You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
बेघरों के लिए कैसे मुसीबत बन गया पेरिस ओलंपिक
- Author, पीटर बॉल और लौरा गार्सिया
- पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस, पेरिस से
पेरिस ओलंपिक का लक्ष्य सिर्फ़ खेल का जश्न मनाना नहीं है बल्कि मेज़बान शहर के लिए स्थिरता और पुनर्विकास का एक मौक़ा भी है.
इस बीच सामाजिक कार्यकर्ताओं का दावा है कि प्रशासन बेघर लोगों और प्रवासियों को शहर की गलियों से दूर या फ्रांस के दूसरे इलाक़ों में शिफ़्ट कर रहे हैं. सामाजिक कार्यकर्ता इसका विरोध कर रहे हैं.
विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि अधिकारियों की योजना 2024 ओलंपिक के दौरान बेघरों और प्रवासियों को शहर से बाहर करने की है.
पेरिस में एक नहर पर बने पुल के नीचे दर्जनों विशाल और कांटेदार क्रंकीट के बैरिकेड रखे गए हैं.
सामाजिक और मानवीय मामलों में मुफ़्त कानूनी सहायता प्रदान करने वाले समूह पेरिस सॉलिडैरीटी बार लीगल एडवोकेसी ग्रुप की ऑरेलिया हुओट कहती हैं, “आज सड़कों पर अब कोई नहीं है.”
औरेलिया ब्रिज के नीचे उन्हीं कंक्रीट बैरिकेड की तरफ़ इशारा करते हुए कहती हैं कि आप इन ब्रिज के नीचे इन अवरोध को देख सकते हैं.
उन्होंने बताया, “यहाँ पुलिस आती है, गश्त लगाती है ताकि प्रवासी न तो यहाँ फिर से आ सकें और न ही अपने कैंप्स फिर से बना सकें.’’
ओलंपिक खेल के उद्घाटन कार्यक्रम से एक हफ्ते पहले यहाँ से बेघर लोगों को हटा दिया गया था. पेरिस में ओलंपिक के शुरू होने से महीनों पहले इस तरह की झुग्गियां और कैंप्स को खाली कराए जाने की कार्रवाई में ये सबसे ताज़ा घटना थी.
'ये कार्रवाई बुरे सपने जैसी'
फ़ारिस अल खली यूसुफ़ राजनीतिक उत्पीड़न के कारण अपना देश चाड छोड़कर फ्रांस आए थे और वो इस कार्रवाई से प्रभावित हुए हैं.
यूसुफ़ आगे बताते हैं कि वो ओलंपिक विलेज से कुछ सौ मीटर की दूरी पर बनी बिल्डिंग में क़रीबन पाँच सौ अन्य लोगों के साथ रहते थे, जिसे पुलिस द्वारा अप्रैल में खाली करा लिया गया था. यूसुफ़ का कहना है कि बिल्डिंग खाली कराते समय वहाँ रहने वाले लोगों से या तो पेरिस में या फिर दूर तुलूज शहर में उन्हें अस्थायी तौर पर बसाने का वादा किया गया था.
यूसुफ़ इसे शरणार्थियों के लिए बुरे सपने जैसा कहते हैं.
यूसुफ़ बताते हैं, “इसे अभी हम सभी जो चाड से आए हैं, झेल रहे हैं. यह तक कि मेट्रो टिकट ख़रीदते वक़्त भी उन्हें रोककर डिटेन्शन सेंटर भेज दिया जा रहा है. शरणार्थियों पर एक प्रकार का दबाव है.”
एक्टिविस्ट पॉल अलाउजे पूरी घटना बताते हुए कहते हैं कि कैसे नहर से कुछ मिनटों की दूरी पर पुल के नीचे एक दूसरे प्रवासी कैंप को खाली कराया गया था और वहाँ पक्के अवरोध रख दिए गए थे.
पॉल उन कैंप्स की तरफ़ इशारा करते हुए बताते हैं, ‘'यह कई सालों तक एक टेंट सिटी हुआ करती थी. तीन साल से लोग वहां रह रहे थे. हर जगह टेंट था जिसमें कहीं सौ, कहीं एक सौ तो कहीं दौ सौ लोग रहते थे.’’
पॉल अलाउजे फ्रांसीसी समूह ‘ले रेवर्स डे ला मेडेल’के लिए काम करते हैं. ‘ले रेवर्स डे ला मेडेल’ मतलब ‘तस्वीर का दूसरा पहलू भी’ होता है.
पॉल का कहना है कि ओलंपिक खेलों के लिए क़रीबन तेरह हज़ार प्रवासी फ्रांस की गलियों से हटाए गए हैं.
एक्टिविस्टों के मुताबिक़, यह सरकार की एक लॉन्ग-टर्म योजना थी, ओलंपिक खेलों के नज़दीक आते आते ही इस पर तेज़ी से काम होने लगा.
हालांकि प्रशासन हटाए गए लोगों को रहने के लिए जगह मुहैया कर रहा है लेकिन वो या तो अस्थायी हैं या फिर पेरिस से बहुत दूर देश के अन्य हिस्सों में हैं.
पॉल बताते हैं, “जब आप लोगों को पेरिस से उठाते हैं और उन्हे पेरिस से काफी दूर छोटे शहरों में भेज देते हैं तो उनके बीच उस तरह की एकजुटता वाली भावना नहीं रह जाती.”
पॉल कहते हैं, ‘निश्चित तौर पर हम भी चाहते हैं कि उन्हें रहने के लिए घर मिले. लेकिन जिस तरह से आप उन्हें हटाते हैं और उनके लिए अगर कोई लॉन्ग-टर्म योजना नहीं है तो समाधान के लिए तो आप उनकी समस्या कभी हल नहीं कर पाएंगे.’
वो कहते हैं, “पेरिस में विकसित हो चुके बड़े प्रवासी समूहों से अलग इन लोगों को अपनी ज़रूरत की चीज़ों और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है और आख़िर में ये राजधानी की सड़क पर आ जाते हैं.’’
प्रशासन का क्या कहना है?
इसी तरह की शिकायतें पहले हुए ओलंपिक खेलों में भी सामने आई थीं.
जापान के टोक्यो में एक पार्क को खाली करा लिया गया था जहां बेघर सोते थे. उसी तरह रियो डे जेनेरियो में भी झुग्गी-बस्तियों को खाली करा लिया गया था.
वहीं पेरिस की मेयर एने हिडालगो कहती हैं कि ओलंपिक से पहले बेघरों की मदद करना प्राथमिकता है.
जबकि पेरिस में अधिकारियों का कहना है कि लोगों का जीवन बेहतर बनाने के लिए गलियों सड़कों से लोगों को हटाना अहम है.
मेयर एने हिडालगो कहती हैं, "मैं यह भी चाहती हूं और बेघरों को घर दिलाना उन विषयों में से एक है जिन पर हम सरकार के साथ चर्चा कर रहे हैं. मेरी समझ के अनुसार वित्तीय संसाधन इसमें रुकावट पैदा कर रहे हैं जिसका समाधान सरकार की तरफ से किया जा सकता है."
पेरिस के प्रशासन ने बीबीसी से कहा कि ओलंपिक की तैयारी के वक्त बेघरों का मुद्दा हमारे जेहन में है और हम खेलों के दौरान उन्हें प्रवास मुहैया कराने के लिए तत्पर भी हैं.”
क्रंकीट अवरोधों की तरफ़ इशारा करते हुए, प्रशासन की तरफ से यह भी कहा गया है कि पेरिस शहर बेघरों के लिए इनका इस्तेमाल नहीं करता है.
क्रंकीट अवरोधों पर स्थिति और साफ करते हुए उन्होंने कहा कि पुल के नीचे रखे गए क्रंकीट अवरोधों उनके क्षेत्र में नहीं बल्कि पड़ोस की नगरपालिका के अंदर आता है और उन्होंने इन अवरोधों का इस्तेमाल प्रवासियों और नशीली दवाओं का सेवन करने वालों को लौटने से रोकने के लिए किया गया है.
इस सफाई के बाद भी कई एक्टविस्ट अभी भी गंभीर रूप से चिंतित हैं.
पॉल कहते हैं, “संक्षेप में कहें तो मेरे लिए तो यह एक विशेष सामाजिक समूह को हटाने जैसा है. आप बस दुर्दशा को छिपाने के लिए लोगों को शहर से बाहर करते हैं फिर कभी वापस आने से रोकते हैं तो यह सिर्फ एक शॉर्ट-टर्म सोल्यूशन है.”