क़तर के शासक ने इसराइल पर कहा- अब बहुत हो गया, क्या इस्लामिक देशों में बनने लगी है सहमति?

सात अक्टूबर को हमास के हमले के बाद से इसराइल ग़ज़ा पर लगातार सैन्य कार्रवाई कर रहा है.

इस ख़ूनी संघर्ष में इसराइल के 1400 लोगों की मौत हुई है और 200 से अधिक लोग हमास के बंधक हैं. दूसरी तरफ़ इसराइल की बमबारी में अब तक 5800 फ़लस्तीनियों की मौत हुई है और ये बमबारी लगातार जारी है.

इसराइल के ग़ज़ा में हमलों को लेकर अरब देशों में नाराज़गी अब बढ़ रही है. क़तर से लेकर सऊदी अरब और ईरान तक ने कहा है कि ‘इसराइल को हिंसा तुरंत रोकनी चाहिए.’

क़तर के शासक शेख़ तमीम बिन हमद अल-थानी ने ग़ज़ा पर इसराइल के बेहद अक्रामक रवैये पर कहा है, “बस बहुत हुआ, इसराइल को कुछ भी करने के लिए हरी झंडी नहीं दी जा सकती. लोगों की हत्या करने का लाइसेंस नहीं दिया जा सकता. घेराबंदी करके, सेटलमेंट के ज़रिए जो हो रहा है, उसकी हक़ीकत को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है."

"बिजली, पानी, खाने की सप्लाई को रोक कर, इसे पूरी कौम के ख़िलाफ़ हथियार की तरह इस्तेमाल करना बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.”

ग़ज़ा में मानवीय तबाही मची है और दुनिया चुप है- सऊदी अरब

सऊदी अरब ने कहा है कि फ़लस्तीनी लोग इसराइल की वॉर-मशीन के साथ-साथ उसके प्रतिबंधों के शिकार हैं.

उनके लिए बिजली, पानी और दवा की सेवाएं रोकी गई हैं. ग़ज़ा में तबाही मची है और संयुक्त राष्ट्र, जिसकी ज़िम्मेदारी है कि दुनिया में सुरक्षा और स्थिरता क़ायम रहे वह पूरी तरह अपना काम करने में फेल साबित हुआ है.

सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फ़ैसल बिन फ़रहान ने स्काई न्यूज़ से बात करते हुए कहा कि शांति कायम करने की प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी होगी और इस हिंसा को रोकने का यही एक तरीक़ा है.

पत्रकार ने प्रिंस फ़ैसल बिन फ़रहान से पूछा कि आपको क्या लगता है कि क्या किया जाना चाहिए?

इन पर उन्होंने कहा, “हमें तुरंत सीज़फ़ायर करना होगा. हमें दोबारा शांति कायम करने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी. इसे संभव बनाना ही होगा, अगर आप मुश्किलों से नहीं निकला चाहेंगे, चुनौतियों से नहीं निपटना चाहेंगे तो यहां कभी शांति नहीं होगी तो हमें शांति बहाली की प्रक्रिया शुरू ही करनी होगी."

"अरबों ने ये दिखा दिया है कि वो इसे लेकर गंभीर हैं, हम बातचीत करना चाहते हैं और इसके लिए तैयार हैं. हम उम्मीद कर रहे हैं कि इसे जल्दी से जल्दी कर लिया जाए.”

सऊदी के विदेश मंत्री प्रिंस फ़रहान ने ग़जा में चल रहे युद्ध पर चर्चा के लिए ब्राज़ील में आयोजित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक उच्च स्तरीय बैठक मे कहा, “इसराइल के सैन्य अभियान में फ़लस्तीनी लोगों के घरों, स्कूलों, अस्पतालों, बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्गों सहित हज़ारों आम लोगों की जान ले ली है. बड़ी तादाद में लोग घायल हुए हैं.”

प्रिंस फैसल बिन फ़रहान ने कहा कि ग़ज़ा के लोगों को इसराइल की ओर से सामूहिक सज़ा देना, उन्हें जबरन विस्थापित करने की कोशिशों पर अंतराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी ना तो इस क्षेत्र में सुरक्षा लाएगी और ना ही इसे स्थिरता के क़रीब ले जाएगी.”

यहाँ उन्होंने कहा, “ग़ज़ा पट्टी में ख़तरनाक घटनाएं हो रही हैं, हज़ारों लोगों की मौत हो चुकी है. हम एक दर्दनाक परिस्थिति में यह बैठक कर रहे हैं.''

प्रिंस फ़रहान ने कहा, ग़ज़ा में मानवीय तबाही मची है और इस संघर्ष के नतीज़े इस क्षेत्र और दुनिया की सुरक्षा के लिए ख़तरनाक साबित हो सकते हैं.”

उन्होंने कहा कि सऊदी अरब अपने "दोस्त और भाईचारे वाले देशों" के साथ मिल कर इस हिंसा को रोकने की हर संभव कोशिश कर रहा है.

उन्होंने कहा कि लोगों की जान की रक्षा, संपत्ति के नुकसान और क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता की ज़िम्मेदारी संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा काउंसिल की है.

“अंतराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना इस परिषद की ज़िम्मेदारी है, लेकिन आज हम देख रहे हैं कि ये काउंसिल अपनी भूमिका निभाने में फेल साबित हो रहा है.”

“किसी ऐसे समाधान तक पहुँचने में काफ़ी देर हो चुकी है जो इस संकट का समाधान कर सके. क्योंकि इसराइल अंतराष्ट्रीय मानवीय क़ानून सहित अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन करता जा रहा है. अब तो इन क़ानूनों की विश्वसनीयता पर भी अब संदेह हो रहा है.”

प्रिंस फ़रहान ने संयुक्त राष्ट्र के नियमों और प्रस्तावों के आवेदन में दोहरे मानकों और "सिलेक्टिव अप्रोच" पर अफ़सोस जताया.

उन्होंने कहा कि चूंकि इस संघर्ष में कोई जवाबदेही ही तय नहीं की जा रही है, इसलिए "यहां और अधिक हिंसा और बर्बादी होने का ख़तरा है.

उन्होंने कहा कि आज जो हालात हैं वो इसलिए हैं क्योंकि वहां संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों को लागू नहीं कराया गया. सभी को दशकों से चले आ रहे इसराइल-फ़लस्तीनियों संघर्ष के मूल को समझना और स्वीकारना होगा. अगर ऐसा नहीं हुआ तो यहां शांति आ ही नहीं सकेगी.

उन्होंने कहा, “हमें शांति प्रक्रिया गंभीरता से दोबारा शुरू करनी है. हम अपने क्षेत्र के बेहतर भविष्य के लिए काम कर रहे हैं. हमें उम्मीद है कि क्षेत्र में शांति होगी, सभी के लिए समृद्धि की गारंटी होगी और क्षेत्र के लोगों और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य की होगा.”

"हम एक स्थायी शांति चाहते हैं, जो दो-राज्यों के समाधान से ही आएगा. साल 1967 की सीमा के आधार पर एक फ़लस्तीनी राष्ट्र की स्थापना हो और इसी से यहाँ सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि आएगी.”

ईरान ने कहा- मुस्लिम देशों को एकजुट होना होगा

ईरान के राष्ट्रपति ने भी मंगलवार को कहा कि इसराइल जो ग़ज़ा में कर रहा है, उसके खिलाफ़ जवाब देने के लिए मुस्लिम देशों के बीच "एकता नहीं है."

इब्राहिम रईसी ने कहा कि मुस्लिम देशों के बीच बेहतर समन्वय से फ़लस्तीनी क्षेत्र पर इसरायल की बमबारी रोकी जा सकती थी.

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ईरना के मुताबिक़ उन्होंने कहा, "मुस्लिम देश अगर एकजुट हो जाते तो यहूदियों के उत्पीड़न, आक्रामकता और उसके पश्चिमी समर्थकों की ज्यादतियों को रोका जा सकता था."

रईसी ने ये भी कहा कि हमें आपस में "सहयोग को मज़बूत करने" की ज़रूरत है ताकि बाहरी देश हमारे क्षेत्रों के मामले में हस्तक्षेप ना करें.

ये बात रईसी ने तेहरान के एक कार्यक्रम में कही, जहाँ वो ईरान में सऊदी अरब के नए राजदूत अब्दुल्ला बिन सऊद अल-अनाज़ी के परिचय समारोह में शामिल हो रहे थे.

दोनों देशों के बीच सात सालों के बाद राजनयिक रिश्ते बहाल हो रहे हैं.

ईरान की इसराइल को चेतावनी

बीते दिनों ही ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियन ने इसराइल को चेतावनी दी थी कि अगर उसने ग़ज़ा पर हमले नहीं रोके तो ‘कभी भी कुछ भी हो सकता है.’

ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि इसके लिए 'इसराइल की सैन्य सहायता कर रहा अमेरिका भी ज़िम्मेदार होगा.’

ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन ने तेहरान में कहा था, “मैं अमेरिका और इसके परोक्ष नुमाइंदे इसराइल को चेतावनी देता हूं कि अगर ग़ज़ा में इंसानियत के ख़िलाफ़ किए जा रहे अपराध और नरसंहार को नहीं रोका गया तो कभी भी कुछ भी हो सकता है और क्षेत्र में हालात क़ाबू से बाहर हो जाएंगे.”

उन्होंने कहा कि इसके ‘बेहद ख़राब, बुरे और दूरगामी परिणाम’ होंगे जिनका असर इस क्षेत्र पर भी होगा और उन पर भी जो जंग की वकालत कर रहे हैं.

अब्दुल्लाहियन ने कहा, 'अमेरिकी सेना का इसराइल की मदद करना सबूत है कि ग़ज़ा में जारी संघर्ष अमेरिका की ओर से इसराइल द्वारा परोक्ष रूप से की जा रही जंग है.''

इसराइल और हमास के बीच चल रहे संघर्ष के बीच लेबनान की सीमा पर इसराइल और ईरान समर्थित चरमपंथी समूह हिज़बुल्लाह भी एक दूसरे पर हमले कर रहे हैं. वहीं सीरिया में भी, जहाँ ईरान की सेना की मौजूदगी है, वहां भी हमले हो रहे हैं.

बीते सप्ताह इसराइल ने दमिश्क और अलेप्पो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मिसाइल से हमला किया था. साथ ही लेबनान में भी हिज़बुल्लाह के ठिकानों पर हमला किया था.

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