ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने की हो रही कोशिश, क्या कर रहे ये देश

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- Author, कैरोलाइन हॉली
- पदनाम, बीबीसी कूटनीतिक संवाददाता
लगभग एक दशक पहले ईरान के परमाणु कार्यक्रमों पर लगाम लगाने के लिए दुनिया की बड़ी ताक़तों के बीच एक समझौता हुआ था.
लेकिन अंतरराष्ट्रीय बिरादरी और ईरान दोनों के लिए वक़्त एक बार फिर अहम मोड़ पर आ खड़ा हुआ है.
ईरान पहले की तुलना में परमाणु बम बनाने की काबिलियत हासिल करने के और कऱीब आ गया है.
वहीं उसे परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए जो समझौता हुआ था उसकी मियाद इस साल ख़त्म हो रही है.

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लंदन स्थित थिंक टैंक चैटम हाउस की डॉ. सनम वकील का कहना है कि ये असल में एक निर्णायक मोड़ है.
वो कहती हैं, ''अगर सार्थक और सफल डिप्लोमेसी की मदद नहीं ली गई तो हम ईरान को परमाणु हथियारों से लैस होते या फिर उस पर सैन्य हमला होते देख सकते हैं.''
दो साल की मुश्किल सौदेबाज़ी के बाद पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को ढीला करने पर राज़ी हुए थे.
लेकिन इसके बदले ईरान की परमाणु गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिए गए थे.

दरअसल आर्थिक प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था को लगभग चौपट कर दिया था. लिहाज़ा उसे समझौते की मेज़ पर आना पड़ा.
लेकिन 2018 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए इस समझौते से हाथ खींच लिया था.
उन्होंने ईरान पर दोबारा पुराने प्रतिबंध लाद दिए थे. और फिर धीरे-धीरे ईरान ने भी अपने वादों पर अमल करना रोक दिया था.
अब ईरान ने यूरेनियम का संवर्द्धन तेज़ कर दिया है. ये परमाणु रिएक्टर के ईंधन के तौर पर काम करता है लेकिन इससे बम भी बनाया जा सकता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान ने अब इतनी क्षमता हासिल कर ली है कि वो एक सप्ताह में परमाणु बम बनाने लायक यूरेनियम का संवर्द्धन कर सकता है. ये एक परमाणु हथियार बनाने के लिए काफी होगा.
यही वजह है कि ईरान के परमाणु समझौते से जुड़े अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, फ़्रांस, जर्मनी और रूस ने अपनी राजनयिक गतिविधियां बेहद तेज़ कर दी है.
ईरान के परमाणु हथियार और ट्रंप की धमकी

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बुधवार को इसे लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बंद कमरे में बैठक भी हुई थी.
चीन भी शुक्रवार को ईरान और रूस से बात कर रहा है ताकि इस मसले का ''कूटनीतिक हल'' निकाला जा सके.
इस हफ्ते चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा था, ''मौजूदा हालात में सभी पक्षों को शांति और संयम से काम लेना चाहिए ताकि ये मसला (ईरान से जुड़ा परमाणु मुद्दा) टकराव और संघर्ष की ओर न चला जाए.''
बुधवार को ही संयुक्त अरब अमीरात से एक राजनयिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पत्र लेकर तेहरान पहुंचे. हालांकि इस पत्र में क्या लिखा है ये अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है.
लेकिन ट्र्ंप ने 'अधिकतम दबाव' बनाने की अपनी रणनीति के तहत ईरान पर नए प्रतिबंध लादने के बाद पिछले सप्ताह टेलीविज़न पर ईरान को अल्टीमेटम भी दिया था.
उन्होंने कहा था कि ईरान अगर समझौता नहीं करेगा तो उसे इसका ख़मियाजा भुगतना पड़ सकता है.
उन्होंने कहा था, ''मैंने उन्हें (ईरान को) एक चिट्ठी लिखी है. मैंने कहा है कि उम्मीद है आप समझौता करने जा रहे हैं. अगर हमें सेना का सहारा लेना पड़ा तो ये बहुत बुरा होगा.''
परमाणु हथियार को लेकर ईरान का रुख़

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ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली ख़ामेनेई, अमेरिका के इस 'धमकी' भरे रुख़ के बाद उससे बातचीत के विचार को ख़ारिज करते दिखे.
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजे़श्कियान ने भी सार्वजनिक तौर पर ऐसा ही रुख़ जाहिर किया. जबकि वो पहले परमाणु समझौते पर दोबारा बातचीत करने के पक्ष में थे.
इसके बदले उन्होंने ईरान पर प्रतिबंधों को ख़त्म करने की मांग कर की. लेकिन ईरान के संकेत साफ नहीं रहे हैं.
डॉ. सनम वकील कहती हैं, ''ईरान के अंदर कई ऐसे धड़े हैं जो समझौते के पक्ष में हैं. जबकि कुछ धड़ों का मानना है कि ईरान के लिए खुद को परमाणु हथियार से लैस करने का ये बिल्कुल सही समय है.''
दरअसल ईरान में ट्रंप प्रशासन को लेकर भरोसा बेहद कम है.
डॉ. वकील कहती हैं, ''ईरान में लोग ट्रंप के गलत और धमकाने वाले (यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदोमिर ज़ेंलेस्की के मामले में) अंदाज को देख चुके हैं. गज़ा पर उनकी अजीब पेशकश को वो भी देख चुके हैं. ईरान खुद को ऐसी स्थिति में नहीं देखना चाहता.''
ईरान खुद की कनपटी पर पिस्तौल रखे जाने को अपमानजनक मानता है और इससे नफरत करता है. लेकिन वो इस समय कमज़ोर हो चुका है.
पिछले साल के इसराइली हवाई हमलों ने ईरान की सैन्य ताकत कम कर दी है. माना जाता है कि इन हमलों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रमों की हिफ़ाजत में लगे ज्यादातर एयर डिफेंस को ध्वस्त कर दिया है.
इसराइल लंबे समय से परमाणु हथियार विकसित करने के लिए बनाए गए ईरान के इन संयंत्रों का ख़्तामा करना चाहता है.
जबकि ईरानी प्रशासन लगातार ये कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है.
अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की चिंता बढ़ी

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लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रमों को लेकर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की चिंता बढ़ती ही जा रही है.
इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (आईएईए) को लगभग आख़िरी सांस गिन रहे परमाणु समझौते की निगरानी की ज़िम्मेदारी दी गई है.
एजेंसी ने कहा है कि उसने पिछले कुछ वर्षों के दौरान ईरान को अपने संयंत्रों में परमाणु क्षमता को मज़बूत करते देखा है.
आईएईए के महानिदेशक राफ़ेल ग्रॉसी का कहना है कि ईरान के पास 60 फ़ीसदी की शुद्धता वाले संवर्द्धित यूरेनियम का स्टॉक है, और उसका स्टॉक लगातार काफी तेज़ी बढ़ता जा रहा है. परमाणु हथियार बनाने के लिए 90 फ़ीसदी शुद्धता वाले संवर्द्धित यूरेनियम की जरूरत होती है.
आईएईए ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है, ''ईरान ने तेज़ी से संवर्द्धित यूरेनियम का उत्पादन किया है और इसे हासिल भी किया है. ईरान परमाणु हथियार विहीन एकमात्र ऐसा देश है जो इस ख़तरनाक स्तर तक यूरेनियम संवर्द्धन कर रहा है. ये चिंता की बात है.''
लेकिन परमाणु गतिविधियों पर नज़र रखने वाली ये एजेंसी फिलहाल ये पता करने की स्थिति में नहीं है ईरान आख़िर कर क्या रहा है. क्योंकि ईरानी प्रशासन ने आईएईए के सर्विलांस उपकरणों को हटा दिया है.
ग्रॉसी का कहना है चाहे किसी भी ज़रिये से हो, लेकिन ईरान के साथ इस समय कूटनीतिक स्तर पर बातचीत बेहद ज़रूरी और 'अपरिहार्य' हो गई है.

2015 के परमाणु समझौते से जुड़े पक्ष इस साल अक्तूबर में, ईरान पर नियमों के उल्लंघन के आरोप में लगाए जाने वाले संयुक्त राष्ट्र के कथित प्रतिबंधों को दोबारा बहाल करने की अपनी क्षमता खो देंगे.
इसलिए ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी, ईरान पर प्रतिबंधों को दोबारा बहाल करने की चेतावनी दे रहे हैं. वो जब तक इसे लेकर दबाव बना सकते हैं, बना रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन के डिप्टी राजदूत जेम्स कारिउकी ने बुधवार को कहा, ''हमारे सामने ये साफ है कि हम ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए कोई भी कूटनीतिक कदम उठाने को तैयार हैं. ज़रूरत पड़ी तो ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों को दोबारा बहाल किया जा सकता है.''

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फिलहाल ईरान और पूरी दुनिया का बहुत कुछ दांव पर लगा है.
लंदन स्थित थिंक टैंक इंटरनेशल इंस्टीट्यूट फ़ॉर स्ट्रेटजिक स्टडीज़ में परमाणु अप्रसार पर काम करने वाले डॉ. एलेक्ज़ेंडर बोलफ़्रांस कहते हैं, ''अगर ईरान परमाणु बम बनाने का फ़ैसला करता है तो वो कुछ हफ्तों में ही एक साथ कई हथियारों के लिए पर्याप्त यूरेनियम संवर्द्धित कर सकता है.''
हालांकि उन्होंने ये भी कहा है कि मुकम्मल हथियार की डिज़ाइनिंग और असेंबलिंग में कई महीनों से लेकर एक साल या इससे ज्यादा वक्त भी लग सकता है.
वो कहते हैं, ''ईरान अब पहले की तुलना में परमाणु क्षमता हासिल करने के कहीं ज्यादा करीब है. लेकिन अभी भी ये साफ नहीं है कि उसने परमाणु हथियार विकसित करने का फ़ैसला कर लिया है या फिर अपनी शर्तें मनवाने के लिए अपनी इस क्षमता का इस्तेमाल करना चाहता है.''
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