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झारखंड में स्पेनिश महिला से गैंगरेप: समाज क्यों नहीं लगा पा रहा है अंकुश
- Author, नासिरुद्दीन
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
पाँच साल से दुनिया की सैर. पैंसठ से ज़्यादा देशों का भ्रमण. लगभग पौने दो लाख किलोमीटर का सफ़र. भारत में आने की ख़ुशी. भारत में भी पिछले कुछ महीने में कई राज्यों का दौरा.
ये एक जोड़े की मुख़्तसर सी कहानी है. ये स्पेन के नागरिक हैं. व्लॉगर हैं. यानी ये दुनिया घूमते हैं. यहाँ-वहाँ की वीडियो बनाते हैं. सोशल मीडिया के ज़रिये उसे अपने चाहने वालों तक पहुँचाते हैं.
अब तक सब कुछ ठीक चल रहा था. मगर चार दिन पहले एक भयानक घटना ने भारत के सफ़र पर बदनुमा दाग़ लगा दिया. हुआ यों कि वे भारत के अलग-अलग हिस्सों का सफ़र करते हुए झारखंड पहुँचे.
झारखंड के एक ज़िले दुमका में रात गुज़ारने के लिए अपने ही टेंट में रुके. उसी दौरान कुछ लोग पहुँच गए. दोनों के साथ मारपीट की. उन्हें क़ाबू में कर लिया.
लड़की ने इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया. उसमें वे जो बताती हैं, उससे पता चलता है कि हमलावरों का मक़सद लूटपाट करना नहीं बल्कि बलात्कार करना था.
बकौल महिला, उनके साथ सात लोगों ने बलात्कार किया. उसने और उसके साथी ने हिम्मत के साथ जो बयान किया है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है.
इस हादसे की पूरी कहानी आप यहां पढ़ सकते हैं.
हौसलामंद स्त्री या महज एक शरीर
एक महिला, वह भी विदेशी अगर अपने पुरुष साथी के साथ मोटरसाइकिल पर घूम रही है, तो हमारे समाज के बड़े तबके को यही बात खटकने लगती है.
विदेशी लड़कियों को समाज का मर्दाना तबका कैसे घूरता है, यह किसी से छिपा नहीं है. ऐसा नहीं है कि सारे भारत में और भारत के सभी मर्द ऐसा ही देखते या सोचते हैं.
ज़्यादातर पुरुष समाज ऐसे लड़की को जिस निगाह से देखता है, वह सम्मानजनक नहीं होता. वह उसके बारे में जो सोचता है, वह सम्मानजनक नहीं सोचता.
आख़िर एक लड़की बेख़ौफ़ यहाँ-वहाँ अपनी मर्जी से कैसे घूम सकती है. बलात्कार के अभियुक्तों को भी हौसलामंद लड़की, महज एक यौन शरीर दिखी होगी. वह उस यौन शरीर पर हमलावर हो गए.
वे बलात्कार करना चाहते थे. उनका मक़सद लूटपाट करना नहीं था. इसीलिए उन्होंने बहुत कुछ लूटपाट नहीं की बल्कि यौन हमला किया. यह बात जितनी गंभीर है, उतनी ही शिद्दत से मर्दाना समाज के बारे में बहुत कुछ कह रही है.
बलात्कार करने वालों को वह स्त्री महज एक शरीर के रूप में दिख रही थी. वे उसके शरीर को ही निशाना बनाना चाहते थे. इसलिए उन्होंने उसे ही निशाना बनाया. वे यौन इच्छा की तुष्टि के लिए बलात्कार करना चाहते थे. उसका सामूहिक मज़ा लेना चाहते थे.
इसके लिए एक विदेशी महिला उन्हें आसान निशाना लगी. मगर वह लड़की चुप रहने वाली नहीं थी. उसने न सिर्फ़ पुलिस को अपने साथ हुई घटना की बात बताई बल्कि दुनिया को भी बताने से पीछे नहीं हटी.
यह उसकी हिम्मत को बताता है. उसकी हिम्मत की एक मिसाल यह भी है कि वह अपने सफ़र पर झारखंड से आगे निकल चुकी हैं.
अगर यह स्त्री विदेशी न होती तो…
एक स्त्री बेख़ौफ़ मोटरसाइकिल पर अपने पार्टनर के साथ घूम रही है. विदेशी है. यह कितने हौसले और गौरव की बात है. इस हौसले और गौरव का तो जितना सम्मान हो, कम है. मगर यहाँ तो उलटा हो गया.
सम्मान की बात तो दूर, उन्हें ऐसी जख़्मी यादें दे दी गई हैं कि जब भी भारत का ज़िक्र आएगा, ये यादें उन्हें सताएंगी.
सवाल है कि अगर यह स्त्री विदेशी न होती तो क्या होता? यह कहना कठिन है, लेकिन ऐसा किसी भारतीय स्त्री के साथ न होता, यह कहना और भी कठिन है.
हर ऐसी बड़ी घटना के बाद सोशल मीडिया पर महिलाएँ अपने तजुर्बे साझा करती हैं. उन तजुर्बों में यही होता है कि सार्वजनिक जीवन में शायद ही कोई महिला ऐसी होगी, जिसे किसी न किसी रूप में यौन हिंसा का सामना न करना पड़ा हो.
सार्वजनिक जीवन में चाहे जो महिलाएँ हों, उन्हें यौन हिंसा का व्यवहार झेलना पड़ा है. ये व्यवहार उनके साथ कौन कर रहे हैं? क्या उन लोगों को सामूहिक तौर पर अपने व्यवहार के बारे में नहीं सोचना चाहिए?
यह सामाजिक बदलाव का भी संकेत है
पुलिस कार्रवाई कर रही है. अभियुक्त पकड़े जा रहे हैं. मगर इस घटना ने जो दाग़ दिया है, उसका असर काफ़ी दिनों तक रहेगा. यह घटना चूँकि विदेशी महिला के साथ हुई है, इसलिए इसकी गूँज भी व्यापक है.
आमतौर पर माना जाता है कि झारखंड जैसे आदिवासी समाज में स्त्रियों के साथ इस तरह की यौन हिंसा नहीं होती होगी. या काफ़ी कम होती होगी. यह घटना इस विश्वास को भी हिला देती है.
आदिवासी समाज में स्त्रियों के साथ बर्ताव में यौन हिंसा की बातें काफी कम सुनाई देती हैं. यह घटना इस लिहाज से भी चौंकाने वाली है. क्या यह घटना नहीं बताती है कि आदिवासी समाज में स्त्रियों के प्रति नज़रिये पर बाहरी असर पड़ा है.
बड़ा ग़ैरआदिवासी समाज स्त्रियों को वस्तु के रूप में ज़्यादा देखता है और उसे महज़ यौन शरीर में समेट देता है. यह एक व्यापक नज़रिया है. यह पितृसत्तात्मक नज़रिया है. ग़ैरबराबरी और भेदभाव बढ़ाने वाला नज़रिया है.
कहीं इस नज़रिये ने आदिवासी समाज को भी तो अपने अंदर समेटने में कामयाबी हासिल तो नहीं कर ली है. अगर ऐसा है तो यह चिंताजनक है. इसका असर सिर्फ़ इस एक घटना तक सीमित नहीं रहने वाला है.
यह व्यापक समाज के लिए फ़िक्र की बात है. ऐसे समाज में जहाँ स्त्रियों के प्रति हिंसक नज़रिया कमज़ोर हो या सार्वजनिक तौर पर यौन हिंसा जीवन का हिस्सा न हो, वहाँ ऐसी घटना तो गंभीर चिंता का विषय होनी चाहिए.
अगर ऐसा नज़रिया बढ़ रहा है तो यह उस समाज की स्त्रियों के लिए ज़्यादा ख़तरनाक है. यह ख़तरे की घंटी है. इस घंटी की आवाज़ जितनी शिद्दत के साथ सुनी जाए, उतना उस समाज के लिए बेहतर है.
मर्दाना व्यवहार पर बात करना ज़रूरी है
आज जब एक विदेशी महिला के साथ इस तरह की यौन हिंसा हुई है तो हम बड़े पैमाने पर शोरगुल मचा रहे हैं या महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा पर बात कर रहे हैं.
हर ऐसी घटना मर्दाना व्यवहार के बारे में बात करने के लिए मजबूर करती है. ये मर्द ही हैं, जिनके व्यवहार हर ऐसी घटना में शर्मसार करते हैं.
ऐसा नहीं है कि ऐसी कोई घटना महज किसी विदेशी महिला पर तो असर डालेगी लेकिन इसका असर आसपास की महिलाओं पर नहीं पड़ेगा. अगर पुरुषों के एक तबके ने स्त्रियों के प्रति नज़रिये में ऐसा बदलाव पैदा कर लिया है, जहाँ स्त्री उनकी सेवा के लिए महज़ एक शरीर है, तो यह नज़रिया समाज की सभी स्त्रियों पर बुरा असर डालेगा.
हिंसा का सिरा किसी विदेशी महिला तक ही नहीं रुका रहेगा. हिंसा अपनी शिकार अपने ही लोगों के बीच तलाशेगी. अपने ही लोगों को निशाना बनाएगी.
सबसे अहम बात यही है कि मर्द, दबंग हिंसक सोच वाला मर्दाना न बने, इसकी कोशिश और पहल जितनी जल्दी की जाए उतनी ज़रूरी है. वरना एक ऐसा समाज, जिसके बारे में कहा जाता हो कि यहाँ स्त्रियाँ बेहतर हैं, वहाँ की लड़कियों और स्त्रियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा.
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