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ताइवान के राष्ट्रपति ने खाई ये कसम, चीन क्यों भड़का?
- Author, रुपर्ट विंगफ़ील्ड-हाएज़ और निक मार्श
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
इसी साल कार्यभार ग्रहण करने के बाद अपने सबसे अहम भाषण में ताइवान के राष्ट्रपति विलियम लाई ने ताइवान के स्व शासन के दर्जे को बरक़रार रखने की क़सम खाई.
इस द्वीप पर चीन के दावे का परोक्ष रूप से ज़िक्र करते हुए लाई ने कहा, “इसे मिलाने की या हमारी संप्रभुता में दखल देने की किसी भी कोशिश का विरोध करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं.”
हालांकि दूसरी तरफ़, लाई ने “पूरे ताइवान स्ट्रेट में शांति और स्थिरता की यथास्थिति बनाए रखने” का वादा किया और बीजिंग के साथ जलवायु परिवर्तन, संक्रामक बीमारियों से लड़ने और इलाक़ाई सुरक्षा बनाए रखने में साथ मिलकर काम करने का वादा किया है.
लाई के भाषण पर चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा, “इस भाषण ने ताइवान की स्वतंत्रता पर उनके अड़ियल रुख़ को जगज़ाहिर कर दिया है.”
भाषण में नरमी पर रुख़ में कड़ाई
ताइवान नेशनल डे के मौके पर ताइपे में आयोजित एक कार्यक्रम में लाई ने भाषण में कहा, “रिपब्लिक ऑफ़ चाइना और पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना एक दूसरे के अधीन नहीं हैं.”
इससे नौ दिन पहले ही कम्युनिस्ट चीन ने अपनी 75वीं सालगिरह मनाई थी .
लाई ने कहा, “इस ज़मीन पर, लोकतंत्र और आज़ादी फल फूल रही है. पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना को ताइवान का प्रतिनिधित्व करने का कोई हक़ नहीं है.”
इससे पहले लाई ने लोगों को दिलासा दिलाया था कि उनके नेशनल डे भाषण में कोई ‘अनोखी’ बात नहीं होगी. वो लोगों को आश्वस्त करना चाह रहे थे कि वो कोई ऐसी बात नहीं करेंगे जिससे चीन और भड़के.
यह सफ़ाई उन्हें इसलिए देनी पड़ी क्योंकि पिछले कई महीनों में उन्होंने कई मौकों पर ऐसे बयान दिए थे जिसे लोगों ने उकसावे के रूप में देखा.
नेशनल ताइवान यूनिवर्सिटी में राजनीतिक विज्ञान पढ़ाने वाले लेव नैकमैन मानते हैं कि गुरुवार का राष्ट्रपति लाई का भाषण काफ़ी हद तक संतुलित था.
नैकमैन ने बीबीसी से कहा, “यह भाषण पहले के भाषणों के मुकाबले काफ़ी नरम और कम आक्रामक था. उनके ख़िलाफ़ हमला तेज़ करने के लिए, यह भाषण चीन को बहुत कम बहाना देगा.”
उन्होंने जोड़ा, “हालांकि, इस भाषण की आलोचना करने के लिए बीजिंग फिर भी कोई न कोई बहाना ढूंढ ही लेगा.”
नैकमैन उम्मीद कर रहे थे कि अगले कुछ दिनों में बीजिंग की ओर से इस क्षेत्र में और अधिक सैन्य अभ्यासों के रूप में तीखी प्रतिक्रिया आएगी.
चीन क्या बोला
स्वतंत्रता पर राष्ट्रपति लाई को “अड़ियल” बताते हुए चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने उनके भाषण और अपने राजनीतिक लाभ के लिए ताइवान जलडमरूमध्य में तनाव को बढ़ाने की उनकी ख़तरनाक़ मंशा की आलोचना की.
लाई के चीनी नाम का इस्तेमाल करते हुए गुरुवार को माओ निंग ने पत्रकारों से कहा, “इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि लाई चिंग-ते प्रशासन क्या कहता है या क्या करता है, वो इस वस्तुगत तथ्य को नहीं बदल पाएगा कि ताइवान स्ट्रेट का दोनों तरफ़ का हिस्सा एक ही चीन का है. ना ही इस ऐतिहासिक ट्रेंड को बदल पाएगा कि चीन का एकीकरण होना ही है, और आख़िरकार ये होकर रहेगा.”
पिछले हफ़्ते लाई ने कहा कि ये “पूरी तरह असंभव” है कि चीन ताइवान की मातृभूमि बन जाए क्योंकि इस द्वीप की सरकार 1911 में बनी थी, यानी 1949 में मेनलैंड चाइना में मौजूदा कम्युनिस्ट सरकार आने के दशकों पहले.
शनिवार को ताइवान के नेशनल डे से पहले एक संगीत कार्यक्रम में लाई ने कहा था, “इसकी बजाय, रिपब्लिक ऑफ़ चाइना, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना के नागरिकों की मातृभूमि बन सकता है.”
ताइवान में रिपब्लिक ऑफ़ चाइना का संविधान बरक़रार है जिसकी स्थापना चाइनीज़ मेनलैंड में की गई थी.
गृह युद्ध के दौरान 1949 में हारने के बाद रिपब्लिक ऑफ़ चाइना की सरकार निर्वासित होकर ताइवान चली गई और तबसे ही वहां उसका शासन है.
पिछले महीने, लाई ने इस द्वीप पर “क्षेत्रीय अखंडता” के आधार पर चीन के एकीकरण के दावे पर सवाल उठाए थे. लाई ने सवाल किया कि अगर ऐसा है तो बीजिंग उन सभी क्षेत्रों पर भी दावे ठोकेगा जो कभी चीनी साम्राज्य का हिस्सा हुआ करते थे.
अपने कार्यकाल के 100 दिन पूरे होने पर लाई ने एक इंटरव्यू में कहा था, “अगर चीन ताइवान को मिलाना चाहता है...तो यह क्षेत्रीय अखंडता के लिए नहीं है.”
उन्होंने कहा, “अगर यह वाक़ई क्षेत्रीय अखंडता के लिए है तो चीन रूस के साथ क्यों नहीं करता.”
ताइवान की स्वतंत्रता पर क्या बोले लाई?
लाई ने 1858 की आइगुन संधि का संदर्भ दिया, जिसके तहत चीन ने मंचूरिया का एक बड़ा हिस्सा रूस को दे दिया था.
जब यह समझौता हुआ तब चीन इसे “अपमान की सदी” कहा करता था, जब पश्चिमी शक्तियों और जापान ने कमज़ोर किंग राजवंश का दोहन किया था.
बुधवार को चीन की सरकार ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राष्ट्रपति लाई अपने “ख़तरनाक़ मंशा” के साथ तनाव को बढ़ा रहे हैं.
ताइवान मामलों के चीनी विभाग की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, “लाई चिंग-ते का ताइवान की आज़ादी का झूठा दिलासा, नई बोतल में पुरानी शराब की तरह है और इसने ताइवान की स्वतंत्रता पर उनके ज़िद्दी रुख़ और शत्रुता और टकराव वाली उनके भयावह इरादों से पर्दा हटा दिया है.”
इसी साल जनवरी में हुए चुनावों में लाई ने ताइवान के पूर्व राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन की जगह ली, जो खुद डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डीपीपी) की नेता थीं.
कई राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि लाई के सार्वजनिक बयान उनके पूर्ववर्ती राष्ट्रपति के बयानों से भी बढ़चढ़ कर हैं, जो कि अपने सार्वजनिक भाषणों में बहुत सावधान रहा करती थीं.
लाई प्रशासन के अधिक टकराव वाले रुख़ के बावजूद, लाई ने ताइवान और चीन के बीच यथास्थिति बनाए रखने पर ज़ोर दिया है.
उन्होंने कहा कि ताइवान को स्वतंत्र घोषित करने की कोई ज़रूरत नहीं है क्योंकि यह पहले से ही एक स्वतंत्र संप्रभु राष्ट्र है, जो कभी भी पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना के अधीन नहीं रहा.
लाई के गुरुवार के भाषण का अधिकांश हिस्सा ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और आवास जैसे घरेलू मुद्दों पर केंद्रित था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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