विपक्षी पार्टियों की पटना में एकजुटता बैठक के बाद अब तक क्या क्या हुआ?

विपक्षी दलों की बेंगलुरु में बैठक से पहले सड़कों पर शीर्ष नेताओं के पोस्टर लगे.

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इमेज कैप्शन, विपक्षी दलों की बेंगलुरु में बैठक से पहले सड़कों पर शीर्ष नेताओं के पोस्टर लगे.

बेंगलुरु में 17-18 जुलाई को विपक्षी दलों की दूसरी बैठक की तैयारी पूरी हो गई है. दूसरी तरफ़ बीजेपी ने 18 जुलाई को एनडीए की बैठक दिल्ली में बुलाई है.

बेंगलुरु बैठक से ठीक पहले कांग्रेस ने दिल्ली में नौकरशाहों की पोस्टिंग वाले केंद्र सरकार के अध्यादेश पर आम आदमी पार्टी को समर्थन देने का संकेत दिया, जिसके बाद 'आप' ने इस बैठक में शामिल होने की रज़ामंदी दे दी है.

बीते 23 जून को पटना में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की मेज़बानी में विपक्षी दलों की बैठक में आगामी आम चुनावों की रणनीति तय करने की कोशिश हुई थी.

इसके बाद अचानक राजनीतिक सरगर्मी तेज़ हो गई. सत्तारूढ़ बीजेपी ने भी अपने किले को मज़बूत करने की कोशिशें शुरू कर दीं और पिछले 20 दिन कुछ अहम राजनीतिक घटनाक्रमों के गवाह रहे.

पटना की मीटिंग में नीतीश कुमार और लालू यादव के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, शरद पवार, उद्धव ठाकरे, हेमंत सोरेन, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, फारुख़ अब्दुल्ला, महबूबा मुफ़्ती जैसे कई कद्दावर नेता शामिल हुए थे.

बैठक में सभी पार्टियों ने तय किया कि बीजेपी के ख़िलाफ़ आगामी लोकसभा चुनाव वो एक होकर लड़ेंगे.

इसी बैठक में तय हुआ था कि जुलाई में विपक्षी पार्टियां एक बार फिर शिमला में इकट्ठा होंगी और तब आगे की रणनीति तय की जाएगी.

अब ये बैठक कर्नाटक के बेंगलुरु में आयोजित हो रही है.

अब तक बैठक में 24 राजनीतिक दलों के शामिल होने की सूचना है. कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी भी विपक्षी दलों की बैठक में शामिल होंगी.

लेकिन इन दोनों बैठकों के दरमियान गुज़रे दिनों में भारतीय राजनीति के कुछ ऐसे घटनाक्रम हुए, जो आगामी आम चुनावों के लिहाज से काफ़ी अहम रहे.

इन घटनाओं में जहां विपक्षी एकता में दरार दिखी तो दूसरी तरफ़ बीजेपी ने अपने एनडीए के कुनबे को दुरुस्त करने और उसे बढ़ाने की कोशिशें कीं.

पटना में 23 जून की विपक्षी दलों की बैठक में नीतीश कुमार, लालू यादव, ममता बनर्जी, शरद पवार और अन्य नेता.

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विपक्षी और सत्तापक्ष खेमे में घटी बड़ी घटनाएं

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पटना में हुई बैठक के दिन ही आम आदमी पार्टी ने अपने सुर बदल लिए थे और दिल्ली अध्यादेश पर कांग्रेस की ओर से कोई स्पष्ट बात न कहने से नाराज़गी व्यक्त की थी.

इस बैठक के बाद एनसीपी में दो फाड़ हो गए और शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने अलग दल बनाकर बीजेपी नीत महाराष्ट्र सरकार में शामिल होने की घोषणा कर दी.

विपक्षी एकता की धुरी का प्रमुख चेहरा रहे शरद पवार की पार्टी में आए इस अचानक भूचाल ने विपक्षी पार्टियों को भी सकते में डाल दिया.

लैंड फॉर जॉब केस की चार्ज़शीट में बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का नाम आने से बिहार के महागठबंधन की मुश्किलें भी बढ़ी हैं.

मानहानि मामले में राहुल गांधी को गुजरात हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली जबकि पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के दौरान हुई हिंसा के बीच ममता बनर्जी बीजेपी और विपक्षी दलों के निशाने पर हैं.

दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समान नागरिक संहिता पर बयान देकर 2024 का एजेंडा तय करने की कोशिश की है.

बीजेपी ने कई राज्यों में अपने प्रमुख बदले, वहीं कांग्रेस ने राजस्थान चुनाव के मद्देनज़र महत्वपूर्ण बैठक की.

सियासी बिसात पर एक तरफ विपक्षी खेमे में उठापटक हो रही है तो दूसरी तरफ़ बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह एनडीए को विस्तार देने में जुटे हुए हैं.

रविवार को पूर्वी उत्तर प्रदेश में जनाधार रखने वाली सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने अमित शाह से मिलकर एनडीए में शामिल होने का ऐलान किया.

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतन राम मांझी महागठबंधन से छिटक कर एनडीए में पहले ही शामिल हो चुके हैं.

बीजेपी 18 जुलाई को दिल्ली में एनडीए की बैठक बुला रही है, जिसमें बिहार से जीतन राम मांझी और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास पासवान) के नेता चिराग पासवान को न्योता भेजा है.

ये घटनाएं दिखाती हैं कि राजनीतिक समीकरण बहुत तेजी से बदल रहे हैं.

एनसीपी में दो फाड़ के बाद शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने बनाया अलग दल.

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अब तक क्या कुछ हुआ?

12 जुलाई, 2023: आम आदमी पार्टी ने कहा है कि दिल्ली अध्यादेश के मसले पर कांग्रेस जब तक अपना रुख़ स्पष्ट नहीं करती, तब तक किसी भी बैठक या डिनर में वो शामिल नहीं होंगे.

इससे पहले पटना में हुई बैठक के ठीक बाद भी आम आदमी पार्टी ने विपक्षी एकता को झटका देते हुए कहा था कि वो अब ऐसी बैठकों का तब तक हिस्सा नहीं है, जब तक दिल्ली अध्यादेश पर कांग्रेस अपना स्टैंड क्लियर नहीं करती.

09 जुलाई, 2023: पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव के दौरान हुई हिंसक झड़पों के कारण बीजेपी तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी पर हमलावर है. इसके साथ ही पार्टी ने राहुल गांधी को भी निशाने पर लिया है. बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी से सवाल पूछा है कि क्या उन्हें ऐसी घटनाएं स्वीकार्य लगती हैं, क्योंकि उनकी पार्टी ने हाल ही अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए विपक्षी एकता की बात कही है.

भोपाल में स्मृति ईरानी ने कहा कि जिस तरह से लोग पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनावों में लोकतंत्र की हत्या देख रहे हैं, कांग्रेस उसी टीएमसी से हाथ मिला रही है.

7 जुलाई, 2023: गुजरात हाईकोर्ट ने मोदी सरनेम मामले में कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद राहुल गांधी की याचिका ख़ारिज कर दी. यानी उनकी मुश्किलें बरकरार रहेंगी.

मोदी सरनेम मामले में टिप्पणी को लेकर राहुल गांधी को आपराधिक मानहानि के तहत दोषी ठहराया गया था और इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ उन्होंने गुजरात हाई कोर्ट में अपील की थी.

इसी दिन पार्टी ने राजस्थान चुनाव से पहले प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के साथ बैठक की. इस बैठक में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच चल रहे मतभेद को भी मिटाने की कोशिश की गई. पार्टी ने फ़ैसला लिया है कि वो बिना सीएम फेस के इस बार चुनाव में हिस्सा लेगी.

4 जुलाई, 2023: 2024 लोकसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी ने कई राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों को बदला. पार्टी ने जिन राज्यों में ये बदलाव किए हैं, उनमें तेलंगाना, झारखंड, आंध्र प्रदेश और पंजाब राज्य शामिल हैं. पार्टी ने बाबूलाल मरांडी को झारखंड का प्रदेश अध्यक्ष, सुनील जाखड़ को पंजाब का प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी को तेलंगाना में भाजपा अध्यक्ष नियुक्त किया है.

3 जुलाई, 2023: लैंड फॉर जॉब केस मामले में सीबीआई ने बीते तीन जुलाई को दूसरी चार्जशीट दाख़िल की थी. इस चार्जशीट में पहली बार तेजस्वी यादव को भी आरोपी बनाया गया है. तेजस्वी यादव बिहार में विपक्ष का एक बड़ा चेहरा हैं.

27 जून, 2023: बीते 27 जून को पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूसीसी पर विस्तृत तरीके से बात की. भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान मोदी ने कहा कि 'एक ही परिवार में दो लोगों के लिए अलग-अलग नियम नहीं हो सकते. ऐसी दोहरी व्यवस्था से घर कैसे चल पाएगा?'

नरेंद्र मोदी

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ज़्यादातर विपक्षी पार्टियां समान नागरिक संहिता का विरोध कर रही हैं. वहीं आम आदमी पार्टी ने 'सैद्धांतिक तौर पर’ इसका समर्थन किया है.

पार्टी नेता और सांसद संदीप पाठक ने कहा है, ''हमारी पार्टी सैद्धांतिक रूप से इसका समर्थन करती है. आर्टिकल 44 भी इसका समर्थन करता है. चूंकि ये सभी धर्मों से जुड़ा मामला है, ऐसे में इसे तभी लागू किया जाना चाहिए, जब इस पर सर्वसम्मति हो.''

शिवसेना(उद्धव ठाकरे गुट) का भी कुछ यही रुख़ है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी पार्टियों की बीते 23 जून की बैठक में इस बात पर तो सहमति बन गई कि सभी साथ चुनाव लड़ेंगे लेकिन किस मुद्दे पर लड़ेंगे ये तय नहीं हो पाया.

विपक्षी पार्टियों की एकता से पहले पीएम ने यूसीसी का मुद्दा छेड़ कर एजेंडा सेट करने की कोशिश की है.

अब कांग्रेस की तरफ़ से ये बयान आ रहा है कि अगली बैठक में वो इसका जवाब देंगे. कहा जा रहा है कि इस मुद्दे पर विपक्ष प्रो-एक्टिव होने की बजाय रिएक्टिव हो गया.

विपक्षी पार्टियों और एनडीए की बैठकों के बाद आने वाले समय में राजनीतिक परिदृश्य के और स्पष्ट होने की संभावना है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष की अलग अलग बैठकों में क्या कुछ तय होता है, ये आगामी आम चुनावों के लिहाज से काफ़ी अहम होगा.

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