अगरकर और उनके साथियों के पाले में डाल दी है.
शायद कोहली को इस बात का बख़ूबी अहसास है कि टीम के कप्तान रोहित शर्मा और कोच राहुल द्रविड़ के लिए वो अब भी वर्ल्ड कप की योजनाओं में फ़िट हैं, लेकिन चयनकर्ताओं को थोड़ी हिचकिचाहट है.
सबसे बड़ा सवाल
इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2021 और 2022 में टी 20 वर्ल्ड कप की हार में भारत के टॉप ऑर्डर (रोहित-केएल राहुल-कोहली) की तिकड़ी को ही ज़िम्मेदार ठहराया गया है.
तीनों एक ही शैली में एंकर वाली भूमिका में बल्लेबाज़ी करते हैं. कप्तान रोहित ने वनडे वर्ल्ड कप के दौरान बिल्कुल आक्रामक तेवर अपनाते हुए 50 ओवर की क्रिकेट में भी 20 ओवर वाले अंदाज़ में खेलना शुरू कर दिया.
केएल राहुल के मुक़ाबले बाएँ हाथ के यशस्वी जायसवाल बेहतर विकल्प दिखते हैं. अब यक्ष प्रश्न चयनकर्ताओं के सामने यही है कि तीसरे नंबर पर कोहली का चयन हो या फिर शुभमन गिल का.
क्योंकि मिडिल ऑर्डर में सूर्यकुमार यादव, हार्दिक पंड्या, विकेटकीपर-बल्लेबाज रवींद्र जडेजा का स्थान पक्का है.
अगर कोहली या फिर गिल खेलते हैं, तो रिंकू सिंह को छठे नंबर पर फ़िनिशर के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है.
ऐसे में अगर ज़रूरत पड़ी तो आप गिल को तो प्लेइंग इलेवन से बाहर रख सकते हैं, लेकिन कोहली को नहीं. कोहली के टीम में बने रहने के सवाल को लेकर यहीं से चर्चा शुरू हुई.
कोहली के समर्थक और रोहित के आलोचक इस तर्क को देने में पीछे नहीं हटते हैं कि अगर अनुभवी खिलाड़ी के तौर पर मौजूदा कप्तान को मैच विनर माना जा रहा है, तो पूर्व कप्तान के साथ सौतेला रवैया क्यों?
औसत और स्ट्राइक रेट दोनों मामले में कोहली का ओवरऑल रिकॉर्ड रोहित से बेहतर है.
लेकिन, बीसीसीआई और चयनकर्ताओं का मानना है कि रोहित भी इस टीम में नहीं होते, अगर हार्दिक पंड्या वनडे वर्ल्ड कप के दौरान चोटिल नहीं होते और रोहित ने अचानक से ही अपने खेल में इतना बड़ा बदलाव नहीं लाया होता.
समस्या इसी बात में है कि दोनों दिग्गजों को एक साथ प्लेइंग इलेवन में रखने से टीम का संतुलन ख़राब होता है.
चयनकर्ताओं की समस्या
कोहली जानते हैं कि अगर रोहित वर्ल्ड कप का हिस्सा हैं, तो उन्हें कोई भी तर्क के आधार पर टीम से बाहर नहीं कर सकता है.
क्योंकि इतिहास गवाह है कि तथाकथित धीमी स्ट्राइक रेट के बावजूद अपने कौशल और अनुभव के चलते उन्होंने टी-20 फ़ॉर्मेट में किसी भी खिलाड़ी से ज़्यादा मैच जिताने वाली पारियाँ खेली हैं.
आख़िर पाकिस्तान के ख़िलाफ़ मेलबर्न में 2022 वर्ल्ड के दौरान उनकी ऐतिहासिक पारी को कोई कैसे भूल सकता है.
कुल मिलाकर देखा जाए तो एक शानदार पारी खेलकर कोहली ने चयनकर्ताओं को ललकारा है.
चूंकि कोहली बैंगलुरू के लिए ओपनर की भूमिका निभा रहे हैं, तो उनकी दलील ये भी हो उन्हें रोहित के साथ ओपनर के तौर पर देखा जाय.
लेकिन चयनकर्ताओं को समस्या ये होगी कि इन दोनों खिलाड़ियों ने साथ में कुछ ही मैच बतौर ओपनिंग पार्टनर्स खेले हैं.
अगर कोहली आने वाले हफ़्तों में फिर से अपने स्ट्राइक रेट को लेकर जूझते हैं, तो चयनकर्ताओं का तर्क भारी पड़ सकता है.
चयनकर्ता ये तर्क भी दे सकते हैं कि कोहली के आईपीएल में रन और फ़ॉर्म ओपनर के तौर पर हैं जबकि टीम इंडिया के लिए उनका रोल तीसरे नंबर का है.
दरअसल, बड़ी पिक्चर ये है कि कोहली के चयन का मुद्दा अब सुलझने की बजाय चयनकर्ताओं के लिए चुनौती बन गया है.
चयनकर्ताओं की परेशानी कोहली के ताज़ा बयान से और बढ़ गई है. लेकिन, सवाल यही है कि अगर बीसीसीआई के आकाओं ने टी-20 फ़ॉर्मेट से कोहली की जगह किसी युवा खिलाड़ी को ही चुनने का संदेश (अपरोक्ष तरीके से) चयनकर्ताओ को दिया है तो शायद अगरकर के लिए इस मुश्किल फ़ैसले को लेने में थोड़ी सहूलियत हो.
लेकिन, तब भी कोच द्रविड़ और कप्तान रोहित फ़ैंस के सामने किस तरीक़े से ख़ुद का बचाव कर पाएँगे कि कोहली की जगह वाक़ई प्लेइंग इलवेन में नहीं है.
कुल मिलाकर मामला दिलचस्प हो गया है और आईपीएल के आने वाले कुछ हफ़्ते कोहली के बल्ले के लिए काफ़ी मायने रखेंगे.
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