पाकिस्तान के वो 'मानव तस्कर' जो लोगों को अवैध तरीके से भेजते हैं यूरोप

    • Author, रेहा कंसारा, सामरा फ़ातिमा और जैस्मिन डायर
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

क्वेटा का एक मानव तस्कर लोगों को अवैध तरीके से पाकिस्तान से बाहर भेजने की व्यवस्था करता है.

इस मानव तस्कर ने बीबीसी के एक अंडरकवर रिपोर्टर को अपना बिजनेस मॉडल समझाया.

उनका कहना है कि 25 लाख पाकिस्तानी रुपये (नौ हजार डॉलर) में वे एक व्यक्ति को करीब तीन हफ्ते में 'सुरक्षित और स्वस्थ' यूरोप पहुंच सकते हैं.

उनका कहना था कि ऐसे व्यक्ति को पैदल ही ईरान में दाखिल होना होगा. वहां से सड़क मार्ग से तुर्की और फिर इटली. इस मानव तस्कर के बात करने का लहजा आश्वस्त करने वाला था.

यूरोप जाने के इच्छुक व्यक्ति के लिए वो कहते हैं, "उसे अपने साथ नाश्ता रखना चाहिए. उसके पास अच्छी गुणवत्ता वाले जूते जरूर होने चाहिए. दो-तीन जोड़ी कपड़े रखने चाहिए. बस इतना ही. वह क्वेटा से पानी खरीद सकता है. वह क्वेटा पहुंचकर फोन करेगा और हमारा एक आदमी आकर उसे रिसीव करेगा."

आज़म नाम के इस मानव तस्कर का दावा है कि हर दिन सैकड़ों प्रवासी पाकिस्तान की सीमा पार कर ईरान में प्रवेश करते हैं. वह बीबीसी रिपोर्टर के लिए जोखिमों को कम करके आंकता है.

यह अंडरकवर रिपोर्टर एक ऐसे व्यक्ति के रूप में उनसे मिला, जो अपने भाई को यूके भेजना चाहता है.

पाकिस्तान क्यों छोड़ रहे हैं लोग

पाकिस्तान में महंगाई बढ़ने और और पाकिस्तानी रुपये के मूल्य में गिरावट आने के साथ ही कई लोग देश छोड़कर विदेश जाना चाह रहे हैं. पाकिस्तानी अधिकारियों ने बीबीसी को बताया कि 2023 के पहले छह महीनों में करीब तेरह हजार लोगों ने लीबिया या मिस्र जाने के लिए पाकिस्तान छोड़ा है.

वहीं 2022 में ऐसे लोगों की संख्या करीब सात हजार थी.

ऐसे लोग अक्सर जो यात्राएँ करते हैं, वे खतरनाक होती हैं. इस साल जून में, ग्रीस के तट पर मछली पकड़ने वाली एक छोटी नाव के डूब जाने से सैकड़ों प्रवासियों की मौत हो गई थी. अनुमान है कि इस नाव पर कम से कम 350 पाकिस्तानी सवार थे.

आजम कहते हैं, "अगर वह रास्ते में पकड़ा भी जाता है तो भी वह वापस घर ही पहुंचेगा. कोई उसका अपहरण नहीं करेगा और फिरौती नहीं मांगेगा."

लेकिन लीबिया के रास्ते यात्रा करने का प्रयास करने वाले प्रवासियों के मिलिशिया और आपराधिक गिरोहों के हाथ में पड़ जाने का खतरा होता है. जिस पाकिस्तानी व्यक्ति से हमने बात की, उन्होंने इटली की यात्रा के लिए मानव तस्करों का सहारा लिया था. उन्होंने बताया कि उनका अपहरण कर लिया गया था और वे लीबिया में तीन महीने तक कैद रहे. सईद (बदला हुआ नाम) ने बताया कि उन्हें तभी छोड़ा गया जब उनके परिवार ने 2500 डॉलर की फिरौती दी.

उन्होंने बताया कि यूरोप जाने की कोशिश करने के दौरान लीबिया में उन्हें अगवा कर लिया गया था.

कहां प्रचार करते हैं मानव तस्कर

पाकिस्तान के कई मानव तस्कर फेसबुक और टिक-टॉक जैसे मुख्यधारा के सोशल मीडिया प्लेटफार्मों का प्रयोग कर रहे हैं. उनके अकाउंट पर हजारों फॉलोवर हैं.

बीबीसी मानव तस्करी को बढ़ावा देने वाले इन सोशल मीडिया खातों की मई से निगरानी कर रहा है. इस दौरान हमने पाया कि मानव तस्कर डायरेक्ट मैसेज (डीएम) और व्हाट्सएप के माध्यम से निजी तौर पर यात्राओं और भुगतान की व्यवस्था करते हैं.

इन अवैध कारोबार को बढ़ावा देने के लिए 'डंकी' और 'गेम' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है. 'डंकी' का प्रयोग नाव से रास्ता पूरा करने और 'गेम' का इस्तेमाल किसी व्यक्ति के सफलतापूर्वक पहुंच जाने के लिए किया जाता है.

यूरोप के किसी देश में पहुंचने के लिए पाकिस्तान में तीन प्रचलित रास्ते हैं, तुर्की, ईरान और लीबिया. इनका ही इस्तेमाल अधिकांश किया जाता है.

ग्रीस में हुई प्रवासी नाव दुर्घटना के बाद हमने जिन तस्करों पर नजर रखी, वे अब तस्करी के पसंदीदा तरीके के रूप में 'टैक्सी गेम' को बढ़ावा दे रहे हैं. यह पूर्वी यूरोप होते हुए छोटा सड़क मार्ग है.

वीडियो दिखाकर लोगों को आकर्षित करते हैं मानव तस्कर

तस्करों के सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रवासियों के समूहों के जंगल में छिपने और मिनी वैन में जाते हुए वीडियो पोस्ट किए जाते हैं. इन पोस्ट पर एजेंटों के नाम और मोबाइल फोन नंबर अंकित होते हैं. व्हाट्सएप पर, ग्राहक और एजेंट सैकड़ों सदस्यों के साथ अगले 'गेम' के बारे में मैसेज का आदान-प्रदान करते हैं.

आज़म 'टैक्सी गेम्स' में माहिर हैं. उनका दावा है कि 'टैक्सी गेम' समुद्री मार्गों से अधिक सुरक्षित है. लेकिन सड़क मार्ग के भी अपने ख़तरे हैं.

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी यूएनएचसीआर का कहना है कि सर्दियों में ठंडे तापमान के कारण प्रवासी पैदल सीमा पार करने का प्रयास करते हैं, सड़क दुर्घटनाओं का भी खतरा होता है, इनका परिणाम होता है मौत.

हमने जिन पांच अन्य मानव तस्करों से बात की, उन्होंने ने भी 'टैक्सी रूट' की सिफारिश की. इनमें से एक ने कहा कि वह एक हज़ार पाउंड में किसी को भी फ़्रांस से यूके ला सकता है.

शिकायत के बाद 'मेटा' ने हटाए पेज

हमने अपने सबूत मेटा को दिए हैं. मेटा ही फे़सबुक, व्हाट्सऐप और टिकटॉक का मालिक है. हमने उनसे कहा कि उनके प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अवैध लोगों की तस्करी को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है.

मेटा ने हमारी ओर से चिह्नित फे़सबुक समूहों और पेजों के सभी लिंक हटा दिए, लेकिन उनसे जुड़ी प्रोफाइलें नहीं हटाईं. उसने व्हाट्सएप ग्रुपों को भी नहीं हटाया क्योंकि इसकी एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन की नीति गोपनीयता की रक्षा करती है और मॉडरेशन की इजाजत नहीं देती है.

टिकटॉक ने उन खातों के लिंक हटा दिए जिनके बारे में हमने उन्हें सचेत किया था. इसमें कहा गया है कि कंपनी मानव तस्करी को बढ़ावा देने वाली सामग्री के प्रति जीरो टॉलरेंस रखती है. उसने अपनी नीतियों का उल्लंघन करने वाले खातों और सामग्री को हटा दिया.

सईद को किस बात का है इंतजार

सईद इस समय इटली में हैं. पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में रहने वाले सईद ने करीब एक साल पहले अपना शहर छोड़ दिया था. उनके इलाके में रोजगार की संभावनाएं नहीं थीं.

इसके साथ ही भारत प्रशासित कश्मीर से लगती सीमा पर झड़पें भी होती रहती थीं. उनका घर भारत-पाकिस्तान के बीच वास्तविक सीमा लाइन ऑफ कंट्रोल के पास है. वह पिछले 10 महीने से इटली में हैं.

वो कहते हैं कि यूरोप आने के लिए ऑनलाइन देखे गए टिकटॉक वीडियो और एक दोस्त से प्रभावित हुए, जिसने उनसे कुछ महीने पहले पाकिस्तान छोड़ा था.

वो कहते हैं, "मैंने सुना है कि यहां आना बहुत आसान है और इसमें करीब 20 दिन लगेंगे. लेकिन यह सब झूठ था. इसमें मुझे सात महीने से ज्यादा लग गए."

सईद ने इटली में शरण लेने के लिए आवेदन किया है. उन्हें अपने आवेदन पर होने वाले फैसले का इंतजार है. वो कहते हैं कि उन्हें अब 'अवैध रास्ता' अपनाने का पछतावा है. वो इसे 'मौत की यात्रा' बताते हैं. वह नियमित रूप से इटली में अपने नए जीवन के वीडियो टिकटॉक पर पोस्ट करते रहते हैं.

हमारे अंडरकवर रिपोर्टर ने पहली बार मानव तस्कर से संपर्क करने के दो सप्ताह बाद फिर से उसे फोन किया. इस बार उसे बताया कि हम बीबीसी के पत्रकार हैं. जब हमने आजम को उन अवैध मार्गों के खतरों के बारे में बताया, जिन्हें वह बढ़ावा दे रहा है, तो उन्होंने फोन काट दिया.

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