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ईरान में हमलों से क्या हासिल करना चाहता है आईएस
- Author, मिना अल लामी
- पदनाम, जिहादी मीडिया विशेषज्ञ
इस्लामिक स्टेट समूह (आईएस) ने ईरान में 3 जनवरी को हुए दोहरे धमाकों की जिम्मेदारी लेकर खुद को फिर से सुर्खियों में ला दिया है.
आईएस ने यह हमला कुद्स फोर्स के कमांडर कासिम सुलेमानी की अमेरिकी ड्रोन हमले में हुई हत्या की चौथी बरसी पर करमान शहर में आयोजित एक समारोह में किया. इस बम धमाके को आईएस ने आत्मघाती हमला बताया है. इसमें 85 लोग मारे गए.
हमले की तारीख और इससे हुआ नुकसान ईरान के लिए एक गंभीर झटका है. एक ताकतवर शिया-बहुल देश में इस तरह के हमलों को अंजाम देना आईएस की आश्चर्यजनक क्षमता को बताता है. वह भी तब जब उसके पास बहुत सीमित लड़ाके और संसाधन हैं.
इस विश्लेषण में हम इन हमलों की कीमत और उनकी तुलना ईरान में आईएस द्वारा पहले किए गए हमलों से करेंगे.
आईएस ने क्या दावा किया है?
करमान में हुए धमाकों के एक दिन बाद 4 जनवरी को आईएस ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली.
आईएस का दावा है कि हमला विस्फोटक बेल्ट पहने दो आत्मघाती हमलावरों ने किया. स्थानीय मीडिया और अधिकारी शुरू में विस्फोटकों की प्रकृति को लेकर स्पष्ट नहीं थे. यह अनुमान लगाया जा रहा था कि विस्फोटक किसी बैग में रखा हुआ था और धमाका कहीं दूर से किया गया.
ईरानी मीडिया ने आईएस के जिम्मेदारी के दावे की खबर दी. लेकिन कुछ संस्थानों का कहना था कि इन धमाकों के लिए इसराइल और अमेरिका आंशिक रूप से दोषी हैं.
आईएस ने दोनों आत्मघाती हमलावरों के नाम उमर अल-मुवाहिद और सैफुल्ला अल-मुजाहिद बताया है. ये सामान्य उपनाम हैं, इनसे उनके मूल देश के बारे में कोई जानकारी नहीं मिलती है. अपना फायदा देखकर आईएस अक्सर ऐसे नाम चुनता है जो हमलावरों की राष्ट्रीयता या जातीयता को बताते हों. इस मामले में, उसने इस जानकारी को छिपाने की कोशिश की है.
आईएस की तथाकथित न्यूज़ एजेंसी 'अमाक' ने एक फोटो जारी की है. इसमें दो हमलावरों को दिखाया गया है. दोनों नकाबपोश हैं और आईएस के बैनर के सामने पोज दे रहे हैं.
आईएस ने कहा कि हमलावर हजारों शियाओं के समारोह में पहुंचने में कामयाब रहे. उसका दावा है कि अधिकतम नुकसान पहुंचाने के लिए करीब 20 मिनट के अंतराल पर उन्होंने अपने आत्मघाती बेल्टों में विस्फोट कर दिया.
आईएस का कहना है कि सुलेमानी इराक और सीरिया में हुए मुसलमानों के दर्जनों नरसंहारों में शामिल थे.
आईएस ने इस बात पर खुशी जताई कि यह हमला ईरान सरकार के लिए एक बड़ा झटका है.
ईरान का दावा उसके नए अभियान के नाम को प्रदर्शित करने वाला पहला दावा था. उसके बाद उसी तरह का दावा दुनिया के अन्य हिस्सों में भी किए गए.
आईएस ने ईरान के लिए कभी किसी डेडिकेटेड शाखा की घोषणा नहीं की है. इसलिए करमान हमले के लिए आईएस के दावे को केवल ईरान के रूप में चिह्नित किया गया था. इसमें उसके किसी सहयोगी संगठन का नाम नहीं था. अहवाज़ में 2018 में हुई गोलीबारी को छोड़कर, ईरान में आईएस के अधिकांश हमलों का यही मामला रहा है. अहवाज गोलीबारी के लिए आईएस की अफगानिस्तान-केंद्रित खोरासान प्रांत शाखा (आईएसकेपी) को जिम्मेदार ठहराया गया था.
हमले का समय और इसराइल-ग़ज़ा युद्ध
इस हमले का समय महत्वपूर्ण है, केवल सुलेमानी की बरसी पर हुए हमले के कारण नहीं.
आईएस ने ईरान पर ऐसे समय हमला किया है जब कट्टरपंथी जिहादी पश्चिमी एशिया में ईरान की खतरनाक और बढ़ती भूमिका की निंदा कर रहे हैं.
इसराइल-ग़ज़ा युद्ध के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि सुन्नी खासकर फलस्तीनी समूह हमास, ईरान के इसराइल विरोधी रुख और बयानबाजी से मूर्ख बन रहे हैं.
जिहादियों ने ईरान पर खुद को इसराइल के खिलाफ फलस्तीनियों के चैंपियन के रूप में पेश कर, खासकर क्षेत्र में ईरान के प्रॉक्सियों द्वारा इसराइल और अमेरिका विरोधी हमलों से सुन्नी समर्थन हासिल करने और क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है.
जिहादी इस बात से नाराज हैं कि उनकी इसराइल विरोधी धमकियों और बयानबाजी के बावजूद, फलस्तीनियों से अपील करने के उनके प्रयास लोकप्रियता हासिल करने में विफल हो रहे हैं.
खासकर इलाके में ईरान और संबद्ध शिया गुटों के खिलाफ उनकी चेतावनियां विफल होती दिख रही हैं, क्योंकि ये वही शिया समूह हैं- (जैसे लेबनान में हिजबुल्लाह, यमन में हूती और इराक में मिलिशिया) जो इसराइल और अमेरिका के हितों के खिलाफ कार्रवाई करते नजर आ रहे हैं.
आईएस ने करमान हमले को लेकर किए दावे में इसका जिक्र किया है. अमाक की रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य पूर्व के इलाके में कई पार्टियां ईरानी परियोजना को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही हैं, इस वजह से हमला हुआ, वहीं केंद्रीय दावे में चेतावनी दी गई कि मुजाहिदीन इस इलाके में ईरान की परियोजनाओं का सामना करेंगे.
यह कारण जिहादियों को पसंद है, कम से कम उनके प्रचार और भर्ती प्रयासों के लिए. इसलिए इस मुद्दे पर ईरान की बयानबाजी संभावित रूप से खतरनाक वैचारिक प्रतिस्पर्धा पेश करती है.
इस तरह ईरान को निशाना बनाना जिहादी हलके में आईएस के लिए एक प्रचार का तरीका हो सकता है, खासतौर पर यह देखते हुए कि इस समूह का कट्टर जिहादी प्रतिद्वंद्वी, अल-कायदा, जो ग़ज़ा युद्ध के संदर्भ में ईरान को लेकर इसी तरह की शिकायतें कर रहा है, लेकिन उसने अभी तक ऐसा कुछ भी नहीं किया है.
आईएस ने अलकायदा पर बार-बार ईरान को निशाना बनाने से बचने का आरोप लगाया है, क्योंकि ईरान अलकायदा के प्रमुख नेताओं को शरण देता रहा है, इनमें अल-कायदा के वर्तमान नेता सैफ अल-अदल भी शामिल हैं.
हमले का स्तर और प्रभाव
करमान हमला ईरान में आईएस की ओर से किया गया चौथा हमला है.आईएस ने पहले हमले का दावा 2017 में किया था. लेकिन जो बात इस हमले को पिछले हमलों से अलग बनाती है, वह है हताहतों की संख्या. इस हमले में 85 लोगों की मौत हुई है और 284 लोग घायल हुए हैं.
यह पिछले एक साल में दुनिया भर में आईएस द्वारा किए गए हमलों में सबसे बड़ा है, जिसमें हताहतों की संख्या इतनी अधिक है. पिछले जुलाई में उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान में एक राजनीतिक रैली में आईएस का सबसे बड़ा आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें कम से कम 45 लोगों की मौत हुई थी.
ईरान में हुई मुट्ठी भर हमलों के बावजूद, आईएस ने इन अभियानों में बड़े पैमाने पर हाई-प्रोफाइल और प्रतीकात्मक लक्ष्यों को निशाना बनाया है.
ईरान में आईएस का पहला हमला, 7 जून 2017 को हुआ था. इसमें आईएस के लड़ाकों ने बंदूकों और आत्मघाती बेल्टों का उपयोग कर राजधानी तेहरान में ईरान की संसद भवन और अयातुल्लाह ख़ोमैनी के मकबरे पर संयुक्त रूप से हमला किया. इस हमले में 12 लोगों की जान गई.
इसके कुछ दिनों बाद आईएस ने एक ऑडियो संदेश जारी कर ईरान हमले के साथ-साथ दुनिया भर में आईएस आतंकवादियों की ओर से किए गए अन्य हमलों की सराहना की.
इसके एक साल बाद, 22 सितंबर 2018 को आईएस के बंदूकधारियों ने ईरान के दक्षिणी शहर अहवाज़ में ईरान-इराक युद्ध (1980-1988) की शुरुआत की सालगिरह मनाने के लिए आयोजित एक सैन्य परेड को निशाना बनाया. इस हमले में 24 लोग मारे गए.
पहले के तीन हमलों के उलट इस हमले की जिम्मेदारी आईएस की अफगानिस्तान-केंद्रित शाखा आईएसकेपी ने ली.
आईएस ने शुरू में दावा किया कि जब लड़ाकों ने हमला किया तो ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी परेड में मौजूद थे, लेकिन बाद में उसने अपना यह दावा वापस ले लिया.
अहवाज़ हमले को लेकर आईएस के प्रवक्ता ने एक संक्षिप्त और समर्पित ऑडियो संदेश जारी किया था.
आईएस का नया अभियान?
आईएस का तीसरा हमला 26 अक्टूबर 2022 को हुआ था. उस दिन आईएस के एक बंदूकधारी ने दक्षिणी शहर शिराज के शाहचेराग दरगाह में जायरीनों को निशाना बनाया. इसमें 13 लोगों की जान गई थी.
इसके बाद अल-कायदा पर कटाक्ष करते हुए आईएस ने कहा कि इस हमले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह एकमात्र ताकत है जो शिया शक्ति ईरान से मुकाबला करने की इच्छा रखता है.
लेकिन आईएस ने अगस्त 2023 में उसी दरगाह पर हुए इसी तरह के हमले की जिम्मेदारी नहीं ली. इसमें दो लोगों की मौत हुई थी, हालांकि आईएस को ही इस हमले का जिम्मेदार माना गया था.
करमान में हमला ईरान में आईएस का चौथा हमला है. इससे आईएस अपने पारंपरिक जिहादी दुश्मन के खिलाफ एक बड़ी जीत का दावा कर सकता है, जिसे उसके प्रतिद्वंद्वी अल-कायदा समेत दूसरे सुन्नी जिहादी समूह पहले निशाना बनाने में असफल रहे हैं, खासकर ऐसे समय जब सुन्नी जिहादियों में ईरान विरोधी भावना अपने चरम पर है.
आईएस के मुताबिक इस हमले में दो आत्मघाती हमलावर शामिल थे. यह हमला एक हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम के दौरान किया गया था. यह आईएस की उस देश में ऐसे हमलों को अंजाम देने की क्षमता की ओर इशारा करता है, जहां उसे बहुत सीमित समर्थन और संसाधनों के लिए जाना जाता है.
दरअसल, यह हमला आईएस के नए वैश्विक चरमपंथी अभियान की शुरुआत का प्रतीक माना जा रहा है, जिसकी घोषणा उसने हाल ही में की है. इसे 'उन्हें जहां भी पाएं मार डालो' नाम दिया गया है. इसका मकसद लंबे समय से कम हो रही गतिविधियों को फिर से शुरू करना है.
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