You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
DeepSeek ही नहीं चीन का 10 साल पहले बनाया गया ये हाई टेक प्लान कर रहा है काम
- Author, जो टिडी
- पदनाम, साइबर संवाददाता, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
चीन के चैटबॉट डीपसीक ने दुनिया को हैरान किया है. लेकिन चीन पर नज़र रखने वालों के लिए इसमें हैरानी जैसा कुछ भी नहीं है.
चीन बीते 10 साल से धीरे-धीरे एआई समेत हाई टेक प्रोडक्ट्स में महारत हासिल कर रहा है. ये चीन के बेहद महत्वाकांक्षी 'मेड इन चाइना 2025' प्लान का हिस्सा है.
विश्लेषकों के लिए डीपसीक ग्रैंड प्रोजेक्ट की सफलता का एक उदाहरण है.
2015 में चीन की सरकार ने 'मेड इन चाइना 2025' प्लान की घोषणा की थी.
इसके पीछे आइडिया यह था कि हर दिन इस्तेमाल होने वाली लाखों चीज़ों के मामले में हाई क्वालिटी और हाई टेक सुप्रीमेसी स्थापित की जाए.
बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
10 क्षेत्रों पर किया गया फोकस
चीन ने साल 2025 तक इस मामले में सबसे आगे रहने के विचार के साथ टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के 10 क्षेत्रों को चुना और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, इलेक्ट्रिकल कार, रिन्यूएबल एनर्जी और बैटरी टेक्नोलॉजी को डॉक्यूमेंट्स में जगह दी गई.
कुछ क्षेत्रों में चीन ने सफलता हासिल की है और वो बड़ा प्लेयर बन गया है और कुछ मामलों में उसे बड़ी सफलता मिली है.
किंग्स कॉलेज लंदन में डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स की एक्सपर्ट डॉक्टर युनदन गोंग की नज़र में 'मेड इन चाइना 2025' प्रोजेक्ट कामयाब रहा है.
उन्होंने कहा, "कई क्षेत्रों में चीन आगे बढ़ रहा है और कुछ क्षेत्रों में चीन ने बढ़त बना रखी है."
जर्मनी, जापान और अमेरिका को पछाड़ते हुए चीन कार बेचने के मामले में सबसे आगे है. इसका श्रेय इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली कंपनी बीवाईडी को जाता है.
ईवी की कामयाबी चीन के साथ जुड़ी हुई है और वह दुनिया का सबसे ज़्यादा बैटरी बनाने वाला देश भी बन गया है.
रिन्यूएबल एनर्जी के मामले में आगे है चीन
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) के मुताबिक़ रिन्यूएबल एनर्जी के लिए दुनियाभर में सोलर पैनल का 80 से 95 फीसदी निर्यात चीन करता है.
रिसर्चर्स का मानना है कि 2028 तक चीन रिन्यूएबल एनर्जी का पावर हाउस बन जाएगा और दुनियाभर में रिन्यूएबल एनर्जी के मामले में चीन का योगदान क़रीब 60 फ़ीसदी होगा.
ड्रोन के मामले में भी चीन सबसे आगे है. बीसीसी की रिसर्च के मुताबिक शेनजेन बेस्ड डीजीआई का वैश्विक स्तर पर 70 फ़ीसदी मार्केट शेयर है. विश्व की 10 बड़े ड्रोन निर्माताओं में से तीन चीन से ही हैं.
अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने एक रोडमैप के ज़रिए 250 गोल सेट किए हैं. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक़ इनमें से क़रीब 86 फ़ीसदी गोल चीन ने पूरे कर लिए हैं.
जो बाइडन के पूर्व सलाहाकार लिंडसे गोरमैन कहती हैं, "चीन का मॉडल राज्य समर्थित पूंजीवाद कामयाब है जिसमें सरकार रिसर्च और फंडिंग का एजेंडा सेट करती है."
गोरमैन इस ओर भी इशारा करती हैं कि किस तरह चीन विदेशी प्रतिभाओं और विदेशी कंपनियों को चीन की कंपनियों के साथ मिलकर काम करने के लिए मनाता है.
इसके लिए बड़ी रकम भी ख़र्च की जाती है. यूएस कांग्रेस रिसर्च के मुताबिक़ चीन की सरकार ने रिसर्च, डेवलपमेंट और विदेशी कंपनियों को ख़रीदने के लिए 1.5 लाख करोड़ डॉलर का ग्रांट रखा है.
डीपसीक है बड़ा उदाहरण
'मेड इन चाइना 2025' इतना कामयाब रहा है कि कुछ साल में सरकार ने यह बोलना बंद कर दिया कि वह विरोधियों को पछाड़ रही है.
लेकिन यह बहुत देरी से भी है क्योंकि हाल के देशों में कई पश्चिमी देशों ने चीन से तकनीक के निर्यात पर रोक लगाई है.
प्लान ये था कि कैसे विकास की रफ़्तार को धीमा रखा जाए और माइक्रोचिप के मामले में यह काम करता हुआ भी दिखाई दे रहा है.
लेकिन कुछ विश्लेषकों का मानना है कि कुछ प्रतिबंधों ने शायद चीन को प्रेरित किया है और 'मेड इन चाइना 2025' और आत्मनिर्भर बनने का ज़रिया बना.
कार्डिफ़ यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ बिज़नेस में प्रोफे़सर पेंग जाउ कहते हैं, "चीन में एक पुरानी कहावत है- ज़िंदगी हमेशा अपना रास्ता तलाश लेती है. प्रतिबंध सिर्फ़ जड़े बदल सकते हैं उसकी दिशा नहीं."
प्रोफे़सर जाउ डीपसीक को इसका एक बड़ा उदाहरण बनाते हैं. निर्यात पर अमेरिका का कंट्रोल होने की वजह से कंपनी को अपने मॉडल को ट्रेनिंग देने के लिए पावरफुल चिप नहीं मिले.
इसी वजह से कंपनी ने कम पावरफुल चिप का इस्तेमाल किया और एक नई तकनीक के ज़रिए अपने चैटबॉट को कम ख़र्च में तैयार किया.
इन मामलों में आगे है अमेरिका
हालांकि इन दावों को विरोधी चुनौती दे रहे हैं. लेकिन डीपसीक ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी हैरान किया है और उन्होंने देश की बड़ी एआई कंपनियों को इसे वेकअप कॉल बताया है.
किस भी और देश की तुलना में चीन की एआई कंपनियों के पास अधिक पेटेंट हैं. चीन की अलीबाबा और बाइटडांस जैसी कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स के ज़रिए उतना पैसा कमा रही हैं जितना गूगल और ओपन एआई अपने प्रोडक्ट्स के ज़रिए कमाती हैं.
हालांकि 'मेड इन चाइना 2025' के बावजूद अमेरिका एआई के मामले में दुनिया का लीडर है.
चीन के वैज्ञानिक क्वांटम कंप्यूटिंग में ज्यादा रिसर्च पेपर पब्लिश कर रहे हैं लेकिन बावजूद इसके क्वांटम कंप्यूटिंग में अमेरिका कई मामलों में बहुत आगे है.
चीन की चुनौती का सामना करने के लिए अमेरिका माइक्रोचिप निर्माण में सैकड़ों अरब डॉलर जुटाने की कोशिश कर रहा है.
राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंता चीन की राह में चुनौती है. टिकटॉक को अमेरिका में काफ़ी सफलता मिली, लेकिन अब उस पर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा होने की वजह से प्रतिबंध का ख़तरा मंडरा रहा है.
डीपसीक के साथ चीन की ईकॉमर्स कंपनी टेमू और शीन का आगे बढ़ना भी संदेश के घेरे में है.
हालांकि चीन की टेलीकॉम कंपनी हुआवे को पश्चिमी देशों से अलग अपना रास्ता तलाशना पड़ा. 2019 में जब राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं शुरू हुईं तब उसका असर हुआवे पर पड़ा और प्रतिबंधों की वजह से उसके स्मार्टफोन बनाने पर भी असर पड़ा.
दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी अपनी माइक्रोचिप बनाने पर काम किया जा रहा है और पश्चिम के प्रतिबंधों से आगे बढ़ते हुए 100 मिलियन डॉलर का रेव्न्यू रिकॉर्ड किया गया है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)