बंगाल में कथित चरमपंथियों की गिरफ़्तारी: टीएमसी के निशाने पर केंद्र, बीजेपी ने लगाए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप

    • Author, सलमान रावी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पिछले दो हफ़्तों में पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश से जुड़े प्रतिबंधित चरमपंथी संगठनों के तीन संदिग्ध गिरफ़्तार हुए हैं.

22 दिसंबर को असम पुलिस ने दो कथित चरमंथियों को बंगाल में गिरफ़्तार किया था. इससे पहले 19 दिसंबर को असम और बंगाल की एसटीएफ़ ने एक साझा ऑपरेशन में दो संदिग्ध चरमपंथियों को पकड़ा था.

इसके अलावा फर्ज़ी दस्तावेज़ बनवाने वाले 13 लोगों और उनकी मदद करने वाले 8 बिचौलियों को भी गिरफ़्तार किया गया है.

पुलिस के मुताबिक़ गिरफ़्तार लोगों ने न केवल फर्ज़ी पासपोर्ट और आधार कार्ड बनवाए थे बल्कि अपने नाम मतदाता सूची में भी जुड़वा लिए थे. गिरफ़्तारियों से एक बड़ा हमला नाक़ाम करने में सफलता मिली है.

अब पश्चिम बंगाल में सुरक्षा एजेंसियों और राज्य की पुलिस ने सतर्कता बढ़ा दी है. इस बीच राज्य के प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज़ हो गया है.

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पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने बांग्लादेशी चरमपंथी संगठन 'अंसारुल्लाह बांग्लादेश टीम' से जुड़े संदिग्धों की गिरफ़्तारी के बाद राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए.

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'एक्स' पर तीन बांग्लादेशी नागरिकों के नाम लेते हुए दावा किया कि ये लोग राज्य के विभिन्न इलाकों में अवैध रूप से रह रहे थे.

बीजेपी ने लगाए आरोप तो टीएमसी ने दिया जवाब

शुभेंदु अधिकारी ने कहा, "इन लोगों ने फर्ज़ी तरीके से पासपोर्ट और आधार कार्ड बनवाए और अपने नाम मतदाता सूची में भी जुड़वा लिए. जिन आठ बिचौलियों को फर्जी दस्तावेज़ बनाने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है, उनमें से दो का सीधा संबंध सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस से है."

हालाँकि उन्होंने इस संंबंध में कोई पुख़्ता प्रमाण नहीं दिए. राज्य की पुलिस ने भी इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है. तृणमूल कांग्रेस ने भी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

पश्चिम बंगाल में चरमपंथियों की मौजूदगी के आरोप पर टीएमसी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने पहले की वाम मोर्चे की सरकार को घेरते हुए कहा, "हमारी सरकार से पहले तीन दशकों तक पश्चिम बंगाल में चरमपंथियों की मौजूदगी कोई नई बात नहीं थी. कोलकाता में लालबाज़ार पुलिस मुख्यालय और अमेरिकी कॉन्सुलेट पर हमले हो चुके हैं. लेकिन राज्य में तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ऐसी गतिविधियां कम हुई हैं."

कुणाल घोष ने केंद्र सरकार पर पलटवार करते हुए कहा, "केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संसद में कहा है कि 14 ऐसे राज्य हैं, जहां चरमपंथी सक्रिय हैं. इनमें से ज़्यादातर में बीजेपी का शासन है. अगर घुसपैठ हो रही है तो उसे रोकने की ज़िम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्रालय की है. बीएसएफ़ को सतर्कता दिखानी चाहिए."

केंद्रीय मंत्री और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने इसके जवाब में कहा, "राज्य सरकार सीमा सुरक्षा बल को बांग्लादेश से लगी सीमा पर कंटीले तार लगाने के लिए ज़मीन उपलब्ध नहीं करा रही है. पश्चिम बंगाल बांग्लादेश के साथ 4096 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है. उत्तर 24 परगना, नदिया और मालदा जिलों में कई ऐसे इलाके हैं जहां आज तक कंटीले तार नहीं लग पाए हैं."

सीमा सुरक्षा को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच लंबे समय से रस्साकशी चल रही है.

आरोप-प्रत्यारोप के बीच फ़र्ज़ी दस्तावेज़ और पासपोर्ट प्रक्रिया पर सवाल

सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इन लोगों ने फ़र्जी तरीके से पासपोर्ट कैसे बनवा लिए, जबकि इसकी प्रक्रिया काफी जटिल है.

पश्चिम बंगाल पुलिस के महानिदेशक राजीव कुमार ने कहा "पासपोर्ट वेरिफ़िकेशन के नियमों में कई ख़ामियां हैं."

राजीव कुमार ने बताया कि इन ख़ामियों को उजागर करते हुए राज्य की पुलिस ने विदेश मंत्रालय को एक पत्र लिखा है.

साथ ही अब जिला स्तर पर पासपोर्ट वेरिफ़िकेशन की प्रक्रिया को और सघन किया जा रहा है.

राज्य के दक्षिण 24 परगना के कैनिंग इलाक़े से एक कश्मीरी चरमपंथी गुट के सदस्य जावेद मुंशी की गिरफ़्तारी पर राजीव कुमार का दावा है कि राज्य की पुलिस और विशेष टास्क फोर्स की जानकारी के आधार पर ही जम्मू-कश्मीर की पुलिस ने ये कार्रवाई की है.

पुलिस, प्रशासन, टीएमसी पर उठ रहे सवाल

हालांकि जिस मामले को लेकर सरकार, पुलिस, प्रशासन और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की आलोचना हो रही है वो है मुर्शिदाबाद से गिरफ़्तार किए गए शाद रादी नामक संदिग्ध चरमपंथी का मामला.

पुलिस के मुताबिक़ रादी पिछले 10 वर्षों से मुर्शिदाबाद में रह रहे थे. उन्होंने न केवल फर्ज़ी तरीके से आधार कार्ड और पासपोर्ट बनवाया बल्कि अपना नाम मतदाता सूची में भी दर्ज करा लिया.

इस मामले में अब चुनाव आयोग ने राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है. इन गिरफ़्तारियों से ना केवल सुरक्षा एजेंसियां बल्कि विदेश मंत्रालय की भी चिंताएं बढ़ी हैं.

पुलिस का दावा है कि जावेद मुंशी हाल के वर्षों में तीन बार पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर जा चुके हैं. वहां उनका संपर्क मुंबई हमलों के मुख्य अभियुक्त हाफ़िज़ सईद के पुत्र ताल्हा सईद से भी हुआ था.

मुर्शिदाबाद से पुलिस ने मिनारुल शेख़ और मोहम्मद अब्बास अली को भी गिरफ़्तार किया है.

पुलिस के मुताबिक़ ये दोनों बांग्लादेश के प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन 'जमात-उल-मुजाहिदीन' के लिए काम करते थे. शाद रादी, जो पहले ही गिरफ़्तार किया जा चुके हैं, 'अंसारुल्लाह बांग्ला टीम' जैसे अन्य प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन से जुड़े हुए हैं.

क्या पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर में चरमपंथी गतिविधियां बढ़ रही हैं?

असम पुलिस के विशेष महानिदेशक हरमीत सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि इन गिरफ़्तारियों के कारण एक बड़े हमले को विफल करने में सफलता मिली है.

उन्होंने बताया कि गिरफ़्तार किए गए संदिग्ध चरमपंथियों की निशानदेही पर भारी मात्रा में विस्फोटक और हथियार भी बरामद किए गए हैं.

पश्चिम बंगाल के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सुप्रतीम सरकार ने राजीव कुमार के साथ पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जांच से ये साफ़ हुआ है कि बांग्लादेश में सक्रिय चरमपंथी संगठन बंगाल और पूर्वोत्तर भारत को जोड़ने वाले इलाकों में अपनी गतिविधियां बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं.

सुप्रतीम सरकार ने बताया कि इन संगठनों का मक़सद पश्चिम बंगाल के युवाओं को अपने लिए काम करने के लिए प्रेरित करना है.

उन्होंने कहा कि अब तक तक की जांच में इस खतरे की पुष्टि हुई है, जिससे सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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